मैंने राजस्थान यात्रा में देखा अनूठा स्कूल, 50 डिग्री तापमान में भी बिना AC के रहता है ठंडा

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Photo of मैंने राजस्थान यात्रा में देखा अनूठा स्कूल, 50 डिग्री तापमान में भी बिना AC के रहता है ठंडा by Musafir Rishabh

राजस्थान में घूमने के लिए कई सुंदर और सुनहरी जगहें हैं। वैभवता और राजशाही के प्रतीक राजस्थान में प्राचीन महल, क़िले और हवेलियाँ हैं। जिनको देखकर हर कोई आज भी वाह कह उठता है। आज मैं आपको राजस्थान की एक ऐसी जगह की यात्रा पर ले जाना चाहता हूँ, जहां हर व्यक्ति को एक बार ज़रूर जाना चाहिए। थार रेगिस्तान में गर्मियों के दिनों में तापमान 50 डिग्री सेल्सियस पहुँच जाता है और दिन में चलने वाली हवाएँ किसी थपेड़े से कम नहीं होती हैं। उसी रेगिस्तान के बीचों बीच एक ऐसा स्कूल है जिसके अंदर ठंड का एहसास होता है। स्कूल के अंदर ना एसी लगी है और ना ही कूलर। इस स्कूल की संरचना कुछ इस प्रकार है कि अंदर ठंडी-ठंडी हवाएँ चलती हैं और बच्चे-हंसते खेलते हुए पढ़ते हैं।

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मैं सम सैंड ड्यूंस कैंप में था तब मुझे इस स्कूल के बारे में पता चला। थार रेगिस्तान में बना इस स्कूल का नाम राजकुमारी रत्नावती गर्ल्स स्कूल है। कनोई गाँव में स्थित ये स्कूल सम सैंड ड्यूंस से सिर्फ़ 7 किमी. की दूरी पर है और जैसलमेर के 45 किमी. की दूरी पर है। मैंने स्कूटी उठाई और इस स्कूल को देखने के लिए निकल पड़ा। स्कूल तक पूरा रास्ता बना हुआ है लेकिन गूगल मैप की कृपा से हम कच्चे और रेतीले रास्ते से स्कूल तक पहुँचे। हम जब स्कूल के पास पहुँचे तो स्कूल बंद था। अंडाकार आकार का बना ये स्कूल देखने में वाक़ई शानदार है। मुझे लगा कि स्कूल तो बंद है इसलिए हम स्कूल को अंदर से देख नहीं पाएँगे। स्कूल के गेट पर एक नंबर लिखा हुआ था। मेरी जिनसे बात हुई तो उन्होंने बताया कि वो स्कूल आ रहे हैं।

राजकुमारी रत्नावती गर्ल्स स्कूल

शानदार वास्तुकला का उदाहरण राजकुमारी रत्नावती गर्ल्स स्कूल का डिज़ाइन न्यूयार्क की आर्किटेक्ट डायना केलॉग ने किया है। इस स्कूल को CITTA नाम की संस्था के संस्थापक माइकल डूबे की मदद से चलाया जा रहा है। इसके अलावा इस स्कूल के बच्चों की ड्रेस मशहूर डिज़ाइनर सब्यसाची मुखर्जी ने तैयार की है। सब्यसाची अभिनेत्री दीपिका पादुकोण और प्रियंका चोपड़ा की डिज़ाइनर रही हैं। लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देता है राजस्थान का ये स्कूल। इस स्कूल में लड़कियाँ पढ़ती हैं और उनकी शिक्षा बिल्कुल मुफ़्त है। छात्राओं को निःशुल्क शिक्षा के अलावा रोज़ाना मिड-डे मील भी दिया जाता है। इस स्कूल का नाम क्षेत्र की एक राजकुमारी के नाम पर रखा गया है।

