A Peaceful place -Lansdowne

Tripoto
27th Jun 2022
Day 1

15 जून से उत्तर भारत में मानसून आने वाला था और मैं हरियाणा प्रदेश के फारीदाबाद जिले में गर्मी में झुलस रहा था। मेरी पत्नी का बचपन पहाड़ों में बीता है और इनकी स्कूलिंग जम्मू से और दार्जिलिंग से हुई है, तो उनका मन हमेशा पहाड़ों में लगा रहता है। इनकी मास्टर्स हिमालयन गढ़वाल यूनिवर्सिटी पौड़ी गढ़वाल से हुई है। अब गर्मी से हालत खराब थी, ऊपर से यह हरियाणा वालों का दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम, इसने भी हमारे जीवन में आग लगा रखी थी। मेरी पत्नी ने कहा कि चलो मेरी डिग्री ले आते हैं, पिछले साल मेरी पत्नी की मास्टर्स पूरी हो गई थी। हम लोग बस एक मौका ढूंढ रहे थे, इतनी दूर जाने के लिए और वह मौका यह गर्मियां थी। हम लोग सोमवार को सुबह 10:00 बजे बैग पैक कर के पौड़ी गढ़वाल के लिए बाय रोड कार से निकल गए, बस मन में एक ही भय था, कि हम बारिश में फंस न जाए क्योंकि उस क्षेत्र में बारिश शुरु हो चुकी थी, हर दूसरे तीसरे दिन यहाँ बारिश हो रही थी। पौड़ी गढ़वाल क्षेत्र के रास्ते अभी इतने अच्छे नहीं हैं, वहां पर ज्यादातर लैंडस्लाइड हो जाती है,  उसके बाद रास्ते बंद हो जाते हैं। अगले दो-तीन दिनों के लिए अगर बारिश रुक जाती है, तो वहां पर राहत कार्य शुरू होता है और सड़कें साफ की जाती हैं। हम लोग मन में बस यही प्रार्थना करते हुए जा रहे थे कि मौसम अच्छा रहे हल्की बारिश हो बस इतनी बारिश ना हो कि लैंडसाइड हो जाए और हम ही फस जाए, आने वाले तीन चार दिन या 5 दिनों के लिए। यह बारिश में फंसने का भय एक तरफ था मगर मन में पहाड़ पर जाना वहां के मौसम का लुत्फ उठाना यह गुदगुदी अलग ही तरंग उठा रही थी।
हम लोगों ने मेरठ में रास्ते में रुक कर थोड़ा स्नेक्स खाया और फिर आगे बढ़ चले। बिजनौर कोटद्वार के रास्ते में आम के बगीचे और जामुन के पेड़ लगे हैं, तो आम और जामुन आसानी से मिल जाते हैं। हम लोग इन मौसमी फलों का आनंद लेते हुए आगे बढ़ते जा रहे थे। जैसे ही हमने कोटद्वार पार किया हल्की हल्की बारिश शुरू हो गई, हम धीरे धीरे घाटी का आनंद उठाते हुए, रास्तों का मजा लेते हुए आगे बढ़ते जा रहे थे, पहाड़ों पर जब बारिश होती है तो प्रकृति का रंग बहुत चटक हो जाता है, हर तरफ हरियाली, साफ सुंदर धुले पहाड़, चट्टाने, धुले हुए रास्ते, कहीं कहीं पर बहते हुए बरसाती झरने, एक अलग ही सुख आंखों को देते हैं।

लैंसडाउन की एक सुहानी शाम

Photo of Lansdowne by The Vacationist

धुले हुए हरियाली से भरे रास्ते

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शाम को करीब 7:00 बजे तक हम लोग रास्तों का नजारा करते हुए, सीधा लैंसडौन के टॉप पर  टिप ऐंड टॉप नाम के एक होटल एंड रिसॉर्ट पर पहुंच गए। यहां से पूरा लैंसडौन और नीचे वैली नजर आती है, यहां से इस नजारे का लुत्फ उठाने  के लिए ₹20 का टिकट खरीदना पड़ता है , जो टिप टॉप होटल के बाहर एक काउंटर से मिलता है,  लोग होटल में नहीं रुके हैं मात्र उनके लिए यह शुल्क देय होता है। इस होटल के अंदर बहुत ही व्यवस्थित कमरे हैं, जो अंग्रेजों के समय से बने हुए हैं, होटल मैनेजमेंट और अधिक कमरों का निर्माण कर रहा है। यहां आस-पास प्रकृति ने दिल खोलकर सुंदरता बिखेरी हुई है,  बगीचे, लॉन्स और आसपास छोटे-छोटे हट जो कैंपिंग के लिए अलग से बनाए गए हैं, यहां के रेस्टोरेंट्स – बार खाना बहुत ही स्वादिष्ट है, यहां पर क्षेत्रीय खाने का स्वाद लाजवाब है।

