जैसलमेर की एक संपूर्ण मार्गदर्शिका

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जैसलमेर

Photo of जैसलमेर की एक संपूर्ण मार्गदर्शिका 1/1 by लफंगा परिंदा
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मैं आपको जैसलमेर पहुँचने के बारे में सारी जानकारी दूंगा जैसे की यहाँ के आकर्षण, जैसलमेर घूमने का सबसे अच्छा समय इत्यादि | ऊँट व्यापार के रूट में होने के कारण जैसलमेर मुसाफिरों के रास्ते में आने वाला एक महत्वपूर्ण यात्रा और व्यवसायिक शहर है। जैसलमेर अपने खूबसूरत किलों, झीलों और उद्यानों के लिए प्रसिद्ध है। इस शहर में हमें राजस्थान राज्य के विभिन्न रंगों और समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर की झलक देखने को मिलती है | जैसलमेर में होने वाले उत्सव देश विदेश के कोने कोने से सैलानियों को आकर्षित करते हैं |

देखें - जब तीन दिन हमारे लिए पर्याप्त नहीं थे - जैसलमेर (भाग 1)

1. जैसलमेर की एक झलक

जैसलमेर जिसका शाब्दिक अर्थ "जैसल का पहाड़ी किला" है, पर्यटकों के लिए भारत का एक प्रमुख आकर्षण है। जैसलमेर का नाम महारावल जैसल सिंह के नाम पर रखा गया है जिन्होंने 1156 ईस्वी में शहर की स्थापना की थी। यह शहर रेगिस्तान सफारी और यहाँ के जैसलमेर किले के कारण जाना जाता है | जैसलमेर किले की परिधि में आज भी लोग रहते हैं और इसे स्वर्ण किले के नाम से भी जाना जाता है। जैसलमेर शहर को 'गोल्डन सिटी' के नाम से भी जाना जाता है।

जनसंख्या - 6,72,008 (साल 2011 की जनगणना के अनुसार)

क्षेत्रफल - 38,401 वर्ग किलोमीटर

भौगोलिक स्थिति - उत्तर पश्चिम

आदर्श अवधि - 2-3 दिन

ऊँचाई - 225 मी

राज्य - राजस्थान (भारत)

एसटीडी कोड - 02992

प्रसिद्ध - ऐतिहासिक स्मारकों के लिए

भाषा - हिंदी, राजस्थानी, अंग्रेजी, उर्दू

मौसम - गर्मी में (25-44 डिग्री सेल्सियस) और सर्दी में (5-24 डिग्री सेल्सियस)

यात्रा का सर्वोत्तम समय - अक्टूबर से मार्च के महीनें

2. इतिहास

जैसलमेर शहर की स्थापना 1156 में एक राजपूत राजा महारावल जैसल सिंह ने की थी। जैसलमेर के इतिहास में राजपूतों के साहस और दृढ़ संकल्प का भी पता चलता है। यह शहर एक प्रमुख व्यापार केंद्र हुआ करता था क्योंकि पश्चिमी देशों से भारत आते समय ये शहर व्यापार मार्ग में पड़ता था |

3. स्थान

यह भारत के राजस्थान राज्य के पश्चिमी भाग में स्थित था। राजस्थान का सबसे बड़ा जिला होने के साथ ही यह भारत देश का तीसरा सबसे बड़ा जिला भी है। तार के विशाल मरुस्थल के बीच स्थित इस शहर के पश्चिमी ओर पाकिस्तान है और दक्षिण में बीकानेर नामक सुंदर सा शहर स्थित है | जोधपुर जो जैसलमेर की ही तरह रंगों और परंपरा से भरपूर शहर है, जैसलमेर के पूर्वी भाग में स्थित है | राज्य के अन्य हिस्सों की तुलना में जैसलमेर की जनसंख्या काफी कम है।

