इस पवित्र धाम में है शिव-शक्ति का अद्भुत वास, यहाँ ज्योतिर्लिंग के साथ कीजिये शक्तिपीठ के दर्शन!

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हमारा देश भारत विविधतताओं से भरा एक ऐसा अद्भुत देश है जिसकी अगर आप यात्रा करते हैं तो यह यात्रा धर्म, अध्यात्म, ऐतिहासिकता, रोमांच, और प्राकृतिक नजारों से भरी होगी। धार्मिक तौर पर बात करें तो देश के कोने-कोने में अनेकों बेहद प्राचीन और धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण स्थान मौजूद हैं।

इन्हीं धार्मिक स्थानों में से कुछ बेहद पौराणिक शिवालय हैं जिनका हिन्दू धर्म में एक खास स्थान है और इन्हीं शिवालयों में से सबसे अधिक महत्त्व 12 ज्योतिर्लिंगों का बताया जाता है जो देश के अलग-अलग हिस्सों में स्थित हैं।

ऐसी मान्यता है कि इन 12 ज्योतिर्लिंगों में स्वयं भगवान शिव ज्योति के रूप में विराजमान हैं और पुराणों में इन सभी ज्योतिर्लिंगों का अपना एक खास महत्त्व बताया गया है और सभी 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन से भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।

अगर इन मान्यताओं की बात ना भी करें तो भी अगर आप इनमें से किसी भी ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने जाते हैं तो वहां का सकारात्मकता से भरा वातावरण आपको सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है जिसे आप वास्तव में खुद अनुभव कर सकते हैं।

ज्योतिर्लिंगों के बारे में ये सभी बातें जानकर करीब एक वर्ष पहले उज्जैन में स्थित महाकालेश्वर के दर्शनों से शुरुआत करने के बाद पिछले एक वर्ष में हम कुल 7 ज्योतिर्लिंगों के दर्शनों का सौभाग्य प्राप्त कर चुके हैं।

आज इस लेख में हम बात करने वाले हैं झारखण्ड राज्य के देवघर में स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम की जो कि 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। चलिए बताते हैं आपको इस पवित्र धाम से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां....

Photo of Shree Baba Baidyanath Jyotirlinga Temple, Deoghar by We The Wanderfuls

बैद्यनाथ धाम, झारखण्ड

जैसा कि हमने आपको बताया कि 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक यह ज्योतिर्लिंग झारखण्ड राज्य के देवघर में स्थित है। देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग का जुड़ाव लंकापति रावण से भी बताया जाता है और इसीलिए इस पवित्र स्थान को श्री श्री 1008 रावणेश्वर बाबा बैद्यनाथ धाम के नाम से भी जाना जाता है। मान्यताओं के अनुसार बताया जाता है कि लंकापति रावण की घोर तपस्या से प्रसन्न होकर जब भगवान शिव ने रावण से वरदान मांगने के लिए कहा तो उसने भोलेनाथ से लंका में चलने का वरदान माँगा जिससे वो शिवलिंग रूप में लंका में स्थापित हो जाएँ। भगवान शिव ने रावण को वरदान दिया कि जिस स्थान पर भी तुम शिवलिंग को रख दोगे उसी स्थान पर मैं स्थापित हो जाऊंगा। लेकिन रास्ते में रावण को ईश्वर की लीलानुसार तेज़ लघुशंका लगती है और परिस्थितिवश रावण शिवलिंग को एक बालक चरवाहे को कुछ देर के लिए सौंप देता है लेकिन रावण के अधिक समय लेने की वजह से वह बालक शिवलिंग को वहीं पर रख देता है और अनेक कोशिशों के बाद भी रावण फिर से शिवलिंग को उस स्थान से उठा नहीं पाता और इस तरह शिवलिंग वहीं पर स्थापित हो जाते हैं जिसे आज बैद्यनाथ धाम के नाम से जाना जाता है।

यहाँ शिव और शक्ति एक साथ हैं विराजमान

जैसा कि हमने आपको बताया कि बैद्यनाथ धाम पिछले करीब एक वर्ष की हमारी यात्राओं में सातवां ज्योतिर्लिंग था और यह धाम उन गिने-चुने पवित्र स्थानों में से है जहाँ ज्योतिर्लिंग के साथ माता के 51 शक्तिपीठों में से एक शक्तिपीठ भी स्थित है। जैसे काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर के पास विशालाक्षी शक्तिपीठ मंदिर और उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के समीप ही हरिसिद्धि शक्तिपीठ मंदिर स्थित है वैसे ही देवघर में भी बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग के पास ही माता का शक्तिपीठ मंदिर विराजमान है जिसके लिए बताया जाता है कि यहाँ माता सती का हृदय गिरा था। लेकिन इस पवित्र धाम की हमारी यात्रा में हमने देखा कि शक्तिपीठ और ज्योतिर्लिंग एक ही परिसर में स्थित हैं और यहाँ भक्तों की मनोकामना पूर्ण करने के उद्देश्य से शक्तिपीठ मंदिर और ज्योतिर्लिंग मंदिर के शिखरों का पवित्र गठबंधन भी किया जाता है। परंपरा के अनुसार, बाबा बैद्यनाथ मंदिर व मां पार्वती के मंदिर के शिखर को पवित्र धागों से बांधकर गठबंधन की परंपरा है। इस अद्भुत गठबंधन के दृश्य को अपनी आँखों से देखना हमारे लिए अपने आप में एक बेहद अद्भुत अनुभव था।

