How to Reach Darjeeling - दार्जलिंग कैसे पहुँचे

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'दार्जलिंग' शब्द तिब्बती भाषा के दो शब्द '' और'' से मिलकर बना है. 'दोर्जे' का अर्थ होता है 'ओला' या 'उपल' और 'लिंग' का अर्थ होता है 'स्थान' | इस तरह दार्जीलिंग का शाब्दिक अर्थ हुआ'उपलवृष्टि वाली जगह ' | अंग्रेजो ने इस हिल स्‍टेशन को अपने मौज-मस्ती और सैरगाह के तौर पर विकसित किया गया था | हिमालय पर्वत श्रृंखला की गोद में बसा दार्जिलिंग वास्तव में स्वर्ग है। दार्जीलिंग ने केवल भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में अपनी पहचान शानदार सुंदर हिल स्टेशन के रूप में बनाया | दार्जीलिंग पहाड़ी ढलानों पर उगाई जाने वाली चाय और विभिन्न गुणवत्ता वाले चाय का बड़े पैमाने पर निर्यात के लिए प्रसिद्ध है |

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दार्जलिंग की खोज आंग्‍ल-नेपाल युद्ध के दौरान ब्रिटिश सैनिक ने की थी, जब वो टुक‍ड़ी सिक्किम जाने के लिए छोटा रास्‍ता तलाश रही थी। सिक्किम तक आसान पहुंच के कारण दार्जलिंग ब्रिटिशों के लिए रणनीतिक रूप से काफी महत्‍वपूर्ण था। इसके अलावा यह स्‍थान प्राकृतिक रूप से भी काफी संपन्‍न था। यहां का ठण्‍डा मौसम और बर्फबारी के मुफीद थे अंग्रेज। इस कारण अंग्रेज लोग यहां धीरे-धीरे बसने लगे।

प्रारंभ में दार्जलिंग सिक्किम का एक भाग था। बाद में भूटान ने इस पर कब्‍जा कर लिया। लेकिन कुछ समय बाद सिक्किम ने इस पर पुन: कब्‍जा कर लिया। परंतु 18वीं शताब्‍दी में पुन: इसे नेपाल के हाथों गवां दिया। किन्‍तु नेपाल भी इस पर ज्‍यादा समय तक अधिकार नहीं रख पाया। 1817 ई. में हुए आंग्‍ल-नेपाल युद्ध में नेपाल की हार के बाद नेपाल पर ईस्‍ट इंडिया कंपनी अधिकार हो गया ।

यहां सर्दियों में, जो अक्‍टूबर से मार्च तक होता है अत्‍यधिक ठण्डी पड़ती है। यहां गर्मी का मौसम अप्रैल से जून तक रहता है। इस समय यहाँ हल्‍का ठण्‍डापन होता है। यहां बारिश जून से सितम्‍बर तक होती है। गर्मियों में यहां पर्यटकों की भीड़ लगी रहती हैं, गर्मियों से राहत पाने के लिये पहाड़ों का रूख करते हैं और पश्चिम बंगाल, बिहार, उडीसा के लोगों की पहली पसन्द होती है दार्जलिंग । गर्मी के मौसम में सामान्यतः यहाँ का तापमान 10° - 14° डिग्री सेल्सियस रहता है | जी हाँ ठीक सुना आपने मैं गर्मीयों की ही बात कर रहा हूँ, सर्दियों में तो यहां कड़ाके की ठंड पड़ती है और तापमान लगभग 2° - 3° डिग्री सेल्सियस हो जाता है । वैसे यहाँ का न्यूतम तापमान जनवरी में -2° - 4° भी हो जाता है, कभी-कभी | यहाँ सैर-सपाटे का सबसे बेहतर समय अप्रैल से जून और फिर सितम्बर-अक्टूबर का है | वैसे तो यहाँ कभी भी आया जा सकता है, पर बारिश में यहाँ पर्यटकों की भीड़ बिल्कुल कम हो जाती हैं | सर्दियों में भी लोग क्रिसमस और नये साल की छुट्टियों में पहुँच जाते हैं, इस वजह से दिसम्बर मध्य से लेकर जनवरी के अंत तक नये साल का जश्न मनाने वालों जमावड़ा लगा रहता हैं | इस समय भी होटल महंगे हो जाते हैं |

गर्मियों में दार्जलिंग घूमने का अपना ही मजा है, सुहाना और ठंडक लिये ये जगह आपको गर्मियों की तपिस से राहत देगा | गर्मियों में भी हलके गर्म कपडे लेकर जायें, खासकर बच्चों के लिये गर्म कपड़ों के साथ गर्म टोपी या मफलर लेना ना भूले | वरना सुबह-सुबह ठंड के कारण परेशानी का सामना करना पड़ सकता हैं | लेकिन गर्मियों में यहाँ होटल काफी महंगे होते हैं | बेहतर होगा आप जाने के दो महीने पहले ही कमरे बुक कर लें | आप चाहें तो वेस्ट बंगाल टूरिस्म डेवलपमेन्ट कार्पोरेशन की उपलब्ध होटल भी बुक कर सकते हैं, जानकारी के लिये यहाँ क्लिक करें - वेस्ट बंगालटूरिस्म डेवलपमेन्ट कार्पोरेशन

