जब भारत में ही मिले हवाई का मजा तो विदेश क्यों जाना?

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Photo of जब भारत में ही मिले हवाई का मजा तो विदेश क्यों जाना? by Deeksha Agrawal

घुमक्कड़ी में एक अलग तरह का नशा होता है। ये नशा अगर एक बार आपको लग गया तो यकीन मानिए आप एक जगह टिककर नहीं रह पाएंगे। हर थोड़े दिनों के बाद आपका मन किसी नई जगह को टटोलने का करेगा। आपको पता भी नहीं चलेगा और आप एक नए सफर पर निकलने के लिए अपना सामान बांध रहे होंगे। घुमक्कड़ों की ये चाहत ऐसी होती है जिसका कभी अंत नहीं होता है। आजकल तो हर कोई ऑफबीट जगहों पर जाने की होड़ में लगा हुआ है। हर घुमक्कड़ चाहता है कि वो किसी ऐसी जगह पर जाए जिसके बारे में कम लोगों को मालूम हो।

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कुछ लोग तो ऑफबीट जगहों के चक्कर में विदेश तक चले जाते हैं। लेकिन सच कहें तो ऐसी जगहों पर जाने के लिए आपको विदेश जाने की कोई जरूरत नहीं है। भारत में ही ऐसी कई सारी जगहें हैं जो घुमक्कड़ों के कदमों का इंतजार कर रही हैं। ऐसी ही अनछुई जगह अरुणाचल में भी है। अरुणाचल, जिसको उगते सूरज को भूमि कहा जाता है, ऐसे कई नगीने लिए बैठा है जिनको आपको देख लेना चाहिए।

हवाई

लोहित नदी के किनारे स्थित इस जगह को अंजॉ जिला का मुख्यालय होने का गौरव मिला हुए है। कामन मिश्मी बोली में हवाई शब्द का मतलब तालाब होता है और इस नाम के पीछे एक कारण भी है। असल में हवाई के बीच में करीब एक एकड़ जमीन वो है जहाँ पहले एक तालाब हुआ करता है। इस जमीन को फिलहाल धान की खेती और मछली पालने के लिए किया जाता है। समुद्र तल से लगभग 1296 मीटर की ऊँचाई पर स्थित ये जगह इतनी खूबसूरत है कि यहाँ आने वाले हर इंसान को इस जगह से पहली नजर का प्यार होना लगभग तय है। लोहित नदी के तट पर बसी ये जगह इतनी ऑफबीट है कि यहाँ तक पहुँचने के लिए आपको एक सस्पेंशन पुल पार करना होता है जिसको अंजॉ ब्रिज के नाम से जाना जाता है। लोहित घाटी के बेहतरीन नजारे और हवाई टाउनशिप की प्राकृतिक सुंदरता इस जगह को अरुणाचल प्रदेश के सबसे खूबसूरत स्थानों में से एक बनाती है।

क्या देखें?

अगर कम शब्दों में कहा जाए तो हवाई में वो सबकुछ है जो आपको एक सुकूनदायी वेकेशन के लिए चाहिए होता है। हवाई में झरने हैं, कलकल बहती नदियां हैं, स्थानीय लोग और उनका कल्चर है और बेशुमार खूबसूरती तो है ही।

1. प्राकृतिक सौंदर्य देखें

पूर्वोत्तर राज्यों की एक बात है जो इन्हें बाकी सभी जगहों से एकदम अलग बनाती है। वो वजह ये है कि आप चाहे किसी भी राज्य में चले जाइए हर जगह आपको प्रकृति का खूब साथ मिलेगा। अरुणाचल प्रदेश में भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने के लिए मिलता है। हवाई अरुणाचल की वो जगह है जहाँ आपको प्रकृति की बेहद खूबसूरत छटा दिखाई देगी। खास बात ये भी है कि इस सुंदरता को वैसे बनाए रखने के लिए हवाई के लोगों ने भी खूब मेहनत की है। नेचर को किसी भी तरह का नुकसान ना हो इसका खास ध्यान रखा जाता है। सभी महत्वपूर्ण कामों को करने से पहले प्रकृति को होने वाले नुकसान के बारे में भी ठीक तरह से सोचा जाता है और उसको कम करने के उपाय भी तलाशे जाते हैं। अगर आप भी इस छोटी जन्नत की सैर करना चाहते हैं तो अब आपको बिल्कुल देर नहीं करनी चाहिए।

2. लोहित नदी

नदियाँ किसी भी तरह की मानवीय आबादी के होने की सबसे बड़ी वजह होती हैं। हवाई के मामले में भी कुछ ऐसा ही है। हवाई लोहित नदी के तट पर बसी हुई जगह है जो हवाई आने वालों के लिए सबसे पसंदीदा आकर्षणों में से है। लोहित नदी असल में ब्रह्मापुत्र नदी की सहायक नदी है जो विशाल पहाड़ों और कई सारे पत्थरों से होकर हवाई पहुँचती है। इस वजह से हवाई के आसपास इस नदी का बहाव बेहद तेज होता है। आमतौर पर लोहित नदी देखने जाने वालों को सावधानी बरतने की सख्त हिदायत दी जाती है। लेकिन कुछ भी हो ये नदी इतनी खूबसूरत है कि आपको इससे प्यार हो जाएगा। क्योंकि हवाई इस नदी के ऊपर स्थित है इसलिए शहर में जगह जगह से नीचे बसी लोहित नदी का भव्य नजारा दिखाई देता है जो घुमक्कड़ी का मजा और भी बढ़ा देता है।

