सैकड़ों सालों से, महज़ एक खम्भे पर टिका है ये चाइनीज़ मंदिर

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Photo of सैकड़ों सालों से, महज़ एक खम्भे पर टिका है ये चाइनीज़ मंदिर by Rupesh Kumar Jha

ये दुनिया रहस्यों से भरी हुई है जो कि आपको ना केवल रोमांचित करती है बल्कि आश्चर्यचकित भी करती है। सैलानियों को ऐसे ही किसी बहाने, किसी ठिकाने की तलाश होती है जो कि उन्हें यात्रा का जोखिम लेने के लिए प्रेरित करती है। यूँ तो हमारे देश भारत में ऐसे स्थान भरे-पड़े हैं जो कि बनावट और विशेषताओं के कारण आपको अपनी ओर आकर्षित करते हैं। वहीं इस मामले में पड़ोसी देश चीन भी कम नहीं है!

विशाल जनसंख्या और भू-भाग वाला ये देश अपनी दीवार के साथ ही कई अजीब कारणों से फेमस है। चीन के फेमस जगहों के बारे में आपको पता हो सकता है। लेकिन आज एक ऐसे मंदिर से रूबरू कराने जा रहे हैं जो अपने आप में एक अजूबा है। ये बात पक्की है कि इसके बारे में सैलानियों को कम ही पता चल पाया है। हालांकि इधर कुछ सालों में चीन का ये अजीब मंदिर आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है।

गान्लू मंदिर: ये मंदिर क्यों है अजीब?

मंदिर आस्था और विश्वास का ठिकाना होता है। चीन के दक्षिण-पश्चिम पहाड़ी भाग में मौजूद गान्लू मंदिर को लेकर ऐसा ही विश्वास है। लेकिन इसकी बनावट सैलानियों को अचंभित करती है। चीन के शांझी में हेंग माउंटेन स्थित ये मंदिर 260 फीट की ऊँचाई पर है। दिलचस्प बात है कि ये महज एक खंभे पर खड़ा है। इसका निर्माण 1146 ई. में किया गया था जो कि आज भी सबको हैरत में डाल देता है।

इस बौद्ध मंदिर को लेकर निःसंतान दम्पत्तियों में अटूट आस्था है। मान्यता है कि जो भी यहाँ आता है, उसे खाली हाथ नहीं जाना पड़ता है। ज्यादातर लोग यहाँ संतान की कामना के लिए ही हाजिरी लगाते हैं। लेकिन आजकल सैलानी भी इसे देखने खूब आते हैं। धीरे-धीरे ये लोकप्रिय जगहों में शुमार होता जा रहा है।

जानकारी हो कि इस झूलते मंदिर का निर्माण ‘ये जुकिया’ द्वारा किया गया था। ऐसा कहा जाता है कि उसने अपनी माँ की याद में इसको बनाया था। बता दें कि सालभर यहाँ सैलानियों व भक्तों का आना-जाना लगा रहता है। पहाड़ों पर लटका ये मंदिर हैंगिंग मॉनैस्ट्री के नाम से मशहूर हो रहा है।

कैसी है मंदिर की संरचना?

ये ख़ास संरचना मंदिर को बाढ़, बारिश और तूफान से बचाने के लिए है। बताया जाता है कि एक समय बौद्ध भीक्षु जब यात्रा पर होते थे तो ऐसी जगहों पर उनके लिए उचित ठिकाना नहीं मिलता था। खासकर खराब मौसम, बारिश और बाढ़ के वक्त कुछ ज्यादा ही मुश्किलों का सामना करना पड़ता था। मंदिर के इस विशेष बनावट का एक कारण इसे भी बताया जाता है।

ये मंदिर दटोंग शहर के उत्तर-पश्चिम में 64.2 कि.मी. की दूरी पर है। इसे तीन चीनी पारंपरिक धर्म, बुद्ध, ताओ और कंफुशिवाद के मिलन के रूप में भी देखा जाता है। इसकी पूरी संरचना एक आधार स्तम्भ पर टिकी हुई है। मंदिर तक जाने के लिए सीढ़ियाँ बनी हुई हैं जो कि लकड़ी और लोहे की हैं।

ये मंदिर चाइनीज आर्किटेक्चर का बढ़िया नमूना है। मंदिर में लगभग 40 अलग-अलग हॉल मौजूद हैं जो कि आपस में एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। मंदिर के अंदर आप पुराने स्मारकों और प्रतिमाओं को देख सकते हैं। बताया जाता है कि यहाँ 80 से अधिक मूर्तियाँ हैं जो कि तांबे, लोहे, पत्थर से तराशे गए हैं। ये बहुत ही सुंदर और सजीव जान पड़ते हैं।

एशिया ही नहीं, बल्कि दुनिया के हर एक हिस्से से लोग मंदिर को देखने आते हैं। पर्यटन के लिहाज़ से इसको संरक्षित करने का काम भी लगातार जारी है। आज भी इसकी संरचना को लेकर लोग रीसर्च में लगे हुए हैं। लोग इसके निर्माण तकनीक को लेकर अधिक से अधिक जानकारी हासिल करना चाहते हैं जिससे विषम जगहों पर भी निर्माण किया जा सकता है। सैकड़ों साल पहले बना ये मंदिर उस समय के समुन्नत तकनीक की गवाही दे रहा है।

पर्यटक जब इस मंदिर को देखते हैं तो हक्के-बक्के रह जाते हैं। इसकी संरचना ऐसी है कि लगता है कि मंदिर गिरने ही वाला है। इसमें दाखिल होने वाले लोगों को लगता रहता है कि उन्होंने अगर जोर से कदम भी बढ़ाया तो मंदिर नीचे गिर सकता है। हालांकि ऐसा वाकई होता नहीं है बल्कि मंदिर एक रोमांच पैदा ज़रूर करता है।

चीन के इस हिस्से में प्रचलित कहावत है कि आकाश पर झूलता ये मंदिर घोड़े की पूंछ के तीन बालों पर टिका हुआ है। मंदिर को सामने से देखने पर लगता है कि इसके तीन आधार खम्भे हैं। लेकिन रिसर्चर का कहना है कि एक आधार स्तंभ के साथ ही अनेक ऐसे खम्भे हैं जो इसे टिकाकर रखे हुए हैं। उनका मानना है कि ये मंदिर घोंसले बनाने की तकनीक पर आधारित है।

अगर ट्रिप पर जाएँ तो...

इस झूलते मंदिर के आसपास आपको कई और मंदिर देखने को मिलते हैं। इनमें अवतार मंदिर, स्तूप मंदिर, हज़ार बौद्ध सूत्र मंदिर सहित कई फेमस कलाकृति देखने को मिलेंगी। इनकी सुन्दर वास्तुशैली, सूक्ष्म नक्काशी देखकर आप मुग्ध जाएँगे। यहाँ की यात्रा बौद्ध धर्म को समझने और जागरुकता बढ़ाने का अवसर देती है। मंदिर अपने आप में कई सीख देने के लिए काफी है। ये आप पर निर्भर है कि इस सांस्कृतिक ट्रिप पर आप कितना एक्सप्लोर करते हैं।

शांझी प्रांत चीन की बौद्ध व ताओ संस्कृति की विरासत को देखने के लिए बेहतरीन जगह है। ठंड के मौसम में यहाँ बर्फ़बारी होती है जो सैलानियों को मुश्किल में डालती है। लिहाजा अगर आप यहाँ की यात्रा करना चाहते हैं तो गर्मी के मौसम में जाएँ। इस ट्रिप के माध्यम से आपको धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को निकट से निहारने का अवसर मिल सकता है!

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