मिजोरम ट्रेवल गाइड: खूबसूरती के साथ सुकून का पर्याय है पूर्वोत्तर का ये शानदार राज्य

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आपने रिपल इफेक्ट के बारे में सुना है? एक के बाद एक आती समुंदर की लहरें इस रिपल इफेक्ट की वजह से ही होती हैं। पहली लहर ठीक तरह से खत्म भी नहीं हो पाती है और दूसरी लहर उतनी ही तेजी से आ जाती है। यात्राओं और घुमक्कड़ों में भी कुछ ऐसा ही संबंध होता है। आप एक शहर की यादों को बक्से में संजो भी नहीं पाते हैं कि कोई नई जगह आपके इंतजार में तैयार खड़ी रहती है। लेकिन कुछ जगहों से इतना गहरा रिश्ता जुड़ जाता है कि आप उस शहर को कभी छोड़ना ही नहीं चाहते हैं। वो जगह बहुत खूबसूरत होती है। वहाँ के लोग उस जगह की खूबी होते हैं। ढेरों सुंदर चेहरे, बहुत सारे पंछी, घने विशाल पेड़, सुरम्य पहाड़ और पूरे शहर में बिखरी चाय-कॉफी की दुकानें। अब जरा सोचिए अगर ये सब केवल एक जगह में सीमित ना होकर पूरा राज्य ही ऐसा हो तब वो नजारा कितना शानदार होगा। ऐसा ही सुंदर राज्य है मिजोरम। आप मिजोरम आएंगे तो यहाँ की खूबसूरती आपके दिल में घर कर जाएगी।

मिजोरम क्यों आना चाहिए?

शायद ही कोई घुमक्कड़ होगा जिसे उत्तर-पूर्वी राज्यों की खूबसूरती के बारे में नहीं पता होगा। बाकी राज्यों की तुलना में मिजोरम में टूरिज्म पूरी तरह से साफ-सुथरा है। साफ-सुथरा इसलिए क्योंकि मिजोरम वो जगह है जहाँ के लोगों और जगहों की सच्चाई देखकर आपका मन खुश हो जाएगा। मिजोरम में पर्यटन किसी तय ढांचे में नहीं बंधा है। यहाँ मिलने वाली हर जगह की अपनी खूबी और खामियां हैं जिसकी वजह से ये पूरा राज्य ही एक खूबसूरत ऑफ-बीट जगह बन जाता है। मिजोरम प्राकृतिक सुंदरता का खजाना जैसा है। वेदांत पेड़ों से ढकी पहाड़ियों के बीच में डूबते सूरज की लालिमा पूरे राज्य को अपने रंग में समा लेती है। इस बात में कोई दोष नहीं है कि मिजोरम को नीले पहाड़ों का गढ़ भी कहा जाता है। सुबह-सुबह घाटियों से निकलने वाली मखमली धूप पहाड़ियों को इस तरह ढक लेती है कि पूरा इलाका सफेद समुद्र जैसा लगने लगता है। मिजोरम में बहुत सारी झीलें और झरने भी हैं। घाटियों से नीचे आकर आप छोटी पहाड़ियों से घिरे धान के खेत देख सकते भी हैं।

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श्रेय: होलिडीफाई

कहते हैं किसी जगह को खास बनाने में वहाँ के लोगों का बहुत बड़ा हाथ होता है। मिजोरम की लोकल मिजो जनजाति ने अपने राज्य के विकास और रख-रखाव में एकदम कसर नहीं छोड़ी है। मिजोरम में आप इन लोगों से मिल सकते हैं। मिजो परंपरा और संस्कृति से जुड़ने का अच्छा मौका है। मिजो जनजाति के सभी त्योहार काफी रंगीन होते हैं। पारंपरिक गानों और डांस में उनका अपने कल्चर की तरफ लगाव साफ दिखाई देता है। कुल मिलाकर मिजोरम में वो हर चीज है जो एक घुमक्कड़ चाहता है। मिजोरम में घूमने और सीखने के लिए इतनी चीजें हैं कि आप खुश हो जाएंगे। मिजोरम यकीनन टिपिकल पर्यटन मैप का हिस्सा नहीं है। लेकिन इस राज्य को टटोलने के लिए असंख्य कारण भी हैं। अगर आप अब भी टूरिस्टी जगहों को घूमने में लगे हुए हैं, तो आपको इस सुदूर राज्य का प्लान जरूर बनाना चाहिए।

क्या देखें?

