इन 7 तरीकों से मिलेगा ग्रामीण भारत की सैर का फुल टू मजा

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भारत में बढ़ते पर्यटन को देखते हुए अब हर घुमक्कड़ किसी अनछुई और यूनिक जगह पर जाना चाहता है। कोई अलग हिल स्टेशन या अनसुना कस्बा के बारे में पता लगाने के लिए जैसे कोई प्रतियोगिता आयोजित की गई है। एक चीज जो अक्सर लोग भूल जाते हैं वो हैं गाँव। रूरल यानी ग्रामीण टूरिज्म भी अब तेजी से रफ्तार पकड़ रहा है। शांत और सुंदर जगहों पर जाने की चाहत लोगों को अब धीरे-धीरे वापस से गाँवों की ओर आकर्षित कर रही है। फर्क बस इतना है कि गाँवों को भी अब टूरिज्म के नक्शे पर पक्का कर दिया गया है। वैसे देखा जाए तो ये अच्छा भी है। गाँवों में पर्यटन बढने की वजह से लोगों को रोजगार मिलता शुरू हो गया है। बाहरी दुनिया के तौर तरीकों के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने का इससे बेहतरीन मौका और कैसे मिल सकता है। गाँवों में पर्यटन की वजह से मिट्टी और सूखे पत्तों से बनी कुटिया को अब नए ट्रेंड में गिना जाने लगा है। वहीं लग्जरी टेंट ने भी ग्रामीण भारत में आराम से अपना रास्ता बना लिया है। अगर आप भी पर्यटन के नए और रोचक तरीकों को अजमाना चाहते हैं तो इन 7 कंपनियों के साथ जरूर ट्रेवल करने का प्लान बनाना चाहिए।

1. दिरांग बुटीक कॉटेज, अरुणाचल प्रदेश

अरुणाचल प्रदेश की कम देखी जाने वाली जगहों में से एक दिरांग घाटी की नदी के ठीक किनारे बने ये कॉटेज असल में हॉलिडे स्काउट की प्रॉपर्टी के अंतर्गत आते हैं। हॉलिडे स्काउट अरुणाचल प्रदेश में काम करने वाली वो कंपनी है जिसको अरूणाचल के सबसे अनछुए इलाकों की भी जानकारी है। ये कंपनी अपने मेहमानों को अरुणाचल के ऐसे हिस्सों का टूर करने का मौला देती है जिससे राज्य के स्थानीय लोगों को भी फायदा हो सके। दिरांग बुटीक कॉटेज की सबसे अच्छी बात ये है कि इसके मालिक भी अपने परिवार के साथ इसी प्रोपर्टी में रहते हैं जिसकी वजह से यहाँ आने वाले हर घुमक्कड़ को एकदम घर जैसा माहौल मिलता है। दिरांग घाटी अपने आप में बेहद खूबसूरत जगह है और इसको और भी खास बनाते हैं यहाँ रहने वाले मोनपा जनजाति के लोग। दिरांग बुटीक कॉटेज ऐसे ही लोकल टूर्स को प्रोमोट करता है। इनके साथ कनेक्ट करके आप घाटी के सबसे हसीन पहलुओं को नजदीक से जान सकते हैं।

