लेना चाहते हैं नेचुरल रोलर कोस्टर का आनंद तो करिए भारत की इन वर्ल्ड हेरिटे हिल रेलवे ट्रेनों में सफर

Tripoto
24th Jul 2021
Day 2

१-कांगड़ा वैली रेलवे-
यह ट्रेन हिमाचल प्रदेश के हिमालय धौलाधार पर्वत श्रेणियों के मध्य पठानकोट रेलवे स्टेशन से, जोगिंदर नगर स्टेशन के मध्य चलती है। यह एक हिल टॉय ट्रेन है। यह हिल टॉय ट्रेन हिमालय की पर्वत श्रेणियां व प्राकृतिक के खूबसूरत नजारों के दर्शन कराती है। कांगड़ा रेलवे वर्ल्ड हेरिटेज यूनेस्को के द्वारा संरक्षित है। यह ट्रेन हिमाचल प्रदेश की अनेकों खूबसूरत प्रसिद्ध हिल स्टेशनों से होकर जाती है। तथा यह दुनिया भर में प्रसिद्ध हिल स्टेशन पालमपुर के चाय बागानों व कांगड़ा जोकि माता ज्वाला देवी मंदिर शक्तिपीठ जैसे प्रसिद्ध स्टेशनों से गुजराती है। ठंड के समय में हर ओर बर्फ से ढके पहाड़ व बर्फ की चादर लपेटे हुए प्राकृतिक पेड़ पौधों की सुंदरता, पहाड़ों के बीच खूबसूरत झरने और साथ ही टॉय ट्रेन का रोमांचकारी सफर  किसी रोमांचकता से कम नहीं है। यह ट्रेन पठानकोट से जोगिंदर नगर 164 किलोमीटर की दूरी 8 से 9 घंटे पूरी करती है। यह  ट्रेन 993 ब्रिज 484 घुमावदार मोड़ों व २ टनल ,से होकर गुजरती है। आहेजु रेलवे स्टेशन (4230 फिट) इस रूट की सबसे ऊंचाई पर स्थित यह रेलवे स्टेशन है।

पालमपुर रेलवे स्टेशन

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2-कालका शिमला रेलवे-
विश्व प्रसिद्ध पर्यटक स्थल शिमला हिमाचल प्रदेश में अपनी खूबसूरत बर्फीली हरी-भरी वादियों के लिए प्रसिद्ध है। शिमला हिमालय के पर्वत श्रेणियों के मध्य  स्थित है। यहां पर देश -विदेश से हर समय पर्यटक आते रहते हैं। शिमला सड़क मार्ग के साथ ही रेलवे मार्ग से भी जुड़ा हुआ है। जो कि कालका- शिमला  रेलवे नाम से जाना जाता है। शिमला जाने के लिए रेलवे का यह खूबसूरत मार्ग भी है। यह रेल, हिल रेलवे टॉय ट्रेन है। यह रेलवे - मार्ग अत्यंत खूबसूरत रोमांचकारी व दिल को मोह लेने वाला है। यह रेलवे वर्ल्ड हेरिटेज यूनेस्को द्वारा  संरक्षित है। यह रेलवे कालका शिमला टॉय ट्रेन के नाम से विख्यात है। यह रेलवे सन 19०३ में बना था। कालका से शिमला की दूरी 96 किलोमीटर है। तथा इस मार्ग में 20 रेलवे स्टेशन , 103 सुरंगे वह 800 छोटे बड़े ब्रिजों से होते हुए यह ट्रेन शिमला पहुंचती है। ठंड के समय में यह ट्रेन हिमालय की पर्वत श्रेणियों, बर्फ से ढके पहाड़, पर्वत पेड़- पौधों व प्राकृति की खूबसूरती दृश्यों के दर्शन कराता है। हिमालय की पर्वत श्रेणियों के बीच टॉय ट्रेन का सफर किसी अमेजिंग से कम नहीं है।

