यात्रा - एक व्याख्यान

Tripoto
19th Aug 2019
Photo of यात्रा - एक व्याख्यान by Praveen Gupta (pk)

यूं तो यात्रा शब्द ही अपने आप में बहुत से रहस्य सहेजे हुए है । पर जब हम यात्रा अथवा सफर की बात करते है तो इसके कई प्रकार आ जाते है जैसे लौह पथ गामिनी यात्रा , बस यात्रा , छोटी यात्रा , पैदल यात्रा , परिवार के साथ की गई यात्रा , गाव की यात्रा , बड़े शहर की यात्रा , पहाड़ी यात्रा ,  बड़ी यात्रा , ए सी में कि गई यात्रा , जनरल बोगी में कि गई यात्रा और भी कई प्रकार है ।

इन यात्राओं को करने पर हमें अपने सफ़र में विचित्र या फिर कई प्रकार , जाती , सोच के लोग मिलते है और फिर वार्तालाप का सिलसला शुरू हो जाता है । अब ये जो लोग है और इनकी कहानियां आप सुनेगे तो आप नतमस्तक होना चाहेंगे । वैसे इस वर्ग विशेष के लोग अक्सर छोटे तबके के सामान्य डिब्बे में चलने वाले लोग है क्योंकि की ए सी में चलने वाले अधिकतर व्यक्ति यात्रा के दौरान चुप चाप अपने कम्बल ले के लेटना पसंद करते है  बजाय इसके कि सफर को बातो से और अपनी अपनी कहानियों से मजेदार बनाया जाए ।

जिन सामान्य व्यक्तियों की बात कर रहा हूं अक्सर चलचित्र भी इन्हीं से प्रेरित होते है आप लगभग कोई भी चलचित्र उठा के देख सकते है आपको पता चल जाएगा कहानियां कहा और किस तबके से आती है ।

अपने विद्यालय के समय मैंने ऐसी ही बहुत सी यात्रा कि है ।
घर से दूर रहकर पढ़ना और 2 या 3 दिन का अवकाश मिलते ही घर के लिए निकल लेना । उस समय तो यही जीवनशैली थी । तो इन्हीं छोटी छोटी यात्राओं में मैंने बहुत से लोगो की जीवन की रोमांचक कहानियों को टटोला । वो भी क्या दिन थे कोई फिक्र ना थी । तो इन्हीं लोगो से गुफ्तगू करते करते वक्त कब गुजर जाता था पता ही नहीं चलता था ।

इसी यात्रा कि एक कड़ी रमेश ( काल्पनिक नाम ) महज उसकी उम्र 22 साल रही होगी जब मै मिला था उससे । उसने बताया कि वो 10 साल पहले घर वालो से कुछ बहस होने पर घर छोड़ कर भाग गया मतलब जब वो 12 साल का रहा होगा फिर दिल्ली आ कर छोटे मोटे ढाबे पर काम करके अपनी रोजी रोटी चलाने लगा । अब वह 10 साल बाद अपने घर जा रहा था उसके गांव वालो से पता चला कि उसके बहन की शादी है तो उससे रुका ना गया  और उसने ट्रेन पकड़ ली । अब सोचने वाली बात यह है कि उसने कैसे और किन परिस्थितियों में जीवन यापन शुरू किया होगा ।

ऐसा ही एक किस्सा याद आता है मुझे असम के एक निवासी का जो चाय का व्यापार किया करता था बड़ी ही मुश्किल से उसने अपने इस व्यापार को खड़ा किया क्या क्या दिक्कतें अाई और किन किन लोगो ने उसका साथ छोड़ दिया । पूरी कहानी सुनाई ।

तो ऐसे ही बहुत सारे किस्से है पुराने मेरी जिंदगी के जो बीती रात ताजा हो गए । क्योकी बड़े सालो बाद मुझे फिर से ऐसी एक यात्रा का मौका मिला । मै भूल सा गया था ऐसी कहानियां जो निचले तबके के लोगो के बीच से आती है बहुत ही रोमांचक और मुस्किलो से भरी होती है ।

आपके जीवन में भी मेरे ख्याल से  ऐसी ही बहुत सी यात्राएं होंगी और इन यात्राओं के बीच मिले लोग या लोगो की कहानियों ने आपको प्रभावित जरूर किया होगा। तो इस प्रकार केवल प्राकृतिक दृश्यों से ही नहीं अपितु जीते जाते लोगो की जीवन गाथा को भी सुने और उनके अनुभव से कुछ सीख सके तो सीखे ।

अगर यात्रा या सफर पर लिखना शुरू किया जाए तो एक ग्रंथ तैयार किया जा सकता है । वैसे अगर लिखना जारी रखा  जाए तो और भी बहुत कुछ है लिखने को  लेकिन मैं अपने लेख को यही पर विराम देता हूं ।  आप भी अपने विचारो को एक दूसरे के साथ साझा करे और ये जरूर बताएं ये लेख कैसा लगा आपको ।

इन छोटी छोटी खुशियों को ना कर यू बेकार ,
जी ले हर पल को जहां हो लोग चार ।
ना जाने कब खत्म हो जाए ये सफर ,
बनता जा हर किसी का हमसफ़र ,
करता जा सफर , करता जा सफर ।।

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