भारत में इन जगहों पर घूमने के लिए ज़रूरी है परमिशन!

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दुनिया की सैर करने का शौक किसे नहीं होता। हर कोई चाहता है कि जब कभी वक्त मिले कहीं से घूम कर आया जाए। कुछ लोगों के लिए तो घूमना एक जूनून होता है। घुमक्कड़ किस्म के लोगों के दिमाग में हमेशा ही कहीं ना कहीं जाने का प्लान बनता रहता है और वक्त मिलते ही वे टूर पर निकल जाते हैं!

आपके अंदर भी अगर घूमने-फिरने का शौक है तो ये आदत बहुत अच्छी है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश के अन्दर भी घूमने के लिए परमिशन की जरूरत होती है? जी हाँ! भारतीय संविधान की धारा 19 के अनुसार, इंडिया के लोगों को देश भर में कहीं भी आने-जाने की पूरी स्वतंत्रता है, बावजूद इसके देश के कई भाग ऐसे हैं जहाँ घूमने जाते समय स्थानीय प्रशासन से अनुमति लेना अनिवार्य होता है।

यहाँ भारत के उन जगहों के बारे में जान लीजिए जहाँ घूमने जाने से पहले आपको परमिशन की ज़रूरत पड़ती है:

1. लक्षद्वीप

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फोटोः फ्लिकर

लक्षद्वीप छोटे-छोटे 36 द्वीपों को लेकर बना है। इसके कुछ स्थानों पर प्रवेश करने के लिए भारतीय व विदेशी दोनों पर्यटकों को अनुमति लेनी पड़ती है। विदेशी नागरिक अगाती, कदमत व बांगरम द्वीपों पर जा सकते हैं, वहीं भारतीय पर्यटक मिनिकॉय और अमिनी जैसे कुछ द्वीपों पर जा सकते हैं। लक्षद्वीप के कुल 10 द्वीपों पर ही लोग रहते हैं जिनमें से 8 द्वीप ही अनुमति सहित पर्यटन के लिए खुले हुए हैं। नीला अंबर, ऊँचे-उँचे नारियल के पेड़ व पाम के हरे-भरे वृक्षों के अलावे समुद्र तट का आनंद लेने पर्यटक यहाँ खींचे चले आते हैं।

2. परांग ट्रेक, हिमाचल प्रदेश

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फोटोः फ्लिकर

हिमाचल प्रदेश हिमालय की गोद में बसा हुआ राज्य है। देश में पर्यटन के लिए मशहूर शिमला, मनाली व कुल्लू जैसे हिलस्टेशन इसी राज्य में पड़ते हैं। ऊँचे-ऊँचे पहाड़ों, वादियों से घिरा प्रकृति का मनोरम दृश्य लोगों के मन को मोहते हैं तो वहीं यहाँ की सर्द आवोहवा का आनंद लेने लोग पहुँचते हैं। अगर आप हिमाचल के परांग ट्रैक पर जाना चाहते हैं तो बता दूँ कि आपको वहाँ के एसडीएम से अनुमति लेनी पड़ेगी। साथ ही चितकुल से आगे जाने के लिए किन्नौर जिला प्रशासन आपको परमिशन देता है।

3. सिक्किम

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फोटोः फ्लिकर

हिमालय की तलहटी में बसा छोटा सा राज्य पहाड़ों की खूबसूरती को खुद में समेटे हुए है। हाल के दिनों में भारतीय टूरिज्म सेक्टर में सिक्किम का नाम बेस्ट टूरिस्ट डेस्टिनेशन के तौर पर उभर कर सामने आया है। भारत के पूर्व में स्थित यह राज्य इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि यह तीन देश नेपाल, भूटान, व चीन की सीमाओं से घिरा हुआ है। प्राचीन काल का प्रसिद्ध सिल्क रूट (रेशम मार्ग) इसी राज्य से ही जाता है। इसके नथुला दर्रा, गुरडोंगमार, जिरो प्वाइंट जैसे स्थानों को देखने के लिए सरकारी अनुमित लेना अनिवार्य होता है।

4. मिज़ोरम

पहाड़ी खूबसूरती को पसंद करने वाले लोग मिज़ोरम की सैर को ज़रूर प्राथमिकता देते हैं। यहाँ आइजोल, लुंगलेईव, चम्पैइ आदि जगहें पर्यटन के प्रमुख स्थान घोषित किए गए हैं। पूर्वोत्तर भारत के इस खूबसूरत राज्य में लगभग 21 आकर्षक ऊँची-ऊँची पर्वतीय चोटियाँ हैं। हिमालय की गोद में बसे इस राज्य के कई स्थानों में घूमने के लिए स्थानीय अनुमति की आवश्यकता होती है।

5. लद्दाख और जम्मू-कश्मीर

जम्मू-कश्मीर तो जैसे प्रकृति का खजाना है, जहाँ ईश्वर ने अपना भरपूर प्यार लुटाया है। यहाँ की खूबसूरती पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देती है। कई कारणों से ये खूबसूरत राज्य संवेदनशील हो गया है। इसकी भौगोलिक स्थिति ही ऐसी है कि पड़ोसी देशों से विवाद और सीमा-सुरक्षा को देखते हुए सुरक्षाबल तैनात हैं। जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती क्षेत्रों में जाने के लिए जिला प्रशासन या फिर सुरक्षाबल से परमिशन लेना अनिवार्य होता है। वहीं, लद्दाख के लेह, अक्साई चीन में जाने के लिए इनर लाइन परमिट की जरूरत होती है।