4. कैसे पहुँचें

हवाई मार्ग से - जैसलमेर हवाई मार्ग से सीधे जुड़ा नहीं है। इस रेगिस्तानी शहर के सबसे करीबी हवाई अड्डा यहाँ से 300 किलो मीटर दूर जोधपुर में स्थित है | जोधपुर हवाई अड्डे पर उतर के सैलानी जैसलमेर पहुँचने के लिए टैक्सी बुक कर सकते हैं |

सड़क मार्ग से - जैसलमेर शहर राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 15 पर स्थित है। राजस्थान रोडवेज के डीलक्स और साधारण बसों के साथ-साथ कई निजी ऑपरेटर भी बस सेवा द्वारा जैसलमेर को देश के सभी महत्वपूर्ण शहरों से जोड़ते हैं। बस टर्मिनस से यात्री अपने बुक करवाए हुए होटल या पर्यटक आकर्षण तक पहुंचने के लिए परिवहन के स्थानीय साधनों का लाभ उठा सकते हैं।

रेल मार्ग से - जैसलमेर और भारत के सभी महत्वपूर्ण शहरों के बीच रोज़ रेलें चलती हैं | जैसलमेर पहुँचने के लिए दिल्ली, जयपुर और जोधपुर की सीधी ट्रेनें पकड़ी जा सकती हैं | भारत की सबसे भव्य ट्रेन "पैलेस ऑन व्हील्स" से यात्रा के दौरान प्रमुख स्टेशनों में से एक जैसलमेर है।

प्रमुख शहरों से दूरी:

दिल्ली: 793 किलो मीटर

जयपुर: 585 किलो मीटर

जोधपुर: 294 किलो मीटर

उदयपुर: 522 किलो मीटर

यह भी देखें - जब तीन दिन भी हमारे लिए पर्याप्त नहीं थे - जैसलमेर (भाग 2)

5. रहने के स्थान

राजस्थान राज्य में आने वाले पर्यटकों के लिए जैसलमेर एक महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल है | सैलानियों के रहने के लिए विभिन्न प्रकार के विकल्प उपलब्ध है | आप जैसलमेर में रहने के लिए कई तरह के होटलों में से चुन सकते हैं | होटल और अतिथि ग्रह बजट विकल्पों से ले कर लक्जरी और हेरिटेज होटल के विकल्पों मे भी मिल जाएँगे | आप सैम सैंड ड्यून्स और खुरी में रेगिस्तान शिविर और टेंट भी प्राप्त कर सकते हैं। ये टेंट और शिविर आधुनिक सुख सुविधाओं के सभी सामानों से सुसज्जित हैं और इनमें ठहरने वाले सैलानियों के आराम का पूरा ध्यान रखा जाता है |

इसके अलावा पढ़ें - जब तीन दिन भी हमारे लिए पर्याप्त नहीं थे - जैसलमेर (अंतिम भाग)

6. घूमने की जगहें

• जैसलमेर का किला (जैन मंदिर, महल, अजायबघर, सिटी व्यू पॉइंट)

• कुलधारा- एक गाँव जिसे त्याग दिया गया

अमर सागर

सैम सैंड ड्यून्स

जैसलमेर युद्ध संग्रहालय

• गडीसर झील

• पटवों की हवेली

• नाथमल जी की हवेली

• सलीम सिंह की हवेली

• बड़ा बाग

• थार विरासत संग्रहालय

• भारत पाक बोर्डर (लोंगेवाला पोस्ट और तनोट माता मंदिर)

जरुर पढ़े - जैसलमेर में करने लायक 11 गतिविधियाँ

7. करने लायक गतिविधियाँ

• ऊंट सफारी

• जीप सफारी

• गडीसर झील में नौका विहार

• मरु महोत्सव

8. मेले और त्यौहार

मेले और उत्सव इस शहर की संपन्न सांस्कृतिक धरोहर की भरपूर झलक देते हैं | मरु महोत्सव जैसलमेर में मनाया जाने वाला मुख्य उत्सव है जो साल में फ़रवरी और मार्च के महीनों में मनाया जाता है | यह महोत्सव सैम सैंड ड्यून्स में मनाया जाता है जो शहर से 42 किलो मीटर की दूरी पर स्थित है। उत्सव के प्रमुख आकर्षणों में ऊंट दौड़, लोक प्रदर्शन और सांस्कृतिक कार्यक्रम शामिल हैं।

