होटल नहीं, जेल में बिताओ एक रात: टूरिज़म का एक अनोखा ट्रेंड

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'जेल की रोटी खानी पड़ेगी, जेल का पानी पीना पड़ेगा ।' ये सुनते ही बचपन की मीठी यादें ताज़ा हो जाती हैं, लेकिन अगर आज कोई जेल जाने का नाम ले तो आपकी हवाईयाँ छूट जाएंगी। लाज़मी भी है, आखिर जेल तो सिर्फ चोर-बदमाश जाते हैं ना? जी नहीं, ट्रैवल की दुनिया में आप भी जेल जा सकते हैं! अरे परेशान न हों, यहाँ जेल जाने के लिए कोई अपराध करना ज़रूरी नहीं है। सुनकर हैरानी ज़रूर होगी लेकिन भारत में ऐसी कई जगह हैं जहाँ आप सलाखों के पीछे, जेल की सज़ा, मेरा मतलब जेल का मज़ा ले सकते हैं।

अगर आपको भी ऐसी अजीबो- गरीब जगह जाने का शौक है तो आगे पढ़िए:

सांगारेड्डी ज़िला जेल

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हैदराबाद से 96 कि.मी. की दूरी पर बसे मेडक जिले में एक ऐसी जेल हैं जहाँ से निकलने के नहीं, बल्कि अंदर जाने के पैसे लगते हैं। सांगारेड्डी जिला जेल में 500 रुपए दीजिए और आप 24 घंटे यहाँ जेल की सलाखों के पीछे गुज़ार सकते हैं। जेल का पूरा अहसास देने के लिए आपको कैदियों वाली खाकी वर्दी दी जाएगी और खाने के लिए अल्युमिनियम की एक प्लेट। यहाँ रात गुज़ारने के लिए आपको आरामदायक बेड नहीं, बल्कि एक साधारण गद्दा ही मिलेगा।

अब जेल में गए हैं, तो मज़दूरी भी तो करनी पड़ेगी। जेल की ज़िंदगी से रूबरू करवाने के लिए यहाँ आए पर्यटकों को कैदियों का रूटीन भी मानना पड़ता है। सुबह 5 बजे उठकर कोठरी की सफाई के बाद नाश्ता दिया जाता है। दिन में पौधे लगाने और सफाई जैसे काम भी करने होते हैं।

क्यों खास है ये जेल?

दरअसल सांगारेड्डी ज़िला जेल किसी एतिहासिक धरोहर से कम नहीं है। ये जेल 223 साल पुरानी है जिसे 1796 में निज़ाम ने बनवाया था। फिर इसे एक म्यूज़ियम में तब्दील कर दिया गया और इसे लोगों के बीच मशहूर करने के लिए फील द जेल कैंपेन शुरू किया गया है जिसमें पर्यटक जेल का अनुभव ले सकते हैं।

Photo of सेल्यूलर जेल, Atlanta Point, Port Blair, Andaman and Nicobar Islands, India by Bhawna Sati

अंडमान द्वीप पर घूमने आने वालों के लिए सुंदर समुद्र तटों के साथ एक जेल भी मुख्य आकर्षण है। पोर्ट ब्लेयर में बनी सेल्यूलर जेल जिसे काला पानी के नाम से भी जाना जाता है, आज़ादी के वक्त की संघर्ष की कहानी बयान करती है। यहाँ रोज़ कई यात्री इसके इतिहास को करीब से समझने के लिए पहुँचते हैं। एकांत कारावास के लिए बनाई गई सेल के कारण ही इस जेल का नाम सेल्यूलर जेल रखा गया है। शाम के वक्त लाइट एंड साउंड शो के ज़रिए जेल भारत की आज़ादी की कहानी भी दर्शाई जाती है।

क्यों खास है ये जेल?

इस जेल में बटुकेश्वर दत्त और वीर सावरकर जैसे कई स्वतंत्रता सैनानियों को काला पानी की सज़ा मिली और ना जाने कितने ज़ुल्म किए गए। सन 1979 में इसे नेशनल मेमोरियल घोषित कर दिया गया और आज ये जेल भारत के इतिहास में एक अहम किस्सों में से एक है।

अगुवाडा जेल

श्रेय: जो गोआ यूके

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गोआ घूमने आने वाले ज्यादातर टूरिस्टों की लिस्ट में अगुवाडा फोर्ट तो सबसे ऊपर रहता है। खूबसूरत समूद्र के नज़ारे और दिल चाहता है वाले पोज़ ने इस जगह को इतना मशहूर जो कर दिया है। लेकिन कम ही लोग जानते हैं इस फोर्ट के नीचे बनी अगुवाडा जेल के बारे में। कुछ वक्त पहले ये जेल गोआ का सबसे बड़ा कारागार हुआ करती थी।

क्यों खास है ये जेल?

इस जेल में कुछ वक्त पहले तक भी कैदियों को रखा जाता था। गोआ में टूरिज़म को देखते हुए इस जेल को एतिहासिक धरोहर के तौर पर विकसित करने का फैसला लिया गया और जेल में मौजूद कैदियों को कोलवाले जेल में ट्रांसफर कर दिया गया है। जेल देखने आए पर्यटकों के लिए एक्टिवटी और टूर करवाने का भी प्लान है।

श्रेय: कश्मीर वॉइस

Photo of तिहाड़ जेल, Tihar Central Jail, Tihar Jail, New Delhi, Delhi, India by Bhawna Sati

भारत की सबसे बड़ी जेल यानी तिहाड़ जेल भी जल्द ही जेल टूरिज़म का हिस्सा बन सकती है। यानी आप इस जेल में कैदी नहीं बल्कि पर्यटक के रूप में तिहाड़ के चक्कर लगा सकेंगे। हालांकि अभी इस प्रोग्राम की शुरूआत होने में वक्त है, लेकिन फिलहाल लोग यहाँ के ग्राउंड, कैंटीन और मीटिंग हॉल में जा सकते हैं।

अब भले ही कितना अजीब ही क्यों न लगे, लेकिन अब जेल टूरिज़म भी घूमने-घुमाने का एक नया तरीका बनता जा रहा है। अगर आपको भी कैदियों की ज़िंदगी को करीब से देखने का ये अनोखा शौक है, तो इन जगह की टिकट कटा लीजिए।

अगर आप भी ऐसी अनूठी जगहों के बारे में जानते हैं तो Tripoto पर लिखें और अपनी जानकारी बाकी यात्रियों के साथ बाँटें।

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