बांसवाड़ा - The city of Hundred Islands

Tripoto
8th Sep 2019
Photo of बांसवाड़ा - The city of Hundred Islands by Saransh Ramavat
Day 1

सभी घुमक्कड़ों को मेरा प्रणाम । इस ब्लॉग को शुरू करने से पहले मैं अपने बारे मे बता देना चाहता हूँ ताकि आप लोग मुझे और मेरे काम के बारे मे जान सके । मेरा नाम सारांश है और कोटा शहर में, जहाँ मैं रहता हूँ वहाँ लोग प्यार से मुझे परिंदा कहते है और इसका मुख्य कारण है ट्रेवल व आर्ट फील्ड मे काम करने वाली संस्था“परिंदों का सफर” । परिंदों का सफर मे हम लोग कई काम करते है जैसे ट्रिप्स, फोटोग्राफी, फूड फेस्टिवल,एक्सिबिशन, पेंटिंग, हेरिटेज वॉक, बाइक राइड्स, और कई अलग अलग गतिविधियाँ जिससे शहर को कुछ नया मिल सके ।

तो बात यह है की हम लोग हर साल परिंदों का सफर की तरफ से राजस्थान पर्येटन विभाग के साथ मिलकर “The Hidden Colours Of Rajasthan” नाम से एक ट्रेवल व आर्ट सिरिज़ निकालते है, जिसका मुख्य उद्देश्य होता है राजस्थान के उन अनछूए रंगो, जगहो और कला को बाहर निकालना जिसे की लोग अभी तक जानते नहीं है । और इस साल की सिरीज़ मे हमने 3 जगह चुना था जिसमे से एक था बांसवाड़ा ।

जैसे ही हमारा बांसवाड़ा जाना तय हुआ मेरी सबसे पहले बात हुई प्रवीण भैया के मित्र (और अब मेरे भाई ) तनिष्क भैया व संग्राम भैया से, उन्होंने मुझे बहुत ज्यादा अच्छे से समझाया की बांसवाड़ा में क्या-क्या है और यहाँ आना हमारे लिए क्यों यादगार रहेगा । साथ ही साथ उन्होंने मेरा संपर्क बांसवाड़ा के उपनिदेशक – सूचना व जनसंपर्क विभाग बांसवाड़ा श्री कमलेश शर्मा जी सर से कराया, जिन्होंने पूरे ट्रिप के समय हमारी छोटी से छोटी सुविधाओं का ध्यान रखा, उन्होंने सभी तैयारी इतने ज्यादा अच्छे तरीके से की, की हर्षिता और मैंने ना जाने कितने बार एक दूसरे से बोला की अगर सर नहीं होते तो अपन किसी भी हाल मे यह ट्रिप मैनेज नहीं कर सकते थे ।

अब में आपको बताता हूँ हम सारे परिंदों के बांसवारा के सफर मे क्या-क्या देखा और बांसवाड़ा हमारी उम्मीद से हमे किया ज्यादा अच्छा मिला । हम 8 सितंबर को प्रात: 5 बजे बांसवारा पहुँचे व पहुँचते से ही हमने सर्किट हाउस मे 2 दिन के लिए अपना घोसला बनाया, जो की मेरा शुरू से एक सपना था की हम सभी एक बार सर्किट हाउस में रुकें, और जिसमे तो बांसवाड़ा का सर्किट हाउस अपने आप मे इतना सुंदर है की क्या कहने, चारों तरफ हरियाली के बीच मे जब आप बैठते हैं और सामने का नज़ारा देखते है तो मानो लगता है की हम बस यही ही रह जाएँ ।

सर्किट हाउस में ही हमारी मुलाक़ात उदयपुर से प्रीति मेम से हुई और उनसे हुई बातचीत आज भी जस की तस याद है , कहते है ना की कुछ लोगो से कुछ ही देर की बातचीत जीवन मे बहुत गहरा प्रभाव डाल देती है ।

