₹1000 में पटनीटॉप का मज़ेदार सफर: ऐसे की ये बजट यात्रा

Tripoto
Photo of ₹1000 में पटनीटॉप का मज़ेदार सफर: ऐसे की ये बजट यात्रा 1/1 by Manglam Bhaarat
श्रेय : ज़ीशान

हमारी इंजीनियरिंग का चौथा साल था। कॉलेज के इन आख़िरी दिनों को हर लड़का और लड़की पूरी शिद्दत से जी लेना चाहता है। क्या पता, फिर इस जनम में मुलाक़ात हो न हो। इसलिए हम 3 साथी; मैं, यश और ज़ीशान ने शुक्रवार को प्लान बनाया पटनीटॉप जाने का। अब क्योंकि सारे स्टूडेंट्स थे तो ज़ाहिर है कि जेब सभी की तंग थी। लेकिन किसी तरह जुगाड़ करके मैंने ₹1000 में अपना पटनीटॉप का ये यादगार सफर पूरा कर लिया।

एक दो बातें अलग से बता दूँ। मैंने जम्मू कश्मीर से इंजीनियरिंग की है, जिसमें इंजीनियरिंग तो क्या ही थी, घूमना था और शायरी करनी थी। वैष्णो देवी से 10 कि.मी. दूर था मेरा कॉलेज। अगर आप दिल्ली से पटनीटॉप का सफ़र प्लान कर रहे हैं तो कटरा तक ट्रेन का खर्च और जोड़ लेना जो करीब ₹400 से ₹2500 के बीच में होगा।

ख़ैर, तीन साथी निकल पड़े सुबह-सुबह पटनीटॉप के सफ़र पर। हमारे कॉलेज के गेट से 9:30 पर उधमपुर के लिए मेटाडोर बस जाती है। हम बैठ गए, एक का किराया ₹35। बैठ कर हम उधमपुर पहुँचे। खाने को पराँठे हमने मेस से उठा रखे थे।

उधमपुर पहुँच कर पता चला कि वहाँ से पटनीटॉप के लिए जो आम तौर पर बस जाती है वो नहीं चल रही है। लेकिन चेनानी मोड़ से उधमपुर के लिए बस मिल जाएगी। तो हम उधमपुर से चेनानी मोड़ की बस में बैठ गए (किराया ₹25) । चेनानी मोड़ से हमको पटनीटॉप की बस मिल गई ( किराया ₹20)। इस रास्ते महसूस हुआ कि कटरा की हवा में ताज़गी थी और यहाँ की हवा में ताज़गी के साथ हल्की ठण्ड भी घुल चुकी थी। जाम इतना लम्बा था कि बस वाले ने पटनीटॉप के 2 कि.मी. पहले ही हमको उतार दिया।

Photo of पतनितोप by Manglam Bhaarat

अभी लगभग 12:30 बजे थे, हमने 2 कि.मी. का सफ़र पैदल तय करने का मन बनाया। एक अलहदा से रस्ते पर जाने पर पता चला कि वो रास्ता कहीं नहीं जाता है। लेकिन हम चलते रहे, कि कहीं तो पहुँचेंगे। और हम पहुँचे एक बूढ़ी दादी के घर पर, वहाँ हमें खाने को मिलीं ख़ूब सारी गालियाँ और हम नीचे आ गए। नीचे पहुँचे तो ज़ीशान दो बार बर्फ़ पर गिरा।

टिप- बर्फ़ वाली जगह जा रहे हों तो जूते स्पोर्ट्स वाले होने चाहिए। कैनवस के जूते पहन कर स्टाइल मत मारिए। गिर गए तो हर कोई हँसेगा!

