6700 फीट की उँचाई पर कुल्लू व मनाली के बीच बसा है एक कस्बा जिसे वक्त भुला चुका है

Tripoto

आप किसी भी मुसाफिर से पूछ कर देख लीजिए | यह एक जगज़नित तथ्य है कि हिमाचल घूमने का अगर कोई सबसे अच्छा साधन है तो वो है HRTC की बसें | HRTC की बसों मे हिमाचल घूमते हुए आँखों पर पट्टी, कानों मे संगीत लगाकर जब आप नींद की आगोश मे जाते हैं तो . पर छ्होटे मोटे खद्डों में उच्छल खाती बस ऐसी लगती है मानो कोई सोते समय आपको पालने मे झुला रहा हो | ऐसी गहरी और मज़ेदार नींद लेने का सुख बसों और रेलों के लंबे सफ़र में ही मिल पाता है |

HRTC की बसों की सीटें पीछे होकर लगभग स्लीपर सीट की तरह बन जाती है और आयेज पैर फैलाने की भी पर्याप्त जगह होती है| ऐसी आरामदायक सीटों की वजह से सफ़र बहुत आराम से कटता है| वरना हिमाचल की घुमावदार सड़कों पर लंबा सफ़र करना किसी सज़ा से कम नही लगता |

मैं ऐसी ही एक आरामदायक सीट पर गहरी नींद मे खोई थी की अचानक मेरे कानों में बस के कंडक्टर की कर्कश आवाज़ पड़ी...

"मंडी मंडी मंडी....मंडी वाले तैयार हो जाओ" आने वाले बस स्टॉप पर उतरने वाली सवारियों को उठाने की जल्दबाज़ी में बस कंडक्टर ने पूरी बस की सवारियों को नींद से जगा दिया था | आँखें मलते हुए कच्ची नींद में ही मैने अपना मोबाइल फोन जेब से निकाला और इंटरनेट सुविधा चालू कर के नक्शे में नग्गर को ढूँढने की कोशिश की | पता चला की नग्गर अभी भी पाँच से छह घंटे की दूरी पर है | अधूरी नींद से जागने और आधुनिक उपकरणों पर भरोसा ना होने की वजह से मैने भी कंडक्टर से ऊँची आवाज़ मे पूछ ही लिया

"नग्गर के लिए कहाँ उतरना है? "

कंडक्टर ने मेरी तरफ ऐसे देखा जैसे मैने बात नही पहेली पूछी हो | फिर गर्दन घुमाकर अपने से ज़्यादा तजुर्बेदार बस चालक से पूछा |

"पटलिकुहल" चालक ने मेरे उतरने का स्थान मेरे साथ साथ 40 अन्य सवारियों को भी बता दिया |

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इस अजीबो ग़रीब कस्बे को पूरी तरह से घूमने और अनुभव लेने के लिए आपको यहाँ कम से कम तीन रातें तो गुज़ारनी ही पड़ेंगी |

आपके लिए पेश हैं यहाँ की कुछ ऐसी जगहें जो आप घूम सकते हैं | समझने वाली बात है की नग्गर एक छ्होटा सा कस्बा है| तो यहाँ की सबसे ज़्यादा दूरी वाली जगह पर भी पैदल चलकर मात्र एक घंटे मे पहुँचा जा सकता है | खुशी की बात यह है की हिमाचल मे कुल्लू और मनाली के बीच छुपे इस छोटे से कस्बे मे इंटरनेट या फोन की सुविधा पर्याप्त है इसलिए यहाँ के मंदिर और रोरीच गॅलरी सहित सभी सैलानियों के आकर्षण गूगल मानचित्र पर देखे जा सकते हैं |

नग्गर का पुराना महल

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आज से पाँच सौ साल पहले का बना नग्गर कस्बे का भव्य किला नग्गर के पुराने शानदार दिनों की याद दिलाता है| अब इस किले का संचालन HPTDC द्वारा किया जाता है और आप इस भव्य महल में ठहरने के लिए एक कमरा भी आरक्षित करवा सकते हैं| वाजिब कीमतों पर सरकार द्वारा संचालित महल मे रात गुज़ारने का मौका किसी सपने से कम नही है| अगर आप यहाँ रात मे रुकना नही भी चाहते और सिर्फ़ इसे घूमना चाहते है तो इस महल के भीतर बने कैफ़े मे बैठकर एक कप कॉफी पी सकते हैं | साथ मे आपको मिलेगा चारों तरफ की पहाड़ियों का विहंगम दृश्य|

