ओडिशा आए और गोपालपुर नहीं देखा तो क्या खाक ओडिशा आए!

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Photo of ओडिशा आए और गोपालपुर नहीं देखा तो क्या खाक ओडिशा आए! by Deeksha

अगर आप इतिहास के पन्ने पलटने बैठेंगे तो ऐसी बहुत सारी चीजें मिलेंगी जो आपको अब ठीक से याद भी नहीं हैं। इसलिए कहा जाता है कि हर पुरानी चीज को आपको समय-समय पर दोहरा लेना चाहिए। घुमक्कड़ी में भी कुछ ऐसा ही होता है। कुछ जगहें होती हैं जहाँ आप बार-बार जाना चाहते हैं। लेकिन कुछ ऐसी भी होती हैं जहाँ जाना तो छोड़िए आपने उनके बारे में सुना भी नहीं होता है। ऐसी जगहें ऐतिहासिक नजरिए से बेहद खास होती हैं। क्योंकि इनका पुराने समय में महत्व हुआ करता था इसलिए ऐसी जगहों पर आपको कई प्राचीन इमारतें देखने के लिए मिलती हैं। लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है कि इनमें आधुनिकता कम है। ये सभी जगहें जितनी खूबसूरत होती हैं इनका आधुनिकता से भी उतना ही रिश्ता होता है। ऐसी ही बेहद अनोखी और सरल जगह है ओडिशा का गोपालपुर।

गोपालपुर का इतिहास

गोपालपुर ओडिशा में बसा एक छोटा सा शहर है। बंगाल की खड़ी के तट पर स्थित ये जगह ओडिशा के गंजम जिले का हिस्सा है। पुराने समय में गोपालपुर प्राचीन कलिंगा के समुद्री यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण बंदरगाह हुआ करता था। समुद्र के रास्ते आने वाले सभी यात्री गोपालपुर में ही आराम किया करते थे। पहले विश्व युद्ध के दौरान भी गोपालपुर में सेना का कैंप हुआ करता था जहाँ से सैनिक फिर आगे बर्मा की तरफ बढ़ते थे। गोपालपुर वो जगह है जहाँ ओडिशा का सबसे पहला आधुनिक होटल बनाया गया था जिसको देश का पहला बीच रिजॉर्ट होने का गौरव भी मिला हुआ है। द पाम बीच रिजॉर्ट का निर्माण एक इतालाई व्यवसाई सिग्नोर मग्लियनी ने 1914 में करवाया था। इसके बाद 1948 में इस रिजॉर्ट को ओबेरॉय समूह ने खरीद लिया था। गोपालपुर की खासियत केवल यहीं तक सीमित नहीं है। गोपालपुर भारत की उन चुनिंदा जगहों में से है जहाँ ऑलिव रिडली कछुए पाए जाते हैं। अगर आप ओडिशा घूमने जाने का प्लान बना रहे हैं तो गोपालपुर आपकी लिस्ट में जरूर होना चाहिए।

क्या देखें?

गोपालपुर में टूरिस्टों के लिए बहुत कुछ है। यहाँ की साफ बीच से लेकर पारंपरिक ओडिया खाने तक हर एक चीज आपको खूब पसंद आएगी।

1. गोपालपुर बीच

इस बीच को गोपालपुर की शान कहना भी गलत नहीं होगा। गोपालपुर आने वाला हर व्यक्ति इस बीच को देखने जरूर जाता है। गोपालपुर बीच को ओडिशा की सबसे आलीशान बीचों में भी गिना जाता है। इस बीच की खासियत है यहाँ मिलने वाले कछुए और लाल केकड़े जो भारत में बहुत कम जगहों पर देखने के लिए मिलते हैं। नारियल के पेड़ों और सफेद रेत से लिपटी इस बीच पर टहलना आपको जरूर पसंद आएगा। ये बीच इतनी लाजवाब है कि आज ये गोपालपुर की पहचान बन चुकी है। गोपालपुर का लोकप्रिय बीच फेस्टिवल का आयोजन भी इसी बीच पर किया जाता है। इस बीच पर काजू के पेड़ देखने के साथ-साथ रोमांचक वॉटर स्पोर्ट्स जैसे बोटिंग, कयाकिंग और स्कूबा डाइविंग भी कर सकते हैं।

2. गोपालपुर लाइट हाउस और बंदरगाह

गोपालपुर के तमाम आकर्षक और देखने लायक पर्यटक स्थलों में से एक है बीच पर बना लाइट हाउस। इस लाइट हाउस की देख-रेख ओडिशा के पर्यटन विभाग द्वारा की जाती है। कहा जाता है इस लाइट हाउस का निर्माण सालों पहले करवाया गया था। लाइट हाउस से आपको आसपास की जगहों का बेहतरीन नजारा दिखाई देता है। यहाँ से बीच के साथ-साथ गोपालपुर और चिल्का झील के कुछ हिस्सों को भी देखा जा सकता है। गोपालपुर का एक और आकर्षण है बीच पर बना बंदरगाह। इस बंदरगाह का निर्माण भारत और बर्मा के बीच चावल के व्यापार को व्यवस्थित करने के लिए करवाया गया था। क्योंकि उन दिनों भारत और बर्मा के व्यापार के लिए गोपालपुर बेहद महत्वपूर्ण हुआ करता था इसलिए इस बंदरगाह को जरूरी माना जाता था।