शाम को करीब 7:00 बजे तक हम लोग रास्तों का नजारा करते हुए, सीधा लैंसडौन के टॉप पर टिप ऐंड टॉप नाम के एक होटल एंड रिसॉर्ट पर पहुंच गए। यहां से पूरा लैंसडौन और नीचे वैली नजर आती है, यहां से इस नजारे का लुत्फ उठाने के लिए ₹20 का टिकट खरीदना पड़ता है , जो टिप टॉप होटल के बाहर एक काउंटर से मिलता है। जो लोग होटल में नहीं रुके हैं मात्र उनके लिए ही यह शुल्क देय होता है। इस होटल के अंदर बहुत ही व्यवस्थित कमरे हैं, जो अंग्रेजों के समय से बने हुए हैं। होटल मैनेजमेंट और अधिक कमरों का निर्माण कर रहा है। यहां आस-पास प्रकृति ने दिल खोलकर सुंदरता बिखेरी हुई है, बगीचे, लॉन्स और आसपास छोटे-छोटे हट, जो कैंपिंग के लिए अलग से बनाए गए हैं, यहां के रेस्टोरेंट्स – बार का खाना बहुत ही स्वादिष्ट है, यहां पर क्षेत्रीय खाने का स्वाद लाजवाब है। यहां पर हमने रात का खाना खाया, टेबल पर म्यूजिक बजा कर, नाच कर खूब आनंद उठाया। धीरे-धीरे यहां ठंड बढ़ती जा रही थी तो 11:30 बजे तक हम लोग सोने के लिए चले गए।

टिप ऐंड टॉप – होटल एंड रिसॉर्ट

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एक यादगार सुहानी शाम

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Day 2

सुबह 5:00 बजे अपने आप नींद खुल गई, पहाड़ों पर सवेरा जल्दी हो जाता है । बाहर खिड़की के पास पक्षी चह –चहा रहे थे, खिड़की को खोलते ही बाहर की ठंडक का एहसास हुआ शायद रात को ज्यादा बारिश हुई थी और हर तरफ एक धुंध छाई हुई थी,  बड़ा सुखद अनुभव हो रहा था, कहां हम 1 दिन पहले गर्मी में ,  पसीने से तर, जहां पर एसी भी काम करना बंद कर चुके थे,  उस तंदूर जैसी जगह पर बस रोस्ट हुए जा रहे थे और आज ऐसा लग रहा है, जैसे रेफ्रिजरेटर के आंगन में आ गए हों।

सूरज और धुंध का द्वंद

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इससे अदभुत कुछ नहीं हो सकता

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कमरे से बाहर ठंडक –राज

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सूरज का इस धुंध से द्वंद

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अब हमें यहां से आगे हिमालयन गढ़वाल यूनिवर्सिटी के लिए निकलना था, जो धैद गांव में, पोखरा ब्लॉक, डिस्ट्रिक्ट पौड़ी गढ़वाल में ही आता है।वहां तक का रास्ता सतपुली से होकर निकलता है और सतपुली में मां गंगा का सानिध्य भी प्राप्त होता है। हम टिप एंड टॉप रिजॉर्ट और लैंसडौन को अलविदा कहकर अपने रास्ते पर निकल गए। हम आगे बढ़े तो हमारा स्वागत फिर बारिश की बूंदों ने किया,  हल्की हल्की बारिश की बूंदे और  रास्ते पर छाई हुई धुंध,  आप विश्वास करिए हम लोगों को सुबह 9:00 बजे गाड़ी की पार्किंग लाइट और फोग लैंप्स को ऑन करके ड्राइव करना पड़ रहा था। धीरे धीरे बारिश बढ़ती जा रही थी, परंतु जैसे-जैसे हम लैंसडाउन से नीचे उतरते गए वह धुंध छठ गई। मात्र अब बारिश से टकराना ही बचा था, सावधानी से हम आगे बढ़ रहे थे और पूरे रास्ते पर पानी बह रहा था,  बारिश तेज थी तो रास्तों पर ऐसा लग रहा था, जैसे कोई बरसाती नाला बहना शुरू हो गया हो। धीरे-धीरे संभल कर हम आगे बढ़ते गए, करीब 20 किलोमीटर चलने के बाद बारिश बंद हो गई। लैंसडौन से हिमालयन गढ़वाल यूनिवर्सिटी की दूरी 80 किलोमीटर के करीब पड़ती है। यह सफर तय करने में हमें 4 घंटे का समय लगा। हम लोग करीब 2:00 बजे यूनिवर्सिटी पहुंच चुके थे।