2. स्पीति इकोस्फीयर, हिमाचल प्रदेश

पहाड़ों में बढ़ते टूरिज्म की वजह से प्लास्टिक और गंदगी की समस्या में भी साल दर साल इजाफा हुआ है। स्पीति इकोस्फीयर की स्थापना इन्हीं समस्याओं को हल करने के मकसद से कि गई है। स्पीति इकोस्फीयर हिमाचल की इस संस्था का नाम है जो सभी घुमक्कड़ों को जिम्मेदारी के साथ ट्रेवल करने के लिए प्रेरित करती है। इस संस्था ने लोगों को कम से कम कचड़ा फेंकने और नए और संग्रक्षित तरीकों से ट्रेवल करने के लिए जागरूक करने का जिम्मा उठाया है। सबसे अच्छी बात ये है कि इस संस्था ने इस काम में स्पीति घाटी के स्थानीय लोगों की मदद ली है। स्पीति इकोस्फीयर द्वारा उठाए गए इन्हीं कदमों की वजह से आज घाटी में जगह जगह पर डस्टबिन और पानी भरने की मशीनें लगाई जा चुकी हैं। स्पीति इकोस्फीयर अपने मेहमानों को वॉलंटियर करने का भी मौका देता है। आप इकोस्फीयर द्वारा चलाए जा रहे कैफे में काम कर सकते हैं। स्पीति इकोस्फीयर के साथ ट्रेवल करने के लिए आप इनके पैकेज ऑफर एक्सप्लोर कर सकते हैं।

3. कच्छ एडवेंचर्स इंडिया, गुजरात

कच्छ एडवेंचर्स इंडिया के साथ आपको गुजरात का मशहूर नमकीन रेगिस्तान घूमने मौका मिलता है जो आपको बहुत पसंद आएगा। यदि आप सोच रहे हैं कि इस कंपनी के साथ टूर करने का क्या फायदा है तो बता दें कच्छ एडवेंचर्स इंडिया आपको रण के बेहद खास गाँवों में ले जाती है। रण के इन गाँवों में आपको गुजरात की मिट्टी की खुशबू आएगी। आप गुजराती संस्कृति और रण के लोगों का रहन सहन का तरीका देख सकते हैं। कच्छ एडवेंचर्स इंडिया अपने सभी मेहमानों के लिए खास मिट्टी से बनी झोपड़ियों में ठहरने की व्यवस्था कर रखी है। ये झोपड़ियाँ भले ही मिट्टी की होती हैं लेकिन इनमें आपको सभी सुविधाएँ मिलेंगी। अगर आप चाहें तो होडका गाँव में टेंट में भी ठहर सकते हैं।

4. तोरा इको रिजॉर्ट एंड लाइफ एक्सपीरियंस सेंटर, पश्चिम बंगाल

बंगाल का सुंदरबन विश्व के सबसे मैंग्रोव वन होने की वजह से यूनेस्को की विश्व हेरिटेज साइट की सूची में शामिल है। सुंदरबन के कुल हिस्से का लगभग 35 प्रतिशत हिस्सा भारत में आता है जिसमें लगभग 102 द्वीप भी शामिल हैं। जिसमें से ज्यादातर द्वीपों पर इंसानों का बसेरा नहीं है। सुंदरबन के द्वीप समूह पर जिंदगी जीना आसान बिल्कुल नहीं है। यहाँ ना अच्छी सड़कें हैं और ना ही बिजली पानी का कोई पक्का इंतेजाम। लोगों के घर मिट्टी से बने हुए हैं जिनपर अक्सर जंगली जानवरों के हमले का खतरा बना रहता है। सुंदरबन के बाली आइलैंड पर बना तोरा इको रिजॉर्ट यूनीक टूरिज्म प्रोजेक्ट है जिसके अंतर्गत पर्यटकों को ग्रामीण जीवन के बारे में जानकारी दी जाती है। इस प्रोजेक्ट में कुल 6 कॉटेज हैं जिनमें मेहमानों के लिए ठहरने की व्यवस्था की गई है। धान के खेत और हरियाली से घिरे इन कॉटेज में रहना आपको जरूर अच्छा लगेगा। यहाँ आप गाँव की सैर करने जा सकते हैं, खेत में काम कर सकते हैं और सुंदरबन के संकरे रास्तों को भी एक्सप्लोर कर सकते हैं।

