पराशर झील ट्रेक: पहली मुलाकात से शादी तक ले गया ये सफर

Tripoto
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हम सभी के मन में बॉलीवुड फिल्मों जैसी एक लव स्टोरी की ख्वाहिश हमेशा रहती है मगर ये ख्वाहिश कभी पूरी नहीं हो पाती | लेकिन सौम्या और सारांश की लव स्टोरी कोई ऐसी वैसी कहानी नहीं बल्कि रोमांटिक फिल्मों की स्क्रिप्ट की तरह रोमांच और प्यार से भरी है |

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सारांश एक स्टार्टअप के लिए मोबाइल ऐप्स बनाते हैं और सौम्या स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े एक NGO में काम करती हैं। दोनों ही ट्रेकिंग के बड़े शौकीन हैं | तीन साल पहले सौमया अपने कुछ दोस्तों के साथ मंडी पहुँच गयी और वहाँ से उन्होनें पराशर झील की सैर करने का प्लान बनाया | निकलने से कुछ देर पहले ही एक दोस्त ने किसी वजह से आने से मना कर दिया लेकिन अपनी जगह पर अपने एक दोस्त को ज़रूर शामिल करवा दिया, और ये दोस्त था सारांश |

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वैसे तो पराशर झील की चढ़ाई आसान है मगर इन दोनों को रास्ते में भारी बारिश का सामना करना पड़ा जिसके चलते इन दोनों की लव-स्टोरी शुरू हुई | ट्रेक खत्म होने पर सभी थक कर अपने कमरों में आराम करने निकल पड़े, मगर इन दोनों प्रेमियों की आँखों से तो नींद कोसों दूर थी | झील के किनारे टहलते हुए इन दोनों ने फिजिक्स के नियमों से लेकर लोगों के दुख-दर्द की बातें कर डाली | और इस तरह से इनकी प्रेम कहानी की शुरुआत हुई |

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दिल्ली आने के बाद इन दोनों की मुलाकात एक डीकैथलॉन सेल में भी हुई जहाँ इन्होनें साथ में और यात्राएँ करने का मन बनाया |

"अगर किसी को गहराई से समझना है तो उसके साथ यात्रा करें"

ये दोनों आने वाले सालों में और कई ट्रेक जैसे सार पास, हम्पता पास, रूपकुंड, खीर-गंगा, करेरी झील और गोइचाला साथ घूमने गये |

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लगभग तीन साल साथ गुज़ारने और कई ट्रेक पर साथ जाने के बाद इस प्रेमी जोड़े ने शादी करने की सोची | मगर ये दोनों ही कोई साधारण सी होटल के बैंक्वेट हॉल या किसी बड़े महल में होने वाली शादी नहीं चाहते थे | शादी करने के लिए इनके ज़हन में कई जगहें थी जैसे रूपकुंड या चितकुल, बुगयाल और हम्पता पास | मगर जल्द ही उन्हें एहसास हुआ कि शादी करने के लिए अगर कोई पर्फेक्ट जगह होगी तो वो होगी पराशर झील,वो जगह जहाँ उनकी पहली मुलाकात हुई थी |

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सिर्फ हिंदू परंपराओं से शादी करने के बजाय उन्होंने पूरी दुनिया की सभ्यताओं से शादी की पसंदीदा रस्में चुनीं और उसी हिसाब से अपी शादी की|

कोर्ट मैरिज की सभी औपचारिकताएँ दिन में पूरी कर दी गयी थी, और रात होते ही दोनों पाराशर झील की ओर बस मैं बैठकर निकल पड़े | उस दिन हवा चलने के साथ ही ठंड भी थी, मगर इन दोनों को तो यही पसंद था | मेहमानों की सूची में करीबी दोस्तों और रिश्तेदारों को मिलाकर कुल 15 ही लोग थे |

"पराशर झील की ओर ट्रेक करते हुए हम दोनों हिमालय की गोद में मिले थे | तीन साल बाद हमने उसी पहाड़ पर शादी की | कोई दिखावा नहीं, बस प्यार ही प्यार |"

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