भारत के कोने-कोने में बसता है अनेकता में एकता का मूलमंत्र! जानिए कैसे

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भारत विविधताओं वाला देश है। यहाँ हर गली-मोहल्ले में आपको कुछ ना कुछ नया और अलग देखने के लिए मिलेगा। फिर चाहे वो लोगों की भाषा हो या उनके रहन-सहन का तरीका। हर चीज भारतीय संस्कृति के एक नए पहलू से रूबरू होने का मौका देती है। भारत में अनेकता में एकता का संदेश दिया जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि यहाँ अलग-अलग धर्मों के लोग एक साथ परिवार की तरह रहते हैं। लोगों के धर्म और पूजापाठ करने के तरीके जरूर हो सकते हैं लेकिन भारतवासी होने का गर्व और भाईचारे की भावना हर किसी के अंदर समान होती है। यदि आप जानना चाहते हैं कि भारत में अनेकता में एकता के संदेश कैसे दिया जाता है तो आपकी कुछ मदद हम कर देते हैं।

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1. स्वर्ण मंदिर, अमृतसर

हरमंदिर साहिब के भी नाम से मशहूर अमृतसर का स्वर्ण मंदिर सिख समुदाय के लोगों के लिए बेहद खास जगह है। ये मंदिर मात्र पूजा अर्चना करने के लिए ही खास नहीं है बल्कि ये पूरे देश में भाईचारे और एकता का संदेश भी देता है। स्वर्ण मंदिर की वास्तुकला में हिन्दू और मुस्लिम आर्किटेक्चर का बेहतरीन इस्तेमाल दिखाई देता है। गुरुद्वारे ने नीचे हिस्से में मार्बल का काम किया गया है जिसमें फूलों से प्रेरणा ली गई है। ये नक्काशी हूबहू आगरा के ताजमहल में भी देखने मिलती है। गुरुद्वारे की दूसरी मंजिल पर सोने की चादरों का काम किया गया है और ऊपर लगे गुंबद में भी लगभग 700 किलो सोना इस्तेमाल किया गया है। गुरुद्वारा चारों ओर से अमृत सरोवर से घिरा हुआ है। हर दिन लगभग 1 लाख लोग इस गुरुद्वारे में शीश नवाते हैं। स्वर्ण मंदिर का लंगर और अमृत सरोवर में आस्था की डुबकी लगाने के लिए किसी को कोई मनाही नहीं है।

2. जामा मस्जिद, दिल्ली

जामा मस्जिद भारत का सबसे विशाल मस्जिद है। मस्जिद के आगे बने आंगन में लगभग 25,000 लोगों को एक साथ किया का सकता है। मुगल शासक शाह जहाँ ने 1644 में जमा मस्जिद का निर्माण करवाना शुरू किया था। 1658 में बनकर तैयार हुआ ये मस्जिद शाहजहाँ का आखिरी लेकिन बेहद लाजवाब प्रोजेक्ट था। पुरानी दिल्ली में स्थित ये मस्जिद मार्बल और सैंडस्टोन से बना हुआ है। मस्जिद मे दाखिल होने के लिए तीन दरवाजे हैं। मस्जिद के हर कोने पर एक 40 मीटर ऊँची मीनार है। अच्छी बात ये है कि मस्जिद में आए लोगों को इन मीनारों पर जाने की इजाजत दी जाती है। मीनार से दिल्ली का बहुत ही खूबसूरत नजारा दिखाई देता है जो आपको बहुत अच्छा लगेगा।

