Indira Gandhi International Airport T3 1/undefined by Tripoto

Indira Gandhi International Airport T3

Deepali Kumar
I’ve been to many airports until now but T3 offers a lot than the others.The infrastructure is amazing and the services are superb. Friendly staff, clear signs for each and everything, easily accessible vending machines and security makes the traveling quite easier for passengers.This international terminal has a lot to offer. After passing your immigration, you just name the store and it’s there. The food is pretty amazing and almost all restaurants are open 24*7. I’ve eaten chilly chicken and noodles at 3am in the night as well(not kidding guys). One of the best things they’ve introduced is sleeping capsules. Yes, you can rent those and sleep in there.Overall, I’ve had a very good experience and would definitely recommend people to come here.Overall, I’ve never had a bad experience
Aman Oberoi
   
Dr Punam Chauhan
Am a dreamer and always wanted to visit certain places which i use to watch either in movies or documentaries..but as we say lyf is unpredictable and many time it gives you unexpected surprises. When i was working in Maldives i use to talk to myself thinking why God sent me in so small island 🥺i wana be in big country like UAE .. When i came back from Maldives i got an offer from a city named Al ain to work in a school . And when it is travelling with earning what else will anyone ask for . The day came and i was on Delhi airport sitting and waiting for my flight to board.
विमान में बैठते ही, हल्की बूंदाबांदी शुरू हुई, जो की मैं विमान में बैठें साफ़ साफ़ देख रहा था, विमान के मुख्य चालक ने अपनी औपचारिक घोषणाओं के दौरान मौसम के खराब होने की जानकारी प्रदान करते हुए, पेटी बांधे रखने के निर्देश भी दे दिए।विमान अपने निर्धारित समय से उड़ान भरने को तैयार था, हमलोग अपनी-अपनी सीट की पेटी बांध कर विमान चालक दल के कर्मियों द्वारा सुरक्षा निर्देशों को देखने लगे, औऱ इसके कुछ ही समय बाद विमान रनवे पर था और आसमान की तरफ़ बढ़ने लगा।कुछ ही देर बाद विमान अपने निर्धारित ऊँचाई पर था, और अब विमान की सभी बत्तियाँ जल उठी थी, उस हल्के प्रकाश में मैं अपने मित्रों के चेहरों पर उत्सुकता देख रहा था जिसे मैंने दास बाबु के कैमरे में कैद कर लिया।इतने में चालक दल के सदस्यों द्वारा जलपान वितरण शुरु किया गया, हमें जलपान नही मिलना था क्योंकी हमारी टिकट कम शुल्क की थी, किन्तु जल, चाय, या कॉफी मिलना तय था।जब चालक दल की सदस्य हमारी लाईन में आई तो उन्होंने पूछा "श्रीमान अखिलेश सिंह जी, आप वेज लेंगें या नॉन वेज"? मुझे लगा कुछ गड़बड़ है।अखिलेश ने कहा "वेज" और विमान कर्मी महिला ने उन्हें एक थाली सौंप दी, लेकिन मात्र एक, क्योंकी मेरे तीनों मित्रों की टिकट एक ही PNR के अंतर्गत थी तो मैंने उनसे पूछा, "व्हाई ओन्ली अखिलेश, वि आर थ्री पैसेंजरस इन सेम PNR"?उन्होंने अखिलेश से उनका बोर्डिंग पास मांगा, और बोली "सॉरी इट्स ओनली हिम" इतने में अखिलेश जिसको मालूम था, के ये भोजन नही मिलना था, लेकिन मिल गया औऱ मैं उसे भी रद्द करने पर तुला था। मन ही मन मुझे कोसने लगा औऱ बोला "कैसा दोस्त हैं बे तू" और उसने ये बात लगभग सभी को बताई की मैं उसका भोजन रद्द करवाना चाहता था।