सुंदरवन : बाघों का वन

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सुंदरवन डेल्टा
Photo of सुंदरवन : बाघों का वन 2/3 by लफंगा परिंदा
सुंदरवन टाइगर कैंप

दुनिया के सबसे बड़े डेल्टा सुंदरवन के क्षेत्र में लगभग 10200 वर्ग किमी में फैले सदाबहार जंगल हैं | ये जंगल भारत में ही नहीं बल्कि बांग्लादेश में भी पाए जाते हैं | जंगल का जो भाग भारत सरकार के अंतर्गत आता है उसे सुंदरवन राष्ट्रीय उद्यान कहते हैं और इसमें पश्चिम बंगाल में गंगा नदी का बेसिन आता है | राष्ट्रीय उद्यान 38500 वर्ग किमी के क्षेत्र में फैला है जिसका एक तिहाई पानी और दलदल है | यहाँ बड़ी तादात में पाए जाने वाले सुंदरी वृक्षों के कारण उद्यान का नाम सुंदरवन पड़ा है | दुर्भाग्यवश, सफारी के दौरान फोटोशूट करना मना है |

जंगल के सहारे बने छोटे छोटे गाँवों में रहने वाले ग्रामीण खेती करके अपना गुज़र बसर चलाते हैं | रोज़मर्रा जीवन की दुख तकलीफ़ों ने उनमें भाईचारा और सदभाव की परंपराएँ पैदा कर दी हैं | हिंदू और मुस्लिम साथ साथ रहते हैं और बराबर में ही अपने अपने भगवान की उपासना करते हैं | यहाँ के जंगलों में मशहूर रॉयल बंगाल बाघ बहुतायत में पाया जाता है | बाघों ने इस क्षेत्र में रहने के लिए पाने आप को इस प्रकार ढाला है कि इन्हें यहाँ के खारे पानी में रहने और तैरने में कोई समस्या नहीं आती है | यह कई अन्य जंगली जानवरों जैसे कि जंगल फावल, ज़ायंट लिज़ार्ड, चित्तीदार हिरण, जंगली सूअर, मगरमच्छ आदि का प्राकृतिक आवास भी है। प्रवास के मौसम के दौरान साइबेरियन बतख यहाँ आकर बस जाते हैं। रॉयल बंगाल बाघ के अलावा, सुंदरबन बटागुर बास्का, किंग क्रेब्स और ओलिव रिडले कछुओं जैसी लुप्तप्राय प्रजातियों का घर भी है |

इतिहास

सन 1966 से सुंदरवन वन्यजीव अभयारण्य है | सन 1973 में सुंदरवन राष्ट्रीय उद्यान को सुंदरवन टाइगर सेंचुरी का मुख्य इलाक़ा घोषित कर दिया गया था | सन 1987 में इसे युनेसको द्वारा विश्व धरोहर घोषित कर दिया गया था और सुंदरवन क्षेत्र को साल 1989 में बायोस्फियर रिजर्व घोषित कर दिया गया था | लगभग 300 रॉयल बंगाल टाइगर और लगभग 30000 चित्तीदार हिरण यहाँ रहते हैं |

कहाँ रहें:

सुंदरवन वन्यजीव अभयारण्य के अंदर और बाहर कई होटल, वन्यजीव रिसॉर्ट, फोरेस्ट लॉज और जंगल कैंप मिल जाएँगे | सुंदरवन के अंदर बने वन्यजीव रिज़ोर्ट और होटल सभी प्रकार के शौक और बजट वाले सैलानियों को पनाह देते हैं | टूरिस्ट सीज़न के चरम पर सारे कमरे भर जाते हैं इसलिए पहले से ही बुकिंग करवा लेने में समझदारी है | सुंदरवन के सभी वन्यजीव रिज़ोर्ट पार्क में सफारियों का आयोजन करवाते हैं |

टिप्स:

1. विदेशी सैलानियों को पार्क में प्रवेश करने और बाघों को देखने के लिए एक ख़ास प्रवेश परमिट लेना होता है | पर्यटकों को पश्चिम बंगाल वन विभाग के सचिव, राइटर्स ब्लिज, कोलकाता से संपर्क करना होता है |

2. सुंदरवन के अन्य भागों को देखने के लिए सैलानियों को फील्ड डायरेक्टर, सुंदरबन टाइगर रिजर्व, पीओ कैनिंग, जिला 24 परगना, पश्चिम बंगाल से मिलना होता है | हालाँकि अभयारण्य के बाहर सुंदरवन में नाव से सवारी करने के लिए किसी तरह के प्रवेश परमिट की ज़रूरत नहीं है |

3. स्वयं से अभयारण्य में घूमना थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है क्यूंकी आपको परमिट और आने जाने के साधानो का स्वयं ही जुगाड़ करना होगा | अकेले नाव में घूमना सस्ता भी नहीं होता | समूह को इकट्ठा करके टूर करना बेहतर और आरामदेह होगा |

4. आपको अपना खुद का पानी या पानी छानने का यंत्र / लिक्विड़ ड्रॉप्स ले जाने की सलाह दी जाती है |

मज़ेदार तथ्य

1. सुंदरवन को यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर घोषित कर दिया गया है |