हम लोगो ने बांसवाड़ा मे सबसे पहले कड़ेलिया फाल देखा जिसकी खूबसूरती अपने आपमे ही देखते ही बनती थी, तनिष्क भैया ने मुझे व हर्षिता को पीछे से ऊपर जाने का एक रास्ता दिखाया जिस पर चलना ही एक अलग आनंद था । यहाँ हमे मिले अमन जैन भैया जिन्होंने मेरा काम काफी हद तक कम कर दिया था हम दोनों की लोगो को बरबस वापिस ले जा रहे थे क्योंकि सभी जगह इतनी अच्छी थी की लोग वहाँ से जाना ही नहीं चाह रहे थे और हमे यह चिंता थी की आगे की कोई जगह छूट ना जाए । फिर बारी आयी जुआ फॉल की,अगर कोई उठाने वाला ना हो तो मे तो यहाँ पूरे दिन पानी मैं पैर डालकर सामने गिरते हुए झरने को ही देखता रहूँगा, आपके पैरो पर लगता ठंडा पानी और सामने के वाटरफॉल से झरता हुआ पानी, इससे ज्यादा और क्या चाहिए था । यहाँ 11.35 पर हमारे हर्षित शर्मा के साथ एक जरूर अप्रिय घटना हुई जिससे ड्रोन की ब्लेड से उनके एक कट लग गया परंतु तभी पूरी टीम ने उसे संभाला व यह हर्षित की ज़िंदादिली ही थी की उसने भी चोट लगने व दर्द होने के बाद भी जल्दी से जल्दी अपने आप को संभाला ताकि सभी जो बिलकुल शांत हो गए थे वह वापिस से अपने ट्रिप का मजा ले सकें ।

यहाँ से जाने के बाद हम लोग पहुँचे कागदी पीकअप वीयर, जहाँ हमने जो लंच किया, इतना स्वादिष्ट खाना शायद ही कभी खाया हो, खासकर मालपुए का स्वाद तो शायद ही कोई भूल पाएँ, इस जगह की सुंदरता देखते ही बनती है 12 माह पानी से भरी झील के पीछे जब हम हरे भरे पहाड़ देखते है तो इसकी सुंदरता में चार चाँद लग जाते है । यहाँ से हम कल्पव्रक्ष देखते हुए चाचा-कोटा पहुँचे, और यही वो जगह थी जहाँ जाने के लिए हम सभी सबसे ज्यादा उत्सुक थे की हमें तो city of hundred islands का सबसे खूबसूरत islandदेखना है और आप यकीन माने की मेरे पास शब्द नहीं है की मैं उस जगह और उस फीलिंग को कैसे साझा करूँ ,वो जगह ही कुछ और थी वहाँ का सुकून वहाँ का नज़ारा ऐसा था की हल्की बारिश में हम एक पहाड़ के ऊपर जाकर नज़ारा देखकर खुशी से चिल्ला रहे थे । हम जहाँ नज़र घूमा रहे थे हमें नज़र आ रही थी हरियाली, पानी ही पानी और आइलैंड्स । इसके बाद परिंदों का सफर पहुँचा श्रीगढ़ पैलेस, जहाँ स्वयं श्री जगमाल सिंह जी ने बांसवारा व उनके पूर्वजों का इतिहास बताया और जिसे सुनते समय यह लग रहा था की यह दास्तान कभी खत्म ही ना हो । इसके बाद हम सभी लोग सर्किट हाउस पहुँचे और वहाँ पर हमने खाने और सभी चीज़ों से फ्री होकर सभी ने अपने अनुभव, पुरानी यादें ताज़ा करते करते ही सब सो गए।

Photo of बांसवाड़ा - The city of Hundred Islands by Saransh Ramavat
Photo of बांसवाड़ा - The city of Hundred Islands by Saransh Ramavat
Photo of बांसवाड़ा - The city of Hundred Islands by Saransh Ramavat
Photo of बांसवाड़ा - The city of Hundred Islands by Saransh Ramavat
Photo of बांसवाड़ा - The city of Hundred Islands by Saransh Ramavat
Photo of बांसवाड़ा - The city of Hundred Islands by Saransh Ramavat
Photo of बांसवाड़ा - The city of Hundred Islands by Saransh Ramavat
Photo of बांसवाड़ा - The city of Hundred Islands by Saransh Ramavat
Photo of बांसवाड़ा - The city of Hundred Islands by Saransh Ramavat
Photo of बांसवाड़ा - The city of Hundred Islands by Saransh Ramavat
Photo of बांसवाड़ा - The city of Hundred Islands by Saransh Ramavat
Photo of बांसवाड़ा - The city of Hundred Islands by Saransh Ramavat
Photo of बांसवाड़ा - The city of Hundred Islands by Saransh Ramavat
Photo of बांसवाड़ा - The city of Hundred Islands by Saransh Ramavat
Photo of बांसवाड़ा - The city of Hundred Islands by Saransh Ramavat
Day 2

