स्वर्ग से सुंदर दार्जिलिंग की ये 12 वजहें इसे बनाती हैं घुमक्कड़ों की पहली पसंद

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Photo of स्वर्ग से सुंदर दार्जिलिंग की ये 12 वजहें इसे बनाती हैं घुमक्कड़ों की पहली पसंद by Deeksha Agrawal

घुमक्कड़ी का एक उसूल होता है। आप किसी एक जगह को ज़्यादा और दूसरी जगह को कम प्यार नहीं कर सकते। लेकिन कुछ शहर ऐसे होते हैं जिनसे एक अलग तरह का लगाव हो जाता है। ऐसी जगहों पर हम बार-बार जाना चाहते हैं। अगर आपने हिल स्टेशनों की यात्रा की है तो आप इस बात को अच्छे से समझ सकते होंगें। पहाड़ और उन पर बसे शहरों की हवा कुछ अलग होती है। उनमें एक अलग क़िस्म की रूमानियत होती है जिसमें सुकून होता है। ऐसा ही खूबसूरत हिल स्टेशन है दार्जिलिंग।

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दार्जिलिंग देखने में एक पेंटिंग की तरह है। यहाँ ज़िन्दगी के हर पहलू के सबसे मोहक रंगों का संतुलित मिश्रण देखने को मिलता है। इसमें वो हर रंग है जो घुमक्कड़ीय मन को पसंद आता है। दार्जिलिंग में घूमने के लिए इतनी जगहें हैं कि आपको वहीं रह जाने का मन करेगा। ये शहर इतना खूबसूरत है कि एक बार में आपका मन नहीं भरेगा और आप यहाँ बार-बार आना चाहेंगे।

1. बतासिया लूप

श्रेय: नार्थ बंगाल टूरिज़्म।

Photo of बतासिया लूप, West Point, Darjeeling, West Bengal by Deeksha Agrawal

सबसे सुरमई रेल मार्गों में से एक, बतासिया लूप जैसा रोमांचक मोड़ आपको शायद ही कहीं और मिलेगा। इस लूप का निर्माण दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे की ऊँचाई को कम करने के मकसद से किया गया था लेकिन अब ये लूप यहाँ आने वाले सभी पर्यटकों को आपनी ओर आकर्षित करता है। इस लूप को और भी करामाती बनाती है इसपर दौड़ती टॉय ट्रेन। हज़ार वर्ग फुट बागीचे में सजे इस लूप पर जब ये ट्रेन चलती है तो वो नज़ारा सचमुच में बेहद मोहक होता है। रास्ते के दोनों तरफ प्राकृतिक सुंदरता का खज़ाना देखने को मिलता है। कंचनजंगा पहाड़ियों के शानदार नज़ारों को देखते हुए इस लूप से गुजरना खूबसूरत एहसास होता है।

शहर से दूरी: 4 किमी.

2. जापानी मंदिर और शांति पैगोडा

निप्पोनज़न म्योहोजी बौद्ध मंदिर के नाम से भी मशहूर इस मंदिर का निर्माण 1972 में हुआ था। ये मंदिर दार्जिलिंग के जलपहाड़ इलाके में स्तिथ है जो मुख्य शहर से 10 मिनट की दूरी पर है। मंदिर का ढांचा पारंपरिक जापानी आर्किटेक्चर पर बनाया गया है जिसको देखकर ही आपका मन खुश हो जाएगा। शानदार सफेद रंग में जगमगाते मंदिर के अंदर बैठने के लिए भी जगह है। अगर आप चाहें तो यहाँ ध्यान भी लगा सकते हैं। मंदिर में घुसते ही फुजी गुरुजी की एक तस्वीर लगी हुई है जो निप्पोनज़न म्योहोजी के संस्थापक भी हैं। कहते हैं इन्होंने हिरोशिमा और नागासाकी की त्रासदी भी देखी थी और उन्हें गुरुजी की उपाधि महात्मा गांधी ने दी थी।

