पोखरा: झील, पहाड़ों और खूबसूरती से घिरा नेपाल का छोटा सा शहर!

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Photo of पोखरा: झील, पहाड़ों और खूबसूरती से घिरा नेपाल का छोटा सा शहर! by Rishabh Dev

हमारा पड़ोसी देश नेपाल खूबसूरती और प्रकृति के अजूबों से भरा हुआ है। यहाँ जाना हमारे लिए वैसा ही है, जैसे एक शहर से दूसरे शहर जाना। इस देश की सीमा में हम पैदल चलते-चलते ही घुस सकते हैं। यहाँ के जब प्रमुख शहरों की बात होती है तो काठमांडू का नाम आता है। लेकिन काठमांडू के समान ही एक और खूबसूरत शहर है, पोखरा। पोखरा नेपाल का प्रमुख शहर है, जहाँ विराट हिमालय के अद्भुत नजारों का आनंद लिया जा सकता है। इसी शहर में एक खूबसूरत झील है, फेवा झील जिसके किनारे बैठाना एक अलग प्रकार का सुखद एहसास है। यहाँ प्रकृति और संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिलता है। तो चलिए आज उसी खूबसूरत फेवा झील के सफर पर चलते हैं।

Photo of पोखरा, Nepal by Rishabh Dev

सुरम्य और सुंदर पोखरा

नेपाल की राजधानी काठमांडू से मैं पोखरा हवाई मार्ग से जा रहा था। फ्लाइट की सबसे अच्छी बात यही है कि ये आपको कुछ ही घंटों में वहाँ पहुँचा देती है, जहाँ आप जाना चाहते हैं। लेकिन नेपाल जैसे हरे-भरे देश में हवाई सफर करने के बाद आपको पछतावा होता है क्योंकि जो प्राकृतिक नजारे आपको सड़क मार्ग से मिलते हैं वो ये आसमान कभी नहीं दे सकता। काठमांडू से पोखरा जल्दी पहुँचने के बावजूद मुझे बहुत खुशी नहीं हो रही थी। वजह पहाड़ों और हरियाली के सफर का हिस्सा ना बन पाना। समय की कमी की वजह से मन पर पत्थर रखकर फ्लाइट आने का निश्चय किया था। लेकिन पोखरा एयरपोर्ट को देखकर लगा के ये भी बुरा नहीं है। इस छोटे-से एयरपोर्ट को देखकर मन खुश हो गया। पहाड़ों के बीच स्थित ये छोटा-सा एयरपोर्ट बेहद सुंदर लग रहा था। पहाड़ों की यही तो खासियत है, कुछ भी रख दो खूबसूरत ही लगता है।

पोखरा पहुँचकर सबसे पहले मैंने अपने लिए एक ठिकाना ढूँढा, जो पोखरा की सुंदर झील के पास ही था। इस खूबसूरत झील के पास होने की वजह से ये होटल अपने आप में खास था। यहाँ के होटलों की बनावट घर जैसी थी। लकड़ी की सीढ़ियाँ और इनकी बनावट से नेपाल की वास्तुकला को इन होटलों के जरिए समझा सकता है। वो अपनी प्राचीन वास्तुकला को आज भी संजोए हुए हैं। मैं कुछ देर यहाँ रूका और फिर निकल पड़ा इस शहर को देखने। पोखरा एक छोटा-सा स्वच्छ, सुरम्य और सुंदर शहर है, जो खूबसूरत फेवा लेक के किनारे बसा हुआ है। हम पहाड़ों में गंदगी देखते हैं तो यही कहते हैं कि पर्यटक पहाड़ों में आते हैं और गंदा करके जाते हैं। नेपाल के इस शहर में भी टूरिस्टों की चहल-पहल बनी रहती है लेकिन आपको यहाँ गंदगी ढूढ़ने पर भी नहीं मिलेगी।

नेपाल में हिंदी

पोखरा शहर में आप नेपाल की प्राचीन कला का अनुभव कर सकते हैं और आधुनिकता भी देखने को मिलती है। चमक-दमक और आधुनिकता से पूरा तरह से सुसज्जित हैं यहाँ के बाजार। यहाँ महंगे-महंगे होटल हैं, माॅल भी आपको मिल जाएँगे। लेकिन हर जगह कुछ न कुछ नेपाल की संस्कृति का छौंक ज़रूर मिल जाएगा जो आपको एहसास कराता है कि ये नेपाल है। इस आधुनिकता में भी नेपाल की वास्तुकला को बिसराया नहीं गया है। पोखरा में चाहे होटल हो या माॅल। यहाँ आधुनिकता की भरमार आपको ज़रूर देखने को मिलेगी लेकिन अंदर जाने पर माहौल नेपाल का ही पाएँगे। इन सबमें अच्छी बात ये है कि यहाँ के लोग हिंदी को अच्छे से समझते हैं। यहाँ के स्थानीय लोग बताते हैं कि उनकी हिंदी बाॅलीवुड फिल्मों की वजह से अच्छी है और यहाँ भारत से टूरिस्ट आते ही रहते हैं। जिस वजह से हिंदी उनके मुंह-जुबानी में घुल-सी गई है।

