हिमाचल घूम लिया लेकिन 'धाम' का स्वाद नहीं चखा तो हिमाचल यात्रा अधूरी है!

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घुमावदार सड़कें, नदियों में गोते लगाते बच्चे और रहस्य से भरे घने जंगल। कम कहे को ज़्यादा समझिए और जान जाइए कि मैं हिमाचल की बात कर रहा हूँ। हिमाचल के लोग वेज खाना के मामले में एक अलग ही लीक पर चल रहे हैं। सात्विक खाना और उसमें हिमाचल की लज़्ज़त, क्या कहने। दिल बाग बाग हो जाए।

एक ऐसी ही स्पेशल डिश है जिसके बिना आपका हिमाचल की ट्रिप अधूरी रह जाएगी। खाने के विद्वानों से पूछें तो उनके अनुसार ये डिश आपके खाने को 'बैलेंस' करती है। इसलिए जब भी हिमाचल ट्रिप पर जाएँ तो 'धाम' का स्वाद ज़रूर चखें।

कहाँ से आया हिमाचली धाम

कहावत है कि हज़ारों साल पहले एक बार हिमाचल के राजा कश्मीर गए और वहाँ के वाज़वान पर उनका दिल आ गया। अपने खानसामे को उन्होंने ऐसे ही स्वाद वाला कुछ बनाने को कहा। तब जाकर कहीं 'धाम' का अस्तित्त्व आया। तभी से धाम को भगवान का भोग कहा जाता है। बिना अदरक और प्याज़ वाला यह व्यंजन इसीलिए सात्विक भोजन की कैटेगरी में रखा जाता है। अपने में सारे विटामिन और ज़रूरी खनिज लिए इस व्यंजन को सबसे ज़रूरी डिश बताया जाता है।

आप कैसे बना पाएँगे धाम

कहने को हिमाचल छोटा प्रदेश है लेकिन इसके 15 ज़िलों में सबके पास अपनी संस्कृति है, अपना लाइफ़स्टाइल है। इसलिए शिमला का धाम और स्पीति का धाम बिल्कुल अलग-अलग होंगे। इसका स्वाद मिलने वाली सब्ज़ियों, वहाँ की भौगोलिक स्थिति और बनाने वाले के हुनर पर निर्भर करता है।

धाम एक स्पेशल डिश है इसलिए इसको बनाते समय बहुत चीज़ों का ख़्याल रखना पड़ता है। परंपरागत रूप से धाम केवल वनस्पति विज्ञानियों द्वारा तैयार किया जाता था। ब्राह्मण रसोइयों ने इसे अपने पूर्वजों से सीखा। सिर्फ़ इतना नहीं, इसको बनाने के लिए बाक़ायदा स्थानीय पुजारी विशेष तिथि की घोषणा करते हैं।

धाम बहुत मेहनत से बनाया जाने वाला व्यंजन है। अब इसका महत्त्व पहले जितना नहीं रहा है, लेकिन किसी विशेष उत्सव पर इसे ज़रूर बनाया जाता है। हिमाचल ट्रिप पर धाम का आनंद लिए बिना आपका ट्रिप पूरा नहीं होगा।

चंबा धाम

किस्मत तो देखिए, चंबा को ऐसे ही कई व्यंजनों का जन्म स्थान कहा जाता है। यहाँ पर राजमा मद्रा और काला चना को घी के साथ देर तक पकाया जाता है। इसके साथ ही इसमें कढ़ी के साथ मशरूम पुलाव और कुछ ताज़ी सब्जियों को भी डालकर धीमी आँच में देर तक पकाते हैं।

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मंडी धाम

मंडी धाम को मंड्याली धाम भी कहते हैं। इसमें पहले ही मीठे में बूँदी परोसी जाती है। मेन कोर्स में सेपू वड़ी (इसमें काले चने की वड़ी को पालक के साथ डीप फ़्राई करते हैं), मीठा और नमकीन कद्दू, माही की दाल (काली दाल), राजमा और कढ़ी परोसे जाते हैं। जब ये ख़त्म कर लें आप तो अन्त में एक लंबे से गिलास में छाछ भी दिया जाता है जिससे दावत कंपलीट हो जाती है।

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काँगड़ा धाम

काँगड़ा धाम को हिमांचल का सबसे स्वादिष्ट धाम कहा जाता है। इसमें आपको मूँग की दाल के साथ राजमा, चावल और छोले का घुला व्यंजन परोसा जाता है। काँगड़ा धाम यहाँ के ही एक व्यंजन माश दाल से काफ़ी मिलता जुलता है जो मूँग, उड़द और मसूर की दाल से मिलकर बनता है और ऊपर से धुएँ में पकाया हुआ मीठा और इमली खट्टा डाला जाता है। जब आप ये पूरा व्यंजन का स्वाद ले चुकते हैं तो ऊपर से मीठा भात अलग से परोसा जाता है।

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कुल्लू धाम

कुल्लू धाम एक ऐसा स्वादिष्ट और लज़ीज़ व्यंजन है जो आपको घर की सादगी वाला स्वाद देता है। इसमें डाला जाता है छोले मद्रा, काला चना खट्टा, चना दाल और माँ दी दाल। और सबसे अन्त में खाना पूरा करती है मीठी भात।

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ज़रूर आपके मन में भी जिज्ञासा होगी कुछ ऐसा ही स्वादिष्ट जानने की, तो जल्दी से हमसे कमेंट बॉक्स में साझा करें।

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