मिजोरम में देखने और जानने के लिए इतनी चीजें हैं कि एक बार घूमने से आपका मन नहीं भरेगा। पहाड़ी खूबसूरती से लैस इस राज्य में मनमोहक घाटियों से लेकर कलकल बहते झरने हैं। अगर आप किसी परफेक्ट हॉलिडे डेस्टिनेशन की तलाश में हैं तो मिजोरम के नजारों को देखकर आप ठहर जाएंगे।

1. आइजोल

किसी भी राज्य का राजधानी शहर उस राज्य के लिए सबसे खास होता है। मिजोरम में भी ऐसा ही है। प्रकृति की गोद में बसी ये जगह भव्य होने के साथ-साथ बेहद खूबसूरत भी है। आइजोल समुद्र तल से लगभग 1132 मीटर की ऊँचाई पर है इसलिए यहाँ पहाड़ी सौंदर्य का भंडार है। आइजोल में आप सोलोमन मंदिर, मिजोरम राज्य संग्रहालय और बर्रा बाजार जैसी जगहों पर घूम सकते हैं। इसके अलावा आप तामदिल झील की सैर करने जा सकते हैं। ये झील मुख्य शहर से 85 किमी. दूर है। आइजोल पैदल घुमक्कड़ी के लिए एकदम सही शहर है। पैदल चलते हुए यहाँ के बाजारों में घूमने का अलग मजा है। कुल मिलाकर आइजोल प्राकृतिक खूबसूरती और सांस्कृतिक दृष्टि दोनों में ही मिजोरम का सबसे समृद्ध शहर है।

2. चम्फाई

चम्फाई को मिजोरम का व्यवसायिक शहर कहा जा सकता है। क्योंकि ये जगह म्यांमार सीमा के बेहद पास स्थित है इसलिए ये जगह और भी खास हो जाती है। चम्फाई के कुछ हिस्सों से म्यांमार में खड़े पहाड़ों का दृश्य भी देखा जा सकता है। 1678 मीटर की ऊँचाई पर बसा ये शहर शानदार पहाड़ी नजारों का घर है। चम्फाई में आप मिजोरम का सबसे बड़ा समतल मैदान देख सकते हैं। आप यहाँ पुरानी गुफाओं और फलों के बगीचों की सैर कर सकते हैं। चम्फाई को मिजोरम का फलों का कटोरा भी कहा जाता है। इसके अलावा चम्फाई ऐतिहासिक नजरिए से भी बेहद खास है। चम्फाई में आप मुरलेन नेशनल पार्क, रिह दिल झील, लेंगटेंग वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी, मुरा पार्क, थासियामा सेनो नेंहना और क्वलकुलाह जैसी जगहों पर भी घूम सकते हैं।

3. लुंगलेई

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श्रेय: इंडिया.कॉम

लुंगलेई का मतलब होता है चट्टान का पुल। आइजोल के बाद लुंगलेई मिजोरम का दूसरा सबसे बड़ा शहर है। लेकिन ये आइजोल से भी ज्यादा ऊँचाई पर है। इतनी ज्यादा ऊँचाई पर बसा होने की वजह से लुंगलेई में शानदार नजारों की बिल्कुल कमी नहीं है। जो लोग शहरीय शोर और भीड़ से बचना चाहते हैं उन्हें लुंगलेई आना चाहिए। ये जगह किसी शांत समंदर जैसी है जहाँ आपको सुकून मिलेगा। प्रकृति से लगाव रखने वाले लोगों के लिए लुंगलेई में बहुत कुछ है। आप खंगलांग वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी, साजा वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी और सैकुटी हॉल देख सकते हैं।

4. सेरछिप

सेरछिप को मिजोरम का सबसे खूबसूरत रहस्य कहा जा सकता है। अगर आप शांति और सुकून की चाहत रखते हैं तो आपको सेरछिप से बढ़िया जगह नहीं मिलेगी। सेरछिप आइजोल से 112 किमी. दूर है और कई खट्टे फल वाले पेड़ों के लिए जाना जाता है। सेरछिप में मिजोरम का सबसे ऊँचा झरना भी है। मिजोरम का ये दिलकश शहर प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ अपने लाजवाब हैंडीक्राफ्ट के लिए भी मशहूर है। सेरछिप में आप वंटावंग वाटरफॉल, चिंगपुई थलन और थेंजोल डियर पार्क भी घूम सकते हैं।

5. लॉन्गतलाई

लॉन्गतलाई मिजोरम की उन चुनिंदा जगहों में से है जहाँ का मोहक लैंडस्केप आपको खुश कर देगा। लॉन्गतलाई की खास बात ये है कि ये जगह बांग्लादेशी सीमा के बहुत पास है। जिसकी वजह से भारत में होते हुए भी आपको बंगलादेश की कुछ झलकियाँ मिल जाती हैं। लॉन्गतलाई का काफी हिस्सा घने जंगलों से बना हुआ है इसलिए यहाँ वन्य जीवन से लगाव रखने वाले लोगों के लिए बहुत कुछ है। लॉन्गतलाई में आप लेंगपुई चोटी, लोहावाका वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी, सिनेमोन वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी जैसी जगहों पर घुमक्कड़ी का आनंद ले सकते हैं।

कब जाएं?