वादियों के बीच फेवा

बाजार, होटल और माॅल को देखते हुए हम उस जगह पहुँच गए जिसके लिए ये शहर जाना जाता है, फेवा झील। खूबसूरत फेवा झील पहाड़ों के नीचे दूर तलक तक पसरी हुई है। जहाँ तक नजरें जाती हैं झील ही दिखाई देती है। इस लेक को देखकर लगता है कि पहाड़ों के बीचों-बीच भगवान ने यहाँ जल तंत्र बना दिया हो। ये नज़ारा सुंदर और मोहित करने वाला है। यहाँ आकर लगता है कि सुकून अगर कहीं है तो यहीं है। मैं भी इस सुंदर झील को देखकर आकर्षित हो गया था। मेरा इस झील के पास आने के बाद कहीं जाने का मन ही नहीं कर रहा था। मैं झील के किनारे ही पेड़ों के गट्टे पर बैठकर झील और दूर आसमान को छूते पहाड़ों को देख रहा था।

मैंने इतनी साफ और खूबसूरत झील कभी नहीं देखी थी। पहली बार कुछ नया देखने का आकर्षण कुछ अलग ही होता है। आप उस दृश्य को हमेशा के लिए सहेज लेना चाहते हैं। पहली बार देखने पर आँखें उस दृश्य पर टिकी ही रहती है। झील के किनारे एक छोटा-सा घर भी था। ये घर इस जगह की सुंदरता में एक रंग बिखेर रहा था। फेवा झील खूबसूरत पहाड़ों से घिरी हुई है। हिमालय की अद्भुत वादियों को सौंदर्य है यहाँ। मैं दूर तक जाती नावें, मल्लाहों और टूरिस्टों से भरी बोटों को देख रहा था। इतने सारे पर्यटक और हलचल होने के बावजूद यहाँ के वातावरण में अजब-सी शांति थी। शायद ये इस जगह की एक खासियत ही थी जो मैं अनुभव कर रहा था। फेवा झील की खूबसूरती को देखते हुए पता ही नहीं चला कि कब शाम हो गई। शायद शाम होने का मतलब ही है, लौटना। मैं भी होटल की ओर लौट रहा था।

मैं वापस लौटने लगा और मन ही मन सोच रहा था कि कल फिर आउँगा। तभी अचानक बाजार में खूबसूरत कलाकृति दिखी। मन किया कि इसको अपने कैमरे में कैद करूँ। कैमरे की तरफ हाथ गया तो देखा कि कैमरा तो है ही नहीं। मन अचानक खिन्न-सा हो गया। लगा कि ये सफर बहुत सारी यादें छीन रहा है। उन यादों को वापस कैमरे में सहेजना मुश्किल था। मैं वापस उस झील जाना चाहता था, सब कह रहे थे कि अब नहीं मिलेगा। लेकिन मुझे तसल्ली तो करनी ही थी। मैं झील की ओर बढ़ रहा था और मन ही मन भगवान को याद कर रहा था। मैं उस जगह गया जहाँ से घंटों तक इस झील को देख रहा था। कैमरे का बैग अपनी जगह पर रखा हुआ था, लग रहा था कि कैमरा इस झील को निहार रहा था। मैंने झट से कैमरा उठाया और भगवान को धन्यवाद कहा। मैंने इन दिनों में थोड़ी सीखी नेपाली में कहा, ‘भोली भेंटोला फेवा’। यानी फिर मिलूँगा फेवा, अभी चलता हूँ।

कब और कैसे पहुँचे?

पोखरा में फेवा झील के अलावा भी देखने को बहुत कुछ है। अगर आप इस खूबसूरत शहर को देखना चाहते हैं तो उसके लिए सबसे बेस्ट टाइम है सितंबर महीने से नवंबर तक। आप भारत से पोखरा बड़े आराम से पहँच सकते हैं। इसके लिए आप हवाई और सड़क मार्ग का उपयोग कर सकते हैं। अगर आप फ्लाइट से आने की सोच रहे हैं तो भारत से नेपाल की राजधानी काठमांडू के लिए सीधी फ्लाइट है। काठमांडू पहुँचकर आप एक और फ्लाइट लेकर पोखरा पहुँच सकते हैं या काठमांडू से बस और टैक्सी से पोखरा पहुँच सकते हैं। भारत से नेपाल सड़क मार्ग से भी आ सकते हैं। भारत के गोरखपुर और वाराणसी जैसे शहरों से काठमांडू के लिए बसें चलतीं हैं। नई दिल्ली से भी काठमांडू के लिए एक सीधी बस जाती है। नेपाल में अभी तक रेलवे की सुविधा उपलब्ध नहीं है।

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