प्रकृति से है प्यार तो बना लो इन राज्यों में इको टूरिज्म का मजा लेने का प्लान

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घुमक्कड़ी में केवल घूमना ही शामिल नहीं होता है। इसमें शामिल होती है एक जिम्मेदारी। जिम्मेदारी अपने आसपास के पर्यावरण को नुकसान ना पहुँचाने की। भारत में इको टूरिज्म भले ही उतना फेमस ना हुआ हो। लेकिन जो इसके बारे में जानते हैं वो अपनी तरफ से पर्यावरण की सुरक्षा करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। ऐसा नहीं है कि आप इसमें कुछ नहीं कर सकते हैं। आप भी छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर इको टूरिज्म को बढ़ावा देने में मदद कर सकते हैं। आप इको टूरिज्म में अपनी भागीदारी पक्की करने के लिए अनछुई और कम विकसित जगहों पर घूमने जाने का प्लान बना सकते हैं। जिससे आप उस जगह और वहाँ के कल्चर दोनों को दुनिया के सामने ला पाएँ। भारत में ये कॉन्सेप्ट नया जरूर है लेकिन ऐसा नहीं है कि लोग इको टूरिज्म के बारे में एकदम अनजान हैं। कुछ राज्य हैं जहाँ इको टूरिज्म पर बहुत ध्यान दिया जाता है और टूरिस्टों को भी ऐसा ही करने की सलाह दी जाती है।

1. लद्दाख

हर घुमक्कड़ की चाहत होती है कि वो एक बार जरूर लद्दाख जाए। पहले के समय में लद्दाख जाना किसी सपने जैसा लगता था। लेकिन आज लद्दाख जाने के लिए आपको लगभग ना के बराबर तैयारी करनी होती है। अब जब लद्दाख घूमना इतना आसान हो गया है तो क्या हमारा फर्ज नहीं बनता कि प्रकृति की इतनी खूबसूरत जगह को अच्छे से जिम्मेदारी के साथ घूमा जाए? इसी के चलते कुछ संस्थाएँ हैं जो लद्दाख में इको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए काम कर रही हैं। यदि आप आम टूरिस्ट की तरह ना होकर जिम्मेदारी के साथ घुमक्कड़ी का आनंद लेना चाहते हैं तो आप हेमिस नेशनल पार्क, ट्सो मोरिरी वेटलैंड कंजर्वेशन रिजर्व और तमाम पुराने मठ देख सकते हैं। रहने के लिए आप होमस्टे में बुकिंग कर सकते हैं। इन छोटे-छोटे कदमों से आप भी इको टूरिज्म में अपना योगदान दे सकते हैं।

2. हिमाचल प्रदेश

अगर घुमक्कड़ी की दुनिया में भारत के सबसे लोकप्रिय राज्यों की सूची बनाई जाए तो हिमाचल प्रदेश का नाम पहले दो स्थानों में आएगा। ये राज्य अपने आप में इतना खूबसूरत है कि हर कोई इसके सौंदर्य को मन भरकर देख लेना चाहता है। लेकिन ये सिर्फ एक पहलू है। पिछले कुछ सालों में हिमाचल प्रदेश में बढ़ते पर्यटन की वजह से यहाँ की प्राकृतिक छटा में कुछ कमी आई है। हिमाचल की खूबसूरती को बरकरार रखने के लिए इस राज्य में भी कड़ी कोशिशें की जा रहीं हैं। हिमाचल की इकोटूरिज्म सोसाइटी पिछले कई वर्षों से इस मुद्दे पर काम कर रही है। इसके अलावा कुछ संस्थाएं हैं जो स्पीति जैसे बंजर इलाकों में भी पर्यावरण संग्रक्षण पर ध्यान दे रहीं हैं। इनमें सबसे खास नाम है स्पीति इकॉस्फीयर का। अगर आप हिमाचल में इको टूरिज्म से जुड़ी जगहें देखना चाहते हैं तो आपको ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क, पिन वैली नेशनल पार्क, चंद्रताल झील जैसी प्राकृतिक जगहों पर जाना चाहिए।

3. नई दिल्ली

दिल्ली देश की राजधानी तो है ही लेकिन इसके साथ इस आधुनिक शहर ने इको टूरिज्म को बढ़ावा देने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी है। कुछ संस्थाएँ हैं जो दिल्ली टिकाऊ और सुरक्षित पर्यावरण को बढ़ावा देने में मदद कर रहीं हैं। इको टूरिज्म सोसाइटी ऑफ इंडिया उनमें से एक नाम है। इस सोसायटी ने अकेले दिल्ली में कार्बन फुटप्रिंट कम करने में बहुत मदद की है। इसके अलावा इस संस्था ने दिल्ली में पहले से काम कर रहीं तमाम और संस्थाओं के साथ जुड़कर राजधानी में इको टूरिज्म को बढ़ावा देने का काम किया है। केवल यही नहीं संसाधनों का बढ़िया इस्तेमाल करके दिल्ली में नई इको टूरिज्म जगहों ढूंढी गईं हैं। इनमें एक जगह है छावला कंगनहेरी। नजफगढ़ ड्रेन के पास स्थित ये एक इको टूरिज्म पार्क है जिसको बोटिंग और कैंपिंग करने वालों के लिए तैयार किया गया है। दिल्ली में इको टूरिज्म का महत्व समझने में होमस्टे का भी बड़ा योगदान रहा है। अगर आप कुछ ऐसी खास जगहों को देखना चाहते हैं तो आपको जेएनयू केव्स, यमुना बायोडायवर्सिटी पार्क और रिज जैसी जगहों पर जाना चाहिए।