श्रेय: इनसाइड दार्जीलिंग।

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जापानी मंदिर के थोड़ा ही दूर शांति पैगोडा है। इस पैगोडा में भगवान बुद्ध के चार रूपों को दर्शाया गया है। इसकी ख़ास बात ये है कि इसमें बने सभी अवतार दार्जिलिंग की सबसे ऊँची प्रतिमाएँ भी हैं। इस पैगोडा की नींव फूजी गुरुजी ने 1972 में रखी थी। पैगोडा शांति और भाईचारे को बढ़ावा देने के इरादे से बनाया गया है। पैगोडा और जापानी मंदिर दोनों एक ही कैंपस में हैं और यहाँ पहुँचने के लिए आपको पैदल चलने के लिए तैयार रहना चाहिए।

शहर से दूरी: 4 किमी.

3. तिब्बती रिफ्यूजी कैंप

श्रेय: रिमोट लैंडस।

Photo of तिब्बती रिफ्यूजी सेल्फ-हेल्प सेंटर, Gandhi Road, Darjeeling, West Bengal, India by Deeksha Agrawal

तिब्बती रिफ्यूजी कैंप की स्थापना 1959 में हुई थी जब धर्म गुरु दलाई लामा ने भारत छोड़ा। दलाई लामा तो तिब्बत चले गए लेकिन उनको मानने वाले कुछ लोग यहीं भारत में रह गए और तब इस रिफ्यूजी कैंप की शुरुआत हुई। इस कैंप में तिब्बती लोग रहते हैं और कैंप की देख-रेख से लेकर यहाँ आने वाले लोगों को टूर करवाने तक का सारा काम यही लोग करते हैं। कैंप में कार्पेट के कारखाने भी हैं। कैंप में बनने वाले सभी कार्पेट यहाँ की महिलाएँ हाथ से बनाती हैं। कार्पेट दिखने में जितने सुंदर होते हैं उनको बनाने की प्रक्रिया उतनी की मुश्किल और लंबी होती है। कैंप में कार्पेट को बनते हुए भी देखा जा सकता है। इसके अलावा यहाँ हैंडीक्राफ्ट भी बनाए जाते हैं जिसके लिए एक छोटी सी दुकान भी है। कैंप में एक छोटा सा म्यूज़ियम है जिसमें दलाई लामा की बचपन से लेकर अबतक की पूरी यात्रा को दिखाया गया है।

शहर से दूरी: 5 किमी.

4. घूम मोनेस्ट्री

अगर आप पहले दार्जिलिंग जा चुके हैं और आपने ये मोनेस्ट्री नहीं देखी है तो फिर आपसे दार्जिलिंग की सबसे खूबसूरत जगह छूट गई है। 1850 में बनी ये मोनेस्ट्री दार्जिलिंग से सबसे पुराने मठों में से है। इस मोनेस्ट्री को यिगा चॅालिंग मठ के नाम से भी जाना जाता है। ये मोनेस्ट्री जलपाईगुड़ी से दार्जिलिंग के रास्ते में है। मोनेस्ट्री का दरवाज़ा इतना भव्य है कि इसे दूर से ही देखा जा सकता है। मठ का आर्किटेक्चर पुराने ढंग का है लेकिन इतने नएपन का भी महत्वपूर्ण हिस्सा देखने को मिलता है। क्योंकि ये मोनेस्ट्री सड़क से थोड़ी ऊँचाई पर है इसलिए यहाँ से नीचे बसे दार्जिलिंग शहर का बेहद मोहक नज़ारा दिखता है। वैसे तो सभी मठ एक तरह के होते हैं लेकिन घूम मोनेस्ट्री के चटख रंग इसे सबसे अलग बनाते हैं। ये मोनेस्ट्री देखने में जितनी सुंदर है यहाँ के नियम उतने ही मुश्किल हैं। मोनेस्ट्री में आने वाले सभी पर्यटकों को इन नियमों का पालन करना होता है।

शहर से दूरी: 8 किमी.

