उत्तराखंड घूमने के लिए जल्द देना पड़ सकता है "ग्रीन टैक्स"!

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उत्तराखंड के औली में अभी हाल ही हुई 200 करोड़ की शादी देश-भर की खबर बन गयी थी | शादी के बाद औली से निकाले 4000 किलो कूड़े की खबर भी सोशल मीडिया पर छाई रही, जिसे साफ करने में एक हफ़्ता लगा |

मगर अब जो खबर आपके सामने आने वाली है, वो हम ट्रैवेलर्स की ज़िंदगी पर सीधा असर डालेगी, क्योंकि अब सबके प्यारे उत्तराखंड घूमने के लिए आपको 'ग्रीन टैक्स' चुकाना पड़ सकता है।

उत्तराखंड एनवायरमेंट प्रोटेक्शन एंड पोल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (यूईपीपीसीबी) ने राज्य के फोरेस्ट और एनवायरमेंट मिनिस्टर हरक सिंह के साथ बातचीत के दौरान उत्तराखंड में बढ़ते प्रदूषण के मुद्दे पर चर्चा की |

चर्चा के हिसाब से जल्द ही उत्तराखंड घूमने के लिए आपको "ग्रीन टैक्स" देना होगा |

इसका मतलब है कि अगर ये ''ग्रीन टैक्स '' लागू हो जाता है, तो उत्तराखंड घूमने जाने वाले हर इंसान को ये टैक्स देना होगा | चाहे आप चार धाम की यात्रा पर जा रहे हों, ऋषिकेश में राफ्टिंग करने, ट्रेकिंग करने, या किसी रिज़ोर्ट में शादी मनाने का प्रोग्राम हो; 'ग्रीन टैक्स' तो देना ही होगा |

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ग्रीन टैक्स की ज़रूरत ही क्या है ?

उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था काफ़ी हद तक टूरिज़्म के सहारे आने वाली कमाई पर टिकी हुई है | राज्य में कोई ख़ास "कैश क्रॉप " यानी नकद फसल भी नहीं उगती | नकद फसल वो होती है, जिसे किसान बेचकर पैसा कमाने के लिए उगाता है | राज्य में साल 2018 में हेंप यानी भांग के पौधे की खेती ज़रूर वैध हुई है, मगर इस फसल को उत्तराखंड का किसान निजी ग्राहक को नहीं बेच सकता | हेंप की फसल भी सिर्फ़ सरकार को ही बेचनी पड़ती है |

साल 2015 में करीब ढाई करोड़ देशी-विदेशी सैलानी उत्तराखंड घूमने आए थे | इतने लोगों के आने से कमाई तो होती है, मगर इनसे होने वाले प्रदूषण का हर्जाना उत्तराखंड के पर्यावरण को चुकाना पड़ता है | इसलिए ग्रीन टैक्स लगाना और भी ज़रूरी हो जाता है | अब कम से कम टैक्स से आए हुए पैसे को पर्यावरण संरक्षण के कामों और राज्य की व्यवस्था को बेहतर करने में लगाया जा सकता है |

पर्यावरण को होते नुकसान को देखते हुए साल 2018 में उत्तराखंड हाइ कोर्ट ने राज्य सरकार को ऊँचे चरागाहों यानी बुग्यालों पर ट्रेकिंग करने जाने वालों की संख्या को भी 200 पर सीमित करने का आदेश दिया था | राज्य सरकार ने इस आदेश को चुनौती भी दी थी, क्योंकि इस तरह के आदेशों से उत्तराखंड के पर्यटन पर काफ़ी बुरा फ़र्क पड़ेगा |

तो अब लोगों के साथ-साथ राज्य की सरकारें और अदालतें भी पर्यावरण को बचाने की कवायद में लग गई हैं |

उत्तराखंड घूमने के लिए ग्रीन टैक्स तो दिया जा सकता है, लेकिन अगर 'ट्रेकिंग करने वालों की संख्या सीमित करने' जैसे आदेशों को मान लिया गया तो ना सिर्फ़ उत्तराखंड में बुग्यालों पर ट्रेकिंग करने के लिए अमरनाथ जैसे रेजिस्ट्रेशन होने लगेंगे, बल्कि इस प्रक्रिया में भ्रष्टाचार फैलने की भी तो कितनी गुंजाइश है |

तो ऐसे में अच्छा ये ही होगा कि आप "रेस्पॉन्सिबल टूरिज़्म " के बारे में जान लें | पहाड़ों में घूमने जाएँ तो कचरे को यूँ ही कहीं ना फेंकें |

बाकी ग्रीन टैक्स के नाम पर उत्तराखंड घूमने का कितना पैसा सरकार की जेब में डालना पड़ेगा, ये तो भविष्य ही बताएगा |

आप इस फैसले के बारे में क्या सोचते हैं?कॉमेंट्स में लिखकर हमें बताएँ।

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