3. बेसिलिका ऑफ आवर लेडी ऑफ गुड हैल्थ, वेलंकन्नी

तमिलनाडु का छोटा-सा जिला वेलंकन्नी भारत के सबसे महत्वपूर्ण गिरजाघरों में शुमार बेसिलिका ऑफ आवर लेडी ऑफ गुड हैल्थ का घर है। इस चर्च को देखने केवल भारत ही नहीं बल्कि विश्वभर से लोग आते हैं। इस चर्च में हर साल 2 मिलियन से भी अधिक लोग प्रार्थना करने आते हैं। अगस्त-सितंबर के महीने में चर्च में विशाल प्रार्थना सभा का आयोजन किया जाता है। साल के इस समय ये चिर्च लोगों की भीड़ से गुलजार हो उठता है। ये प्रार्थना सभी कुल 7 भाषाओं में आयोजित की जाती है। जिसकी वजह से विश्वभर के लोग यहाँ आते हैं। चर्च का आर्किटेक्चर भी देखने लायक है। सफेद रंग में सजी इस बेहतरीन इमारत को आपको भी जरूर देखना चाहिए।

4. दिलवारा जैन मंदिर, माउंट आबू

मशहूर हिल स्टेशन माउंट अबू से लगभग 2 किलोमीटर आगे स्थित दिलवारा जैन मंदिर भारत की अनेकता में एकता का सबसे सटीक उदाहरण हैं। हर साल इस मंदिर को देखने के लिए श्रद्धालुओं और पर्यटकों की बराबर भीड़ रहती है। ये मंदिर जैन धर्म के तीर्थंकरों को समर्पित है जिसकी वजह से ये जैन धर्म मानने वाले लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण जगह है। लगभग 400 से 1,000 साल पहले बने इन मंदिरों की वास्तुकला सचमुच देखने लायक है। मार्बल का बेहतरीन काम और पत्थरों पर की गई विस्तृत नक्काशी इन मंदिरों को देखने लायक बनाती है। दिलवारा मंदिर वो जगह है जिनको देखना भारतीय और विदेशी पर्यटक दोनों की सूची में शामिल होता है।

5. मीनाक्षी अम्मन मंदिर, मदुरई

वैगई नदी के किनारे बना मीनाक्षी टेंपल हिन्दू देवी पार्वती को समर्पित है। प्राचीन समय से चले आ रहे इस मंदिर का पुनः निर्माण 16वीं शताब्दी में किया गया है जिसकी वजह से ये आज दिखाई देने वाली स्थिति में खड़ा हुआ है। 45 एकड़ जमीन पर बने इस मंदिर की जितनी तारीफ की जाए कम होगी। अकेले इस मंदिर में 14 टॉवर हैं। मंदिर के ऊपरी हिस्से में हजारों की संख्या में देवी-देवताओं की रंग-बिरंगी प्रतिमाएँ बनाई गई हैं। मंदिर के अंदर तमाम हॉल होने के साथ-साथ एक कुंड भी है। इस मंदिर में हर रोज लगभग 15,000 श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है। खास त्योहारों पर ये आंकड़ा 1 मिलियन भी पार कर जाता है।

6. लोटस टेंपल, नई दिल्ली

नई दिल्ली में स्थित इस बहाई मंदिर की जितनी तारीफ की जाए कम होगी। लोटस टेंपल का आर्किटेक्चर ऑस्ट्रेलिया के सिडनी ओपेरा हाउस से मेल खाता है। लोटस टेंपल देखने में बिल्कुल कमल के फूल जैसा है। जिसकी 9 पंखुड़ियाँ विश्व में माने जाने वाले 9 महत्वपूर्ण धर्मों की ओर इशारा करती हैं। ये 9 पंखुड़ियाँ कुल 3 परतों में बनाई गईं हैं। जो मानवता, शांति और एकता का मूलमंत्र सिखाती हैं। लोटस टेंपल के ठीक सामने तालाब बनाए गए हैं। तालाब में पड़ती मंदिर की परछाईं देखकर लगता है मानो कमल का फूल पानी में तैर रहा है। लोटस टेंपल खास इसलिए भी है क्योंकि यहाँ किसी देवी-देवता की कोई मूर्ति नहीं है। मंदिर में ध्यान लगाने के लिए बड़े-बड़े हॉल बनाए गए हैं जिसमें एक बार में 2500 लोग बैठ सकते हैं। लोटस टेंपल को देखने हर साल 4 मिलियन के करीब पर्यटक आते हैं। आपकी अगली दिल्ली यात्रा में लोटस टेंपल देखना जरूर शामिल होना चाहिए।