निकोलस रोरीच आर्ट गैलरी

नग्गर के महल से मात्र तीस मिनट की दूरी पर स्थित रोरीच मेमोरियल उन रूसी मुसाफिरों के लिए एक तीर्थ स्थल से कम नही है जो प्रतिष्ठित चित्रकार, दार्शनिक और लेखक निकोलस रोरीच के काम से परिचित एवं प्रभावित हैं | कहते हैं जब कलाकार रोरीच अपनी पत्नी के साथ नग्गर मे आया तो यहाँ की सुंदरता और शांति ने उसे एसा मंत्रमुग्ध किया कि वो अपनी पत्नी सहित यहीं कुटिया बनाकर रहने लगा |

रोरीच के काम के प्रशंसकों मे भारत के दो सुप्रसिद्ध प्रधानमंत्रियों के नाम शुमार हैं जो रोरीच के यहाँ लगातार मिलने भी आते थे | उन दो शक्सियतों का नाम है पंडित जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गाँधी| यहाँ की गॅलरी मे आज भी इन दोनों प्रभावशाली व्यक्तित्वों के साथ आध्यात्मिक और दार्शनिक रोरीच तस्वीर लगी हुई है|

दीप्ति नवल स्टूडियो

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रोरीच मेमोरियल के बहुत करीब स्थित मशहूर अभिनेता दीप्ति नवल का पत्थर से बना कॉटेज है जिसमे अभी भी इस अभिनेता की कलाकृतियाँ जैसे पेंटिंग्स, फोटोग्राफ, फिल्म पोस्टर, फिल्म रील जैसी कई वस्तुएँ रखी हुई हैं | इस जगह पर अपनी कलात्मक कुटिया बनाने का कारण बताते हुए दीप्ति नवल कहते हैं " रोरीच ने रूस और न्यू यॉर्क में अपनी अच्छी बलि ज़िंदगी छोड़ कर नग्गर मे बसने और एक नई ज़िंदगी शुरू करने का फ़ैसला लिया था | मैं यहाँ तब से आ रहा हूँ जब से मैं चार साल का था | मेरे पिताजी उदय नवल कला प्रेमी होने के साथ साथ रोरीच को भी अच्छे से जानते थे| इसीलिए इन चीज़ों से मुझे मेरी ज़िंदगी की प्रेरणा मिली है |

त्रिपुरा सुंदरी मंदिर

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यह प्राचीन मंदिर नग्गर के महल और रोरीच की कुटिया के बीच मे स्थित है | मंदिर स्थानीय देवी को समर्पित है और पूरी तरह पत्थर से बना है। मंदिर के बारे मे ज़्यादा पौराणिक कथाएँ ना तो प्रचलित हैं और ना कहीं कुछ लिखा गया है, लेकिन आस-पास रहने वाले स्थानीय लोग इस मंदिर को बहुत शुभ मानते हैं।

गौरी शंकर मंदिर

मग्गर के महल से कुछ ही दूरी पर स्थित इस मंदिर में शिव और पार्वती की पूजा की जाती है| गौरी और शंकर का यह मंदिर ग्यारहवीं शताब्दी मे बना था| इस मंदिर को गुर्जरा-प्रतिहार संस्कृति की अंतिम वास्तुशिल्प संरचना माना जाता है।

जन झरना

अगर आप पूरे एक दिन के रोमांचक अनुभव के लिए तैयार हैं तो जन गाँव और झरने की चढ़ाई कर सकते हैं | जन गाँव नग्गर से तेरह किलोमीटर दूर है | अगर आप चाहें तो जिस घर / होस्टल मे आप रह रहे हैं वहाँ एक गाइड की व्यवस्था करने की गुज़ारिश कर सकते हैं | अगर थोड़ा और लंबा रोमांच चाहिए तो चंदरखानी दर्रे को पकड़ के पहाड़ के दूसरी ओर बसे मलाना गाँव तक जा सकते हैं |

नग्गर मे कहाँ खाना खा सकते हैं?

