विद्याशंकर मंदिर:एक ऐसा मंदिर जहां सूर्य की किरणे वर्ष के महीने का देती है संकेत

Tripoto
12th Oct 2023
Photo of विद्याशंकर मंदिर:एक ऐसा मंदिर जहां सूर्य की किरणे वर्ष के महीने का देती है संकेत by Priya Yadav


          हमारे भारत देश में अनेकों ऐसे मंदिर है जो कई प्रकार के रहस्यों से भरे पड़े है।इन रहस्यों को न आज तक कोई सुलझा पाया है और न ही इसके पीछे की वजह कोई जान पाया है।आश्चर्य की बात यह है की इन रहस्यों और चमत्कारों का संबंध उस समय से है जब ना तो हमारे पास कोई टेक्नोलॉजी थी और न ही कोई सुविधाएं।फिर भी इन चमत्कारों को हमारे पूर्वजों ने ऐसी सटीक गणरा के साथ बनाया है कि आज तक इसका राज कोई नहीं जान पाया।ऐसे ही रहस्यों से भरा हुआ एक मंदिर हमारे दक्षिण भारत के कर्नाटक राज्य के चिकमगलूर जिले के श्रृंगेरी में स्थित है।इस मंदिर का नाम विद्याशंकर मंदिर है।आज हम आपको इस रहस्यमई मंदिर की वास्तुकला और इतिहास से परिचित कराएंगे।

Photo of विद्याशंकर मंदिर:एक ऐसा मंदिर जहां सूर्य की किरणे वर्ष के महीने का देती है संकेत by Priya Yadav


         विद्याशंकर मंदिर कर्नाटक के चिकमंगलूर जिले के श्रृंगेरी नामक स्थान पर स्थित है।यह मंदिर अपनी अद्भुत वास्तुकला के लिए जाना जाता है।इस मंदिर के मठ को स्वयं शंकराचार्य ने स्थापित किया था।यह उनके स्थापित अद्वैत मठों में से एक है।श्री आदि शंकराचार्य के शिष्य सुरेश्वराचार्य इस मठ के पहले प्रमुख थे।यह मंदिर अपने आप में किसी चमत्कार से कम नहीं है।इसके अलावा यह बहुत से शिलालेख भी देखने को मिलेंगे जो द्रविड़, चालुक्य, दक्षिण भारतीय और विजयनगर स्थापत्य शैली को दर्शाते है।इस तीर्थ स्थल का निर्माण 1338 ई. में ‘विद्यारान्य‘ नामक एक ऋषि ने कराया था, जो विजयनगर साम्राज्य के संस्थापकों के संरक्षक थे और 14वीं सदी में यहां रहते थे।

मंदिर के बारह स्तम्भ

जो सबसे आश्चर्य करने वाली बात है वो है इस मंदिर के बारह स्तंभ।इस मंदिर में स्थापित बारह स्तंभ 12 राशि चक्रों के प्रतीक हैं।इन स्तंभों की नक्काशी और रूपरेखा खगोलीय  अवधारणा को ध्यान में रखकर की गई है।ये सभी 12 स्तंभ एक आकार के नही बल्कि अलग अलग आकार के है।सबसे ज्यादा आश्चर्य की बात यह है कि जब हर सुबह सूर्य की किरणें निकलती है तो सिर्फ उसी माह की राशि वाले स्तंभ पर पड़ती है जो माह उस समय चल रहा होता है और माह के बदलते है सूर्य की किरणें अगले माह की राशि वाले स्तंभ पर पड़ती है।इनकी इतनी सटीक गरणा उस समय के दौरान कैसे की गई इसका पता कोई नही जानता।

Photo of Sri Vidyashankara Temple by Priya Yadav


मंदिर की वास्तुकला

यह मंदिर अपनी अद्भुत वास्तुकला के लिए ही जानी जाती है।मंदिर एक ऊंची स्थान पर अर्धगोलाकार का बना है जिस पर बहुत ही खूबसूरती से नक्काशी की गई है।मंदिर की शिलाओं पर उस समय की सभ्यता को खूबसूरती के साथ उकेरा गया है।मंदिर की छत पर सुंदर आकृतियां बनाई गई है,जो बहुत ही आकर्षक लगता है।मंदिर देखने में किसी रथ के समान लगता है।मंदिर में प्रवेश और निकासी के लिए छः दरवाजे लगे हुए हैं।मंदिर के चारो ओर 12 स्तंभ है जो वर्ष के प्रत्येक माह के राशियों का प्रतीक है।

मंदिर का गर्भगृह

मंदिर के गर्भ गृह में एक लिंग है जिसे विद्याशंकर लिंग के रूप में पूजा जाता है।इसके अलावा मंदिर में भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश्वर की प्रतिमा स्थापित है।विद्याशंकर लिंग के बाई ओर भगवान गणेश की मूर्ति और ऊपर की ओर मां दुर्गा की मूर्ति भी स्थापित है।मंदिर की एक और अद्भुत बात यह है कि जब दोनों विषुवों (जब दिन-रात बराबर होते हैं) बराबर होते है इस  दिन सूर्योदय की किरणें सीधे विद्याशंकर लिंग पर पड़ते हैं।जबकि अन्य दिन सूर्य की किरणें गर्भ गृह में प्रवेश भी नहीं करती है।

Photo of विद्याशंकर मंदिर:एक ऐसा मंदिर जहां सूर्य की किरणे वर्ष के महीने का देती है संकेत by Priya Yadav


कैसे पहुँचें

हवाई जहाज द्वारा

श्रृंगेरी जाने के लिए अगर आप हवाई मार्ग का चुनाव करते है तो उसका सबसे निकटम हवाई अड्डा मैंगलोर हवाई अड्डा है।जो श्रृंगेरी से लगभग 100 किमी की दूरी पर स्थित है।यह पहुंच कर आप टैक्सी या बस से विद्याशंकर मंदिर पहुंच सकते है।

रेल द्वारा

श्रृंगेरी का सबसे निकटम रेलवे स्टेशन उडुपी रेलवे स्टेशन है जो वहां से लगभग 80 किमी की दूरी पर स्थित है।

सड़क द्वारा

श्रृंगेरी कर्नाटक के अधिकांश निकटवर्ती स्थानों से बस मार्गों के माध्यम से जुड़ा हुआ है।

Photo of विद्याशंकर मंदिर:एक ऐसा मंदिर जहां सूर्य की किरणे वर्ष के महीने का देती है संकेत by Priya Yadav

कैसा लगा आपको यह आर्टिकल हमे कमेंट में जरुर बताए।

क्या आपने हाल में कोई की यात्रा की है? अपने अनुभव को शेयर करने के लिए यहाँ क्लिक करें

बांग्ला और गुजराती में सफ़रनामे पढ़ने और साझा करने के लिए Tripoto বাংলা और Tripoto ગુજરાતી फॉलो करें।

More By This Author

Further Reads