4. उत्तराखंड

घुमक्कड़ों और टूरिस्टों को पर्यावरण और स्थानीय संस्कृति से रूबरू करवाने के लिए उत्तराखंड सरकार ने इको टूरिज्म से जुड़े कई कदम उठाए हैं। इनमें सबसे खास है उत्तराखंड के गाँवो से होते हुए जाते ट्रेकिंग रूट्स जो खासतौर से कुमाऊँ के कल्चर की झलक दिखलाते हैं। असल में ये प्रोजेक्ट उत्तराखंड के टूरिज्म बोर्ड, गढ़वाल कुमाऊँ विकास मंडल और राज्य के फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की मिली जुली कोशिश है। इन तीनों के प्रयास से उत्तराखंड में ऐसे कई टूर्स का आयोजन किया जा चुका है जिनसे इको टूरिज्म को बढ़ावा दिया जा सकता है। इन गाँवों में कई होमस्टे भी खोले गए हैं। खास बात ये है कि जरूरत पड़ने पर इन होमस्टे को संसाधन भी उपलब्ध करवाए जाते हैं जिससे इनके रख-रखाव में कोई कमी ना आए। अगर आप उत्तराखंड में इको टूरिज्म से जुड़ी जगहों को देखना चाहते हैं तो आपको पवलगढ़ कंजर्वेशन रिजर्व, नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व और फूलों की घाटी ट्रेक पर जाना चाहिए।

5. अरुणाचल प्रदेश

पूर्वोत्तर भारत में अरुणाचल प्रदेश की खास पहचान है। इस राज्य के विविध लैंडस्केप को देखकर आपको हैरान होने पर मजबूर होना पड़ेगा। टूरिस्टों की लिस्ट में अपना पक्का स्थान बना चुके अरुणाचल में इको टूरिज्म को भी बढ़ावा दिया जाता है। फ्यूचर जेनरेशन अरुणाचल और ग्रीन पश्चर जैसी संस्थाओं ने मिलकर अरुणाचल में इको टूरिज्म की तरफ खूब योगदान दिया है। केवल यही नहीं अरुणाचल के अलग-अलग हिस्सों में तमाम होमस्टे हैं जो पर्यावरण को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं। इको टूरिज्म के अलावा अरुणाचल के स्थानीय कल्चर और आदिवासी क्षेत्रों के रख-रखाव के लिए भी कई संस्थाएँ बढ़ चढ़कर काम कर रही हैं। इनमें आदिवासियों के रहने के लिए सुरक्षित और अच्छा माहौल का इंतजाम भी किया जाता है। अगर आप अरुणाचल में इको टूरिज्म से जुड़ी जगहें देखना चाहते हैं तो आपको नमदाफा नेशनल पार्क और त्संगा कम्युनिटी कंजर्वेशन सेंटर जैसी जगहों पर जाना चाहिए।

6. मेघालय

पूर्वोत्तर भारत के इस राज्य को देखने के लिए बहुत कम लोग जाते हैं। लेकिन इसका ये मतलब बिल्कुल भी नहीं है कि मेघालय में देखने लिए चीजों या जगहों की कमी है। मेघालय में भी इको टूरिज्म को बढ़ावा देने और यहाँ आने वाले पर्यटकों में प्रकृति की तरफ रुझान बढ़ाने के लिए तमाम कोशिशें की जा रही हैं। लिविंग रूट्स इको टूरिज्म सोसायटी ने मेघालय के मशहूर लिविंग रूट ब्रिग की देख-रेख की जिम्मेदारी ली है। ईस्ट खासी हिल्स के नोंगब्लाई गाँव में ऐसे 16 ब्रिज हैं जिनकी देख-रेख इस संस्था द्वारा की जा रही है। इसके अलावा मेघालय में अलग-अलग जगहों पर इको टूरिज्म से जुड़ी वर्कशॉप्स होती रहती हैं जिनकी वजह से काफी मदद होती है। मेघालय में इको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए विलेज टूर का भी इंतेजाम किया गया है। मेघालय आने वाले लोग अगर चाहें तो इन टूर्स का मजा उठा सकते हैं। अगर आप मेघालय में इको टूरिज्म से जुड़ी जगहें देखना चाहते हैं तो आप मालिनोंग गाँव, ईस्ट खासी हिल्स और जक्रेम हॉट स्प्रिंग्स देख सकते हैं।