3. अंजॉ पुल

हवाई के लोगों और हवाई घूमने जाने की चाहत रखने वालों के लिए इस पुल का होना बेहद जरूरी है। ऐसा इसलिए क्योंकि यदि आप हवाई जाना चाहते हैं तो आपको इस पुल से होकर ही गुजरना होता है। इसके बिना हवाई पहुँचना बहुत मुश्किल काम है। ये पुल हवाई को मुख्य बीआरटीएफ सड़क से जोड़ता है। इस ब्रिज को हवाई में इंजीनियरिंग का लाजवाब नमूना कहा जा सकता है जो हवाई की खूबसूरती को और भी बढ़ा देता है। 156 मीटर लंबाई वाले इस पुल को पूर्वोत्तर के सबसे लंबे पुलों में गिना जाता है। इस पुल से हवाई और उसके आसपास के इलाकों का बेहद शानदार नजारा दिखाई देता है जिसे आपको देख लेना चाहिए। क्योंकि ये पुल लोहित नदी के ऊपर बना हुआ है इसलिए पुल से आप नीचे बहती नदी भी देख सकते हैं। वैसे इस पुल पर जाने का सबसे अच्छा समय शाम का होता है। पुल से लोहित नदी पर पड़ती ढलते सूरज की किरणें पानी को चमकदार बना देती हैं जो देखने में बहुत प्यारा लगता है।

4. पुराना हवाई

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इस हवाई से थोड़ी दूर स्थित है हवाई का वो हिस्सा जिसको पुराने हवाई के नाम से जाना जाता है। पुराने हवाई की खास बात ये है कि यहाँ आपको कल्चर का भंडार मिलेगा। अगर आप हवाई में मानी जाने वाली परम्पराओं को नजदीक से समझना चाहते हैं तो आपको इस हिस्से में आना चाहिए। यहाँ आप हवाई की स्थानीय संस्कृति को भी अच्छे से देख पाएंगे। यहाँ लोग कैसे रहते हैं, उनका पहनावा कैसा है, उनका खान-पान का तरीका, उनकी बोली और ऐसी कई सारी चीजें हैं जो आपको पुराने हवाई में आकर पता चलेंगी।

कहाँ ठहरें?

हवाई में ठहरने के लिए ज्यादा विकल्प नहीं हैं। अंजॉ डिस्ट्रिक्ट अरुणाचल के सबसे नए जिलों में से है इसलिए फिलहाल यहाँ ठहरने के लिए आपको उतने आलीशान ठिकाने नहीं मिलेंगे। लेकिन अगर आप केवल आरामदायक ठिकाने की तलाश में हैं तो आपके लिए हवाई में रुकना बहुत आसान काम है। हवाई में कुछ गेस्ट हाउस हैं जो सरकार द्वारा चलाए जाते हैं। इन गेस्ट हाउस में ठहरने के लिए आपको पहले से बुकिंग करनी होती है। 

हालांकि हवाई में कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्होंने पर्यटकों के रुकने के लिए अपने घरों को होमस्टे में बदल दिया है। हालांकि इन सभी विकल्पों का मिलना पूरी तरह आपकी किस्मत पर निर्भर करता है। अगर आप अंतिम समय की परेशानियों से बचना चाहते हैं तो आपको हवाई से 4 घंटों की दूरी पर स्थित परशुराम कुंड के आसपास रुकना चाहिए। यहाँ आपको कम दाम में आरामदायक होटल और गेस्ट हाउस मिल जाएंगे।

कब जाएँ?

क्योंकि हवाई अरुणाचल का हिस्सा है इसलिए यहाँ आने के लिए आपको किसी खास समय का इंतेजार नहीं करना होता है। आप साल के किसी भी समय हवाई आने का प्लान बना सकते हैं। लेकिन अगर आप सबसे सही समय की तलाश कर रहे हैं तब आपको मार्च से अगस्त के बीच हवाई आना चाहिए। साल के इस समय जब मैदानी इलाकों में तेज गर्मी पद रही होती है, हवाई का मौसम सुखद बना रहता है। ऐसे में आप बिना किसी चीज की चिंता करे अच्छे से घूमने का मजा ले पाएंगे।

कैसे पहुँचें?

हवाई पहुँचने के लिए आपको थोड़ी मेहनत करनी पड़ेगी। क्योंकि ये जगह अरुणाचल के अंदरुनी हिस्से में है इसलिए यहाँ पहुँचने के लिए आपको कई वाहन बदलने पड़ सकते हैं।

फ्लाइट से: अगर आप फ्लाइट से हवाई आना चाहते हैं तो आपको सबसे पहले असम के लीलाबरी हवाई अड्डे पर आना होगा। ये एयरपोर्ट असम की लखीमपुर जिले में है और हवाई से 447 किमी. की दूरी पर है। एयरपोर्ट से आप प्राइवेट टैक्सी या कैब लेकर आसानी से हवाई पहुँच सकते हैं। इसके अलावा आप असम के डिब्रूगढ़ एयरपोर्ट से भी टैक्सी लेकर हवाई आ सकते हैं।

ट्रेन से: ट्रेन से आने के लिए सबसे पहले आपको तिनसुकिया जंक्शन आना होगा। तिनसुकिया आने के लिए आपको देश के सभी हिस्सों से आसानी से ट्रेनें मिल जाएंगी इसलिए आपको कोई दिक्कत नहीं होगी। तिनसुकिया से हवाई 285 किमी. की दूरी पर है। तिनसुकिया से आप प्राइवेट टैक्सी लेकर आराम से हवाई आ सकते हैं।

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