111 दिन, 11 देश, 1 भारतीय परिवार और बेंगलुरु से पेरिस तक की रोमांचक रोड ट्रिप

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रोड ट्रिप पर ख्याल जितना रोमांचक होता है उसको करना उतना ही मुश्किल। ये एक ऐसा ख्याल है जिसे करने के लिए बहुत अच्छी प्लानिंग और जुनून चाहिए होता है और अगर आप अपने परिवार के साथ रोड ट्रिप पर जाना चाहते हैं तो आपको इस परिवार की कहानी जरूर जान लेनी चाहिए।

1 कार, 1 परिवार, 11 देश, 22780 किलोमीटर और रोड ट्रिप के बेहतरीन 111 दिन। बेंगलुरु के बैद परिवार के लिए एडवेंचर की कुछ ऐसी परिभाषा है। ये वो परिवार है जिसने अपना बैग पैक किया और अपनी फिएट लिनिया में बेंगलुरु से पेरिस तक में आधी दुनिया का सफर तय कर डाला।

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इन्होंने अपनी इस यात्रा को एक नाम भी दिया। टीम एल.आई.ए.ई. यानी लिटल इंडियन फैमिली ऑफ एक्सप्लोरर कुल 4 सदस्यों से बनी एक छोटी सी टोली का नाम है जिसने ये करिश्मा कर दिखाया। इसमें 38 साल के आनंद बैद हैं जो पेशे से एनिमेटर और एजुकेटर हैं। इस टीम में उनके साथ उनकी 36 वर्षीय पत्नी पुनीता बैद और उनके दो बच्चे यश और धृति शामिल हैं।

कहते हैं यात्राएँ इंसान को अपने अंदर झाँकने का मौका देती हैं। घुमक्कड़ी आपको अपने आप से जुड़े कुछ ऐसे पहलुओं से रूबरू करवाती है जिन्हें आप घर बैठकर नहीं जान सकते हैं। आनंद का भी कुछ ऐसा ही मानना है। वो बताते हैं वो अपने परिवार के साथ बैंगलोर से राजस्थान रोड ट्रिप पर गए थे जिसके बाद उन्होंने पूरी दुनिया को देखने का मन बनाया।

कहते हैं हर यात्रा के पहले थोड़ी प्लानिंग और जानकारी बटोर लेना अच्छा होता है। अगर आप इतनी लंबी रोड ट्रिप पर जाने का मन बना चुके हों तो प्लानिंग करना और भी जरूरी हो जाता है। लेकिन अपनी इस रोड ट्रिप के सपने को सच करने के लिए आनंद को सबसे पहले जरूरत थी अपने परिवार की मंजूरी की। जिसके बाद वो अपनी प्लानिंग का काम शुरू कर पाते। आनंद बताते हैं "शुरुआत में मेरी पत्नी ने केवल इसलिए हाँ कहा क्योंकि उसे लगा की ये रोड ट्रिप मुमकिन ही नहीं है और ये केवल मेरे मन का विचार है। वो जानती थी कि अगर उसने मना किया तो मैं उससे बार-बार यही सवाल पूछता रहूँगा। लेकिन उसे ये नहीं पता था मैं इस ट्रिप को लेकर कितना उत्सुक था।"

"यहाँ तक कि मेरी माँ ने हमारे जाने से एक महीने पहले तक मेरी योजना पर विश्वास नहीं किया था। लेकिन जब उन्होंने मुझे वीज़ा के लिए इधर-उधर भाग-दौड़ करते हुए देखा तब उन्हें लगा मैं गंभीर था।"

आनंद आगे कहते हैं "मेरी पत्नी ने इस ट्रिप के बारे में सोचा और हमारे बच्चों पर इस ट्रिप से होने वाले फायदों को समझा। मेरी पत्नी में मुझे एक बढ़िया और शानदार घुमक्कड़ी का साथी मिला है। हम दोनों साथ मिलकर कई जगहें घूम चुके हैं। हम दोनों ही अपने इस सफर पर कुछ और हसीन पल जोड़ना चाहते थे और देखना चाहते थे कि ये ट्रिप हमें कहाँ ले जाती है।"