शिव-पार्वती गठबंधन

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कामना लिंग नाम के पीछे का रहस्य

आपको बता दें कि बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग को कामना लिंग या मनोकामना लिंग के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि यहाँ आये भक्तों को शिव और शक्ति दोनों का आशीर्वाद मिलता है जिससे उनकी हर मनोकामना पूर्ण होती है। शिव और शक्ति के एक साथ एक ही स्थान पर विराजमान होना ही इस स्थान को बेहद पवित्र और महत्वपूर्ण बनाता है और इसीलिए यहाँ सच्चे मन से मांगी गयी हर कामना ईश्वर जरूर पूरी करते हैं और इसीलिए इन्हें कामना लिंग के नाम से भी जाना जाता है।

फोटो क्रेडिट: Sannidhi.net

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दर्शनों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां

आपको बता दें कि देवघर में सावन के महीने में श्रावणी मेले का आयोजन किया जाता है जिसमें रोज लाखों भक्त दूर-दूर से बाबा बैद्यनाथ के दर्शन करने आते हैं। इसके अलावा शिवरात्रि पर भी यहाँ भक्तों की अत्यधिक भीड़ देखी जाती है। इसके अलावा यहाँ भक्तों की इतनी अधिक भीड़ नहीं होती है लेकिन फिर भी किसी भी दिन आपको ज्योतिर्लिंग दर्शन के लिए करीब 2 से 4 घंटे का समय लग सकता है। समय बचाने के लिए आप सुबह जितना जल्दी हो सके दर्शन के लिए जा सकते हैं। मंदिर सुबह 4 बजे ही खुल जाता है और फिर दोपहर 3:30 बजे तक खुला रहता है उसके बाद 3:30 बजे के बाद मंदिर शाम 6 बजे खुलता है जिसके बाद आप रात्रि 9 बजे तक दर्शन कर सकते हैं।

इसके अलावा आपको बता दें कि आप अगर लम्बी पंक्तियों में नहीं रुकना चाहते तो मंदिर प्रबंधन की तरफ से शीघ्रः दर्शन की व्यवस्था भी की गयी है जिसके लिए आपको 250 रुपये का पास लेना होता है। इसके बाद आप ज़िग-ज़ैग लाइन से ना जाकर सीधे मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार के करीब पहुँच जाते हैं। हालाँकि मंदिर के गर्भगृह में पहुँचने से कुछ देर पहले ही शीघ्र दर्शन वाली पंक्ति सामान्य दर्शन वाली पंक्ति के साथ मिल जाती है।

सामान्य दर्शन पंक्ति के लिये इस पुल से होकर जाना होता है

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शीघ्र दर्शन वाली पंक्ति के लिये इस सिंह द्वार से जा सकते हैं

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हमारे अनुभव के अनुसार आपको कुछ महत्वपूर्ण जानकारी बताना चाहते हैं जैसे कि मंदिर के गर्भगृह में मोबाइल इत्यादि ले जाने की मनाही नहीं है लेकिन गर्भगृह में फोटोग्राफी करना बिलकुल अवैध है। हालाँकि दर्शनों के बाद आप गर्भगृह के बाहर मंदिर के साथ फोटो ले सकते हैं। इसके अलावा आपको बता दें कि गर्भगृह में आपको भक्तों की अत्यधिक भीड़ देखने को मिलेगी जिससे वहां धक्का-मुक्की जैसी स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है तो अगर आपके साथ बुजुर्ग या फिर छोटे बच्चे हैं तो आप जरूर सावधानी रखियेगा। इसके अलावा गर्भगृह में ज्योतिर्लिंग पर आप जलाभिषेक कर सकते हैं साथ ही पुष्प आदि भी चढ़ा सकते हैं। गर्भगृह में मौजूद पंडित आपको दर्शनों में सहायता करते हैं लेकिन इसके बदले में वे आपसे कुछ बड़ी दक्षिणा राशि की भी उम्मीद करते हैं। गर्भगृह में प्रवेश करने और बाहर निकलने का एक ही रास्ता होने की वजह से यहाँ भीड़ नियंत्रित करना एक चुनौती रहती है जिस वजह से भक्तों को दर्शनों के लिए थोड़ी परेशानी का भी सामना करना पड़ता है।

फिर बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शनों के बाद गर्भगृह से बाहर आकर आप सामने शक्तिपीठ मंदिर में माता के दर्शन करने जा सकते हैं। यहाँ आपको भीड़ कुछ कम मिलेगी और माता के दर्शनों के बाद आप परिसर में स्थित बाकी मंदिरों के भी दर्शन कर सकते हैं।

तो अगर आप भी बाबा बैद्यनाथ धाम जाने का प्लान कर रहे हैं तो हमें उम्मीद है कि ऊपर दी गयी जानकारी आपके बेहद काम आएगी। श्री श्री 1008 रावणेश्वर बाबा बैद्यनाथ धाम से जुड़ी जितनी भी जानकारी हमारे पास थी हमने आपसे इस लेख के माध्यम से साझा करने की कोशिश की है। अगर आपको ये जानकारी अच्छी लगी तो कृपया इस आर्टिकल को लाइक जरूर करें और साथ ही ऐसी ही अन्य जानकारियों के लिए आप हमें फॉलो भी कर सकते हैं।

अगर आप ऐसी ही कुछ और जानकारियों के बारे में जानना चाहते हैं तो आप हमारे यूट्यूब चैनल WE and IHANA पर या फिर हमारे इंस्टाग्राम अकाउंट @weandihana पर भी जा सकते हैं।

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