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दार्जलिंग का प्रमुख आकर्षण टाइगर हिल है, यहाँ से सुबह उगते हुए सूर्य को देखने का आनंद ही कुछ और है | टाइगर हिल से कंजनजंगा तथा माउंट एवरेस्‍ट, इन दोनों ही चाटियों को देखा जा सकता है | इन दोनों चोटियों की ऊंचाई में मात्र 827 फीट का अंतर है | वैसे कंचनजंगा विश्‍व की तीसरी सबसे ऊंची चोटी है | टाइगर हिल से कंचनजंगा की चोटियों का नज़ारे का सबसे बेहतर समय अगस्त, सितम्बर और अक्टूबर का है | इस समय आसमान बिल्कुल साफ़ होता है और आप कंचनजंगा की लहराती-बलखाती चोटियों की सोने सी चमकते रूप का दर्शन कर सकते हैं, जो किसी को भी अपने मोहपाश में जकड ले |

पहले कंजनजंघा को ही विश्‍व की सबसे ऊंची चोटी माना जाता था, लेकिन 1856 ई. में सर्वेक्षण के बाद यह जानकारी मिल सकी कि संसार की सबसे ऊंची चोटी कंचनजंघा नहीं, बल्कि नेपाल स्थित माउंट एवरेस्‍ट है | कंचनजंघा को सबसे रोमांटिक पर्वत माना जाता है | कंजनजंघा की सुंदरता के कारण ही यह पर्यटकों के मन में रच-बस गया है |

दार्जलिंग में पर्यटकों के लिए टाइगर हिल के अतिरिक्त काफी कुछ है। इनमें से हैप्पी वैली टी एस्टेट, लॉयड बॉटनिकल गार्डन, दार्जलिंग हिमालियन रेलवे (टॉय ट्रेन), बतासिया लूप व युद्ध स्मारक, केबल कार, भूटिया बस्टी गोंपा, मिरिक, दार्जीलिंग उड़नखटोला (Darjleeing Roapway), जापानी बौद्ध मंदिर, शांति स्तूप, समतेन चोलिंग मोनेस्ट्री, सिंगालीला राष्ट्रीय उद्यान, महाकाल मन्दिर, संचल झील एवम वन्यजीव अभयारण्य और हिमालियन माउंटेनीरिंग इंस्टीट्यूट और म्यूजियम प्रमुख है। अगर आपको घुमक्कड़ी पसन्द है तो फिर जनाब आपके लिये भी यहाँ ब्रिटिशकालीन स्थानों की कोई कमी नहीं, आप दार्जलिंग हेरिटेज वाक का आनन्द भी ले सकते हैं | दार्जलिंग हेरिटेज वाक के लिये आपको सुबह से लंच तक का समय देना होगा, चाहें तो इसे मेरी तरह सुबह की सैर में भी पुरा किया जा सकता है | दार्जलिंग हेरिटेज वाक की जानकारी के लिये आलेख पहले ही उपलब्ध है, ब्लॉग पर इसे पढ़ सकते हैं | कृप्या यहाँ जाये-दार्जीलिंग हेरिटेज वाक

दार्जलिंग एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल होने के कारण यहां पहुंचना कोई मुश्किल काम नहीं है। ये हवाई, रेलमार्ग और सड़क मार्ग से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है |

दार्जलिंग देश के अनके स्‍थानों से हवाई मार्ग से जुड़ा हुआ है. बागदोगरा (सिलीगुड़ी) यहां का सबसे नजदीकी हवाई अड्डा है, जो कि यहां से 90 किलोमीटर की दूरी पर है | यहां से दार्जलिंग करीब 2½ से 3 घण्‍टे में पहुंचा जा सकता है |

दार्जलिंग पहुंचने की लिये सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन न्यू जलपाइगुड़ी है| यहाँ से कुर्सियांग, रोहिणी होते हुये दार्जलिंग लगभग 80 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, वहीँ मिरिक होते हुये लगभग 1 1

न्यू जलपाइगुड़ी से 4 pax, 8 pax और 24 pax के लिये गाड़ी प्रीपेड बूथ पर उपलब्ध है, जो कि स्टेशन के बाहर ही बना है | प्रीपेड बूथ के अतिरिक्त कहीं और से गाड़ी लेते वक्त संभल कर और मोल-तोल कर ही गाड़ी लें, यहाँ दलालों का बोलबाला है | स्टेशन स्टैंड से बाहर निकल भी उचित भाड़े पर गाड़ी की जा सकती है | शायद सिलीगुड़ी से बस सेवा भी है, लेकिन बहुत ही कम ट्रिप होती है | इसके बारे में मुझे कुछ विशेष जानकारी नहीं मिल पाई | हाँ, चाहें तो सिलीगुड़ी से शेयर टेक्सी से सफर कर सकते हैं, लेकिन अगर आगे सीट ना मिली तो फिर फजीहत ही समझिये | रास्ते काफी घुमुदार और शार्प टर्न लिये हैं सो परेशानी हो सकती है |

4 पैसेंजेर के लिये छोटी गाड़ी लगभग - Rs. 2,500/-

8 पैसेंजेर के लिये सुमो, बोलेरो गाड़ी लगभग- Rs. 3000/-

दार्जलिंग सिलीगुड़ी से सड़क मार्ग NH 55 द्वारा और गंगटोक से NH 35A से जुड़ा हुआ है | दार्जलिंग सड़क मार्ग से सिलीगुड़ी से 2 ½ से 3 घण्‍टे की दूरी पर स्थित है | कोलकाता से सिलीगुड़ी के लिए सरकारी और निजी बसें चलती है |

पूरी जानकारी के लिए मेरे ब्लॉग को भी देख सकते हैं :

https://yayavarektraveller.blogspot.com/2018/07/blog-post_20.html

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