2. सुंदरवन में शार्क मछली की छह प्रजातियाँ पाई जाती है |

सुंदरबन राष्ट्रीय उद्यान

आप जेट्टी से होते हुए कलकत्ता से गोटखली जेया सकते हैं जो 115 किमी दूर है और जाने में 3 घंटे लगते हैं | हमारी ज़मीनी यात्रा यहाँ तक ही थी क्यूंकी आगे जाने के लिए गोमोर और दूर्गध्वानी नदी में नाव का सहारा लेंगे | हम पिचखली नदी तक पहुँच जाते हैं जहाँ से टाइगर कैंप शुरू होते हैं | पहुँचने पर टाइगर कैंप की टीम आपका स्वागत करेगी और आपको आपके कॉटेज तक पहुँचा दिया जाएगा जहाँ आप लंच करेंगे | दोपहर में दयापुर गाँव में घूमते हुए आप असली सुंदरवन से वाकिफ़ होंगे | घूमते हुए आप स्थानीय लोगों की जीवनशैली, शिल्पकारी, भोजन और जीवन जीने के तरीकों जैसी अद्भुत चीज़ों को देखेंगे | आपको गाँव के लोगों के खेती करने के तरीके के बारे में पता चलेगा और छोटे मुँह वाले मिट्टी से बने घर भी दिखाई देंगे | हमारा टूर गाँव के बाज़ारों से होता हुआ रिज़ोर्ट पर आकर विराम लेगा जहाँ आपको नाश्ता पानी दिया जाएगा और रात को भोजन के साथ ही रिज़र्व जंगल में आपका दूसरा दिन समाप्त होगा | गाँव से लौटने के बाद हम रिज़ोर्ट में बने वाचटावर में भी गये जहाँ से रिज़ोर्ट के पक्षियों को देखा जा सकता है | सुंदरवन टाइगर कैंप में 64 प्रजातियों के पक्षी बसते हैं | शाम को हमने बाघों पर बनी एक फिल्म देखी | फ़िशरमैन व्हार्फ़ डाइनिंग हॉल में खेत की ताज़ा सब्जियों का इस्तेमाल करके पकाया हुआ रात्रिभोज परोसा गया जहाँ स्थानीय लोगों द्वारा मछली पकड़ने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले विभिन्न उपकरण भी प्रदर्शित किए गए। टाइगर कैंप में रात भर आराम करके थकान उतारी |

अगले दिन नाश्ते के बाद हम दोबंके वाचटावर की ओर एक रोमांचक क्रूज़ का आनंद लेने निकल पड़े| अब हम घने जंगलों और नदियों की धाराओं से होते हुए टाइगर रिज़र्व में प्रवेश कर चुके थे | क्रूज़ पर ही हमे स्नैक्स परोसे गये | जंगल के अंदर वाच टावर पर कैनोपी वॉक करके हमारे रोंगटे खड़े हो गये | इसके बाद हम चित्तीदार हिरण पुनर्वास केंद्र पर गये जिसके पश्चात हम माल्टा सी फेस की ओर निकल गये जहाँ से बंगाल की खाड़ी साफ दिखाई देती है | वहाँ से हम फिर टाइगर कैंप की ओर दोपहर का भोजन करने आ गये | खाना खाने के बाद हम पखिरालय द्वीप की ओर निकल पड़े जो नाव से आधे घंटे की दूरी पर है | शाम को गाँव वालों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाते हैं जिसे बोन्बिनी यात्रा कहते हैं | बोन्बिनी का अर्थ है जंगल की देवी और यात्रा का अर्थ है एक खुला रंगमंच | रंगमंच में बाघों के स्वामी, जंगल के देवी देवता, मछुआरों और शहद इकट्ठा करने वालों के बारे में दिलचस्प कहानी बयान की जाती है जिसमें स्थानीय गाँव वालों के द्वारा रचे गये गाने और नृत्य होता है | रात के भोजन के बाद टाइगर कैंप में रात गुज़ारी | सुबह पक्षियों की मधुर ध्वनि के साथ जब आँख खुली तो बालकनी में ही गरमा गरम चाय ला दी गयी | चाय की चुस्कियों के साथ कॉटेज के आस पास के फलदार वृक्षों पर बैठे पक्षियों के मधुर संगीत सुने | नाश्ते के बाद एक बार फिर हम नदियों के रास्ते सुंदरवन टाइगर रिज़र्व में सुधायखली वाचटावर की ओर निकल पड़े | नाव से उतरकर हम बाघ की खोज में एक जालीदार रास्ते से होते हुए वाच टावर की ओर निकल पड़े | चलते हुए मीठे पानी के तालाब की ओर नज़ारे रखें क्यूंकी यहाँ आपको पानी पीता हुआ हिरण या धूप सेकता वाटर मॉनिटर लिज़ार्ड दिख सकता है | आस पास बंदर और जंगली सुअर दिख जाते हैं | दोपहर के भोजन के लिए टाइगर कैंप की ओर प्रस्थान कर दें | बाद में हम गोटखली की ओर प्रस्थान कर गये | गोटखली पहुँचने के बाद हम हमारे वाहन में बैठकर कलकत्ता की ओर रवाना हो गये |

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