भोपाल : स्वाद के शौकीनों की जन्नत

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पहला दिन

भोपाल

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मध्यप्रदेश जैसी चारों ओर फैली प्राकृतिक सुंदरता, परंपरागत गाँव, बड़े बड़े किले और विविध प्रकार के जंगली जानवर भारत के अन्य किसी राज्य में शायद ही हों | इसीलिए मध्यप्रदेश घूमने लायक जगहों में शुमार रहता है | मगर मध्यप्रदेश के व्यंजन ऐसे लज़ीज़ हैं कि क्या कहने |

अगर आप मध्यप्रदेश के व्यंजनों को चखते हुए घूमना चाहते हैं तो शुरुआत कीजिए भोपाल से | भोपाल सैलानियों के बीच ज़्यादा मशहूर नहीं है मगर यहाँ का भोजन ऐसा है कि आप स्वाद भूल नहीं पाएँगे | बात चाहे सुलेमानी चाय की हो या चटोरी गली के माँसाहारी भोजन की, यहाँ के भोजन का ज़ाएका ही अलग है |

भोपाल के भोजन का आनंद लेने के लिए कार्यक्रम

भोपाल का इतिहास कई सौ साल पुराना है | आज पुराने भोपाल में बीते कल की छटा दिखती है | व्यंजनों का स्वाद चखने आपको यहीं जाना होगा |

दिन की शुरुआत सुलेमानी चाय के साथ : भारत में अलग अलग तरह की चाय पी जाती है इसलिए अपने भ्रमण की शुरुआत सुलेमानी चाय से करें | इस चाय में मीठा व नमकीन दोनों तरह का स्वाद होता है क्यूंकी इसमें चीनी, नमक और बहुत सारी मलाई डाली जाती है | एक कप पीते ही आपकी नींद उड़ जाएगी | सुलेमानी चाय आपको पुराने भोपाल में जमाल भाई की चाय की दुकान पर ही मिलेगी | रास्ते में इटवाड़ा चौक के बारे में पूछे, आप सही जगह पर पहुँचा दिए जाएँगे |

इटवाड़ा रोड के पास ही आपको कल्याण सिंह का स्वाद भंडार दिखेगा | ये जगह यहाँ की मशहूर पोहा जलेबी के लिए प्रसिद्ध है | ये दुकान सुबह 7 बजे खुल जाती है और यहाँ उन स्वाद के शौकीन लोगों की भीड़ बढ़ने लगती है जो भोपाल की मशहूर सेव के साथ पोहा और जलेबी खाना चाहते हैं |

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पुराना भोपाल माँसाहार के शौकीन लोगों के लिए जन्नत है | हर दुकान पर मसाला लगा हुआ माँस या मछली सजाया हुआ दिख जाता है | दुकान के अंदर जाकर आप मनचाही चीज़ खा सकते हैं |

जमाल भाई चाय वाले की दुकान के पास ही एक छोटी सी दुकान है जहाँ स्वादिष्ट व खूब चिकनाई वाले बकरे के पाए बिकते हैं | इस नन्ही सी दुकान का कोई नाम नहीं है मगर यहाँ स्वाद के शौकीनों का जमावड़ा लगा रहता है | ये भोपाल की उन चुनिंदा जगहों में से एक है जहाँ सुबह के नाश्ते में मटन बिरयानी मिलती है |

भरपेट नाश्ते के बाद आप जामा मस्जिद और बड़ा तालाब की ओर घूमने जा सकते हैं | घूमने फिरने से आपके पेट में दोपहर के भोजन के लिए जगह बन जाएगी |

कोह ए फ़िज़ा में दोपहर का भोजन बिल्कुल नवाबी अंदाज़ में

इटवाड़ा रोड से 15 मिनट दूर कोह-ए-फ़िज़ा स्थित है | नूर-उस-सबाह एक खुला रेस्तराँ है जहाँ आज भी पुराने भोपाल का नवाबी अंदाज़ देखने को मिलता है | यहाँ दोपहर का भोजन करने का नौभहाव अलग ही है क्यूंकी यहाँ से बड़ा तालाब का नज़ारा देखने को मिलता है | नूर-उस-सबाह का भोपाली चिकन कोरमा और खड़े मसाले का गोश्त (खड़े मसालों के साथ पकाया हुआ मटन) ज़रूर चखें |