नग्गर कस्बे के सारे कैफ़े और कॉफी शॉप्स नग्गर के महल के आस पास बने हुए हैं | चाहे आधुनिक भोजन करना हो या परंपरागत हिमाचली भोजन का स्वाद लेना हो, नग्गर के महल के अंदर बने कैसल रेस्तराँ में जाया जा सकता है| घूमते फिरते अगर एक छोटा सा कॉफी ब्रेक लेने का मान करे तो अपनी किताब उठाइए और पास मे ही स्थित दो जर्मन बेकरियों मे से किसी को भी चुन लीजिए| लकड़ी के तंदूर मे पका पिट्ज़ा खाना है तो नैटींगल रेस्तराँ की ओर रुख़ कीजिए| ये रेस्तराँ महल से कुच्छ ही मीटर की दूरी पर रोरीच मेमोरियल जाने वाली रोड पर स्थित है | अगर देसी खाने के शौकीन हैं तो बस अड्डे के आस पास बहुत सारे ढाबे मिल जाएँगे |

नग्गर मे कहाँ ठहरें

सोहम का शातो डी नग्गर नाम से मशहूर होम स्टे सैलानियों के बीच काफ़ी लोकप्रिय है| मात्र बारह सौ रुपये प्रति रात की दर से इसे बुक किया जा सकता है| बुक करने के लिए यहाँ क्लिक करे या 98055 45408 पर संपर्क करें|

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अन्य भरोसेमंद होटल और रिसॉर्ट्स HPTDC संचालित नागगर कैसल (01902-248316), रागिनी गेस्ट हाउस (9318585385), होटल शीतल (9218073211), पाइन पैलेस (98058 97889) और नग्गर डिलाइट (9817073683) हैं।

जाने के लिए सबसे अच्छा समय:

नग्गर जाने के लिए सितंबर से नवंबर के बीच सबसे सही समय होता है क्यूंकी इस समय तक बारिश थम जाती है और सर्दी की शुरुआत नहीं होती |

दिसंबर से फ़रवरी तक होने वाली बर्फ़बारी से राजमार्ग अवरुद्ध हो जाते है मगर वैसे देखा जाए तो नग्गर तक पूरे साल भर ही जाया जा सकता है |

कैसे पहुँचें

नग्गर पहुँचने का सबसे अच्छा रास्ता सड़कमार्ग द्वारा है| नग्गर एक छोटा सा कस्बा है जहाँ आप पैदल ही कही भी आसानी से आ जेया सकते हैं| फिर भी यदि आप जन गाँव या रोरीच मेमोरियल तक की टॅक्सी करना चाहें तो आपने जिस घर मे शरण ली है वहाँ संपर्क करें |

दिल्ली से नग्गर लगभग पाँच सौ सोलह किलो मीटर दूर है | अगर आप खुद गाड़ी चला कर ले जा रहे हैं तो आपको दस से बारह घंटे लग सकते हैं | अगर आप दिल्ली के इंटर स्टेट बस टर्मिनल से HPTC बस लेते हैं तो वो बस आपको पटलिकुहल लगभग उतने ही समय मे उतार देगी | पटलिकुहल से नग्गर तक के लिए आपको स्थानीय बस या किराए की टॅक्सी मिल जाएगी जो मात्र तीन सौ या चार सौ रुपये में आपको गंतव्य तक पहुँचा देगी | नग्गर का निकटतम हवाई अड्डा यहाँ से चालीस किलो मीटर दूर भुंतर मे है |

दूर दराज की यात्रा करने से पहले आप ये सुनिश्चित कर ले कि आप किसी भी मुश्किल से निकलने का जज़्बा रखते है| पहाड़ों मे पूरी ज़िम्मेदारी के साथ घूमें और प्रकृति की इज़्ज़त करें | सैलानियों की गतिविधियों से पर्यावरण पर होने वाले नकारात्मक प्रभावों को कम करने के तरीके जानने के लिए यहाँ क्लिक करें |

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