अरुणिमा सिन्हा बनी माउंट विनसन को फ़तह करने वाली दुनिया की पहली दिव्यांग महिला

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2013 में माउंट एवरेस्ट को फ़तह करने वाली दुनिया की पहली दिव्यांग महिला - भारत की अरुणिमा सिन्हा ने एक और कारनामा कर के अपने आप और देश को गौरवान्वित किया है | इस बहादुर पर्वतारोही दिव्यांग महिला ने अंटार्कटिका की सबसे ऊँची चोटी माउंट विनसान पर भी फ़तह हाँसिल कर ली है |

पद्मश्री पदक से नवाज़ी गयी इस जाँबाज़ पर्वतारोही ने इस ऐतिहासिक कारनामे के पल को अपने ट्विटर हैंडल पर शेयर किया और पुर देश को गौरवान्वित कर दिया |

"अब इंतज़ार ख़त्म हुआ | हमें आप के साथ यह विश्व रिकॉर्ड बाँटते हुए बहुत ही खुशी महसूस हो रही है | दुनिया की पहली दिव्यांग महिल जिसने अंटार्कटिका की सबसे ऊँची चोटी पर फ़तह हाँसिल की, वो हमारे देश भारत से है | "

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प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी अरुणिमा सिन्हा की इस उपलब्धि पर उन्हें ट्विटर पर बधाई दी |

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"बेहतरीन! सफलता की नई ऊंचाइयों को छूने के लिए @सिन्हा_अरुणिमा को हार्दिक बधाई। अरुणिमा भारत का गौरव हैं जिन्होंने अपनी मेहनत और लगन से अपनी एक अलग पहचान बनाई है | उनकी भविष्य की आकांक्षाओं के लिए उन्हें शुभकामनाएं, " प्रधान मंत्री मोदी ने ट्वीट किया।

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अरुणिमा हर महाद्वीप की सबसे ऊँची चोटी पर भारत का तिरंगा झंडा फहराने के अपने सपने के और भी करीब हैं | अरुणिमा बताती हैं "मेरी योजना छह महाद्वीपों की छह सबसे ऊँची चोटियों पर चढ़ने की है | समय समय पर अभी भी मेरे शरीर में दर्द उठता रहता है | मुझमे एक प्लेट और एक रॉड डाली गयी है | "

अरुणिमा ने पहले से ही 5 चोटियों - एशिया के एवरेस्ट, अफ्रीका के किलिमंजारो, यूरोप के एल्ब्रस, ऑस्ट्रेलिया के कोसिज़को, अर्जेंटीना के एकांकागुआ और इंडोनेशिया के कार्स्टेंस पिरामिड पर फ़तह हासिल की हुई है।

"जब मैने एक पर्वतारोही बनने का फ़ैसला लिया तो मेरे परिवार ने मेरी सबसे ज़्यादा हौंसला अफज़ाई की | पहले मेरी माँ को मेरे बारे में काफ़ी चिंता हो रही थी मगर मेरे फ़ैसले की दृढ़ता देख कर वो भी मेरी सबसे बड़ी समर्थक बन गयीं | " अरुणिमा बताती हैं |

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अरुणिमा एक पर्वतारोही ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर की वॉलीबॉल और फुटबॉल की खिलाड़ी भी है।

साल 2011 में लखनऊ से दिल्ली के लिए पद्मावती एक्सप्रेस ट्रेन पकड़ते हुए अरुणिमा घायल हो गयी थी | इस भयावह हादसे में ट्रेन लुटेरों ने अरुणिमा का बैग एवं चेन लूटने की कोशिश में अरुणिमा को रेल की जनरल बोगी से बाहर फेंक दिया |

जैसा कि कहा जाता है ... "जो आपको मार नहीं पाता वो आपको और भी मजबूत बना देता है।" इस भयावह दुर्घटना ने उसे सपने देखने और उन्हें सच करने से नहीं रोका। सभी बाधाओं के खिलाफ अपने सपने पूरे करने में जुटी अरुणिमा लाखों लोगों के लिए एक प्रेरणा हैं।

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