5. मॉल रोड और चौरस्ता

मॉल रोड दार्जिलिंग का वो इलाका है जहाँ आकर जैसे ये शहर ज़िंदा हो जाता है। ये दार्जिलिंग का सबसे भीड़ वाला हिस्सा भी है। मॉल रोड अपने आप में एक अलग दुनिया है। अगर आप दार्जिलिंग में हैं और खरीदारी करना चाहते हैं तो मॉल रोड और चौक बाज़ार आना चाहिए। यहाँ आपको हर तरह का सामान आसानी और कम दामों में मिल जाएगा। चौक बाज़ार में गर्म कपड़ों और लोकल स्ट्रीट फूड की कई दुकानें मिल जाती हैं। इन दुकानों में दार्जिलिंग का ख़ास लोकल खाना जैसे फाले खा सकते हैं। शाम के समय ये इलाका लोगों की भीड़ से गुलज़ार हो उठता है। चौरस्ता एक तरह से दार्जिलिंग का दिल है। आप दिन के किसी भी समय चौरस्ता चले आइए यहाँ आकर आपकी सारी बोरियत दूर हो जाएगी।

शहर से दूरी: शहर के बीच में ही

6. रॉक गार्डन

दार्जिलिंग के मुख्य पर्यटन स्थलों में शुमार रॉक गार्डन को बरबोटी गार्डन के नाम से भी जाना जाता है। ये गार्डन एक अलग तरह से डिजाइन किया गया प्राकृतिक पार्क है। इस गार्डन को पहाड़ों और चट्टानों को काटकर बनाया गया है जिसकी वजह से इस जगह की अलग पहचान है। गार्डन में तरह-तरह के पक्षी और फूलों को देखा जा सकता है। गार्डन में वॉटरफॉल भी है। बारिश के मौसम में ये वॉटरफॉल चहक उठती है और पूरा इलाका पानी की आवाज़ से बोल उठता है। इसके अलावा गार्डन में बैठने के लिए बेंच भी हैं। ख़ास बात ये है कि इन बेंचों को भी पत्थर और चट्टानों को सलीके से कटकर बनाया गया है जिससे इस पार्क का नाम बना रहता है। रॉक गार्डन तक जाने वाली सड़क आमतौर पर उतनी अच्छी नहीं रहती है लेकिन इस गार्डन की खूबसूरती के सामने ये मुश्किल उठाने लायक है।

शहर से दूरी: 10 किमी.

7. टाइगर हिल

वैसे तो दार्जिलिंग में कई पर्यटन स्थल हैं लेकिन टाइगर हिल पर मिलने वाला एहसास शायद ही कहीं और मिलेगा। 8482 फीट पर बसा टाइगर हिल दार्जिलिंग की सबसे ऊँची चोटी है। अगर आप कंचनजंगा पहाड़ देखना चाहते हैं तो टाइगर हिल से बेहतर जगह और कोई नहीं है। इस जगह से कंचनजंगा का सीधा और बिल्कुल साफ नज़ारा दिखाई देता है जिसकी खूबसूरती को शब्दों में बता पाना मुमकिन नहीं है। टाइगर हिल से सुबह का सूर्योदय देखने के लिए बहुत लोग आते हैं लेकिन अगर आप सही मायनों में टाइगर हिल को अनुभव करना चाहते हैं तो आपको यहाँ कैंपिंग करनी चाहिए। कैंपिंग करने के लिए परमिशन लेना जरूरी है। तैरते हुए सफेद बादलों के बीच से उगते सूरज को देखना सपने जैसा लगता है। ये नज़ारा इतना बेहतरीन होता है और आपको इसे बिल्कुल मिस नहीं करना चाहिए। टाइगर हिल के लिए आप गाड़ी से भी जा सकते हैं लेकिन सबसे अच्छा तरीका ट्रेकिंग करके जाना है।

शहर से दूरी: 10 किमी.