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कालका शिमला रेलवे

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3-दार्जिलिंग हिमालय टॉय ट्रेन रेलवे-
दार्जिलिंग टॉय ट्रेन वर्ल्ड हेरिटेज टॉय ट्रेन के रूप में  विश्व प्रसिद्ध है। यह ट्रेन हिमालय की हसीन वादियों व हिमालय पर्वत श्रेणियों की तीसरी सबसे ऊंची चोटी कंचनजंगा पर्वत के साक्षात दर्शन कराती है। ढलानदार पहाड़ों पर आती-जाती यह ट्रेन अत्यंत रोमांच पैदा करती है। चारों ओर ऊंचे - ऊंचे पर्वत ,बर्फ से ढके हुए पेड़ पौधे ,जंगल और ऊंचे ऊंचे झरनों से गिरता पानी के मनमोहक दृश्य देखने को मिलते है।
यह ट्रेन न्यू जलपाईगुड़ी से दार्जिलिंग तक 88 किलोमीटर की दूरी तय करती है। इसका निर्माण 1879  में हुआ था। दार्जिलिंग टॉय रेलवे स्टेशन भारत की सबसे ऊंचाई पर स्थित रेलवे स्टेशन है। यह 22०० मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।  
                     
4-नीलगिरी माउंटेन टॉय ट्रेन-
तमिलनाडु में स्थित यह टॉय ट्रेन 1908 में अंग्रेजों के शासन काल में बनाया गया था। यूनेस्को वर्ल्ड हेरीटेज साइट ने नीलगिरी पर्वतीय रेलवे को विश्व धरोहर के रूप में मान्यता दी है। नीलगिरी माउंटेन 46 किलोमीटर लंबा ट्रक है। यह ट्रेन मेट्टुपालयम स्टेशन ( कोयम्बतूर) व उद्गमडलम स्टेशन तक का सफर 3:30 से 4:30 घंटे में पूरा करती है। यह भारत की एकलौती रैक रेलवे है। जिसमें रेलवे ट्रैक के साथ ही गेयर  ट्रैक का इस्तेमाल किया जाता है।  यह ट्रेन ढलान दार पहाड़ों पर चढ़ती उतरती है। इस ट्रेन में सफर करना  किसी अमेजिंग से कम नहीं।
नीलगिरी माउंटेन रेलवे 46 किलोमीटर के रूट में यह ट्रेन 16 टनल 250 ब्रिजों व 108 ढलानदार मोड़ो से होकर अपना सफर पूरा करती है।
शाहरुख खान द्वारा निर्मित फिल्म# दिल से # का गाना#चल छैया छैया # की शूटिंग इसी रेलवे ट्रेन में की गई थी।

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5-माथेरान महाराष्ट्र के मुंबई से 100 किलोमीटर दूरी पर रायगढ़ जिले में स्थित है। समुद्र से इसकी ऊंचाई  2650 फिट है। प्राकृतिक सुंदरता से पूर्व एक छोटा प्रसिद्ध हिल स्टेशन है माथेरान रेलवे ट्रेन  माथेरान की मध्य पहाड़ों पर चलती है। यह ट्रेन पहाड़ों पर चढ़ती उतरती 3 घंटे की यात्रा में खूबसूरत मनमोहक प्राकृतिक नजारों का अवलोकन कराती है। यहां हर समय पर्यटकों का तांता लगा रहता है। यहां पर पर अनेकों पर्यटक स्थल है यहां आने का मौसम मानसून का अच्छा रहता है उस समय घाटियों में हवा में तैरते हुए बादल और उड़ते हुवे कोहरा का धुंध और भीगे हुए पेड़ पौधों का नजारा जिसको देखते ही मन पुलकित हो उठता है। इसके अलावा यहां माउंट बेरी वह सारलाट लेक का नजारा देखने लायक है।
माथेरान ट्रेन 20 किलोमीटर की दूरी पहाड़ों का विशाल घने जंगल से होकर गुजरती है

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