रामदेवरा मेला एक और लोकप्रिय त्यौहार है जो जैसलमेर शहर में मनाया जाता है। यह त्यौहार संत बाबा रामदेव को श्रद्धांजलि देने के लिए मनाया जाता है। इन उत्सावों के दौरान शहर में सैलानियों का ताँता लग जाता है |

9. खरीदारी

जैसलमेर अपने काँच की कारीगरी वाले कढ़ाई के कपड़ों व कालीनों, कंबल, तेल के लैंप, पत्थर की कारीगरी वाले पुराने आइटम, रंगीन कपड़े, लकड़ी के सामान, रेशम के वस्त्रों और चांदी के गहनों के लिए अच्छी तरह से जाना जाता है। जैसलमेर में कुछ प्रसिद्ध बाजार हैं जैसे सदर बाजार, पंसारी बाजार, सीमा ग्राम, गांधी दर्शन, माणक चौक और खादी ग्रामोद्योग एम्पोरियम | किले के परिसर में भी अच्छी दुकानें हैं जहाँ आप राजस्थानी पारंपरिक सामान खरीद सकते हैं। यदि आप जैसलमेर में हैं तो यहाँ एक बार तो अवश्य जाना ही चाहिए। जैसलमेर के बाजार की बात करें तो ज़रूरी नहीं कि आप मोलभाव करने में प्रकांड पंडित हों क्यूंकी यहाँ के दुकानदार वैसे ही कीमतें वाजिब लगाते हैं |

10. यात्रा कार्यक्रम

दिन 1- कुलधरा और अमर सागर, रेगिस्तान सफारी, ऊंट की सवारी, थार के रेगिस्तान में रात भर कैंप में बिताना

दिन 2- युद्ध संग्रहालय, गडीसर झील, पटवों की हवेली और नाथमल की हवेली

दिन 3- जैसलमेर किले की सड़कों पर घूमें, पैलेस संग्रहालय का आनंद लें, स्थानीय बाजारों का भ्रमण करें और सलीम सिंह की हवेली का भ्रमण करें | स्थानीय बाज़ारों और हस्तशिल्प की दुकानों पर जाएं, स्थानीय व्यंजनों और राजस्थानी व्यंजनों का आनंद लें।

दिन 4- बड़ा बाग और भारत पाक बोर्डर (लोंगेवाला पोस्ट और तनोट माता मंदिर)

जैसलमेर के लोग और वो लोग जिन्हें हम राजस्थान आते हुए रेल में मिले वो उन अधिकतर लोगों से काफ़ी अलग थे जिनसे हम अभी तक मिलते आए थे | जैसलमेर में ज़्यादातर लोग अच्छी तरह अँग्रेज़ी बोल लेते हैं, साफ सुथरे कपड़े पहनते हैं और ये भिखारी नहीं हैं | ये लोग स्वाभाव से काफ़ी मिलनसार, खुशमिजाज़ और मददगार हैं | शारीरिक रूप से काफ़ी मज़बूत हैं और मानसिक रूप से इनमें काफ़ी सहन शक्ति है |

अंत में मैं पढ़ने वाले सभी लोगों को यही सलाह देना चाहूँगा कि ज़िंदगी में कम से कम एक बार तो इस अनोखी सुनहरी नगरी की सैर कर के ज़रूर आइए | यहाँ की सुंदरता आपको अचंभित कर देगी और आप के हृदय पर एक अमिट छाप छोड़ देगी |

यह पोस्ट सबसे पहले ट्रैवल विद झा पर प्रकाशित हुई थी।

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