मिजोरम आने के लिए आपको समय चुनने की आजादी है। आप साल के किसी भी समय मिजोरम आ सकते हैं। अगर आप सबसे सही समय आना चाहते हैं तो आपको अक्टूबर से मार्च के बीच में आना चाहिए। इस समय मिजोरम का मौसम सबसे अच्छा रहता है। बारिश के मौसम में मिजोरम आने से बचना चाहिए। पहाड़ों के लिए बारिश का समय अक्सर परेशानी वाला होता है। ऐसे में लैंडस्लाइड का खतरा होने के साथ-साथ रिमोट जगहों पर पहुँचना भी मुश्किल हो जाता है।

इनर लाइन परमिट

बाकी उत्तर-पूर्वी राज्यों की तरह मिजोरम आने के लिए भी आपको आईएलपी यानी इनर लाइन परमिट लेना जरूरी होता है। खास बात ये है कि मिजोरम के लिए आईएलपी आप ऑनलाइन नहीं ले सकते हैं। आईएलपी के लिए आपको अलग-अलग राज्यों में बने मिजोरम हाउस में आवेदन करना होता है। आमतौर पर आईएलपी मिलने में केवल एक दिन का समय लगता है इसलिए इसमें कोई दिक्कत नहीं आएगी। कोलकाता, सिलचर, शिलांग, गुवाहाटी और नई दिल्ली में बने तमाम मिजोरम हाउस से आप आईएलपी ले सकते हैं। मिजोरम हाउस शनिवार और रविवार को बंद रहते हैं इसलिए जाने से पहले सभी जरूरी जानकारी जुटा लेनी चाहिए। अगर आप फ्लाइट के रास्ते मिजोरम आ रहे हैं तो आप आइजोल के लैंगपुई एयरपोर्ट से भी आईएलपी बनवा सकते हैं। ध्यान देने वाली बात ये है कि एक बार में ये आईएलपी केवल 7 दिनों के लिए ही मान्य होता है। इसलिए अगर आप मिजोरम में लंबे समय के लिए रहना चाहते हैं तो अलग-अलग समय सीमा के लिए पहले से आईएलपी बनवा लेना चाहिए।

कहाँ ठहरें?

मिजोरम में ठहरने के लिए सबसे अच्छी जगह है टूरिस्ट लॉज। ये लॉग मिजोरम पर्यटन विभाग द्वारा चलाए जाते हैं तो बाकी होटलों और गेस्ट हाउस के मुकाबले अच्छे और सस्ते विकल्प हैं। ये सभी लॉज एकदम सटीक जगहों पर बने हुए हैं जिसकी वजह से आपको घूमने में भी कोई दिक्कत नहीं आएगी। आप चाहें तो आइजोल के होटलों में भी रुक सकते हैं लेकिन इसके लिए आपको ज्यादा पैसे देने पड़ सकते हैं।

कैसे पहुँचें?

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मिजोरम आने के लिए आपके पास कई विकल्प हैं। आप फ्लाइट, रोड और ट्रेन में से किसी भी रास्ते मिजोरम आ सकते हैं। मिजोरम आने के लिए सबसे पहले आपको आइजोल आना चाहिए।

फ्लाइट: आइजोल का लैंगपुई एयरपोर्ट सबसे नजदीकी एयरपोर्ट है। ये देश के सभी बड़े शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुए है इसलिए आपको कोई दिक्कत नहीं होगी। कोलकाता, नई दिल्ली, मुंबई और गुवाहाटी जैसे शहरों से आइजोल के लिए सीधी फ्लाइट्स आसानी से मिल जाती हैं।

ट्रेन: आइजोल में रेलवे स्टेशन नहीं है। मानू और सिलचर सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन हैं जो आइजोल से 75 और 180 किमी. की दूरी पर हैं। सिलचर पहुँचने के लिए आप नई दिल्ली से ट्रेन ले सकते हैं। हालांकि सिलचर के लिए उतनी ट्रेनें नहीं हैं लेकिन अगर पहले से प्लानिंग कर लेंगे तो आपको आसानी से ट्रेन मिल जाएगी।

रोड: अगर आप फ्लाइट से नहीं आना चाहते हैं तो गुवाहाटी से आइजोल पहुँचने का दूसरा सबसे बढ़िया तरीका है बस से आइए। गुवाहाटी से आइजोल लगभग 470 किमी. दूर है जिसके लिए आपको गुवाहाटी से ओवरनाइट बसें आसानी से मिल जाएंगी। वैसे ये रास्ता कुल 15 से 17 घंटों में तय किया जा सकता है। लेकिन क्योंकि पहाड़ी इलाकों में सड़कों पर सफर करना अनिश्चित होता है इसलिए 20 से 22 घंटे तय ही समझिए।

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