भूख लग रही थी। यहाँ तक पहुँचने तक मेस के सारे पराँठे निपट चुके थे। हमने यहाँ पहुँच कर कलाड़ी खाई। कलाड़ी जम्मू, रियासी, पठानकोट के आस पास की नामी डिश है। दूध को मथ कर उसकी परत बनाते हैं, जिसे ब्रेड को सैंडविच बना कर खाया जाता है। साथ में थे आलू के पराँठे और चाय। दुकान सामान्य थी, लेकिन पराँठे शानदार (खर्च ₹70)।

Photo of पतनितोप by Manglam Bhaarat

यहाँ पर एक पार्क है जो आपने पटनीटॉप की तस्वीरों में ख़ूब देखा होगा। पूरा पार्क बर्फ़ से पटा पड़ा था, तब तक ज़ीशान ने पीठ में बर्फ़ डाल दी। उड़ती हुई बर्फ़ यश ने मुँह पर मारी। दोनों ने निशाना मुझे बना रखा था। मैंने भी दोनों को ढंग से दौड़ाया। खेल ख़त्म हुआ और हमने प्लान किया कि आज पटनीटॉप घूमते हैं, कल नत्थाटॉप जाएँगे। क्योंकि नत्थाटॉप 15 कि.मी. दूर है और जाने का कोई ज़रिया नहीं।

यहाँ से हम 3 कि.मी. दूर चल कर प्रसिद्ध नाग मंदिर गए। जाकर पता चला कि मंदिर 100 सा पुराना है। मान्यता है कि यहाँ भगवान शिव का एक भक्त यहाँ माँ पार्वती की रक्षा कर रहा था और ग़लती से भगवान शिव का त्रिशूल उसको लग गया। वहाँ पर एक नंदी की मूर्ति थी, जिनके कान में बोलने से इच्छा पूरी हो जाती हैं।

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अब शाम होने लगी थी, और सर्दी कहर बरपाने लगी थी। तापमान शून्य से नीचे। पास के एक स्टॉल में रुक कर हमने छोटा मोटा चाय पकौड़े खाए। तस्वीरें खींचीं और ऑनलाइन रूम देखने लगे (खर्चा ₹40)।

टिप- आपको लोग हट में रहने की सलाह देंगे लेकिन इस सर्दी में हट लेना नुकसान का सौदा होगा। हट आपको सस्ती तो मिल जाएगी, लेकिन ठंड में आपकी ठीक ठाक बैंड बज जाएगा।

हमने पास में रूम बुक किया। किराया ₹2000 , लेकिन मोल भाव के बाद वो ₹1300 पर माना। एक का खर्चा करीब ₹450 । लेकिन इतना कैश लेकर हम गए नहीं थे। और डिजिटल इकॉनमी का जादू यहाँ चलता नहीं। होटल वाले को ₹500 देकर हमने जैसे तैसे रूम बुक किया। बाकी पैसे बाद में देने के वादे के साथ।

टिप- ऐसी विलगित जगह पर घूमने जा रहे हो तो कैश लेकर चलो, वरना ऐश नहीं कर पाओगे।

बाहर जाकर ऑमलेट और पराँठे खाए (खर्चा ₹70- ₹90)। ऑमलेट और पराँठे लज़ीज़ थे या नहीं, यो तो पता नहीं, लेकिन गर्म थे और इससे ज़्यादा हमें उस वक्त कुछ चाहिए भी नहीं था। अब कैश के लिए हमने एक आदमी के अकाउंट में पैसे डालकर कैश का जुगाड़ किया।

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Day 2

सुबह 6 बजे थे। तापमान -5 डिग्री। सूरज बर्फ़ की सफ़ेद चादर पर अपना शरबती रंग चढ़ा रहा था। धूप खिलने लगी थी, धुँधली- धुँधली सी ही सही। 9:30 पर नाश्ता करके हमने चेक आउट किया। और होटल वाले के मालिक के अकाउंट में पैसे डालने के लिए राज़ी किया।

होटल की खिड़की से ही दिखाई देता था नत्थाटॉप, जो ऊँचाई पर था और बेहद सर्द भी। तो होटल से निकल कर हम बस में बैठे और निकल पड़े अपनी अगली मंजिल की ओर (खर्च ₹30)।

