हिमाचल के ये 5 ट्रेक, जो अब भी ट्रेवल ब्लॉगर्स की नजरों से बचे हुए हैं!

Tripoto

हम अपने इंस्टाग्राम को खोलकर ट्रैवल ब्लॉगर्स को कई ट्रेक्स पर जाते देखते हैं, जिनकी जानकारी वे शेयर भी करते रहते हैं। लेकिन कई बार लगता है कि सभी उन जगहों पर ही जा रहे हैं जो किसी कारण से ज्यादा फेमस हो चुके हैं। ज्यादातर लोग बार-बार त्रिउंड, जीभी और कसोल जैसी जगहों की यात्रा कर रहे हैं। ऐसे में नई जगहों को खोजने, उन्हें एक्सप्लोर करने के लिए आप क्या करेंगे! चिंता की कोई बात नहीं, हम यहां आपके लिए उन ट्रेक्स की पूरी लिस्ट लेकर आए हैं जो कि अब तक ब्लॉगरों की नजर से बचे हुए हैं। अगर आप इनमें से किसी भी ट्रेक पर जाने की योजना बनाते हैं, तो प्रकृति की खूबसूरती के साथ अलौकिक शांति भी मिलेगी जिसकी मैं गारंटी ले सकता हूँ।

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चोबिया पास ट्रेक

यह पीर पंजाल रेंज में दूसरा सबसे ऊंचा पास है, जहां ज्यादातर गद्दी जनजाति के लोग रहते हैं जो कि लाहौल और स्पीति तक फैला है। ट्रेक हदसर, भरमौर से शुरू होता है और इसमें लगभग 5-6 दिन लगते हैं। लाहौल के उदयपुर पहुँचने से पहले आपको बेहतरीन नजारों, घाटी, सुरम्य घाटों, नदियों और विशाल शिलाखंडों से होकर गुजरना पड़ता है। यह ट्रेक अकेले नहीं किया जाता है, आप हदसर में गाइड ले सकते हैं लेकिन यदि आप इसे और मजेदार बनाना चाहते हैं तो स्थानीय गद्दी जनजाति के लोगों को साथ लेना चाहिए।

डिफिकल्टी: कठिन / मध्यम

अधिकतम ऊँचाई: 16,500 फीट

बेहतरीन समय: जून से सितंबर के अंत तक। सर्दियों में बर्फ के कारण ये बहुत मुश्किल हो जाता है।

कालीहनी पास ट्रेक

बड़ा भंगाल के प्रवेश द्वार के रूप में जाना जाने वाला ये ट्रेक शायद ही कभी ट्रेकिंग के बेहद शौक़ीन लोगों के अलावा किसी ने इसे किया हो। यह 8-10 दिन का ट्रेक ब्यास कुंड ट्रेक की तरह ही है। यह मनाली में शुरू होता है और मनाली में समाप्त होता है। सुंदर घास के मैदानों को पार करने और लीक पर चलने के अलावा, आपको हनुमान टिब्बा, इंद्रसन और देओ टिब्बा के असाधारण दृश्य देखने को मिलते हैं। इस ट्रेक पर कुछ कठिन रास्ते और खड़ी चढ़ाई है, इसके लिए तैयार रहें।

डिफिकल्टी: मध्यम

अधिकतम ऊँचाई: 15,498 फीट

बेहतरीन समय: मई से सितंबर तक। सर्दियों में बर्फ की वजह से ये असंभव हो जाता है।

जलसू पास ट्रेक

यह पास चंबा को कांगड़ा से जोड़ता है और अन्य पास के ठीक विपरीत, इंद्रहार और मिंकियानी दर्रा, जलसू पास को पार करना बहुत आसान है। पगडंडी के चारों ओर छोटे-छोटे फूलों से भरी घास के मैदान होने के कारण इसे हिमाचल प्रदेश की 'फूलों की घाटी' के रूप में भी जाना जाता है। ट्रेक का प्रयास या तो चंबा या कांगड़ा की तरफ से किया जा सकता है, लेकिन चंबा से इसे करना लोग पसंद करते हैं क्योंकि दोनों मार्गों के बीच तुलनात्मक रूप से आसान है। यह ट्रेक होली, चंबा से शुरू होता है और पालमपुर के पास उत्तराला में समाप्त होता है।

डिफिकल्टी: आसान / मध्यम

अधिकतम ऊँचाई: 11,300 फीट

बेहतरीन समय: अप्रैल से लेकर अक्टूबर के बीच जलसू पास को पार किया जा सकता है। यदि आप फूलों को खिलते हुए देखना चाहते हैं, तो आप इसे जुलाई या अगस्त में करें।

मंटलाई लेक ट्रेक

पार्वती घाटी में स्थित यह झील पार्वती नदी का मूल बिंदु है। ट्रेक पुलगा से शुरू होता है, जो खीरगंगा ट्रेक के लिए शुरुआती बिंदु भी है। ये झरने, घने जंगल, घास के मैदान, नदी और बाउलडर-रीच इलाके से गुजरता है। इसमें लगभग 6-7 दिन लगते हैं और आपको इस ट्रेक पर जाने के लिए एक अच्छी शारीरिक अवस्था में होना चाहिए।

डिफिकल्टी: मध्यम / चैलेंजिंग

अधिकतम ऊँचाई: 13,500 फीट

बेहतरीन समय: यह जून से अक्टूबर के बीच किया जाना चाहिए। इसके अलावे सालभर यहां बर्फ जमी होती है।

मियार घाटी ट्रेक

बर्फ की चादर में फूलों से सजा दूर तक फैला मैदानी इलाका एकदम खिला-खिला लगता है, ये मियार घाटी है। 5 दिन का ट्रेक, मियार घाटी के अंतिम गाँव खंजर से शुरू होता है, जो शुक्टो से 30 मिनट की दूरी पर गाँव से पहले अंतिम जगह है जहां तक गाड़ी से पहुंचा जा सकता है। आप इस ट्रेक पर घास के मैदान, फूलों की क्यारियाँ, पर्वत शृंखलाएं, बर्फ और चट्टान को देख सकते हैं।

डिफिकल्टी: आसान / मध्यम

अधिकतम ऊँचाई: 11,500 फीट

बेहतरीन समय: यह जून से अक्टूबर के बीच किया जाना चाहिए, इसके अलावे सालभर ये बर्फ से ढका हुआ रहता है।

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क्या आप भी किसी ऐसे ट्रेक के बारे में जानते हैं? यहाँ लिखें और इसे मुसाफिरों की दुनिया के साथ बाँटें।

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