8. हिमालयन माउंटेनियरिंग इंस्टीट्यूट

श्रेय: द लॉस्ट पिलग्रिम्।

Photo of हिमालय पर्वतारोहण संस्थान, Jawahar Parbat, Darjeeling, West Bengal, India by Deeksha Agrawal

दार्जिलिंग अगर शहर है तो ये इंस्टीट्यूट अपने आप में पूरी दुनिया है। ऐसा इसलिए क्योंकि हर वो इंसान जिसे पर्वतारोहण में रुचि है वो इस इंस्टीट्यूट का हिस्सा बनने की चाहत रखता है। ये इंस्टीट्यूट दुनिया भर के साहसी लोगों को हिमालय के पैमाने और उसकी इज्जत को गंभीरता से लेना सिखाता रहा है। दुनिया की कुछ सबसे ऊँची चोटियों को फतह करने में इस्तेमाल किए जाने वाले ज़रूरी उपकरण और माउंटेनियरिंग से जुड़ी आवश्यक जानकारी लेना चाहते हैं तो आपको इस संस्थान इससे बेहतर जगह नहीं मिलेगी। कैंपस में होने वाली कई गतिविधियों के साथ-साथ यहाँ से कंचनजंगा का दिल खुश कर देने वाला नज़ारा दिखाई देता है जो इस इंस्टीट्यूट की शान को और बढ़ा देता है।

शहर से दूरी: 3 किमी.

9. चाय के बागान

शायद ही कोई ऐसा चाय का शौकीन होगा जिसने दार्जिलिंग की चाय के बारे में नहीं सुना होगा। दार्जिलिंग में दर्जनों बाग़ हैं जिनमें विश्व स्तरीय चाय उगाई जाती है। आप इन बागानों में चाय की पत्तियों को इकट्ठा करने से लेकर चाय के बनने तक की पूरी प्रक्रिया देख सकते हैं। केवल यही नहीं दार्जिलिंग में कई रास्ते ऐसे भी हैं जो खुद चाय के बागानों से होकर गुजरते हैं। इन रास्तों पर चलना बेहद हसीन एहसास होता है। लेकिन इन सभी बागानों में घूमने से पहले अनुमति लेनी जरूरी है इसलिए अगर आप भी ऐसा टूर चाहते हैं तो पहले से बुकिंग कर लेनी चाहिए।

शहर से दूरी: 2 किमी.

10. रोपवे

श्रेय: मुंगपू न्यूज़।

Photo of रोपवे स्टेशन, Bijanbari, Darjeeling, West Bengal, India by Deeksha Agrawal

शानदार चाय के बागानों और बर्फ से ढके पहाड़ों को देखने का सबसे अच्छा तरीका है दार्जिलिंग रोपवे या केबल कार। दार्जिलिंग रोपवे भारत का सबसे पुराना केबल कार सिस्टम है जो लगभग 7000 फीट की ऊँचाई पर है। 1968 में बनाया गया ये रोपवे दार्जिलिंग के सबसे पसंदीदा पर्यटन स्थलों में से है जिसकी एक सवारी करने के लिए दुनिया भर से सैलानी आते हैं। रोपवे में कुल 16 कारें हैं। रोपवे दार्जिलिंग के नॉर्थ प्वॉइंट से शुरू होकर रम्मण नदी के किनारे बसे सिंगला तक जाता है। इस 8 किमी. लंबी यात्रा को करने में 45 मिनट का समय लगता है।

शहर से दूरी: 3 किमी.

11. भूटिया बस्ती मोनेस्ट्री

भूटिया बस्ती का मतलब होता है भूटिया कॉलोनी और इस मोनेस्ट्री का इतिहास काफी संवेदनशील रहा है। चाहे वो युद्ध का समय हो या भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा, इस मोनेस्ट्री ने सबकुछ देखा है। पहले ये मोनेस्ट्री ऑब्जर्वेटरी हिल पर थी लेकिन 1934 के भूकंप के बाद सिक्किम के राजा ने इस मोनेस्ट्री को फिर से बनवाया जहाँ ये मोनेस्ट्री आज स्थित है। ये मोनेस्ट्री दार्जिलिंग रेलवे स्टेशन से 2 किमी. दूर है। इस मोनेस्ट्री को पारंपरिक तिब्बती तरीके से बनवाया गया है जिसमें सिक्किमी कल्चर की भी झलक दिखाई देती है। मठ के अंदर बुद्ध की मूर्ति है जिसे काँच के बक्से में सहेजा गया है। मोनेस्ट्री में लाइब्रेरी भी है जहाँ तिब्बती संस्कृति और जीवन से जुड़ी कई किताबें हैं।

शहर से दूरी: 2.5 किमी.

