ये हैं मशहूर हिल स्टेशनों के 7 कम भीड़ भरे विकल्प

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क्या यह पूरी तरह से निराशाजनक नहीं है जब आप हफ्तों प्लान करके और घंटों यात्रा कर के ऐसी जगह पर आ जाते हैं जहाँ आपके शहर से भी ज्यादा भीड़ है? यह आजकल बहुत अधिक होता है क्योंकि हर कोई छुट्टियों के दौरान उन्हीं लोकप्रिय पहाड़ी स्टेशनों की यात्रा करता है। इस कारण से छोटे से इन पहाड़ी क्षेत्रों में धुंआ और प्रदूषण भर जाता है। और तो और ट्रैफिक जैम, समय की बर्बादी और इन स्थलों पर अच्छे होटलों की बुकिंग अलग समस्या पैदा कर आपके वीकेंड को बर्बाद कर देती है।

अपनी चिंताओं को दूर करने और वास्तव में छुट्टी पर जाने के लिए आप आसानी से ज़्यादा सुंदर और कम भीड़ वाली जगह जा सकते हैं। मैंने हमारे देश की बेस्ट 7 कम भीड़ वाले पहाड़ी इलाकों की लिस्ट तैयार की है:

1. शिमला के बजाय नारकंडा

भारत में सबसे लोकप्रिय पहाड़ी स्टेशन होने के नाते इसके नुकसान हैं। साल का कोई भी समय हो शिमला लोगों से भरा होता है। इसलिए नारकंडा, आस-पास का एक शानदार विकल्प है अगरआप हिमाचल के पहाड़ों में रहना चाहते हैं, शिमला के हलचल और शोर से परेशान हुए बिना।

शिमला से दूरी और समय: 62.8 कि.मी.  , 2 घंटे

2. कसौली के बजाय बारोग

आखिरी बार जब मैंने दिल्ली से कसौली की यात्रा की, तो मुझे "राजधानी के निकटतम पहाड़ी स्टेशन" तक पहुँचने में नौ घंटे से ज्यादा समय लगा। यही वह समय था जब मैंने वीकेंड पर इस जगह पर कभी भी ना जाने की ठान ले थी । जब मैंने खोजा, वहाँ बारोग नाम का एक खूबसूरत छोटा पहाड़ी स्टेशन था, जहाँ कसौली के सभी आकर्षण थे।

कसौली से दूरी और समय: 17.7 कि.मी., 43 मिनट ।

3. कुफरी के बजाय चैल

व्यापक रूप से शिमला के विकल्प के रूप में जाना जाता है, कुफरी धीरे-धीरे बढ़ते लेन और क्षेत्र के चारों ओर अच्छे होटलों की कमी के कारण शिमला की तरह ही बन गया है। तो मैं सलाह देता हूँ वहाँ से एक और घंटे आगे बढ़ कर चैल के शांत गाँव जैसे वातावरण का आनंद लें।

कुफरी से दूरी और समय: 31.8 कि.मी., 1 घंटा 8 मिनट

4.नैनीताल के बजाय रामगढ़

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श्रेय: बुकिंग

नैनीताल एक सुंदर पहाड़ी स्टेशन है! और यह कितने दुःख की बात है कि यह किसी को आजकल अपनी सुंदरता का आनंद लेने के लिए पर्याप्त शांत नहीं लगता। अगर आप नैनीताल में लंबी कतारों से बचना चाहते हैं, तो इसके बजाय रामगढ़ के सपने जैसे दिखने वाले छोटे शहर में जाएँ, जो सिर्फ एक घंटा दूर है।

नैनीताल से दूरी और समय: 35.1 कि.मी., 1 घंटा 10 मिनट

5. धर्मशाला के बजाए पालमपुर

वीकेंड आता है और सभी फ़र्ज़ी-हिप्पी किसी भी तरह का निरवाना ढँढते हुए मैक्लोडगंज, धर्मशाला या त्रियुंड चले जाते हैं। ये तीन जगह लोगों की भीड़ से भरे हुए हैं और इसलिए एकमात्र बुद्धिमान फैसला निकटतम पालमपुर गाँव में जाना है, जो कि प्राकृतिक दृश्यों और पुराने ज़माने के आकर्षण से भरपूर है।

धर्मशाला से दूरी और समय: 36 कि.मी., 1 घंटा

6. ऊटी के बजाय कून्नूर

अगर आप साउथ में रह रहे किसी दोस्त से उनके वीकेंड पर घूमने के प्लैन के बारे में पूछेंगे तो शायद उनका जवाब ऊटी ही होगा, क्योंकि यह क्षेत्र में सबसे लोकप्रिय पहाड़ी स्टेशन है। और जब आप ऊटी जाते हैं, तो आप वहाँ हजारों अन्य निराशाजनक लोगों को भीड़ की शिकायत करते हुए पाते हैं। इस तरह के दृश्यों से अधिक निराशा को रोकने के लिए, आपको इसके बजाय कूनूर में रहने का विकल्प चुनना चाहिए, जो सिर्फ एक घंटे से भी कम की दूरी पर है।

ऊटी से दूरी और समय: 21 कि.मी., 46 मिनट

7. डलहौज़ी के बजाय चम्बा

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श्रेय: बुकिंग

अंत में, लिस्टेड सभी जगहों में से मेरी निजी पसंदीदा जगबह। और यह अच्छी बात है कि ये चंबा के आस-पास के इलाके में बसा है। चूंकि डलहौज़ी हनीमूनिंग जोड़ों के बीच बेहद लोकप्रिय है, इसलिए यह हमेशा भरा रहता है। अगर आप वास्तव में अपने प्रियजन के साथ अपने जीवन का सुखद समय चाहते हैं, तो चंबा में ठहरें।

डलहौज़ी से दूरी और समय: 54 कि.मी., 1 घंटा 40 मिनट

तो अपने अगले पहाड़ी छुट्टी पर, साधारण से अलग सोचें और कुछ हटके जगह पर जाएँ।

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