"जब आप किसी चीज को पाना चाहते हैं तो पूरी कायनात उसे आपसे मिलाने की कोशिश करती है। मेरी इस रोड ट्रिप की प्लैनिंग में परिवार को समझने से ज्यादा बड़ी चुनौती बच्चों के स्कूल से परमिशन लेना था। जिससे बच्चों को ज्यादा छुट्टियाँ मिल सकें। हो सकता है मेरी बात आपको थोड़ी अटपटी लगे लेकिन ये ट्रिप कुछ ऐसी थी जिसे करने के लिए हम तैयार थे।" आनंद बताते हैं उनका रोड ट्रिप का विचार स्कूल वालों को एक शानदार आइडिया लगा। जिसके बाद उन्होंने बच्चों को ट्रिप पर जाने की अनुमति आसानी से दे दी।

इस लाजवाब रोड ट्रिप में बैद परिवार ने कुल 11 देशों की यात्रा की जिसमें नेपाल, तिब्बत, चीन, तुर्कमेनिस्तान, किर्गिस्तान, उज़्बेकिस्तान, ग्रीस, तुर्की, ईरान और अंत में फ्रांस शामिल था।

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चीन
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तुर्की
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किर्गिस्तान
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किर्गिस्तान
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चीन
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तुर्की

सुनने में ये ट्रिप जितनी हसीन लग रही है उतनी थी नहीं। उन्हें अपनी इस यात्रा में कई परिशानियों का सामना करना पड़ा। ट्रिप का सबसे पहला झटका उन्हें नेपाल त्रासदी के रूप में मिला। आनंद एक ऑफिस में अपने पासपोर्ट पर स्टैम्प लगवा रहे थे जब उन्हें जमीन हिलती हुई महसूस हुई। आंनद याद करते हुए बताते हैं "मैंने अपने बेटे को चिंता न करने के लिए कहा क्योंकि मुझे लगा वो झटके मेट्रो की वजह से थे।" लेकिन थोड़ी देर बाद उन्हें पर चला वो भूकंप के झटके थे।

भूकंप की वजह से पूरा परिवार पाँच दिनों तक नेपाल और चीन की सीमा पर अटका हुआ था। आनंद कहते हैं "वो हर पल भूकंप के बाद के झटकों को महसूस कर रहे थे और उनके खत्म होने का इंतज़ार कर रहे थे।" इतने दिन उनका पूरा परिवार गाड़ी में रहा और केवल कुछ जरूरी कामों के लिए वो बाहर निकलते थे।

कहते हैं यात्राएँ आपको बहुत कुछ सिखाती हैं और इस साहसिक घुमक्कड़ों की टोली के इस रोमांचक सफर के बाद एक चीज बिल्कुल साफ है। यात्राएँ आपको अपने आप से मिलने का मौका देती हैं। अपने आपको कमरे की चार दीवारों से बाहर निकालकर जानने और परखने का मौका मिलता है।

"जिंदगी में घुमक्कड़ी होना कितना ज़रूरी होता है ये आप घर से बाहर निकलकर समझ पाएँगे। जब आप घर से दूर किसी अनजान जगह पर होते हैं तब आप खुद को बेहतर तरीके से समझ पाते हैं। इस ट्रिप पर हम इतनी सारी चीजों को एक ही समय पर होते हुए देख रहे थे। जिसकी वजह से हमारे होने का एहसास हम उस समय नहीं समझ पा रहे थे। लेकिन ट्रिप से वापस आने बाद वो सभी चीजों के बारे में सोचने का मौका मिला। उसके बाद समझ आया कि हम सभी व्यक्तिगत रूप में कितना विकसित हो चुके हैं। घुमक्कड़ी का सबसे अनोखा पहलू यही तो है। इसमें आप अपनी क्षमताओं को बढ़ता हुए देख पाते हैं जिसमें आपकी घूमी हुई दुनिया भी शामिल होती है।"

ओवर्लैंड स्टोरीज पर उनकी यात्रा के बारे में जानकारी ले सकते हैं।

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