भुतहा मालचा महल का वो सफर जिसे याद कर आज भी रोंगटे खड़े हो जाते है !

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Photo of भुतहा मालचा महल का वो सफर जिसे याद कर आज भी रोंगटे खड़े हो जाते है ! by Saransh Ramavat

काफी लंबे समय से, मुझ पर डरावनी व भूतहा चीज़ों का एक जुनून सवार था । 2015 में जब मैंने मालचा महल के बारे में पढ़ा, तो इसने तुरंत मेरी उत्सुकता को बढ़ा दिया। इसलिए अंतत: मैंने अपने जिद्दी मन की सनक के आगे हथियार डाल दिए और मैं तथाकथित प्रेतवाधित मालचा महल का पता लगाने के लिए निकल पड़ा।

मालचा महल भूतहा था या नहीं यह तो पता नहीं पर उस तक जाने वाली सड़क निश्चित रूप से भयानक थी, जिसमें मेरे दोस्तों और मेरे अलावा किसी अन्य व्यक्ति का कोई नामो-निशान नहीं था।

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Photo of मालचा महल, Malcha, New Delhi, Delhi, India by Saransh Ramavat

जैसे ही हम सड़क से नीचे उतरे, हमने खुद को पेड़ों कि शाखाओं की एक मोटी छतरी के नीचे चलते हुए पाया, जो कि काफी लंबी लग रही थी। जल्द ही, हम अपनी मंज़िल तक पहुँच गए और हमारा स्वागत जंग खाए हुए एक साइनबोर्ड ने किया जिस पर अतिक्रमियों के लिए गंभीर चेतावनी भरे शब्दों में लिखा था –

यहाँ आना मना है!

शिकारी कुत्तो से सावधान रहें ।

सूचना: घुसपैठियों पर गोली चलायी जा सकती है ।

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शायद यह भयानक चेतावनी थी, या वहाँ का रौंगटे खड़े कर देने वाला माहौल था और सबसे बड़ी बात यह थी यह अंधेरा हो रहा था, और हम में से किसी ने भी वहाँ पर गेट से घुसने और रुकने कि हिम्मत नहीं थी ।

मलचा महल के पीछे की कहानी क्या है?

70 के दशक के आस पास, अवध के आखिरी नवाब की पोती, राजकुमारी विलायत महल अपने दो बच्चों, पंद्रह क्रूर कुत्तों और सात नौकरों के साथ दिल्ली आईं। वे नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के प्रथम श्रेणी के प्रतीक्षालय में लगभग आठ वर्षों तक रही, जिसके बाद सरकार ने उन्हें मालचा महल की पेशकश की, जो कि बिना दरवाजे और बिजली का एक पूर्ववर्ती शिकार लॉज था जिसे सरकार ने मरम्मत करवाने का फरमान निकाला था। मरम्मत तो कभी हो नहीं पाई और उनका परिवार बाहरी लोगों व साधारण लोगों के साथ कभी घुलमिल नहीं पाया क्योंकि उन्हें आम लोगों के बीच बैठना अपनी शान के खिलाफ लगता था। जैसे-जैसे साल बीतते गए, राजकुमारी विलायत महल कि निराशा व अवसाद मे इतनी बड़ोतरी हो गयी कि उन्होंने वर्ष 1993 में कुचले हुए हीरों को निगल कर अपनी जान ले ली। उनकी मौत के बाद उनके बच्चे, राजकुमारी सकीना और प्रिंस अली रज़ा अपने कुत्तों और नौकरों के साथ और अलग-थलग रहने लगे। धीरे-धीरे, समय बीतने के साथ, कुत्तों और नौकरों की संख्या भी कम हो गई।

वर्ष 2014 के आस पास , राजकुमारी सकीना का निधन हो गया और बाद में नवंबर 2017 में, प्रिंस अली रज़ा को उनके सामान के साथ मृत पाया गया।

तो, मालचा महल के बारे में ऐसा क्या कहा जाता है?

हत्या, आत्महत्या, कल्पना; यह तीनों बिन्दु ही एक मनगढ़ंत प्रेतावधित कहानी गड़ने के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। भूतों और आत्माओं के अस्तित्व के बारे में बहस करना लगभग व्यर्थ है क्योंकि जो इनमे विश्वास करते है वह एक सकारात्मक जवाब देंगे और जो नहीं मानते है वह अविश्वास में अपना सिर हिला देंगे। लेकिन मालचा महल की कहानी एक अनोखी कहानी है जो कि भूतों मे मानने वाले और नहीं मानने वालों लोगो को एक साथ लाती है।

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हाँ मालचा महल व यहाँ रहने वाले मृतकों कि कहानी ऐसी तो नहीं है कि सुनकर आप अपनी कुर्सी से ही उछल पड़े, लेकिन निश्चित रूप से, यह एक बेहद पेचीदा कहानी है जो आपको उनके जीने के अजीब तरीके के बारे में सोचने पर मजबूर कर देगी ।

जैसे कि वह बिना बिजली के कैसे रहते थे? उन्हें अपना भोजन कहाँ से मिलता था ? अपना समय गुज़ारने के लिए वह क्या करते होंगे? राजकुमारी के बच्चों की मौत के पीछे क्या कारण था? वह स्नान कैसे करते होंगे? उन्होंने अपने नौकरों का भुगतान कैसे किया होगा?

बस यही कुछ कई सवाल हैं जो हमेशा मेरे दिमाग मे चलते रहते है ।

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