मंडावा: दिल्ली से केवल 5 घंटों की दूरी पर लें शेखावटी संस्कृति को देखने का अनुभव

Tripoto
Photo of मंडावा: दिल्ली से केवल 5 घंटों की दूरी पर लें शेखावटी संस्कृति को देखने का अनुभव by Deeksha Agrawal

अगर आप इतिहास, कला और संस्कृति की बात करते हैं तो हर घूमने वाले के जेहन में राजस्थान जरूर आएगा। राजस्थान अपनी विरासत और भव्यता के लिए जाना जाता है लेकिन ये भव्यता क्या सिर्फ कुछ शहरों में सिमटी हुई है? जयपुर, जैसलमेर जैसे शहर अपनी खूबसूरत कला के लिए फेमस हैं। राजस्थान की इसी मिट्टी में कई छोटे-छोटे कस्बे हैं जिनकी गौरवता हर किसी को हैरान कर देगी। इन छोटी लेकिन बेहद महत्वपूर्ण जगहों में से एक है, मंडावा। राजस्थान को अच्छे-से घूमना है तो इस कस्बे को देखना न भूलें। राजस्थान को ये रूप देखकर आप खुशी से भर उठेंगे।

Photo of मंडावा: दिल्ली से केवल 5 घंटों की दूरी पर लें शेखावटी संस्कृति को देखने का अनुभव 1/3 by Deeksha Agrawal

मंडावा राजस्थान का एक छोटा-सा कस्बा है जो झुंझनू जिले में आता है। मंडावा शेखावटी क्षेत्र में पड़ता है और राजधान जयपुर से लगभग 190 किमी. की दूरी पर है। मंडावा में आमिर खान की पीके मूवी की शूटिंग हुई है। अगर आप आर्ट प्रेमी और इतिहास में थोड़ी-सी भी दिलचस्पी रखते हैं तो ये जगह आपके लिए परफेक्ट है। यहाँ की हवेली और किले की खूबसूरती आज भी रोशनदार है। यकीन मानिए राजस्थान का ये कस्बा आपको निराश नहीं करेगा।

क्या देखें?

मंडावा में देखने के लिए बहुत सारी जगहें हैं। यहाँ का राजपूताना अंदाज आपको हैरान कर देगा। इस शहर की खूबसूरती यहाँ के आर्किटेक्चर से लेकर शहर के डिजाइन तक में दिखाई देती है।

1. मंडावा फोर्ट

पारंपरिक राजपूताना वास्तुकला में बने मंडावा के इस किले का निर्माण शेखावटी सौदागरों के व्यापार को सुरक्षित करने के लिए किया गया था। विशाल अरावली पर्वतमाला के बीच बना ये किला अपने रंग-बिरंगे गलियारों, बेहतरीन आर्ट और शीशे के शानदार काम के लिए जाना जाता है। आज इस किले को हेरिटेज होटल में तब्दील कर दिया गया है। कैसल मंडावा होटल में आकर आपको पूरी राजसी शान का एहसास होगा। सभी मेहमानों को होटल एक्सप्लोर करने की पूरी आजादी है। होटल में आप दरबार हॉल देख सकते हैं, गलियारों में टहल सकते हैं और नक्काशीदार दरवाजों पर किया गया काम भी देख सकते हैं। कुल मिलाकर इस किले में आपको मंडावा के राजपूताना संस्कृति की पूरी झलक मिलेगी।

2. हनुमान प्रसाद गोयनका हवेली

Photo of मंडावा: दिल्ली से केवल 5 घंटों की दूरी पर लें शेखावटी संस्कृति को देखने का अनुभव 2/3 by Deeksha Agrawal

पौराणिक पेंटिंग और खूबसूरत मूर्तियों से सजी इस हवेली को देखना मंडावा आने वाले हर घुमक्कड़ की लिस्ट में जरूर शामिल होता है। ये हवेली एक बड़े आंगन के चारों ओर स्थित है जिसकी वजह से हवेली के सभी हिस्सों में भरपूर रोशनी आती है। मंडावा में कारीगरी का सबसे बेहतरीन नमूना आपको इन्हीं हवेलियों में देखने के लिए मिलेगा। हवेली के गलियारों में भी नक्काशी का बढ़िया काम किया गया है। गोयनका हवेली में कई सारे झरोखे भी हैं। जिसकी वजह से आपको आसपास का नजारे भी दिखाई देते हैं। इन झारोंखों से आप हवेली प्रांगण में स्थित भगवान शिव और नंदी की मूर्ति को भी देख सकते हैं।