12. ऑब्जर्वेटरी हिल और महाकाल मंदिर

किसी भी हिल स्टेशन की पहचान उसके दिलकश नज़ारों से होती है और बात अगर दार्जिलिंग की हो तो इस जगह पर ऐसी बेहिसाब खूबसूरती की कोई कमी नहीं है। टाइगर हिल की तरह दार्जिलिंग का ये हिल भी किसी नगीने से कम नहीं है। एक तरफ जहाँ टाइगर हिल जाने के लिए आपको शहर से थोड़ा बाहर जाना होगा वहीं ऑब्जर्वेटरी हिल शहर के बीच में ही है। मॉल रोड पर बसे इस हिल पर जाने का रास्ता चौरस्ता के बाएँ तरफ से जाता है। इस छोटे से हिल पर जाने के लिए आपको 15 मिनट की आसान चढ़ाई करनी होती है जिसके बाद महाकाल मंदिर तक पहुँचा जा सकता है।

महाकाल मंदिर का इतिहास काफी गहरा है। ये वही जगह है जहाँ पहले भूटिया बस्ती मोनेस्ट्री थी। लेकिन भूकंप और 1815 में हुए गोरखा युद्ध के बाद इस मोनेस्ट्री को दूसरी जगह बनवाया गया। आमतौर पर आपको मंदिरों में पुजारी मंत्र और आरती गाते हुए मिलेंगे लेकिन इस मंदिर में पुजारियों के साथ-साथ बौद्ध मोंक भी अपनी धार्मिक प्रार्थनाएँ करते हैं जो सचमुच में बेहद खूबसरत एहसास होता है।

शहर से दूरी: 2 किमी.

कब जाएँ?

किसी भी पहाड़ी शहर में जाने के लिए गर्मियों का समय सबसे अच्छा होता है। दार्जिलिंग घूमने के लिए अप्रैल से अगस्त तक सबसे बढ़िया समय होता है। इस समय जब मैदानी इलाकों में भीषण गर्मी पड़ रही होती है, हिल स्टेशन होने की वजह से दार्जिलिंग का मौसम ठंडा बना रहता है। वैसे अगर आप चाहें तो अगस्त के बाद भी दार्जिलिंग घूमने आ सकते हैं लेकिन अगस्त के बाद बारिश शुरू हो जाती है इसलिए ऐसा करने से बचना चाहिए।

कैसे पहुँचें?

दार्जिलिंग आने के लिए सबसे बढ़िया तरीका है सबसे पहले न्यू जलपाईगुड़ी आइए। उसके बाद शेयर टैक्सी या कैब लेकर दार्जिलिंग पहुँचिए। न्यू जलपाईगुड़ी से दार्जिलिंग के लिए कई शेयर टैक्सी होती हैं जिनका दिन के समय किराया 150 रुपए प्रति व्यक्ति होता है।

हवाई मार्ग: सिलीगुड़ी इंटरनेशनल एयरपोर्ट सबसे नजदीकी एयरपोर्ट है। ये एयरपोर्ट देश के कुछ बड़े शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है इसलिए यहाँ आराम से पहुँचा जा सकता है।

रेल मार्ग: अगर आप ट्रेन से दार्जिलिंग आना चाहते हैं तो उसके लिए आपको न्यू जलपाईगुड़ी रेलवे स्टेशन आना होगा। जलपाईगुड़ी जिसे पहले सिलीगुड़ी के नाम से जाना जाता था दार्जिलिंग का सबसे नजदीकी बड़ा स्टेशन है जहाँ आने के लिए कई ट्रेनें हैं। जलपाईगुड़ी आने के बाद सड़क के रास्ते दार्जिलिंग पहुँचा जा सकता है।

सड़क मार्ग: सड़क के रास्ते दार्जिलिंग आने के लिए आपको नेशनल हाईवे 31 और नेशनल हाईवे 55 का सहारा लेना होगा। ये रास्ता भी जलपाईगुड़ी और कलिमपोंग होकर गुजरता है इसलिए आपको कोई दिक्कत नहीं होगी।

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