विश्व सेना दिवस- इन कठिन जगहों पर रह कर हमारे जोशीले जवान करते हैं हमारी रक्षा

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Photo of विश्व सेना दिवस- इन कठिन जगहों पर रह कर हमारे जोशीले जवान करते हैं हमारी रक्षा by Deeksha Agrawal

अगर हम उन चीजों की बात करें जिनकी अहमियत हमें धीरे-धीरे समझ आती है तो आजादी उसमें सबसे पहला नाम होगा। घूमने की आजादी, कुछ भी कहने, सुनने और करने की आजादी। इस आजादी की भी एक कीमत है। एक वजह है जिसके चलते हम अपनी सुरक्षा की चिंता किए बिना कहीं भी घूम सकते हैं। ये कीमत जो हम नहीं देते हैं। लेकिन हमारे बदले में कुछ और लोग ये कीमत चुकाते हैं। वो लोग हैं भारतीय सेना के जवान। भारत ऐसी जगह पर स्थित है कि ये अलग-अलग तरफ से कुल 7 देशों से घिरा हुआ है। इस वजह से हमारी सुरक्षा और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। इसका ध्यान रखने के लिए देश में कई जगहों पर सेना के स्टेशन और कैंप बनाए गए हैं। लेकिन खास बात ये है कि इनमें से सेना के कुछ स्टेशन फेमस पर्यटन स्थलों के पास भी हैं। इन सभी जगहों की सुरक्षा सेना करती है इसलिए अगर आप इनमें से किसी जगह पर जाएँ तो जिम्मेदारी के साथ घूमें।

1. नाथूला दर्रा, सिक्किम

भारत के उत्तर पूर्वी राज्यों की खूबसूरती देखने केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया से लोग आते हैं। सिक्किम भी इस खूबसूरत टुकड़ी का छोटा-सा राज्य है। सिक्किम छोटा जरूर है लेकिन ये राज्य इतना सुंदर है कि आप इसमें खो जाना चाहेंगे। सिक्किम में ऐसी बहुत सारी जगहें हैं जो अपने आप में बेहद शानदार हैं। उनमें से एक है नाथूला दर्रा। करीब 44 सालों पहले भारत और चीन के बीच व्यापार करने के लिए एक रास्ता हुआ करता था। वो रास्ता सिल्क रूट के नाम से जाना जाता था। लेकिन भारत और चीन के बीच हुए युद्ध के बाद इस रास्ते को बंद कर दिया गया था। नाथूला पास वहीं रास्ता है। अगर आप सिक्किम घूमने जा रहे हैं तो गंगटोक से नाथूला दर्रा घूमने का परमिट लेना बिल्कुल ना भूलें। ये जगह इतनी खूबसूरत है कि आपका मन मोह लेगी। सीमा के बेहद पास बसे होने की वजह से इस पास की सुरक्षा सेना के जवान करते हैं।

2. सियाचिन ग्लेशियर, कश्मीर

हिमालय के कराकोरम पर्वतमाला में बसा ये ग्लेशियर दुनिया का सबसे बड़ा ग्लेशियर है। बाल्ति भाषा में सियाचिन शब्द का मतलब होता है "जंगली गुलाबों वाली जगह" जहाँ से इस ग्लेशियर का नाम लिया गया है। दूर तक फैली बर्फ की चादर देखकर मन खुश हो उठता है। सियाचिन ग्लेशियर पर ट्रेकिंग करना हर पर्वतारोही का सपना होता है। लेकिन ये जगह जितनी सुंदर है उतनी ही खतरनाक भी है। सियाचिन उन जगहों में से हैं जहाँ आज भी लड़ाइयाँ होती हैं। ये जगह दुनिया के सबसे सक्रिय युद्ध क्षेत्रों में से है। इसलिए सियाचिन पहुँचना आसान नहीं है। पाकिस्तान की सीमा के बहुत पास होने की वजह से यहाँ अक्सर जंग जैसे हालात बने रहते हैं। इसके अलावा ये जगह इतनी ऊँचाई पर स्थित है जिसकी वजह से यहाँ जबरदस्त ठंड रहती है। इतनी मुश्किलों के बाद भी सेना के जवान हर समय सीमा की सुरक्षा करते हैं। ये जगह यकीनन कमजोर दिल वालों के लिए नहीं है। लेकिन अगर आप उनमें से हैं जो सियाचीन ग्लेशियर चढ़ने की हिम्मत रखते हैं तो ये अनुभव आपकी जिंदगी का सबसे बेहतरीन पल होगा।