7. महाबोधि मंदिर, बोधगया

बोधगया वो जगह है जहाँ भगवान बुद्ध ने सिद्धार्थ से बुद्ध होने तक का सफर तय किया था। बोधगया के बोधी पेड़ के नीचे उन्हें परम ज्ञान प्राप्त हुआ था। महाबोधि मंदिर गया से 12 किमी. की दूरी पर है और बौद्ध धर्म मानने वाले लोगों के लिए सबसे महत्वपूर्ण जगह है। माना जाता है यहाँ लगा विशाल वृक्ष उसी छोटे पेड़ का रूप है जिसके नीचे बैठकर सिद्धार्थ को प्रबोधन प्राप्त हुआ था। इस मंदिर को देखने हर रोज लाखों लोगों की भीड़ इकट्ठा होती है। जिसमें केवल श्रद्धालु ही नहीं बल्कि पर्यटक और इतिहास में रुचि रखने वाले लोग भी शामिल होते हैं। बोधगया में बौद्ध धर्म से जुड़ी तमाम जगहें देखी जा सकती हैं। जिनमें मंदिर और मठ दोनों शामिल हैं।

8. ईरान शाह, उदवाड़ा

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श्रेय: ईरान शाह

उदवाड़ा को पारसियों की काशी कहा जाता है। उदवाड़ा पारसी समुदाय के लोगों का सर्वाधिक पवित्र स्थल है। ईरान शाह उद्वादा का सबसे पुराना और सबसे ज्यादा माना जाने वाला अग्नि को समर्पित मंदिर है। जो पारसी समुदाय के लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। माना जाता है उड़वादा अताश बेहराम में जलने वाली अग्नि पिछले 100 सालों से भी ज्यादा समय से चली आ रही है। उदवादा के लोगों की कमाई का बड़ा हिस्सा इस मंदिर पर ही निर्भर करता है। इस मंदिर को देखने के लिए भी दुनिया के कोने-कोने से पर्यटक आते हैं। जो इसकी एक झलक पाने के लिए आतुर होते हैं। उद्वदा में मंदिर ही नहीं यहाँ के घरों की बनावट भी देखने लायक है। यहाँ का यूनिक आर्किटेक्चर इस पूरे कस्बे को देखने लायक बना देता है।

9. परदेसी अराधनालय, कोच्चि

परदेसी अराधनालय कोच्चि में स्थित यहूदी धर्म के लोगों के लिए प्रार्थना करने की जगह है। वैसे तो कोच्चि में ऐसे 7 उपासनागृह हैं लेकिन उन सभी में केवल परदेसी अराधनालय आज भी कार्यात्मक है। 1568 में बने इस अराधनालय की खास बात है कि ये भारत का सबसे पुराना उपासनागृह है। अराधनालय के अंदर की सजावट बेहद खूबसूरत तरीके से की गई है। जिसमें चाइनीज, यूरोपीय और मध्य पूर्व देशों की संस्कृति की साफ झलक दिखाई देती है। अराधनालय के अंदर शानदार झूमर लगाए गए हैं जिन्हें बेल्जियम से मंगवाया गया है। फर्श पर टाइल्स लगे हुए हैं जिन्हें हाथ से पेंट किया गया है। आपकी अगली कोच्चि यात्रा में इस जगह को देखना जरूर शामिल होना चाहिए।

10. ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती दरगाह शरीफ, अजमेर

अरावली पर्वतमाला की गोद में स्थित अजमेर सभी धर्म के लोगों के लिए महत्वपूर्ण जगह है। अजमेर में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती दरगाह शरीफ है जिसको देखने देश के सभी कोनों से लोग आते हैं। मुगल शासक हुमायूँ द्वारा बनवाया गई ये दरगाह पूरे देश में बेहद पवित्र मानी जाती है। अच्छी बात ये है कि दरगाह में जाने के लिए किसी भी व्यक्ति को कोई मनाही नहीं है। सभी धर्म के लोग बिना किसी रोक के आराम से यहाँ माथा टेकने आ सकते हैं।

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