वैली ऑफ फ्लावर्स ट्रेक: उत्तराखंड में फूलों की घाटी की सैर

Tripoto
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ज़िंदगी में कुछ ऐसी चीज़ें हैं जिन्हें करने की हमें बड़ी चाहत होती है | ऐसी चीज़ों की हम एक लिस्ट बना लेते हैं और फिर निकल पड़ते हैं उन्हें अनुभव करने |

मुझे भी ऐसा ही कुछ 'वैली ऑफ फ्लावर्स' में अनुभव करना था | मुझे आज भी याद है जब मैंने उत्तराखंड में पश्चिमी हिमालय की तलहटी में इस सुंदर से ट्रेक और यहाँ के फूलों, जीवों व शानदार नज़ारों के बारे में पहली बार सुना था |

बर्फ से ढके पहाड़ों की कुदरती सुंदरता के बीच, पर्वतों की चोटियों पर घूमने के मैं बस सपने ही देखा करती थी | कदमों तले हरी घास और सिर के ऊपर रूई जैसे सफेद बादलों की कल्पनाएँ मुझे फूलों की इस हसीन नगरी की तरफ खींच कर ले ही गयी |

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धरती फूलों के ज़रिए मुस्कुराती है

यात्रा कार्यक्रम

पहला दिन

गोविंदघाट

ऋषिकेश से जोशीमठ के रास्ते होते हुए गोविंदघाट

ऋषिकेश पहुँचिए और फिर 270 कि.मी. की ड्राइव करके गोविंदघाट पहुँचे | ये एक छोटा सा सुंदर कस्बा है जो अलकनंदा और लक्ष्मण गंगा नदियों के संगम पर बसा है | गोविंदघाट में एक रात बिताइए |

होटल भगत

होटल भगत होटलों के मामले में अच्छा चुनाव है | साफ कमरों और स्वादिष्ट खाने के अलावा ये गोविंदघाट के पास ही है | अब चूँकि ये घांगरिया की ओर जाने के लिए बेसकैंप है तो अगर किसी को 14 कि.मी. लंबा ट्रेक चढ़ने की इच्छा नहीं है तो वो हेलिकॉप्टर भी ले सकता है |

दूसरा दिन

घांगरिया

गोविंदघाट - घांगरिया

अलकनंदा नदी के शीशे जैसे साफ पानी पर बने पुल को पार करते ही ट्रेक शुरू हो जाता है | फिर वहाँ से भ्युंडार घाटी की ओर जंगलों से गुज़रते हुए कुछ गाँवों को पार करना होगा | गोविंदघाट से घांगरिया तक की 14 कि.मी. की खड़ी चढ़ाई है | आप चाहें तो टट्टू या हेलिकॉप्टर पर बैठ कर भी घांगरिया तक जा सकते हैं | रात को होटल घांगरिया में रुके या कैंप में | आप वैली ऑफ फ्लावर्स में नहीं ठहर सकते इसलिए घांगरिया आराम करने की सही जगह है |

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घांगरिया के कैंप

तीसरा दिन

वैली ऑफ फ्लावर्स राष्ट्रीय उद्यान

घांगरिया - वैली ऑफ फ्लावर्स - घांगरिया

वैली ऑफ फ्लावर्स रोज़ सुबह 7 बजे खुलता है और आख़िरी प्रवेश दोपहर 2 बजे तक ही दिया जाता है | शाम 5 बजे से पहले आपको वैली से बाहर निकलना होता है | एक किलोमीटर चलने के बाद आप वैली ऑफ फ्लावर्स के प्रवेश द्वार पर पहुँच जाते हैं जहाँ से आपको टिकट खरीदना होता है | अंदर का रास्ता दोनों तरफ से अलग-अलग रंगों और प्रजाति वाले फूलों से भरा है | कुछ कदम चलने के बाद आप एक झरने पर पहुँच जाते हैं और वहाँ से लगभग एक किलोमीटर चलने के बाद धारा पर बने एक पुल पर पहुँचते हैं | पुल पार करने के बाद रास्ता काफ़ी संकरा और पत्थरों से भरा हो जाएगा | फूल खिलने के मौसम के दौरान वैली की धरती पर बैंगनी, पीले, लाल, नीले और सफेद आदि तरह के रंगों वाले फूलों की चादर-सी बिछी रहती है | वैली में 3-4 घंटे बिताइए और फिर घांगरिया की ओर लौट चलिए |

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चौथा दिन

घांगरिया से गोविंदघाट

रास्ते से नीचे उतरें या हेलीकॉप्टर से गोविंदघाट पहुंचें।

घांगरिया में हेलिपैड

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पाँचवा दिन

ट्रेक समाप्त हो चुका है | ऋषिकेश की ओर प्रस्थान करें|

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