सुनना चाहते है प्रकृति का मधुर संगीत तो बिहार के इस वाटरफॉल को जरूर करे एक्सप्लोर

Tripoto
7th Jul 2023
Photo of सुनना चाहते है प्रकृति का मधुर संगीत तो बिहार के इस वाटरफॉल को जरूर करे एक्सप्लोर by Priya Yadav


           भारत के बिहार राज्य को पर्यटन की दृष्टि से हमेशा से ही बहुत कम आका गया है।परंतु ऐसा बिलकुल भी नहीं है कि यहां पर पर्यटन स्थलों की कमी है।भारत के बाकी राज्यों के जैसे ही प्रकृति ने यहां पर भी अपनी खूबसूरती के बहुत सारे छटा बिखेरे हुए हैं।खूबसूरत पहाड़,नदियां,झरने और चारों तरफ़ फैली हरियाली ये सब आपको बिहार में देखने को मिलेगा।ऐसे ही एक खूबसूरत झरने के बारे में आज हम आपको बताएंगे जो बिहार के खूबसूरत पर्यटन का एक छोटे सा नमूना है।जिसके आवाज के शोर में भी आपको एक संगीत सुनाई देगा जो खुद प्रकृति के द्वारा बनाई गई एक मधुर धुन है।तो आइए जानते इस खूबसूरत झरने के बारे में।

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मंझार कुंड

बिहार के रोहतास जिले के सासाराम से लगभग 4 किलोमीटर की दूरी पर मंझार कुंड एक बहुत ही खूबसूरत जलप्रपात है।यह खूबसूरत जलप्रपात विंध्याचल रेंज के कैमूर पर्वत श्रृंखला में लगभग सवा तीन किलोमीटर की परिधि में फैला हुआ है।ऊपर की पहाड़ियों से काव नदी और कुदरा नदी का संयुक्त पानी इस जलप्रपात में इक्कठा होता है।जब पानी की धारा पहाड़ियों से कल कल करती हुई नीचे गिरती है तो यह नजारा देखने में तो खूबसूरत लगता ही है साथ ही पानी का मधुर संगीत मन को भी तृप्त कर देता है।यह जलप्रपात अपने मनोरम दृश्य के लिए दूर दूर तक विख्यात है।बरसात के मौसम में यह की प्राकृतिक छटा ही कुछ और होती है।

मंझार कुंड है धार्मिक आस्था का केंद्र

पर्यटन की दृष्टि से तो यह जगह सभी के लिए विशेष महत्व रखती है।लेकिन धार्मिक दृष्टि से भी इस स्थान का अपना एक अलग महत्व है।हिंदुओ के लिए यह एक पवित्र स्थानों में से एक है।कैमूर की पहाड़ियों पर न जाने कितने ही ऋषि मुनियों ने तपस्या की है हजारों वर्ष तक यहां रहे हैं।आज भी इस महान ऋषि मुनियों की कुटिया ,ध्यान और साधना स्थल इस स्थान पर मौजूद हैं।इस लिए यह हिंदुओ के लिए एक विशेष स्थान रखता है।

       बात अगर सिखों की करे तो ऐसी मान्यता है कि इस स्थान पर सिखों के एक गुरु ने रक्षाबंधन के अगले सप्ताह में अपने अनुयायियों के साथ इस खूबसूरत स्थान पर एक रात व्यतीत की थी ।तभी से इस स्थान पर सिख समुदाय के लिए तीन दिनों का तीर्थ के रूप में करने का परंपरा का विकास हो गया।तभी से यहां रक्षाबंधन के बाद के सप्ताह में पड़ने वाले रविवार को गुरुग्रंथ साहिब को ले जाने की परंपरा है।इस दौरान यहां काफी भीड़ भाड़ देखी जाती है।लोग काफी संख्या में इसमें भाग लेने के लिए इक्कठा होते है।

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घूमने के दौरान इन बातों का रखें ध्यान

• तेज और उफान वाली जगहों पर जाने से बचे,ऐसी जगहों पर जाना खतरनाक हो सकता है।

• पहाड़ों के चट्टानों पर जगह जगह काई होती है तो इसका ध्यान रखे।

• सेल्फी लेने के चक्कर में ऐसी जगहों पर न जाए जो आपके लिए सुरक्षित न हो।

• अपनी गाड़ियों को भली भांति जांच कर ही यहां ले जाए क्योंकि 3 से 4 किमी के क्षेत्र में यहां कोई भी व्यवस्था नहीं मिलेगी।

• खाने पीने की चीज अपने साथ ले कर ही जाए क्योंकि झरने के पास आपको कोई भी दुकान नहीं मिलेगा और आस पास भी बहुत दूर तक कुछ नहीं मिलता।

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कैसे पहुंचे

मंझार कुंड तक पहुंचने के लिए आप बिहार की राजधानी पटना से जोकि वहां से 158 किमी की दूरी पर स्थित है जा सकते है अथवा सासाराम जो की वहां से 7 से 8 किमी की दूरी पर स्थित है पहुंचा जा सकता है।इन दोनो ही जगहों पर पहुंच कर आप निजी साधनों द्वारा मंझार कुंड पहुंच सकते है।

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