6. पंजाब

गेहूँ के लहलहाते खेत और वीरों की धरती पंजाब भारत की खूबसूरती में चार चांद लगाते हैं। यहां का इतिहास बलिदान और संस्कृति से जुड़ी कई कहानियाँ कहती है। यहाँ भारत सहित दुनिया भर से पर्यटक आते हैं। यूँ तो पंजाब में आप कहीं भी आ और जा सकते हैं लेकिन पाकिस्तान सीमा से जुड़े संवेदनशील अमृतसर, गुरुदासपुर, पठानकोट आदि जिलों के कुछ जगहों पर जाने से पहले बीएसएफ से अनुमति लेना ज़रूरी होता है।

7. अरुणाचल प्रदेश

प्राकृतिक नज़ारे और वाटरफॉल की खूबसूरती को निहारने लोग यहाँ आते हैं। कहा जाता है कि नॉर्थ ईस्ट घूमना हो तो शुरुआत अरुणाचल से करें। जीरो वैली यहाँ का शानदार टूरिस्ट अट्रैक्शन है जिसे वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स में शामिल किया गया है। आपातानी ट्राइब के इस निवास स्थान पर आने के लिए आपको इनर लाइन परमिट लेने की जरूरत पड़ती है। जानकारी हो कि तिब्बत की सीमा से लगे इलाकों में आपको जाने से रोक दिया जाता है।

8. नागालैंड

पूर्वोत्तर राज्यों में से नागालैंड काफी खूबसूरत है। यहाँ कला और शिल्प की समृद्ध परंपरा रही है। पर्यटकों के लिए चुमुकेदिमा गाँव में एक भव्य पर्यटन परिसर का निर्माण किया जा रहा है और यहाँ की संस्कृति भारत के अन्य राज्यों से अलग है। नागा पहाड़ी क्षेत्रों में जाने के लिए मूल निवासियों को छोड़ बाहरी लोगों को अनुमति लेना जरूरी होता है। कोहिमा, डिमापुर, मोकोकचुंग, वोखा, मॉन, फेक, किफिरे जैसी जगह पर जाने के लिए आपको डिप्टी कमिशनर ऑफिस से परमिशन लेनी पड़ती है।

9. मेघालय

मेघालय की खूबसूरती को निहारना चाहते हैं और वहाँ 24 घंटे से अधिक का समय बिताना चाहते हैं तो आपको इनर लाइन परमिट लेनी होगी। यहाँ ये परमिट राज्य सरकार की ओर से दिया जाता है। अगर आप केंद्र या राज्य के कर्मचारी हैं तो फिर आपको परमिट लेने की आवश्यकता नहीं है। लेकिन बाकी सभी लोगों को आईएलपी लेनी होती है।

10. लोकतक लेक, मणिपुर

उत्तर-पूर्व के मणिपुर स्थित सबसे बड़े साफ पानी की झील लोकतक लेक अपनी खासियत के लिए विश्व प्रसिद्ध है। इसमें जगह-जगह भूखंड को आप तैरते देखेंगे जो कि मिट्टी, पौधों और जैविक घटकों से मिलकर बने होते हैं। इस लेक को देखने के लिए आपको इनर लाइन परमिट की जरूरत होगी।

इसके अलावे और भी अनेक ऐसी जगहें हैं जहाँ परमिशन लेकर ही जाना होता है. भारत के जिन राज्यों में आप बगैर अनुमित के नहीं जा सकते वहाँ जाने के लिए आपको एक प्रकार का वीजा ‘इनर लाइन परमिट’ लेने की ज़रूरत होती है।

क्या है इनर लाइन परमिट?

इनर लाइन परमिट ईस्टर्न फ्रंटियर विनियम 1873 के अंतर्गत जारी किया जाने वाला एक ट्रैवल डॉक्यूमेंट है। हालांकि इसे भारतीय नागरिकों के लिए ब्रिटिश सरकार ने बनाया था। लेकिन स्वतंत्राता के बाद समय-समय पर इसमें फेरबदल कर इसे जारी रखा गया है। यह परमिट दो प्रकार का होता है, जिसमें पहला- पर्यटन की दृष्टि से बनने वाला एक अल्पकालिक आईएलपी तथा दूसरा- नौकरी, रोजगार के लिए अन्य राज्यों के नागरिकों के लिए बनाया जाने वाला आईएलपी होता है।

इसे कैसे बनाया जा सकता है?

जिन राज्यों में इनर लाइन परमिट बनाने का नियम है वहाँ के बॉर्डर पर इसे बनवा सकते हैं। राज्य सरकार के अधिकारी इस काम में आपकी मदद करेंगे। इसके अलावा इसे दिल्ली, कोलकाता और गुवाहाटी में भी इसका कार्यालय है, जहाँ से आप परमिट बनवा सकते हैं। आईएलपी बनाने के लिए 10-20 पासपोर्ट साइज फोटो के साथ ही सरकारी पहचानपत्र की ज़रूरत पड़ती है। फोटो सफेद बैकग्राउंड वाली हीं लें। इसे बनवाने में महज ₹120 से ₹300 का खर्च आता है। आज के दौर में ऑनलाइन सुविधा का होना अनिवार्य समझा जाता है लेकिन ये सुविधा सभी राज्यों में फिलहाल सही से लागू नहीं है। इसलिए अच्छा होगा अगर आप समय रहते ऑफलाइन ही अप्लाई करें।

जहाँ तक मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश व नागालैंड की बात है तो यहाँ के लिए एकबार में 15 दिन के लिए आईएलपी परमिट मिलता है। आपको अगर वहाँ रुकना है तो इसे रिन्यूवल करा सकते हैं। ट्रैवेल एजेंसियों के माध्यम से भी आप ये परमिट करा सकते हैं।

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