झारखंड के ये पाँच म्यूजियम दिखाती है इतिहास, तीन हैं राजधानी रांची से मात्र 10 किमी दूर, क्या देखें?

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Photo of झारखंड के ये पाँच म्यूजियम दिखाती है इतिहास, तीन हैं राजधानी रांची से मात्र 10 किमी दूर, क्या देखें? by Nikhil Vidyarthi

झारखंड में सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और कलात्मक विरासत की विस्तृत श्रृंखला है। लंबे समय से यह राज्य अपनी खनिज संपदा के लिए जाना जाता रहा है। पूर्वी भारतीय राज्य झारखंड में कुल 12 संग्रहालय बनाए गए हैं। झारखंड में सूचीबद्ध पर्यटन स्थलों का 12% संग्रहालयों का हिस्सा है। राजधानी रांची, जमशेदपुर, हजारीबाग, धनबाद और मधुबन जैसे शहर लोकप्रिय संग्रहालयों का गढ़ है।

झारखंड में पाँच प्रमुख लोकप्रिय संग्रहालय के नाम

1. जनजातीय अनुसंधान संस्थान एवं संग्रहालय (Tribal Research Institute and Museum)

2. रांची विज्ञान केन्द्र (Ranchi science center)

3. राज्य संग्रहालय (State museum)

4. संस्कृति संग्रहालय और आर्ट गैलरी (Sanskriti Museum and Art Gallery)

5. जमशेदपुर सिक्का संग्रहालय (Jamshedpur Coin Museum)

जनजातीय संग्रहालय, रांची

रांची शहर से दूरी- 8.5 किलोमीटर

झारखंड का जनजातीय अनुसंधान संस्थान एवं संग्रहालय जनजातियों की जीवनशैली, वेशभूषा, परंपराओं, विश्वासों, शिल्प और प्रदर्शन कलाओं को प्रदर्शित करती है।

यह संग्रहालय झारखंड के इतिहास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली विभिन्न जनजातियों के जीवन की एक झलक दिखाती है। यह संग्रहालय जनजातियों के दैनिक जीवन में कला, संगीत और नृत्य के महत्व पर रोशनी डालता है। यह उन उपकरणों और संगीत वाद्ययंत्रों को भी उजागर करता है, जो जनजातियों की संस्कृति का पर्याय हैं। इस संग्रहालय में मुंडा, असुर और खोंड सहित झारखंड के 32 प्रमुख आदिवासी समूहों को दर्शाने वाले चित्रावली भी हैं। यहाँ एक पुस्तकालय भी है। संग्रहालय में घूमना निःशुल्क है।

राँची विज्ञान केंद्र

रांची शहर से दूरी- 8 कि.मी.

रांची विज्ञान केंद्र झारखंड राज्य में स्थित है। यह झारखंड विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद के तहत बनने वाला पहला विज्ञान केंद्र है। केंद्र में दो मंजिला इमारतें हैं। जिनमें 13 एकड़ भूमि पर 42,000 वर्ग मीटर के क्षेत्र को कवर करने वाली तीन स्थायी विषयगत गैलरी हैं। संग्रहालय विज्ञान और प्रौद्योगिकी के बारे में जागरूकता बढ़ाने में हर संभव सहायता करता है। यहाँ सरल मशीनों, ध्वनि, प्रकाशिकी, पेंडुलम और प्रागैतिहासिक जानवरों के स्थिर मॉडल पर कई इंटरैक्टिव प्रदर्शनियाँ देख सकते हैं।

राज्य संग्रहालय

रांची सिटी से दूरी- 8 कि.मी.

संग्रहालय में कुछ नृवंशविज्ञान संबंधी प्रदर्शनियाँ रखी गई हैं। मुख्य आकर्षण मूर्तिकला का गैलरी है। यहाँ अलंकृत धनुष और आभूषण भी प्रदर्शित किए गए हैं। मूर्तिकला गैलरी में बेहतरीन नक्काशी और समूचे झारखंड के दूरस्थ वास्तुशिल्प स्थलों की दिलचस्प तस्वीरें देखा जा सकता है। झारखंड की सांस्कृतिक विरासत को उचित स्थान और महत्व देने के लिए वर्ष 2000 में इस राज्य के गठन के बाद गंभीर प्रयास किये गये। वर्ष 2009 में होटवार, रांची में राज्य संग्रहालय की स्थापना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

संस्कृति संग्रहालय और आर्ट गैलरी

रांची से दूरी- 106.3 कि.मी.

संस्कृति संग्रहालय और आर्ट गैलरी की स्थापना 1991 में बुलु इमाम द्वारा की गई थी। हजारीबाग के संस्कृति संग्रहालय में पुरापाषाण युग से लेकर नवपाषाण युग के पत्थर के औजार, माइक्रोलिथ और कांस्य से लेकर लौह युग की कलाकृतियों को संग्रहित किया गया है। इसमें हज़ारीबाग़ क्षेत्र के आसपास के मिट्टी के बर्तन और बौद्ध पुरावशेष भी देखे जा सकते हैं।

जमशेदपुर सिक्का संग्रहालय

राजधानी रांची से दूरी- लगभग 126 कि.मी.

दुर्लभ और ऐतिहासिक भारतीय सिक्कों का अनूठा संग्रह वाला जमशेदपुर सिक्का संग्रहालय देश का अनोखा म्यूजियम है। यहाँ असंख्य भारतीय सिक्कों और विदेशी मुद्राओं का संग्रह रखा गया है। विदेशी मुद्रा के सिक्कों में पाउंड, डॉलर, रुबेल, येन आदि देखी जा सकते हैं। इसके अलावा यहाँ देश-दुनिया की कुछ सबसे बेशकीमती चीज़ें भी मौजूद हैं। यह संग्रहालय न केवल मनोरंजन का स्थान है बल्कि ज्ञान, शिक्षा और सूचना का भी स्रोत है।

यहाँ प्रदर्शित सिक्कों की जानकारी प्रदर्शनी में ही लिखा हुआ है। इसमें मुगल काल के सिक्के भी प्रदर्शित हैं। सोने और चांदी के सिक्के भी देख सकते हैं। राष्ट्रीय छुट्टियों, जमशेदजी नुसरवानजी टाटा की जयंती और कुछ त्योहारों को छोड़कर, हर मौसम इसे देखने के लिए उपयुक्त है। संग्रहालय देखने में कोई प्रवेश शुल्क नहीं है। इसके अंदर फोटोग्राफी भी किया जा सकता है। निकटतम रेलवे स्टेशन टाटानगर रेलवे स्टेशन है।

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