भारत में हडिम्बा माता के सिर्फ दो मंदिरों में से एक प्राचीन हडिम्बा मंदिर तलवाड़ा जिला होशियारपुर पंज

Tripoto
27th Mar 2022
Day 1

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आज हम पंजाब के हुशियारपुर जिले के कस्बे तलवाड़ा से सात  किमी दूर पहाड़ो और गहरे जंगल में बसे प्राचीन हडिम्बा मंदिर के दर्शन करेंगे। पूरे भारत में हडिम्बा माता के दो ही मंदिर हैं , पहला हडिम्बा मंदिर मनाली हिमाचल प्रदेश में और दूसरा तलवाड़ा के पास पंजाब में प्राचीन हडिम्बा मंदिर। मैंने दोनों मंदिरों के दर्शन किए हैं। मनाली वाला हडिम्बा मंदिर बहुत मशहूर हैं लेकिन तलवाड़ा वाला मंदिर जो पंजाब की पहाड़ियों में है उसके बारे बहुत कम लोगों को पता हैं, इस प्राचीन हडिम्बा मंदिर के आज हम दर्शन भी करेंगे और ईतिहास भी जानेंगे।
दोस्तों पंजाब के हुशियारपुर जिला का काफी भाग पहाड़ी क्षेत्र हैं जो कंडी क्षेत्र भी कहलाता हैं। चंडीगढ़ से पठानकोट हाईवे के पूर्व वाले पंजाब के होशियारपुर जिले के भाग को कंडी क्षेत्र कहते है जो निचला पहाड़ी क्षेत्र है जो हिमाचल प्रदेश के साथ लगा हुआ है। होशियारपुर जिला के इस कंडी क्षेत्र की पहाड़ियों में महाभारत काल से पांडवों के साथ बहुत सारे सथल जुड़े हुए हैं कयोंकि ऐसा कहा जाता हैं , पांडवों ने अपने बनवास का आखिरी साल जो अज्ञातवास का था राजा विराट के पास भेष बदल कर गुजारा जो होशियारपुर जिले के कंडी क्षेत्र में ही आता है। राजा विराट की राजधानी होशियारपुर जिला का शहर दसुआ है जो जालंधर-पठानकोट हाईवे पर एक मशहूर कस्बा हैं जहां पांडवों ने भेष बदल कर राजा विराट के पास नौकरी की, जहां आजकल दसुआ शहर में पांडवों की याद में पांडव सरोवर बना हुआ है। ऐसी बहुत सारी निम्नलिखित जगहें है होशियारपुर और पठानकोट जिले में जो पांडवों के साथ संबंधित हैं जैसे
1. पांडव सरोवर दसुआ
2. गगन जी का टीला
3. कामाक्षी देवी ( कमाही देवी )
4. प्राचीन हडिम्बा मंदिर तलवाड़ा
5. पंडन कुआं
6. मुकतेशवर महादेव मंदिर पठानकोट आदि
आज प्राचीन हडिम्बा मंदिर के बारे में लिखूंगा। हो सकता है इस ईलाके में पांडवों से संबंधित और भी जगहें हो जिनके बारे में मुझे जानकारी न हो लेकिन धीरे धीरे इन जगहों की यात्रा जरूर करूंगा और इनके बारे में लिखूंगा।
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यह हडिम्बा माता का मंदिर बहुत प्राचीन हैं महाभारत काल से इसका संबंध हैं, माता हडिम्बा पांच पांडवों में से एक महाबली भीम की पत्नी और घटोत्कच की माता थी। ऐसा कहा जाता हैं जब पांडव अज्ञातवास में होशियारपुर के कंडी क्षेत्र में आए तो यहां नदियों का बहाव बहुत तीव्र था खासकर बयास नदी का जिसे पार करना पांडवों के लिए मुश्किल हो रहा था, तब पांडवों ने माता हडिम्बा से प्राथना की जिससे माता हडिम्बा ने पांडवों की समस्या का समाधान किया। जिस जगह पर आज प्राचीन हडिम्बा मंदिर बना हुआ है वहां पर माता हडिम्बा और पांडवों ने विश्राम किया था। यह मंदिर आज भी गहरे जंगल और ऊंची पहाड़ियों में बना हुआ है। मंदिर के आंगन में आज भी बहुत प्राचीन वृक्ष हैं जो महाभारत काल का हैं और तकरीबन पांच हजार साल पुराना बताया जाता हैं।इसी वृक्ष के नीचे घने जंगल में पांडवों और माता हडिम्बा ने विश्राम किया था। आज यहां छोटा सा लेकिन बहुत खूबसूरत मंदिर बना हुआ है। इस मंदिर में हर साल जून के महीने में एक बहुत बड़ा मेला भी लगता है। इस मंदिर की लोकेशन बहुत सुंदर है, यहां मोबाइल का सिग्नल नहीं आता , घने जंगलों में, ऊंचे पहाड़ों में तलवाड़ा से 7 किमी और कमाही देवी से 8 किमी दूर है माता हडिम्बा का प्राचीन मंदिर। यहां की पहाड़ियों को हवा धार भी कहा जाता है कयोंकि यहां हर समय ठंडी ठंडी हवा चलती रहती हैं, मंदिर की ओर जाने वाले रास्ते पूरे पहाड़ी हैं और एक दो गांव भी पास में है जो बिल्कुल हिमाचल के गांवों जैसे दिखते है कयोंकि पहाड़ों पर बने हुए गांव हैं। होशियारपुर जिले के  कंडी क्षेत्र के ईतिहासिक सथलों के बारे में और जानकारी और खोज की जरुरत है ताकि पांडवों से जुड़े हुए इस क्षेत्र के बारे में और सथलों की पहचान की जाए और उन्हें टूरिस्ट मैप पर लाया जाए ताकि इस ईतिहासिक क्षेत्र का और विकास हो सके। आप भी कभी होशियारपुर आए तो कोशिश कीजिए माता हडिम्बा मंदिर के दर्शन जरूर किए जाए। मंदिर में हडिम्बा माता पिंडी रूप में बिराजमान हैं। मंदिर का वातावरण और आसपास का क्षेत्र बहुत रमणीक और शांत हैं।

प्राचीन हडिम्बा माता मंदिर तलवाड़ा के पास पंजाब में

Photo of Talwara by Dr. Yadwinder Singh

माता के पिंडी रुप में दर्शन

Photo of Talwara by Dr. Yadwinder Singh

महाभारत काल से संबंधित वृक्ष जिसके नीचे पांडवों ने कभी विश्राम किया था।

Photo of Talwara by Dr. Yadwinder Singh

हवाघर की पहाड़ियां जहां सारा दिन ठंडी हवा चलते रहती हैं।

Photo of Talwara by Dr. Yadwinder Singh

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