अपने व्यापार को बढ़ाना चाहतें हैं तो चलें आएं, राजस्थान के चमत्कारी श्री सांवलिया सेठ मंदिर 

Tripoto
16th Jun 2021
Photo of अपने व्यापार को बढ़ाना चाहतें हैं तो चलें आएं, राजस्थान के चमत्कारी श्री सांवलिया सेठ मंदिर by Walia Sachin

जी हाँ, आपने सही पड़ा। राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के मण्डफिया स्थित कृष्ण मंदिर है, जो श्री सांवलिया सेठ के नाम से प्रसिद्ध है। राजस्थान के चित्तौड़गढ़ का एक ऐसा रहस्यमयी मन्दिर श्री सांवलिया सेठ है जहांँ श्रद्धा से जाने मात्र ही आपके व्यापार में वृद्धि होना स्वाभाविक है। यह मन्दिर व्यापरियों के बिजनेस पार्टनर के नाम से भी प्रसिद्ध है। यहां दूर दूर से श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं। 

व्यापार बढ़ाने और अधिक मुनाफा कमाने के लिए व्यापारियों के बीच अक्सर पार्टनरशिप होती है। नफा और नुकसान के लिए वे दोनों ही जिम्मेदार होते हैं, मगर यहां तो खुद भगवान को पार्टनर बनाया जाता है और व्यापार में फायदा होने पर निश्चित धन राशि भगवान तक पहुंचाई भी जाती है। हर माह औसतन 3 से 3.5 करोड़ का चढ़ावा आता है। रुपयों की गिनती सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में होती है। दानपात्र से निकले रुपयों की गणना के नजारे को देखने के लिए श्रृद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। आप भी इस नजारे को देखने के लिए जरूर पधारें।

Day 1

सांवलिया सेठ मन्दिर का बाहरी दर्शनचित्तौडग़ढ़ राजस्थान

Photo of अपने व्यापार को बढ़ाना चाहतें हैं तो चलें आएं, राजस्थान के चमत्कारी श्री सांवलिया सेठ मंदिर by Walia Sachin

श्री सांवलिया सेठ मन्दिर का भीतरी दर्शन

Photo of अपने व्यापार को बढ़ाना चाहतें हैं तो चलें आएं, राजस्थान के चमत्कारी श्री सांवलिया सेठ मंदिर by Walia Sachin

मन्दिर का इतिहास

सांवलिया सेठ मीरा बाई के वही गिरधर गोपाल हैं जिनकी वे पूजा किया करती थीं। मीरा बाई संत महात्माओं के साथ इन मूर्तियों के साथ भ्रमणशील रहती थीं। ऐसे ही एक दयाराम नामक संत थे। जिनके पास ये मूर्तियां थीं। जब औरंगजेब की मुग़ल सेना मंदिरों को तोड़ रही थी। मेवाड़ राज्य में पंहुचने पर मुग़ल सैनिकों को इन मूर्तियों के बारे में पता लगा। तब संत दयाराम ने प्रभु प्रेरणा से इन मूर्तियों को बागुंड-भादसौड़ा के खुले मैदान में एक वट-वृक्ष के नीचे गड्ढा खोद कर दबा दिया। जिससे मूर्तियों को बचाया जा सके। 

सन 1840 में गांव मंडफिया निवासी भोलाराम गुर्जर नाम के ग्वाले को एक सपना आया कि भादसोड़ा-बागूंड के मैदान में 4 मूर्तियां ज़मीन में दबी हुई हैं, जब उस जगह पर खुदाई की गई तो भोलाराम का सपना सही निकला और वहां से एक जैसी 4 मूर्तियां प्रकट हुईं। फिर उदयपुर मेवाड़ राज-परिवार के भींडर ठिकाने की ओर से सांवलिया जी का मंदिर बनवाया गया।

श्रद्धालुओं की मनोकामना पूर्ण होने के बाद का नज़ारा

गत वर्ष दीपावली के बाद आई वाली अमावस्या को खोले गए दो माह के दानपात्र में 5 करोड़ 55 लाख 70 हजार की राशि निकली थी। पिछली बार की तुलना में इस बार चढ़ावे में 15 प्रतिशत वृद्धि रिकॉर्ड दर्ज की गई है। व्यापार में फायदा होने पर निश्चित धन राशि भगवान तक पहुंचाई जाती है। यूं हीं नहीं श्री सांवलिया सेठ जी को बिजनेस पार्टनर कहा जाता रहा है। दोस्तों आप भी श्रद्धा पूर्वक इस मन्दिर पधारें और इस मन्दिर की वास्तविकता जानें।

दोस्तों आपको मेरा यह ब्लॉग कैसा लगा कमेन्ट बॉक्स में बताएँ। मेरा अगला ब्लॉग भी जल्दी आने वाला है तब तक के लिए मेरा प्यार भरा नमस्कार।

जय भारत

कैसा लगा आपको यह आर्टिकल, हमें कमेंट बॉक्स में बताएँ।

अपनी यात्राओं के अनुभव को Tripoto मुसाफिरों के साथ बाँटने के लिए यहाँ क्लिक करें।

बांग्ला और गुजराती के सफ़रनामे पढ़ने के लिए Tripoto বাংলা  और  Tripoto  ગુજરાતી फॉलो करें।

रोज़ाना Telegram पर यात्रा की प्रेरणा के लिए यहाँ क्लिक करें।