अहमदाबादः साबरमती और अक्षरधाम के अलावा और भी बहुत कुछ है यहाँ!

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साबरमती की खुशनुमा सुबह, गलियों में छनते फाफड़े और संस्कृति को संजोकर रखने वाला शहर है, अहमदाबाद। अहमदाबाद गुजरात का सबसे बड़ा शहर है। हर जगह की तरह यहाँ भी आधुनिकता बढ़ रही है लेकिन इस शहर ने अपने वास्तविक स्वरूप को नहीं खोया है। शायद यही वजह है कि इस शहर को अब वर्ल्ड हेरीटेज की लिस्ट में शामिल कर लिया गया है। इस शहर ही अपनी रंगीन संस्कृति है, जिसे आप यहाँ चलते हुए देख सकते हैं। यहाँ आप देख पाएँगे कि कैसे ये शहर आज भी अपने पुराने स्वरूप को बनाए रखा है?

हममें से बहुत-से लोग होंगे जिन्हें अहमदाबाद के बारे में पूछने पर, गांधी याद आएंगे, साबरमती आश्रम याद आएगा। लेकिन उस पुराने स्वरूप के बारे में बहुत कम लोगों को पता होगा जिस वजह से ये शहर वर्ल्ड हेरीटेज के लिए नामित हुआ है। अगर आप उन जगहों के बारे में जानते हैं तो बहुत अच्छी बात है। लेकिन अगर नहीं जानते हैं उस हेरीटेज वाॅक पर हम आपको लिए चलते हैं। जहाँ गुजरात अपनी विरासत के लिए जाना जाता है।

शुरूआत मंदिर से

अहमदाबाद को देखना है, अहमदाबाद को समझना है तो आपको अपने पैरों को तकलीफ देनी होगी। इस शहर को पैदल चलकर देखने का अलग ही आनंद है। सुबह-सुबह गुजरात के इस शहर को देखने की शुरूआत कर दीजिए। इस शहर में सुबह-सुबह आपको आस्था का समागम मिलेगा। आपको चलते हुए गलियों में फाफड़ा बनते हुए देखने को मिलेगा। ये वैसा है जैसा उत्तर भारत में जलेबी के छनने से दिन की शुरूआत होती है। आप शहर को देखते हुए सुबह-सुबह पहुँच जाइए, स्वामीनारायण मंदिर।

स्वामीनारायण मंदिर शहर के बीचो-बीच कालूपुर में है। कहा जाता है कि ये मंदिर स्वामीनारायण संप्रदाय का पहला मंदिर है। ये मंदिर 1822 में बना था। अधिकतर मंदिर की बनावट पारंपरिक और पुरानी होती है। लेकिन इस मंदिर की बनावट आधुनिक है। उसके पीछे एक दिलचस्प कहानी है। जब ये मंदिर बन रहा था तो इस मंदिर को बनते देख अंग्रेज बहुत प्रभावित हुए। तब इस मंदिर को और भव्य बनाने के लिए कुछ जमीन भी दी थी। तब स्वामीनारायण संप्रदाय ने उनको धन्यवाद देने के लिए औपनिवेशिक शैली का प्रयोग किया।

मंदिर की नक्काशी देखकर आप गदगद हो जाएँगे। हर जगह चमक ही चमक है। हर खंभे में लकड़ी की नक्काशी है, जो आज तक बनी हुई है। इस मंदिर में भगवान नरनारायण की मूर्तियाँ हैं। आप जैसे ही मंदिर में घुसेंगे आपको दायें और बाईं तरफ भगवान गणेश और हनुमान की मूर्ति दिखाई देंगी। मंदिर एक ऐसी जगह है जहाँ महिलाओं के कार्यक्रम होते हैं। वहीं पर महिलाएँ पूजा भी करती हैं। इस जगह पर पाँच बार पूजा की जाती है और हर बार भगवान के कपड़े बदले जाते हैं।

एक घर बना स्मारक

वैसे तो अहमदाबाद में स्मारकों की कमी नहीं है लेकिन कवि दलपत राम के बिना सारे स्मारक अधूरे ही हैं। मंदिर के बाद आपको दलपत राम के घर आना चाहिए जिसको अब स्मारक बना दिया गया है। लोगों ने कवि दलपत राम के घर को स्मारक बनाने का प्रस्ताव 1985 में रखा था, लेकिन तब इसे माना नहीं गया था। 2001 में यहाँ स्मारक बनाया गया। तब से ही ये जगह हेरीटेज में भी गिनी जाने लगी। आप जैसे ही इस घर में घुसेंगे तो आपको आंगन में कवि दलपत राम की मूर्ति मिलेगी। कवि दलपत राम सभी को शिक्षा देने के हिमायती थे। उनका मानना था कि चाहे लड़का हो या लड़की पढ़ाई सबको करनी चाहिए। उस समय लड़कियों का पढ़ना सही नहीं माना जाता था।