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लैंसडाउन की प्राकृतिक सुंदरता ने मन मोह लिया था, अब जब तक वहां पर हम लोग एक-दो दिन ना रुकेंगे मन बेचैन रहेगा। ऐसा सोच कर हमने तय किया कि हम 2 दिन लैंसडौन में ही रुकेंगे। यूनिवर्सिटी में डिग्री अप्लाई करके हम लोग वापस लैंसडौन के लिए निकलने की तैयारी कर रहे थे, कि इतने में मेरी पत्नी ने वेदर फोरकास्ट चेक किया तो पता चला कि यहां लगातार 5 दिनों तक बारिश होती रहेगी, फिर हम लोगों ने निराश होकर यह तय किया कि हम यहां से ऋषिकेश के लिए निकल जाएंगे। वहां से हम वापस सतपुली के लिए निकले, सतपुली होकर ऋषिकेश जाने के लिए अच्छा मार्ग है। इस मार्ग में मां गंगा का सानिध्य भी मिलता रहता है, रास्ते के साथ-साथ माता गंगा अपने पूरे बहाव पर बह रही थी।

सतपुली –देवप्रयाग मार्ग

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माता गंगा भी हमराही बन जाती हैं इस मार्ग पर

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सतपुली – देवप्रयाग –ऋषिकेश मार्ग

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रास्ते में चलते हुए हमें उत्तराखंड का एक दुर्लभ जीव मॉनिटर लिजर्ड भी दिखा जिसे यहां की आम भाषा में गोह, विष खोपड़ा आदि भी कहा जाता है, बहुत सारी गलत भ्रांतियों के कारण लोग इनको मार देते हैं, जबकि यह इंसानों के लिए इतने नुकसानदेह नहीं होते किंतु जानकारी ना होने के कारण इनका शिकार कर लिया जाता है।

Walking like a King

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Fearless

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हम उबड़ खाबड़ टूटे-फूटे रास्ते से होते हुए देवप्रयाग पहुंचे। देवप्रयाग के बाद रास्ता बहुत अच्छा बन गया है क्योंकि यहां से गंगोत्री यमुनोत्री बद्रीनाथ केदारनाथ के लिए हाईवे बनाया गया है।यह बहुत ही सुंदर और अच्छा मार्ग है जो चारों धाम को जोड़ता है।
देवप्रयाग से श्रीनगर की दूरी मात्र 30 किलोमीटर है, श्रीनगर भी अपने आप में बहुत ही सुंदर जगह है, जो अलकनंदा नदी के किनारे बसा हुआ है। देवप्रयाग में दो पवित्र नदियों का संगम होता है, एक तरफ से भागीरथी नदी और दूसरी तरफ से अलकनंदा नदी यहां पर आकर मिलती हैं। जिस जगह पर इन दोनों नदियों का संगम होता है, उस जगह को ही देवप्रयाग नाम से बुलाया जाता है। यहां से देवनदी मां गंगा का उद्भव होता है, इससे पहले वह भागीरथी के नाम से जानी जाती हैं। इस संगम के विषय में बहुत सारी अलग-अलग कहानियां है, जो भगवान श्री राम, पांडवों एवं अनेकों ऋषियों से जुड़ी हुई हैं।

संगम देवप्रयाग स्थल

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संगम घाट स्नानादि के लिए

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संगम देवप्रयाग बाई तरफ़ मां भागीरथी एवम दाई तरफ़ मां अलकनंदा

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देवप्रयाग

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देवप्रयाग के संगम में हम स्नान करके यहां स्थित दो  गुफाओं में भगवान शंकर शिवलिंग रूप में विराजमान हैं, उन को जल अर्पण करके हम बाहर आ गए।अभी यहां से आगे हमें 80 किलोमीटर का सफर तय करके ऋषिकेश पहुंचना था किंतु नया और अच्छा रास्ता बने होने के कारण हमें ऋषिकेश पहुंचने में बहुत अधिक समय नहीं लगा हम लोग शाम को 8:00 बजे ऋषिकेश पहुंच चुके थे।
यहां आकर हमने अपने एक पुराने मित्र के होटल में कमरा बुक कर लिया। पूरे दिन गाड़ी चलाने से बहुत अधिक थकान हो चुकी थी तो खाना खाते ही नींद आ गई।

Day 3

ऋषिकेश में हमने सुबह गंगा स्नान किया और फरीदाबाद के लिए निकल गए, किंतु हम मुसाफिर लोगों की किस्मत में ठहराव नहीं लिखा होता , ऋषिकेश से फरीदाबाद का सफर जो कुल 5 घंटे का है वह तय करने में हमें कितना समय लग गया अगली बार बताऊंगा। बस इतना बता देता हूं कि हम फरीदाबाद 2 दिन बाद पहुंचे थे।

अगले सफर की कहानी जल्द ही मेरी जुबानी
आपका अपना "The vacationist"