तिरुपति बालाजी: करोड़पति भगवान के इस मंदिर में छुपे हैं कई राज़

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भारत में ना तो आस्था की कमी है और ना ही पूजे जाने वाले भगवानों की। लेकिन अगर लोकप्रियता का मुकाबला कराया जाए तो शायद तिरुपति बालाजी मंदिर ज़रूर आगे निकल जाता है। जी मैं ये अपनी पसंद के हिसाब से नहीं कह रही, बल्कि इस मंदिर से जुड़ी ऐसी कई अनोखी बातें हैं जिन्हें आप जान लें, तो तुरंत तिरुपति बालाजी के दर्शन करने ज़रूर निकल पड़ेंगे। तो चलिए जानते हैं भगवान तिरुपति के इस मंदिर जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें और कैसे पहुँचे यहाँ।

हिंदुओं के लिए एक अहम धार्मिक स्थान माने जाने वाले इस मंदिर को श्री वेंकटेश्वरा मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। आंध्र प्रदेश के तिरुमला पहाड़ों में बसा ये भव्य मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। 300 ई. में बने इस मंदिर का निर्माण द्वविड़ वास्तुकला में हुआ है और यहाँ आराधना करने आए श्रद्धालुओं के अलावा, लाखों सैलानी इस मंदिर की कला और खूबसूरती निहारने भी आते हैं।

क्यों खास है तिरुपति बालाजी?

1. सबसे अमीर भगवान हैं तिरुपति बालाजी

हज़ारों श्रद्धालु रोज अपनी झोली फैलाए तिरुपति मंदिर पर दस्तक देते हैं, और दे भी क्यों ना, आखिर श्री वेंकेटेश्वर दुनिया के दूसरे सबसे अमीर भगवान जो हैं। तिरुपति बालाजी मंदिर में रोज़ाना करीब 75 लाख रुपए का चढ़ावा आता है और सालाना ये कमाई करीब 400 करोड़ तक पहुँच जाती है। सोने-चांदी से लेकर नकद तक, इस मंदिर की दान-पेटी में किसी चीज़ की कमी नहींं है। सही कहते हैं, देने वाला जब भी देता है छप्पर फाड़ कर देता है।

श्रेय: तिरुमला

Photo of तिरुपति बालाजी: करोड़पति भगवान के इस मंदिर में छुपे हैं कई राज़ by Bhawna Sati

2. तिरुपति बालाजी के बालों का राज़

माना जाता है कि मंदिर में मौजूद बालाजी की मूर्ति के असली केश हैं जो कभी नहीं उलझते। पौराणिक कथाओं के हिसाब से जब श्री वेंकटेश्वरा के केश का कुछ टुकड़ा एक हमले में अलग हो गया तो नीला देवी नाम की एक राजकुमारी ने उन्हें अपने केश अर्पण कर दिए। इस बलिदान से खुश होकर भगवान बालाजी ने ये भेंट स्वीकार कर ली और आशीर्वाद दिया कि जो कोई भी उनके चरणों में अपने बाल अर्पण करेगा, भगवान उसकी मनोकामना पूरी करेंगे। बस तभी से यहाँ पर केश उतरवाने और उन्हें भगवान को चढ़ाने का रिवाज़ है।

3. गुप्त गाँव से आता है बालाजी की पूजा का सामान

जिस आरती और अभिषेक को देखने के लिए तिरुपति मंदिर में घंटों लंबी लाइन लगती है, उसके इस्तेमाल की सामाग्री का ठिकाना भी एक राज़ है। दरअसल सभी को ये तो पता है कि मंदिर से कुछ 20 कि.मी. दूर एक गाँव से ये सामग्री आती है, लेकिन ये गाँव असल में है कहाँ, ये कोई नहीं जानता। और तो और गाँव के बाहर के लोगों को इस गाँव में एंट्री भी नहीं है।

श्रेय: तिरुमला

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4. अखंड मूर्ति की ताकत

ये तो सभी मानते हैं कि भगवान को कोई मिटा नहीं सकता, लेकिन इसका असली नमूना आपको तिरुपति बालाजी मंदिर में मिलता है। जहाँ कच्चा कपूर अगर किसी पत्थर पर लगाया जाए तो उसमें या तो दरार आ जाती है या पत्थर पर निशान पड़ जाते हैं, लेकिन ये कपूर भगवान बालाजी की मूर्ति का बाल भी बांका नहीं कर पाता। है ना कमाल!