नया दिन और नयी जगह का सफर, अगले दिन हम वापिस कागड़ी पीक-अप वीयर पहुँचे और और वहाँ नाश्ता किया और महराणा प्रताप सेतू होते हुए हम निकले गोटियाँ आंबा मंदिर, अगर आप एक बाइकर हैं तो मुझे ऐसा लगता है की यह मंदिर आपको ज़रूर देखना चाहिए क्योंकि यहाँ तक के आने का रास्ता ही कुछ ऐसा है की आपका मन मोह लेगा और आपका ऐसा मन होगा की यह सफर कभी खत्म ही ना हो । और फिर हम बाते करते हुए गाने गाते हुए पहुँचे झोला फ़ाल्स, हम जिस भी जगह जा रहे थे हमारे मुख से एक ही चीज़ निकल रही थी की काश यह जगह हमें पहले पता होती तो ना जाने कितनी ही बार यहाँ आ चुके होते,बड़े बड़े पहाड़ और नीचे बहता पानी, ऊपर से नीचे बहते पानी को देखना इतना सुकून भरा था की मन कर रहा था की यही टेंट लगाओ आज रात को यहीं रुकते हैं । पर हमे वहाँ से सीधे हमारे गौरव का प्रतीक मानगढ़ धाम पहुँचना था जो की अपने आप मे एक मिसाल है,आज़ादी के समय इस जगह ने सबसे ज्यादा शहादते देखी है और इसीलिए इसे वागड़ का जालियाँवाला बाग कहते है । यहाँ से हम सभी लोग निकले त्रिपुरा सुंदरी मंदिर और वहाँ देवी माँ के दर्शन कर हम बांसवारा सर्किट हाउस पहुँचे क्योंकि हम लोगों की वजह से कोटा जाने वाली बस एक घंटा पहले ही लेट हो चुकी थी, हमने बहुत भारी मन से सभी से विदा ली और जल्दी आने का वादा कर हम कोटा से रवाना हुए और जल्दी ही सभी वहाँ जा रहे है तो आप चलेंगे हमारे साथ ?

Photo of बांसवाड़ा - The city of Hundred Islands by Saransh Ramavat
Photo of बांसवाड़ा - The city of Hundred Islands by Saransh Ramavat
Photo of बांसवाड़ा - The city of Hundred Islands by Saransh Ramavat
Photo of बांसवाड़ा - The city of Hundred Islands by Saransh Ramavat
Photo of बांसवाड़ा - The city of Hundred Islands by Saransh Ramavat
Photo of बांसवाड़ा - The city of Hundred Islands by Saransh Ramavat
Photo of बांसवाड़ा - The city of Hundred Islands by Saransh Ramavat
Photo of बांसवाड़ा - The city of Hundred Islands by Saransh Ramavat
Photo of बांसवाड़ा - The city of Hundred Islands by Saransh Ramavat
Photo of बांसवाड़ा - The city of Hundred Islands by Saransh Ramavat
Photo of बांसवाड़ा - The city of Hundred Islands by Saransh Ramavat
Photo of बांसवाड़ा - The city of Hundred Islands by Saransh Ramavat
Photo of बांसवाड़ा - The city of Hundred Islands by Saransh Ramavat
Photo of बांसवाड़ा - The city of Hundred Islands by Saransh Ramavat
Photo of बांसवाड़ा - The city of Hundred Islands by Saransh Ramavat
Photo of बांसवाड़ा - The city of Hundred Islands by Saransh Ramavat
Photo of बांसवाड़ा - The city of Hundred Islands by Saransh Ramavat

Tripoto हिंदी फेसबुक पेज पर अपने सफरनामें देखने के लिए पेज लाइक करें और यहाँ क्लिक कर अपनी यात्रा के अनुभव लिखने की शुरूआत करें। 

Be the first one to comment