पोल में बंटे हैं मुहल्ले

इस पुराने शहर की एक खास बात ये है कि यहाँ लगभग 500-600 पोल हैं और हर पोल में एक चबूतरा है। कहा जाता है कि जब अहमदाबाद में पेड़ों की कमी होने लगी तो उन्होंने पक्षियों को दाने डालने के लिए चबूतरे बनाए जाएँ। वो चबूतरे आज भी हर जगह बने हुए हैं। अहमदाबाद में रिहायशी मोहल्ले पोल में बंटे हैं, जिनके बाहर गेट लगे होते हैं। सारे पोल जाति, धर्म और व्यवसाय के आधार पर बंटे हुए हैं। हर पोल में 20 से 25 परिवार रहते हैं। पोल में एक गेट होता है जो सुरक्षा के लिए बनाया गया है, जिसे रात में बंद कर दिया जाता है। हर पोल यानी कि हर मुहल्ला एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है। इन पोलों के बीच सीक्रेट रास्ते भी हैं, जो पुराने समय में बनाए गये थे।

काले राम

भगवान राम की मुद्राएँ और रंग देश में हर जगह अलग-अलग हैं। इस हेरीटज वाॅक में आपको राम की मूर्ति मिलती है। वैसे राम की हर जगह खड़े हुए मूर्ति है लेकिन यहाँ राम की मूर्ति बैठे हुए में बनाई गई है। ये पहला मंदिर है, जिसमें राम की मूर्ति काले रंग की है। उनके साथ सीता और लक्ष्मण की मूर्ति भी काले रंग की है। ये मूर्तियाँ काले रंग के पत्थर कसौटी से बनी हुई हैं। काले राम का ये मंदिर हाजी पटेल नी पोल के कोने में है। इसे आप मंदिर भी कह सकते हैं और हवेली भी। इस मंदिर को बनवाने वाले आज भी यहीं रहते हैं। वे ही इस मंदिर को देखते हैं। ये मंदिर लगभग 450 साल पुराना है जो आज भी लकड़ियों पर टिका हुआ है।

एक सेठानी की हवेली

शहर के रिलीफ रोड को पार करते हुए आपको एक पुरानी हवेली मिलेगी। ये हवेली है हरकुंवर सेठानी की हवेली। ये हवेली 180 साल पुरानी है जिसमें लगभग 150 कमरे हैं। हरकुंवर उस समय की जानी-मानी महिला थीं। हवेली की नक्काशी में आपको इंडो-चाइना वास्तुकला की झलक मिलेगी। ये हवेली इस समय खाली पड़ी हुई है, इसे सेठानी के परिवार के सदस्य ही देखते हैं।

जामा नहीं, जामी मस्जिद

आपने जामा मस्जिद के बारे में तो सुना होगा, तो चलिए जामी मस्जिद के बारे में भी जान लीजिए। जामी मस्जिद ताजमहल से 200 साल पुरानी मानी जाती है। इसको 1424 के आसपास सुल्तान अहमद शाह प्रथम ने बनवाया था। ये मस्जिद भद्रा किला क्षेत्र से लेकर मानेक चैक तक फैली हुई है। इस मस्जिद के पश्चिम में अहमद शाह प्रथम, उनके बेटे और पोते की कब्रें हैं। मस्जिद के बीच में एक बहुत बड़ा अहाता है, जो 75 मीटर लंबा और 66 मीटर चौड़ा है। इसके तीन दिशाओं में गलियारे हैं और चौथे गलियारे में एक हाॅल है। मस्जिद में आपको इंडो-चाइना नक्काशी देखने को मिलती है। इस तरह ये गुजरात के हेरीटेज सिटी की वाॅक मंदिर से शुरू हुई और मस्जिद पर खत्म हुई।

कैसे पहुँचे?

अहमदाबाद गुजरात का सबसे बड़ा शहर है, यहाँ पहुँचना बहुत आसान है। यहाँ आप सड़क मार्ग, ट्रेन या फ्लाइट से भी आ सकते हैं।

फ्लाइट से आने के लिए आपको सरदार वल्लभ भाई पटेल एयरपोर्ट उतरना होगा जो शहर से करीब 14 कि.मी. दूर है। यहाँ से आप मुख्य शहर में टैक्सी या कैब बुक करके आ सकते हैं। अगर आप सड़क मार्ग से आने की सोच रहे हैं तो अहमदाबाद लगभग हर बड़े शहर से जुड़ा हुआ है। मुंबई सें अहमदाबाद आने में आपको 9-10 घंटे लगेंगे। ट्रेन से आने के लिए आपको अहमदाबाद रेलवे स्टेशन आना होगा। जो कालुपुर एरिया में है। रेलवे स्टेशन मैन सिटी से 6 कि.मी. दूर है। आप वहाँ से शहर आराम से टैक्सी या कैब से आ सकते हैं।

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