7. असम

अनछुई जगहें, आदिवासी जीवन और रोमांचक संस्कृतियाँ असम को इको टूरिज्म के लिए एक बेहतरीन जगह बनाती हैं। असम की एक बात है जो बेहद खास है। असम के लोगों ने राज्य में इको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए बहुत कुछ किया है। अब हाल ये है कि संस्थाओं से ज्यादा स्थानीय लोग अपने राज्य का हरा-भरा लैंडस्केप बचाकर रखने के लिए काम कर रहे हैं। इसी के तहत असम में कई जगहों पर वर्कशॉप्स भी आयोजित की जाती हैं। इको टूरिज्म के महत्व को समझते हुए इको टूरिज्म सोसायटी ऑफ इंडिया ने असम टूरिज्म के साथ मिलकर काफी काम किया है। उनकी इस पहल के तहत असम में इको टूरिज्म से जुड़े कैंप्स लगाए गए हैं जहाँ लोगों को भी इसके बारे में समझाया जाता है। इन कैंप्स में ज्यादातर टूरिस्टों और विदेशी पर्यटकों की भागीदारी रहती है। अगर आप असम में इको टूरिज्म से जुड़ी जगहें देखना चाहते हैं तो आप काजीरंगा नेशनल पार्क, मानस नेशनल पार्क और पोबितोरा वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी घूम सकते हैं।

8. सिक्किम

हिमालय की गोद में बसे इस राज्य को देखने के लिए भर भरकर टूरिस्ट आते हैं। सिक्किम हनीमून मनाने वालों को भी खूब पसंद आता है। लेकिन दुख की बात ये है कि लोग यादें जोड़ने और घूमने में इतने खो जाते हैं कि पर्वायवरण के बारे में भूल जाते हैं। सिक्किम के फॉरेस्ट डिपार्टमेंट ने इस चीज के महत्व को समझते हुए यहाँ की खूबसूरती को संजोने के लिए कई कदम उठाए हैं। उसमें सबसे पहला है टूरिज्म को सस्टेनेबल बनाना। इसके साथ-साथ सिक्किम में पर्यावरण और वाइल्डलाइफ के संग्रक्षण को भी अहमियत दी जाती है। गोइंग वाइल्ड एक ऐसी संस्था है जो सिक्किम में वाइल्डलाइफ संग्रक्षण के लिए लगातार काम कर रही है। इनके इस काम में ये लोग बर्ड वॉचिंग से जुड़े तमाम टूर्स का भी आयोजन करते हैं। अगर आप सिक्किम में इको टूरिज्म से जुड़ी जगहें देखना चाहते हैं तो आपको मैनम वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी जरूर देखनी चाहिए।

9. कर्नाटक

जंगलों में ट्रेक करना, लंबी घाटियों से होकर गुजरना और उन्हीं जंगलों में कैंपिंग करना। कर्नाटक की ये सभी खूबियाँ घुमक्कड़ों को इससे इश्क करने पर मजबूर कर देती हैं। वेस्टर्न घाट के सुरम्य जंगलों में ऐसी बहुत सारी रोमांचक चीजें हैं जिन्हें घुमक्कड़ों को जान लेना चाहिए। यहाँ की इकोलॉजिकल विविधता को जानने और समझने के लिए आपको इन जंगलों में भटकना होगा। कर्नाटक की हेरिटेज साइट, जंगल लॉज और रिजॉर्ट्स इस राज्य को इको टूरिज्म के लिए बढ़िया जगह बनते हैं। कर्नाटक आने वाले सभी टूरिस्टों को इको टूरिज्म का बढ़िया स्वाद मिल सके इसके लिए कर्नाटक इको टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड और नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी ने मिलकर तमाम पॉलिसी और प्रोजेक्ट की शुरुआत की है। अगर आप कर्नाटक में इको टूरिज्म से जुड़ी जगहें देखना चाहते हैं तो आपको बिसले जंगल, नागरहोल, कबिनी बैकवॉटर्स, हस्सन, चिकमगलूर और देवबाग जरूर घूमना चाहिए।

10. केरल

इस राज्य की जितनी तारीफ की जाए कम होगी। केरल भारत का पहला राज्य है जिसने इको टूरिज्म की शुरुआत की थी। टूरिस्टों की बढ़िया मेहमाननवाजी से लेकर सस्टेनेबल ट्रेवल तक हर चीज में केरल हमेशा से सबसे आगे रहा है। हिल स्टेशन, प्लांटेशन और शानदार बैकवॉटर्स वाले इस प्रदेश में इको फ्रेंडली ट्रेवल के ऊपर भी बहुत ध्यान दिया जाता है। केरल में बड़े बड़े गार्डन और चाय के बागान हैं जहाँ आप प्रकृति को महसूस करते हुए टहल सकते हैं। थेनमाला इको टूरिज्म प्रोजेक्ट ने दक्षिण भारत में पर्यावरण के संग्रक्षण और विकास के लिए काफी काम किया है। केरल में तमाम इंस्टिट्यूट भी इको टूरिज्म और सस्टेनेबल ट्रेवल से जुड़ी वर्कशॉप्स का आयोजन करते रहते हैं। अगर आप केरल में इको टूरिज्म से जुड़ी जगहें देखना चाहते हैं तो आपको थेनमाला, अरलाम, साइलेंट वैली नेशनल पार्क और पेरियार टाइगर रिजर्व देखना चाहिए।

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