खैर, हम चारों ने थाली मिल बाँट कर खाई और 3 अतिरिक्त पोहे भी ऑर्डर किये।भोजन वितरण के पश्चात, मैं कॉफी वितरण की प्रतीक्षा कर ही रहा था की, विमान के चालक दल ने पेय पदार्थ के वितरण को रद्द करने का फ़ैसला किया औऱ घोषणा हुईं की मौसम ज्यादा खराब होने के कारण हम पेय पदर्थों का वितरण रद्द करने को विवश हैं, यात्रियों से अनुरोध है की अपनी सीट पर लौट जाएं औऱ पेटी बांध लें।क़रीब 30-35 मिनटों तक हवा में ऊबड़ खाबड़ (टर्बुलेंस) रास्तों का एहसास होता रहा, औऱ इसी के साथ घोषणा हुईं की अब विमान भुबनेश्वर के अन्तरदेशीय हवाईअड्डे पर उतरने को तैयार है, औऱ क़रीब 15-16 मिनटों में हम भुबनेश्वर के विमानपत्तन पर थे। मुझे अभी भी विमान में कॉफी न मिलने का मलाल था।हम जल्दी से उठे, अपनी सीट के ऊपर बने सामान कक्ष से अपना बैग लेकर, विमान से बाहर निकल अपने बड़े बैग के बेल्ट पर आने की प्रतीक्षा करने लगे।
हमें दिल्ली से बैंकाक जाने के लिए भुबनेश्वर के बिजू पटनायक अन्तराष्ट्रीय विमानपत्तन तक जाना था, भुबनेश्वर तक जाने के लिए हम सब विस्तारा एयरलाईन्स की उड़ान संख्या UK781 में आरक्षित थे, इसका निर्धारित समय शाम के 5:45 दिल्ली और रात के 7:50 बजे भुबनेश्वर था।हम विस्तारा एयरलाईन्स के बोर्डिंग पास वितरण डेस्क पर लाईन में लगे और अपनी बारी की प्रतीक्षा करने लगे।कुछ ही देर बाद हमारे बोर्डिंग पास हमे दे दिए गए, और हमारे बड़े बैग को विमान के सामान कक्ष की ओर रवाना कर दिया गया।बोर्डिंग पास लेने के तुरंत बाद, हम पास ही में बने पैसे बदलने के लिए एक सरकारी बैंक के काउंटर पर गए, और पूछा क्या हमें 40,000 थाई भाट मिलेंगें? जी जैसा की मैंने अपने पिछले अंक में लिखा था, यदि आप थाईलैंड जाते हैं, और वीजा ऑन अराईवल लेना चाहते हैं, तो आपके पास स्वदेश वापसी का हवाई आरक्षण, हॉटेल बुकिंग और 10,000 थाई भाट प्रतिव्यक्ति होने अनिवार्य है।काउंटर पर तैनात महोदय ने कहा हमारे पास इतने थाई भाट नही हैं, हमने उन्हें धन्यवाद किया और वंही पर बने अगले पैसे बदल काउंटर पर गए।यहां हमारा अभिवादन एक सुंदरी ने बेहद पेशेवर तरीक़े से किया, उनके व्यवहार से ही मैं समझ गया की यहां हमें 40 क्या 50,000/- भाट भी मिल सकता है।हमने उन्हें अपना पासपोर्ट, पैन कार्ड, बोर्डिंग पास, और भारतीय मुद्राओं के बदले करीब 400 अमरीकी डॉलर और 30,400/- थाई भाट ले लिए।तय हुआ की हम अमरीकी डॉलर रखेंगे औऱ बांकी सब 10,000/- थाई भाट।पैसे बदलने के पश्चात हम सुरक्षा जांच के लिए अग्रसरित हुए, औऱ सुरक्षा जांच के बाद हमारे विमान के उड़ान के लिए निर्धारित द्वार संख्या 42 पर कुछ पेय पदार्थ (कॉफी, जूस) सहित प्रतीक्षा करने लगे, अभी विमान में दाखिल होने में क़रीब 25-30 मिनट औऱ शेष थे, और उड़ान भरने में लगभग 1 घंटे।ये 25-30 मिनट मेरे मित्रों ने मुखपुस्तक (फेसबुक) के माध्यम से सभी को हमारे विमानपत्तन पर होने और थाईलैंड तक के यात्रा से अवगत करवाया, कुछ सेल्फियाँ ली गई, और इतने में हमारे विमान पर सवार होने की घोषणा भी हो गई।हम चारों, सबसे अंत में विमान के द्वार तक पहुँचे, अपना बोर्डिंग पास निरीक्षण करवाया औऱ सवार हो गए दिल्ली से भुबनेश्वर तक कि यात्रा के लिए।विमान में हम चारों के सीट एक साथ ही थे, जो की विमान के 7वी रेखा के C, D, E, F थे।