भारत के इस द्वीप पर जाना है बैन, गए तो कभी वापिस नहीं आ पाओगे!

Tripoto

भारत दिलचस्प लोगों का देश है। इतनी विविधता है यहाँ पर कि पूरे देश का एक चक्कर लगा लिया तो समझो पूरी दुनिया घूम ली।

मेरी दिलचस्पी यह जानकर और बढ़ गई जब मुझे किसी ने बताया कि भारत में कुछ जगहें ऐसी हैं, जहाँ ख़ुद भारतीयों को ही एंट्री नहीं है। भारतीयों की छोड़ो, वहाँ किसी विदेशी को भी एंट्री नहीं है। और अगर वहाँ चले भी गए, तो वापिस शायद ही आ पाओ!

बंगाल की खाड़ी में स्थित अण्डमान निकोबार से कुछ दूर पश्चिमी इलाक़े में एक आदिवासी प्रजाति रहती है, जिसका बाहरी दुनिया से अभी तक कोई संपर्क नहीं है। इनको सेंटिनेल प्रजाति कहा जाता है। वहाँ लोग आज भी पुरापाषाण काल के लोगों जैसी ज़िन्दगी जीते हैं। ठीक वैसी ही, जैसी हमारे इतिहास वाले मास्टर जी बताते थे।

ये लोग आज की दुनिया में भी निर्वस्त्र रहते हैं। तीर कमान से शिकार करते हैं, और साथ ही आग जलाकर जीवन जीते हैं। अगर हम इनकी दुनिया में जाएँ तो लगेगा जैसे 1,000 साल पीछे चले गए हों। इस प्रजाति के लोगों की संख्या 500 से भी कम है।

मैंने सोचा कि इस जगह का दौरा करूँ लेकिन मेरी ख़राब किस्मत, हम लोगों को भारत सरकार ने वहाँ जाने की इजाज़त नहीं दी है। 1956 में केन्द्र सरकार ने इस प्रजाति को संरक्षित रखने के लिए इस पूरे टापू के 3 मील के इलाक़े को प्रतिबन्धित कर रखा है। इस टापू पर अवैध तरीक़े से जितने लोग गए, उन सबका यही कहना है कि इनसे बचकर रहा जाए।

आपको मालूम हो कि यहाँ के लोगों को कोई अधिकार नहीं हैं। यहाँ पर आपके किसी दोस्त की मौत हो जाए तो आप किसी कोर्ट में मुक़दमा दर्ज नहीं कर सकते।

कोई पुराना क़िस्सा

आप अगर ख़बरों से नाता रखने वाले हों तो आपको मालूम होगा 2018 में अमेरिकी ईसाई मिशनरी का आदमी यहाँ के लोगों को ईसाई धर्म में परिवर्तित करने गया था। उसने बोट वाले को घूस दी और अवैध रूप से वहाँ तक पहुँचा।

15 नवंबर को वो टापू पर पहुँचा। कहते हैं कि उसने कोसा भाषा में आदिवासियों से कुछ बातचीत भी की थी। लेकिन जैसे ही उसने कुछ उपहार स्वरूप मछलियाँ दीं तो एक आदिवासी ने उसके सीने पर तीर चला दिया। और उसके बाद 17 नवंबर को उसकी लाश मिली।

2006 में इसी इलाक़े में दो मछुआरों की मौत हो चुकी है। उनका शव लेने के लिए जब फ़ौज गई तो उनके हैलीकॉप्टर पर वहाँ के लोगों ने तीर चलाए।

तब से इस जगह का नाम लोगों के बीच आया।

हमारा योगदान

1960 के दशक में भारत सरकार ने इस प्रजाति के लोगों को इस दुनिया से जोड़ने के लिए बहुत मेहनत की। भारत सरकार से टी एन पंडित को इस प्रजाति को जोड़ने के लिए भेजा गया।

उन्होंने यहाँ आकर इस दुनिया के बहुत सारे फल और उपहार भेजे। जैसे नारियल, बाल्टी और अन्य आधुनिक सामान जिससे आकर्षित होकर वो लोग इस दुनिया के साथ चलने की कोशिश करें। लेकिन इसका कोई फ़ायदा नहीं हुआ।

और अन्ततः सरकार ने इस जगह को प्रतिबन्धित करने का निर्णय लिया।

पढ़कर आप समझ ही गए होंगे कि भारत सच में कितना विचित्र देश है। यहाँ के लोगों को ही अपने देश के कुछ इलाक़ों में जाने की इजाज़त नहीं है।

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