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नूर-उस-सबाह के अलावा जहानुमा पैलेस भी लंच करने के लिए अच्छी जगह है | इस भव्य होटल में स्थित शाहनामा रेस्तराँ यहाँ की ख़ासियत भोपाली फिल्फोरा के लिए जाना जाता है जो मसाला लगा कर धीमी आँच पर पकाया हुआ पेरू का माँस होता है | अगर आप चिकन और मतन से ऊब चुके हैं तो यहाँ आपको बटेर मुसल्लम भी मिल जाएगा |

शाम के लिए व्यंजन

चटोरी गली का पाया सूप : भोपाली खाने पीने के इतने बड़े शौकीन हैं कि उन्होने अपनी गली का नाम ही चटोरी गली रख दिया है | ये इलाक़ा पुराना दिल्ली जैसा है | मटन पाया सूप यहाँ की ख़ासियत है | ये सूप मटन को धीमी आँच पर पकाकर गाढ़े शोरबे के साथ परोसा जाता है | यहाँ का सूप दिल्ली और हैदराबाद के मुकाबले ज़्यादा गाढ़ा होता है | ये सूप बकरे के माँस के कीमे, बारीक कटे हारे धनिए और मिले जुले मसालों के साथ परोसा जाता है जो डिनर की शुरुआत करने के लिए सही है |

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झिल्ली मियाँ पर बड़े का कबाब : चटोरी गली की ख़ासियत बड़े का कबाब कमज़ोर दिल वालों के लिए नहीं है | एक छोटे से कोने में बनी इस दुकान में पाडे के माँस से बने कबाब मिलते हैं जो मुँह में रखते ही घुल जाएँ |

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साइकल सूपवाला पर शाकाहारी ज़ायक़े का मज़ा लें : शाकाहारियों को निराश होने की ज़रूरत नहीं है | साइकल सूपवाला जिसका नाम अब सागर गाइरे हो गया है, एक फेरीवाले की प्रेरणास्पद कहानी है जिसने फेरी लगाने से शुरुआत करके आज भोपाल में अपनी कई दुकाने खोल दी हैं | इन बेहतरीन दुकानों पर आज तरह तरह के सूप, ट्रिपल डेकर चीज़ सैंडविच और वेज बिरयानी मिलती है |

बन कबाब स्टाल : बन कबाब आपकी ज़िंदगी का सबसे लज़ीज़ बर्गर साबित होगा | आँच पर पका हुआ नर्म गोश्त बन के बीच रखकर प्याज़ और चटनी के साथ परोसा जाता है |

इब्राहिमपुरा का होटल जमील : होटल जमील यहाँ की केसर वाली रोटी शीरमाल के लिए मशहूर है | ये रोटियाँ कबाब या तले हुए मुर्गे के साथ बड़ी स्वाद लगती हैं |

आख़िरकार मीठा

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अगर आपको खाने के बाद मीठा पसंद है तो पुराने भोपाल में आपको निराशा नहीं होगी |

बरफी रसमलाई : जामा मस्जिद के पास ही सुरेंद्र जैन स्टॉल बरफी रसमलाई दोना बनाते हैं | नाम के साथ ही बनाने का तरीका भी अनोखा है | कूटी हुई बर्फ के साथ रबड़ी मिलाकर ऊपर से फ्लेवर वाली चाशनी और गुलाबजल डाल कर पत्तों से बने दोने में परोसी जाती है | विश्वास कीजिए, एक डन से आपका मान ही नहीं भरेगा और आप और खाना चाहेंगे |

हाजी लस्सीवाला : इटवाड़ा चौक के पास हाजी लस्सीवाला जैसी लस्सी देता है वैसी लस्सी कोई नहीं देता | दूध मलाई से बनी इस लस्सी में चम्मच भर के फालूदा के लच्छे डाले जाते हैं | इस लस्सी फालूदा में खूब सारे सूखे मेवे डाले जाते हैं जिससे इसका स्वाद निराला हो जाता है |

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शाही टुकड़ा: पुराने भोपाल के ख़ास अंदाज़ में बना शाही टुकड़ा आपको ज़रूर पसंद आएगा | कई सारे खोमचे अपनी अपनी तरह से बनाकर ये व्यंजन परोसते हैं | कई दुकानों पर आपको खीर और आम की कुल्फी भी मिल जाएगी |

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अगर आपको भोपाल के सभी व्यंजनों का स्वाद चखना है तो आपके घूमने फिरने के कार्यक्रम में एक दिन और बढ़ जाएगा | इस शहर की रसोई से इन व्यंजनों के अलावा और भी बहुत से लज़ीज़ पकवान निकलते हैं |

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