एक घंटे में हम नत्थाटॉप पर थे। नज़ारा देख अपनी तिश्नगी पर हमें फ़ख़्र हो रहा था, बर्फ़ की परतें ऐसी थीं मानो दूध की फुहारें जमा कर काली सड़क के दोनों ओर बिखेर दी गई हों। हमें सड़क को देख कर इतना आनन्द आ रहा था कि क्या कहें साहब, दिल लूट लिया। नेटवर्क नहीं आता है यहाँ पर, वैसे इस वक़्त तो पूरे जम्मू कश्मीर में ही नहीं आ रहा।

कुछ देर घूमने, तस्वीरें खिंचाने के बाद हम वापस आने लगे।( बस का किराया फिर से ₹30)। पटनीटॉप पर हमने नज़दीक के प्रसिद्ध शिव मन्दिर जाने का प्लान किया, जो पैदल ही था। लोग यहाँ जोड़े में जाते थे बच्चे की कामना लेकर। हम ऐसे ही पहुँच गए। हम ख़ुद बच्चे थे, बस थोड़े से बदमाश, मन्नत तो नहीं मांगी लेकिन वहीं पास में नाश्ता ज़रूर कर लिया (खर्चा ₹100)।

मंदिर के बगल से ही चेनानी मोड़ के लिए बस चलती थी (किराया ₹20)। चेनानी मोड़ पर पहुँचने में क़रीब 45 मिनट लगे। तक़रीबन 3 बज चुके थे अब तक लेकिन जो बस सुबह उधमपुर से निकली थी, वो अभी तक आई नहीं थी। रास्ता ऊबड़ खाबड़ है यहाँ का, इसलिए दिक्कतें हैं। हमने चेनानी मोड़ से निकलने का फ़ैसला किया। और नीचे शेर का बाज़ार से होते हुए किसी ग़ुमनाम नदी को देखते देखते शाह राह की तरफ़ चल दिए। यहाँ क़रीब एक सवा घंटा इंतज़ार करते रहे हम बस का। जो अगली बस आई उसमें चढ़ लिए हम। डेढ़ घंटे में हम उधमपुर थे (बस का किराया ₹30)

Photo of पतनितोप by Manglam Bhaarat

यहाँ पर लोगों की लम्बी भीड़ थी। मुश्किल था कि हमें बस मिले। हम चलते जा रहे थे कि ज़ीशान के पापा का कॉल आया, वो भी उधमपुर में थे। ज़ीशान ने हमें सरप्राइज़ दिया था। अंकल ने हमें उधमपुर रोड पर रिसीव किया और एक घंटे में हम कॉलेज के बाहर मैगी उड़ा रहे थे। और ख़त्म हुआ हमारा पटनीटॉप का रोमांचकारी सफ़र।

टिप- जब भी ऐसी जगह घूमने जाएँ, तो ग्रुप में जाएँ। तीन चार दोस्त साथ होंगे तो डर और पैसा दोनों कम लगता है। ग्रुप में जाने का फ़ायदा है कि सफ़र में मौज ख़ूब आती है, अकेले सफ़र करना अच्छी बात है लेकिन जोख़िम का ख़तरा बढ़ जाता है।

सय्यद मोहम्मद मस्त कलत्तवी साहब का शेर है, "मिटा दे अपनी हस्ती को गर कुछ मर्तबा चाहे। कि दाना ख़ाक में मिलकर गुल-ओ-गुलज़ार होता है।" मैंने कभी नहीं सोचा था कि जम्मू कश्मीर रहने का मौक़ा मिलेगा, पहाड़ों की छाँव में रहकर ज़िन्दगी देखने का मौक़ा मिलेगा। इतना कुछ कहने का मौक़ा मिलेगा, और तजुर्बा आपसे बाँटने का भी। करना क्या है, बस चलते जाना है...

आपको छोड़ कर जाता हूँ इस तस्वीर के साथ!

Photo of ₹1000 में पटनीटॉप का मज़ेदार सफर: ऐसे की ये बजट यात्रा by Manglam Bhaarat

"यदि आप सपने देख सकते हो तो उसे पूरे भी कर सकते हो।"

पटनीटॉप यात्रा का कुल खर्च- ₹1,060 ।

कैसा लगा मेरा ये सफ़र, कमेंट बॉक्स में बताएँ।

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