Chunar 1/undefined by Tripoto

Chunar

Akshat Maneesh Sahu
हम चुनार आ गए…फिर चुनार से हाइवे रोड गए (शायद NH 5A, ठीक-ठीक जगह का नाम नहीं याद है)…वैसे तो ये लगभग 15-18 कि.मी. का रास्ता था लेकिन इतना खराब था कि ऐसा लगा जैसे हम 40-50 कि.मी. आ गए हों, हमारा सिर कभी उस तीन पहिए वाले ऑटो रिक्शा के इस तरफ टकराता तो कभी उस तरफ। खैर, रोते गाते-पहँच गए फिर वहाँ से एक मैजिक मिली जो हमें लेखनिया दरी के मोड़ पर छोड़ गई…हमें बिल्कुल अन्दाजा ना था कि आगे का लगभग 8 कि.मी .से ज्यादा का रास्ता हमें पैदल ही नापना है।ये बिल्कुल कंगाली में आटा गीला होने जैसा ही था क्योंकि उस गड्ढे में समाई सड़क पर 18 कि.मी. का सफर करने के बाद हमारा शरीर टूट चुका था। लेकिन फिर आगे जो चार कि.मी. का पैदल वाला रास्ता था वो सड़क एकदम चकाचक थी..सड़क के किनारे खाई थी और लगभग चारों तरफ पहाड़ियों की श्रृंखलाएँ थीं। इन सबको देखते-ताकते अपने उत्साह को ऊर्जा का स्त्रोत मानकर हम आखिरकार लेखनियां पहुँच चुके थे।