3. गोपालपुर बीच फेस्टिवल

इस फेस्टिवल को देखने के लिए हर साल हजारों की संख्या में लोग आते हैं। एक तरह से इस भव्य फेस्टिवल की वजह से ही गोपालपुर को जाना जाता है। 1996 में शुरू किए गए इस फेस्टिवल का आयोजन गोपालपुर में टूरिज्म और कल्चर को बढ़ावा देने के लिए किया जाता है। दिसंबर में होने वाले इस उत्सव जैसे फेस्टिवल में कई नामी सितारे भी हिस्सा लेते हैं। फेस्टिवल की सबसे अच्छी बात है कि इसमें मुख्य रूप से गोपालपुर की स्थानीय संस्कृति के बारे में लोगों को बताया जाता है। फेस्टिवल में स्थानीय चीजों का बाजार लगता है जिसमें गोपालपुर और ओडिशा से जुड़ी चीजें प्रदर्शित की जाती हैं। कुल मिलाकर फेस्टिवल के समय पूरा गोपालपुर खिल उठता है।

4. चिल्का झील

गोपालपुर से लगभग 90 किमी. की दूरी पर बनी ये झील एशिया की सबसे बड़ी और दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी खारे पानी की झील है। अगर आपको बोर्ड वॉचिंग करना पसंद है और आपको प्रकृति से लगाव है तो ये झील आपको किसी जन्नत से कम नहीं लगेगी। चिल्का तरह-तरह के पंछी और मछलियों का घर है। इस झील में आपके पास बोटिंग करने का भी विकल्प है। अगर किस्मत अच्छी रही तो आपको डॉल्फिन भी दिखाई दे सकती है। इस झील का आकार नाशपाती की तरह है जिसमें आपको कई सारे छोटे-छोटे द्वीप भी देखने के लिए मिलते हैं। आप इनमें से किसी भी द्वीप पर जाकर बंगाल की खाड़ी की तेज लहरों को देख सकते हैं।

कहाँ ठहरें और क्या खाएँ?

गोपालपुर में रहने और खाने के तमाम ऑप्शन्स हैं। यहाँ ठहरने के लिए आप अपने बजट के हिसाब से कोई भी होटल या गेस्ट हाउस चुन सकते हैं। अगर आप केवल आरामदायक ठिकाना चाहते हैं तो उसके लिए आपको 400 से 500 रुपए तक में होटल मिल जाएगा। लेकिन अगर आप ठहरने के साथ-साथ और भी सुविधाएँ चाहते हैं तो उसके लिए आपको ज्यादा पैसे देने पड़ सकते हैं। आमतौर पर इन होटलों में खाने के लिए भी व्यवस्था होती है। होटल में ही रेस्त्रां या रूम सर्विस से आप खाना मंगवा सकते हैं। रेस्त्रां की बात करें तो गोपालपुर में ऐसी कई जगहें हैं जहाँ आप लाजवाब सीफूड खाने का मजा ले सकते हैं। क्योंकि गोपालपुर समुद्री इलाका है इसलिए यहाँ झींगा, केकड़ा और मछली में खूब वेरायटी मिल जाती है। इसके अलावा गोपालपुर में आप पारंपरिक ओड़िया खाने का स्वाद भी ले सकते हैं।

कब जाएँ?

गोपालपुर आने के लिए सबसे अच्छा समय नवंबर से फरवरी के बीच का होता है। इन 4 महीनों में गोपालपुर का मौसम सबसे सुखद होता है। समुद्र के पास होने की वजह से यहाँ गर्मियों के समय तेज धूप और उमस रहती है। इसलिए गर्मियों में यहाँ आने का प्लान ना बनाना ही सही होगा। इसके अलावा बारिश के मौसम में भी गोपालपुर आना ठीक नहीं होगा। आप बरसात से परेशान को जाएंगे और आपके सारे प्लान खराब हो जाएंगे। इसलिए नवंबर से फरवरी के समय जब बाकी देश में जोरदार ठंड पड़ रही होती है गोपालपुर में आप आरामदायक छुट्टियाँ बिताने का आनंद ले सकते हैं।

कैसे पहुँचें?

आप फ्लाइट, बस और ट्रेन लेकर आसानी से गोपालपुर आ सकते हैं।

फ्लाइट से: अगर आप फ्लाइट से गोपालपुर आना चाहते हैं तो सबसे पहले आपको भुवनेश्वर एयरपोर्ट आना होगा। भुवनेश्वर का बीजू पटनायक इंटरनेशनल एयरपोर्ट सबसे नजदीक हवाई अड्डा है जो गोपालपुर से 169 किमी. की दूरी पर स्थित है। एयरपोर्ट से आप टैक्सी, कैब या बस लेकर गोपालपुर आ सकते हैं। एयरपोर्ट से गोपालपुर आने में लगभग 4 घंटों का समय लग जाता है।

ट्रेन से: गोपालपुर में कोई रेलवे स्टेशन नहीं है। इसलिए अगर आप ट्रेन से आने का मन बना रहे हैं तो आपको सबसे पहले बेरहामपुर रेलवे स्टेशन आना होगा। ये स्टेशन गोपालपुर से केवल 16 किमी. दूर है इसलिए आपको कोई परेशानी नहीं होगी। बेरहामपुर देश के बाकी बड़े शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुए है इसलिए आपको ट्रेन मिलने में भी दिक्कत नहीं होगी।

बस से: गोपालपुर आने के लिए शायद आपको सीधी बस ना मिले। लेकिन इसके बाद भी यहाँ बस से आया जा सकता है। बस से आने के लिए आपको बेरहामपुर की बस लेनी होगी। बेरहामपुर बस अड्डे से गोपालपुर 15 किमी. ही दूर है। देश के सभी शहरों से ओडिशा राज्य पर्यटन की बसें मिल जाती हैं जिनसे बेरहामपुर आसानी से पहुँचा जा सकता है। बेरहामपुर से फिर या तो आप लोकल प्राइवेट बस लेकर गोपालपुर आ सकते हैं या आप टैक्सी भी ले सकते हैं।

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