5. जीवित है तिरुपति बालाजी की मूर्ति

ऐसी कई अनोखी घटनाएँ हैं जिनकी वजह से लोग मूर्ति को जीवित मानते हैं। पहला तो, माना जाता है कि मूर्ति के पीछे अगर आप कान लगाकर सुनें तो आपको समुद्र की लहरों की आवाज़ सुनाई देगी। सिर्फ इतना ही नहीं भगवान बालाजी की इस मूर्ति को पसीना भी आता है, जिसे वक्त- वक्त पर पुजारी रेशम के कपड़े से पोछते हैं।

श्रेय: टेंपल कनेक्ट

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अब आप ये बातें मानें या ना मानें, लेकिन ये सभी इस मंदिर को एक रोमांचक जगह तो ज़रूर बनाते हैं।

कैसे पहुँचे तिरुपति मंदिर?

हवाई यात्रा- तिरुमला पहुँचने के लिए तिरुपति एयपोर्ट सबसे करीबी हवाई अड्डा है। यहाँ से मंदिर तक पहुँचने के लिए आपको 40 कि.मी. का सफर करना होगा, जिसके लिए आसानी से बस या टैक्सी की जा सकती है।

रेल यात्रा- तिरुमला का अपना रेलवे स्टेशन नहीं है, इसलिए आपको तिरूमला रेलवे स्टेशन पर ही उतरना होगा। यहाँ से आपको मंदिर तक जाती बसे और प्राइवेट टैक्सी मिल जाएँगी।

बस यात्रा- तिरुमला रोड के ज़रिए सभी बड़े शहरों से अच्छी तरह कनेक्टेड है। चेन्नई, वैल्लोर और बेंगलुरू के लिए आपको सीधी बसे मिल जाएँगी। आप चाहें तो तिरुपति से भी बस या टैक्सी कर मंदिर पहुँच सकते हैं।

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तिरुपति बालाजी मंदिर की यात्रा जुड़ी से ज़रूरी बातें

ये सब पढ़कर आपका तिरुपति जाने का प्लान तो ज़रूर बन गया होगा। लेकिन इससे पहले आप बैग उठाकर चल दें, मंदिर से जुड़ी से ज़रूरी बातें जान लीजिए:

- तिरुपति मंदिर के गभगृह तक पहुँचने के लिए एक लंबी लाइन लगती है और एंट्री करने में 4 घंटे से लेकर 24 घंटे भी लग सकते हैं। तो लंबे इंतज़ार के लिए तैयार रहें।

- क्योंकि हर दिन यहाँ हज़ारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं, तो आप अपनी टिकट 2-3 महीने एडवांस में ही बुक कर लें। दर्शन के लिए भी सुबह होते ही प्रवेश के लिए पहुँच जाएँ। आप चाहें तो जल्दी एंट्री के लिए VIP टिकट भी ले सकते हैं।

- मंदिर के अंदर किसी भी तरह की फोटोग्रफी या वीडियोग्रफी की अनुमति नहीं है, तो पहले ही अपने फोन और दूसरा सामान जमा करा दें। इसके लिए लॉकर सुविधा मौजूद है।

सारी जानकारी अब आपके पास है, तो इंतज़ार किस बात का, चलिए दर्शन कर आइए इस अनोखे मंदिर के।

अगर आपके पास भी ऐसी रोचक जानकारी है तो Tripoto पर ब्लॉग बनाएँ और अपना अनुभव यात्री समुदाय के साथ बाँटें।

1 Comment(s)
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इस प्रतिमा के पूरे गहने हटाने पर आप पाएंगे ये जैन धर्म के 23 वे तीर्थंकर नेमिनाथ भगवान की प्रतिमा है जो वहां के ट्रस्टी जानते हैं ।
Tue 04 16 19, 20:02 · Reply · Report