3. पोर्ट ब्लेयर, अंडमान

ट्रॉपिकल वेकेशन का ख्याल आते ही कुछ जगहें ऐसी होती हैं जिनका जिक्र आना लगभग तय होता है। ऐसी ही एक जगह है अंडमान द्वीप की राजधानी पोर्ट ब्लेयर। बंगाल की खाड़ी में बसी ये जगह भारतीय सेना के लिए बेहद खास है। सेना का ये इकलौता ऐसा स्थान है जहाँ तीन थियेटर कमांड है। तीन थियेटर कमांड मतलब इस जगह पर सेना के तीनों रूप यानी एयरफोर्स, नेवी और आर्मी के स्टेशन मौजूद हैं। इसमें भारतीय नौसेना के 15 जहाज, 2 नौसैनिक समुद्री बेस स्टेशन, 4 वायु सेना और नौसैनिक अड्डे और एक सेना का ब्रिगेड शामिल है। पोर्ट ब्लेयर घूमने में जितना सुंदर है ये जगह कालाबाजारी और तस्करी के नजरिए से उतनी संवेदनशील भी है। ये जवान इस इलाके में हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी को रोकने के साथ-साथ किसी भी तरह के समुद्री खतरे को मिटाने का भी काम करते हैं।

4. इंफाल, मणिपुर

अगर आप भारत और म्यांमार के बारे में थोड़ा भी जानते होंगे तो आप इंफाल का महत्व समझ सकते होंगे। भारत के उत्तर पूर्व में बसी ये जगह घुमक्कड़ी के लिए शानदार है। सुंदर होने के साथ-साथ इस राज्य की संस्कृति, परंपरा, खाना और लोगों का स्वभाव इतना अच्छा है कि यहाँ एक बार घूमने से आपका मन नहीं भरेगा। मणिपुर चारों तरफ से दूसरे राज्यों से घिरा हुआ है। इस राज्य की पूर्वी सीमा म्यांमार से लगी हुई है। म्यांमार के साथ सीमाएं बांटने का मतलब है मणिपुर में भारतीय सेना की खास भूमिका। इंफाल सेना का बेस स्टेशन है। खूबसूरत झीलों, बाजारों और हरे-भरे पहाड़ों वाली इस जगह पर देखने के लिए बहुत कुछ है।

5. तेजपुर, असम

तेजपुर असम का पांचवां सबसे बड़ा शहर है। लेकिन इसके बाद भी यहाँ दूसरे बड़े शहरों की तरह भीड़-भाड़ नहीं दिखाई देती है। तेजपुर असम की वो जगह है जहाँ आप शांत और सुकून भरे माहौल में प्रकृति के नजारों का आनंद ले सकते हैं। इतना खूबसूरत होने के बावजूद तेजपुर सैन्य नजरिए से काफी जरूरी जगह है। तेजपुर में भारतीय वायुसेना का बेस स्टेशन है जो उत्तर पूर्व में बसा सबसे सक्रिय स्टेशनों में से है। तेजपुर एयरफील्ड को 1942 में बनाया गया था जिसके बाद इस स्टेशन पर कई महत्वपूर्ण काम किए गए। एक समय पर ये एयरफील्ड सेना के मिग-21 विमान टुकड़ी का बेस कैंप हुआ करता था। फिलहाल इस एयरफील्ड को विमान चालकों की ट्रेनिंग और प्रशिक्षण के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

6. तवांग, अरुणाचल प्रदेश

अरुणाचल प्रदेश में स्थित तवांग में भारतीय सेना की खास मौजूदगी है। 1962 में हुए भारत-चीन युद्ध में चीन से हार के बाद, तवांग और उसके आस-पास के कई इलाके दोनों देशों के लिए संवेदनशील इलाकों में हो गए हैं। अरुणाचल के ज्यादातर हिस्सों में कम आबादी है और इन सभी इलाकों में अच्छी कनेक्टिविटी की कमी है। तवांग घूमने के लिए जितना खूबसूरत है इस जगह पर मुश्किलें उतनी ही ज्यादा हैं। तवांग में मौसम की अलग-अलग स्थिति यहाँ रहने वालों के लिए परेशानियां बढ़ा देती है। तवांग में भारतीय सेना की बड़ी टुकड़ी है। इसलिए उन्हें मौसमी मार से बचाने के लिए सेना ने खास इंतजाम कर रखे हैं।