थोड़ी देर इंतज़ार करने के बाद एक स्कूल की बस आ गई जिसमें से बहुत सारी लड़कियाँ बस्ते पहनकर नीचे उतरीं। जिनसे हमारी फ़ोन पर बात हुई थी उन्होंने स्कूल का गेट खोला। उनका नाम राजेन्द्र भाटी है और वो स्कूल के सुपरवाइज़र हैं। उन्होंने हमें बताया कि स्कूल अंदर वीडियोग्राफी करना पूरी तरह से मना है, आप स्कूल के अंदर और बाहर फ़ोटो ले सकते हैं। उन्होंने बताया कि हमें 200 रुपए स्कूल के डोनेशन में देने होंगे जो लड़कियों की शिक्षा में इस्तेमाल किए जाएँगे। राजेन्द्र भाटी ने हमें पूरा स्कूल घुमाया। तब तक एक और स्कूली बस आ गई।

निःशुल्क शिक्षा

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राजस्थान में साक्षरता दर बहुत कम है और लड़कियों को तो बेहद कम शिक्षा दे जाती है। ऐसे में राजस्थान के ग्रामीण इलाक़े में ऐसा स्कूल का बनना शिक्षा के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इंटरनेट पर कई जगहों पर दिया गया है कि राजकुमारी रत्नावती गर्ल्स स्कूल में कक्षा 1 से 10 तक पढ़ाई होती है और 400 छात्राएँ इसमें पढ़ती हैं। स्कूल के सुपरवाइज़र राजेन्द्र भाटी ने बताया कि वर्तमान में इस स्कूल में कक्षा 1 से कक्षा 4 तक पढ़ाई होती है और स्कूल में कुल छात्राओं की संख्या 120 है। शिक्षा पूरी तरह से अंग्रेज़ी माध्यम में होती है और स्कूल में 4 शिक्षक पढ़ाते हैं। इसके अलावा गेस्ट टीचर भी आते-रहते हैं। उन्होंने बताया कि इस स्कूल के 15 किमी. के दायरे में जो गाँव आते हैं, वहाँ की लड़कियाँ इस स्कूल में पढ़ने आती हैं। हर रोज़ स्कूल की बस छात्राओं को लेने जाती है और छोड़ने भी जाती है।

राजकुमारी रत्नावती गर्ल्स स्कूल अंडाकार आकार का बना है। पूरा स्कूल सौर ऊर्जा से संचालित है। स्कूल की छत पर सोलर पैनल भी लगे हुए हैं। इसके अलावा यहाँ का पानी भी बहुत मीठा है। मैंने इस स्कूल के नल का पानी पिया तो यक़ीन नहीं हुआ कि इतना मीठा पानी रेगिस्तान में कैसे हो सकता है? हमने स्कूल की कक्षाएँ और कार्यालय भी दिखाया। राजेंद्र भाटी जी ने हमें स्कूल की यूनिफार्म और आसपास बनने वाली इमारतों का डिज़ाइन दिखाया।

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उन्होंने बताया कि इसी स्कूल के पास में दो और इमारतें प्रस्तावित हैं। स्कूल के अंडाकार आकार में ही दोनों इमारतें बनेंगी। कुल मिलाकर इस जगह पर अंडाकार आकार की तीन इमारतें हो जाएँगी। इसमें से एक इमारत में तो स्कूल चलेगा, एक इमारत में क्षेत्र की महिलाएं अपने हाथ से सामान बनाएँगी और तीसरी इमारत में बाज़ार लगेगा। जिसमें महिलाएं अपने बनाए हुए सामान को बेच सकेंगी। कुल मिलाकर ये जगह शिक्षा और रोज़गार का केन्द्र बन जाएगी।

राजकुमारी रत्नावती गर्ल्स स्कूल राजस्थान में लड़कियों की शिक्षा के लिए एक अच्छी पहल है। अगर ऐसे ही स्कूल राजस्थान के कई सारे ग्रामीण इलाक़ों में बन जाएँ तो राजस्थान शिक्षा में काफ़ी बढ़िया करेगा। इसके अलावा इस स्कूल की वास्तुकला तो देखने लायक़ है ही। दूर-दूर से सैलानी इस स्कूल को देखने के लिए आते हैं। अगर आप राजस्थान के जैसलमेर जाते हैं तो इस स्कूल को देखना ना भूलें।

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