इसके अलावा आप मुरमुरिया हवेली, लक्ष्मीनारायण लडिया हवेली, चोखनी डबल हवेली और बिंसिधर नवातिया हवेली भी देख सकते हैं।

3. हरलालका कुंआ

आपने इच्छा पूरी करने वाले कुंए के बारे में जरूर सुना होगा। बता दें ये वही कुंआ है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस कुंए से मांगी गई सारी मुरादें पूरी हो जाती हैं। चार मजबूत स्तंभ से घिरा ये कुंआ मंडावा की अगली महत्वपूर्ण जगह है। ये कुंआ कब और कैसे बना ये आज भी एक रहस्य का विषय है। हालांकि माना जाता है कि इस कुंए की गहराई हिन्द महासागर से भी ज्यादा है। खास बात ये भी है कि कुंए में पानी का स्तर आज भी बना हुए है। लेकिन इसके बावजूद इसके आसपास सुरक्षा के लिए कोई रेलिंग या दीवार नहीं है। इसलिए सावधानी बरतना और भी जरूरी है जाता है।

4. तालबेलिया महोत्सव

दिसंबर के महीने में आयोजित किया जाने वाला ये महोत्सव किसी अन्य त्योहार से कम नहीं है। तालबेलिया महोत्सव में आपको अव्वल दर्जे का पारंपरिक राजस्थानी म्यूजिक एन्जॉय करने का मौका मिलता है। जो यकीनन बेहद शानदार अनुभव होता है। इस महोत्सव में आप राजस्थानी फोक डांस भी कर सकते हैं। संगीत और नृत्य के अलावा इस महोत्सव में तमाम खाने के स्टॉल और वर्कशॉप्स का भी आयोजन किया जाता है। जिससे लोगों में रोमांच बना रहता है। अगर आप मंडावा आने के बारे में सोच रहे हैं तो आपको दिसंबर में अपनी ट्रिप प्लान करनी चाहिए।

कब जाएं?

मंडावा जाने के लिए सबसे सही समय अक्टूबर से मार्च के बीच का होता है। इस समय मौसम भी ठंडा रहता है जिसकी वजह से आप आराम से घूम सकते हैं। वैसे तो आप पूरे साल में कभी भी मंडावा आ सकते हैं लेकिन साल के अंतिम महीनों में ये जगह सबसे सुहावनी लगती है। खुशनुमा मौसम को एंजॉय करते हुए मंडावा की गलियों में भटकना आपको बहुत अच्छा लगेगा। अगर आप सोच रहे हैं कि मंडावा में ठहरने के लिए क्या विकल्प हैं तो बता दें आप यहाँ की हवेलियों में रह सकते हैं। इन सभी हवेलियों में आपको किसी भी बड़े पांच सितारा होटल जैसी सारी सुविधाएं मिलेंगे और आपको ठहरने में कोई परेशानी नहीं आएगी। इसके अलावा आप आप अपने बजट के मुताबिक भी कोई होटल चुन सकते हैं।

कैसे पहुँचें?

मंडावा देश के सभी हिस्सों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। इसलिए यहाँ आने में आपको ज्यादा परेशानी नहीं होगी। आप फ्लाइट, ट्रेन या बस लेकर आराम से मंडावा आ सकते हैं।

फ्लाइट: जयपुर एयरपोर्ट सबसे नजदीकी एयरपोर्ट है जो लगभग 180 किमी. की दूरी पर स्थित है। देश के सभी शहरों से जयपुर के लिए आसानी से फ्लाइट मिल जाती है। जयपुर आने के बाद आप सरकारी बस या टैक्सी लेकर मंडावा आ सकते हैं।

ट्रेन: ट्रेन से आने के लिए आप राजस्थान के झुंझुनू आना होगा। झुंझुनू रेलवे स्टेशन मंडावा से केवल 30 किमी. की दूरी पर है इसलिए आप आसानी से मंडावा आ सकते हैं।

वाया रोड: अगर आप सड़क के रास्ते मंडावा आना चाहते हैं तो उसमें भी आपको कोई परेशानी नहीं होगी। मंडावा देश के अन्य शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है इसलिए आपको आसानी से साधन मिल जाएगा।

क्या आपने मंडावा की यात्रा की है? अपने अनुभव को शेयर करने के लिए यहाँ क्लिक करें।

बांग्ला और गुजराती में सफ़रनामे पढ़ने और साझा करने के लिए Tripoto বাংলা और Tripoto ગુજરાતી फॉलो करें।

रोज़ाना टेलीग्राम पर यात्रा की प्रेरणा के लिए यहाँ क्लिक करें।