7. दंतेवाड़ा, छत्तीसगढ़

दंतेवाड़ा उन चुनिंदा जगहों में से है जहाँ आज भी पारंपरिक कल्चर को जिंदा रखा गया है। दंतेवाड़ा के लोगों ने ना अपना जिंदगी जीने का तरीका बदला है और अपने लोक गीत और नृत्य को भी नहीं छोड़ा है। इस जगह की यही चीज आपको बेहद पसंद आएगी। लेकिन ये जगह भी नक्सली हमलों से अनछुई नहीं है। नक्सलवादी गढ़ के नाम से मशहूर ये जगह छत्तीसगढ़ के दक्षिणी ओर में स्थित है। यहाँ अप्रैल 2010 में नक्सलियों के एक हमले में सीआरपीएफ के 76 जवान शहीद हुए थे। इसलिए यहाँ सुरक्षा और सावधानी रखना दोनों बहुत जरूरी है। इस शहर का नाम दंतेश्वरी देवी के नाम पर पड़ा है जो यहाँ के मंदिर की मुख्य देवी भी हैं। दंतेवाड़ा वो शहर है जहाँ इतिहास और संस्कृति को बेहद अच्छे तरीके से सहेजा गया है। यहाँ की गलियों में आप सालों पुरानी इमारतें देख सकते हैं। इसके अलावा अगर आप पुरानी और अलग चीजों का शौक रखते हैं तो आप पत्थर से बनी ज्वेलरी भी खरीद सकते है।

8. गुरेज वैली, कश्मीर

श्रीनगर से लगभग 130 किमी. की दूरी पर बसी गुरेज घाटी, पहाड़ों, सुंदर नजारों और नदियों के खूबसूरत संगम जैसी है। हिमालय के सबसे अनछुए इलाकों में होने की वजह से इस घाटी के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। कश्मीर का ये नगीना लाइन ऑफ कंट्रोल यानी एलओसी के बेहद पास है इसलिए ये जगह खतरनाक और असुरक्षित दोनों ही है। पाकिस्तान के इतने पास होने की वजह से गुरेज में सेना के जवानों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। केवल यही नहीं गुरेज में लैंडमाइन का खतरा भी है। लैंडमाइन एक तरह की बारूदी सुरंगें होती हैं जिनसे दूर रहना ही सही है। इसके अलावा गुरेज में अक्सर लैंडस्लाइड होते हैं जिसकी वजह से ये जगह और खतरनाक हो जाती है। इतनी खतरनाक होने के बाद भी ये जगह बेहद खूबसूरत है। गुरेज के लोग अच्छे स्वभाव के हैं और यहाँ आने वाले हर घुमक्कड़ का खुले दिल के साथ स्वागत करते हैं। कहते हैं मेहमाननवजी देखनी है तो आपको किसी कश्मीरी घर में जाना चाहिए। एक बार गुरेज आकर देखिए आपको इस बात पर पूरा विश्वास हो जाएगा।

9. मुनाबाव, राजस्थान

अगर भारत-पाकिस्तान बॉर्डर की बात की जाए तो ज्यादातर लोगों के मन में सबसे पहला नाम अमृतसर के वाघा बॉर्डर का आता है। लेकिन रेगिस्तानों के बीच एक गाँव है जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। वो नाम है राजस्थान का मुनाबाव गाँव। पाकिस्तान और भारत की सीमा पर बसा ये गाँव पाकिस्तानी जमीन से लगा हुआ है और इसकी 1040 किमी. लम्बी सीमा की वजह से ये जगह सुरक्षा के नजरिए से बहुत महत्वपूर्ण है। 1965 में हुए भारत पाकिस्तान युद्ध के बाद ये गाँव पाकिस्तानी सीमा में चला गया था। लेकिन बाद में भारतीय सेना ने इसे वापस हासिल कर लिया था। ये जगह सीमा और विभाजन के असल मायने समझाती है। बाड़मेर जिले का ये गाँव इतना अनछुआ है कि इस जगह पर होने वाली परेशानियों के बारे में कोई नहीं जानता है। रेगिस्तानी लैंडस्केप में बसे होने की वजह से यहाँ अक्सर रेतीले तूफान आते रहते हैं। अगर आप सीमा के नजदीक की जिंदगी देखना चाहते हैं तो आपको मुनाबाव आना चाहिए।

10. द्रास, लद्दाख

द्रास को लद्दाख का दरवाजा कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि यदि आप लद्दाख जाना चाहते हैं तो आपको लगभग इस जगह से होकर गुजरना होता है। द्रास दुनिया की दूसरी सबसे ठंडी जगह है। 10,597 फीट की ऊँचाई पर बसी इस जगह पर आपका सामना बर्फीली हवाओं से होता है। द्रास में इतनी ठंड पड़ती है कि तापमान माइनस 45 डिग्री तक चला जाता है। लद्दाख का ये छोटा-सा शहर 1999 में हुए कारगिल युद्ध के बाद मशहूर हुआ था। सीमा के इतना करीब होने की वजह से द्रास में सेना के जवानों की बड़ी संख्या है। इतना ठंडा होने के बाद भी द्रास की खूबसूरती को देखने के लिए कई लोग आते हैं। तो अगर आप भी इन शानदार वादियों को महसूस करना चाहते हैं तो द्रास घूमने का प्लान जरूर बनाएं।

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