5. चंदूरी साई गेस्टहाऊस, ओडिशा

ओडिशा के कोरापुट जिले में बना चंदूरी साई गेस्टहाऊस अपने ऑस्ट्रेलियाई मालिक लियोन के लिए प्यार की बेहतरीन निशानी है। गौदगुदा गाँव में स्थित ये बुटीक गेस्टहाऊस लियोन की मेहनत का नतीजा है। जिनसे अपने दम पर इस गेस्टहाऊस का डिजाइन तैयार किया और बाद में गाँव के कुम्हारों की मदद से इसको आज की स्थिति में खड़ा किया। लियोन ने कुम्हारों को टेराकोटा के टाइल्स और गेस्टहाऊस की छत के लिए सामान बनाने का काम दिया था। अच्छी बात ये है कि इस गेस्टहाऊस को चलाने के लिए गाँव के है लोगों की मदद ली जाती है जिसमें क्षेत्र की कुछ आदिवासी महिलाएँ भी शामिल हैं। यहाँ आए मेहमानों को पूरे गाँव की सैर करने की आजादी दी जाती है। वो कुम्हारों से मिट्टी के बर्तन बनान सीख सकते हैं, ट्राइबल डांस और आदिवासी खानपान के तरीकों को भी जान सकते हैं। मेहमानों को घुमाने के लिए गाँव के किसी व्यक्ति की मदद ली जाती है जो आपको ट्राइबल मार्केट से लेकर पूरे इलाके की सैर कराता है।

6. ओवरलैंडर इंडिया, राजस्थान

ओवरलैंडर इंडिया के साथ ट्रिप प्लान करना अपने आप को कोई तोहफा देने जैसा है। ओवरलैंडर इंडिया खास ऑफ रोडिंग के लिए मशहूर है जो राजस्थान के सबसे अंदरुनी और अनछुए इलाकों में ट्रिप्स आयोजित करती है। हर ट्रिप में एक गाइड आपके साथ बना रहता है। ज्यादातर मामलों में कंपनी के मालिक उदय ही मेहमानों के साथ ट्रिप पर जाते हैं। उदय का परिवार इस इलाके के सबसे पुराने परिवारों में से है जो लगभग 16वीं शताब्दी से यहाँ रहते आए हैं। ओवरलैंडर इंडिया खास स्थानीय लोगों के हित में काम करने वाली कंपनी है। इनके टूर्स खास जोधपुर के आसपास वाले इलाकों में होते हैं जहाँ मेहमानों को ग्रामीण क्षेत्रों में ले जाया जाता है। इन टूर्स में आपको लोगों से बातचीत करने का भी मौका मिलता है। आप उनके रहन सहन का तरीका देख सकते हैं और उनके साथ बैठकर खाना खाने का आनंद भी ले सकते हैं।

7. ग्रासरूट्स, महाराष्ट्र

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श्रेय: ग्रासरूट्स

ग्रामीण भारत के विकास को ध्यान में रखकर 2005 में शुरू की गई इस कंपनी की जितनी तारीफ की जाए कम होगी। 2005 से लेकर अबतक ग्रासरूट्स 3 राज्यों में कुल 12 गाँवों की मदद कर चुकी है। ग्रासरूट्स कम्युनिटी टूरिज्म को बढ़ावा देने वाली कंपनी है। महाराष्ट्र का पुरुषवाडी इनका पहला गाँव था। इनके साथ ट्रेवल करने में आपको कई सारे फायदे हैं। यदि आप जून के महीने में ट्रेवल कर रहे हैं तो आप जुग्नुओं को देखने का मजा ले सकते हैं। ग्रासरूट्स के साथ छोटे ग्रुप में ट्रेवल करने का सुख मिलता है। हर ग्रुप के लिए खास पैकेज डिजाइन किए जाते हैं जिसमें वर्ली आर्ट से जुड़ी वर्कशॉप्स, राइटिंग वर्कशॉप्स जैसी चीजें शामिल होती हैं। यदि आप चाहें तो अपना पैकेज कस्टमाइज भी कर सकते हैं। इन लोगों को मेहमानों के मन मुताबिक चीजें प्लान करने में महारथ हासिल है।

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