मुंबई में करें समझदारी से सफ़र, जानिए कैसे?

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भीड़-भाड़ और ट्रैफिक के शोरगुल के बीच हर वक्त भागती मुंबई में आना-जाना काफी मुश्किल हो सकता है | अगर आपको रास्तों और सफर करने का सही समय नहीं पता तो अपने घर में रहना ही ठीक है | मगर मुंबई जैसे रंगीन और रोमांचक शहर में ऐसा कर पाना मुमकिन नहीं है | मैंने तो मुंबई में मौजूद पब्लिक ट्रांसपोर्ट को अच्छी तरह समझ लिया है और अपने दिमाग में नक्शे भी तैयार कर लिए हैं। अब मैं तो मुंबई में रोज़ आने-जाने के रास्ते और वक्त अच्छी तरह समझ चुका हूँ, तो आपको भी अपने अनुभव से कुछ ऐसी टिप्स दे देता हूँ जिनके सहारे मुंबई की मायानगरी में घूमना आपके लिए काफी आसान हो जाएगा।

व्यस्त घंटों में सफ़र ना करें

अगर आप मुंबई की भीड़भाड़ में नहीं पिसना चाहते तो व्यस्त घंटों में सफ़र करना बंद कर दें | हफ्ते में व्यस्त समय सुबह 8 से 10 बजे तकशाम को 5.30 से 8.30 बजे के बीच होता है | ख़ास मौकों जैसे त्यौहारों पर ये वक्त बढ़ या बदल भी सकता है | अगर आपको व्यस्त घंटों में सफ़र करना ज़रूरी हो तो रोड के जरिए आना-जाना करें और लोकल ट्रेन को लोकल लोगों की महारथ पर छोड़ दें | अगर आपको शहर के दूसरे छोर पर जाना है तो घर से कम से कम एक घंटा पहले निकल लें |

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श्रेय : फ्लिक्र.कॉम से राजर्शी मित्रा

लोकल ट्रेनों में चलते रहें

व्यस्त समय में लोकल ट्रेनों की भीड़ देखकर दिमाग़ खराब हो सकता है, इसलिए व्यस्त घंटों में मैं आपको लोकल ट्रेनों से दूर रहने की ही सलाह दूँगा | अगर आपको व्यस्त समय में लोकल ट्रेनों में सफ़र करना ही है एक बात रट लें, 'बस चलते रहो'। ट्रेनों से चढ़ते और उतरते समय भीड़ के साथ हो लें | अगर आप रुक जाएँगे तो भीड़ द्वारा दबा दिए जाएँगे | अगर अपनी ट्रेन का इंतज़ार नहीं कर रहे तो प्लैटफॉर्म से दूर ही रहें | ये कोई मॉल नहीं, बल्कि यात्रियों के लिए बहुत व्यस्त जगह है |

स्थानीय जुमलों को याद रखें

वैसे तो मुंबई की स्थानीय भाषा मराठी है मगर यहाँ के परिवहन तंत्र में सभी हिन्दी बखूबी समझते हैं | अगर आपका हाथ हिन्दी में ज़रा तंग है तो भी कुछ बुनियादी जुमले ज़रूर सीख लें जिनसे आपको इस शहर में घूमने में आसानी होगी, जैसे ''मीटर है क्या?'', "कितना टाइम लगेगा?" आदि | ट्रेन या बसों के अधिकारियों को 'भैया' के बजाय 'अंकल' या 'काका' बुलाना सम्मान का प्रतीक है जिससे आपको इनका काफ़ी मदद मिल सकती है |

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आत्मविश्वास के साथ बातचीत करें

बातचीत करते समय ऐसा जताएँ जैसे आप सब जानते हैं | मुझे अंजान मुसाफिर समझ कर काफी बार फायदा उठाया जा चुका है | अंजान बर्ताव करने और जानकार मुसाफिर जैसा व्यवहार करने में काफ़ी फ़र्क होता है | अगर आपको कहाँ जाना है इसका पता ना भी हो तो ड्राइवर को इस बात की भनक ना लगने दें | अंजान यात्री होने और डरा हुआ बर्ताव करने से कई ड्राइवरों ने मेरे मज़े लिए हैं | अगर आपको लगे कि आप खो गये हैं तो गाड़ी को भीड़भाड़ वाली जगह पर रुकवाएँ और स्थानीय लोगों से मदद लें | यहाँ अक्सर लोगों को मदद करना अच्छा लगता है |

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अगर अकेले हों तो ड्राइवर के साथ मोल-भाव करने से बचें

अगर आप ऑटो या टैक्सी से सफ़र कर रहे हैं तो मीटर ज़रूर देख लें | अगर मीटर नदारद हो तो ड्राइवर के साथ मोलभाव करके कोई सौदा ना करें | मोलभाव करके बैठने से आपको ऑटो शेयर करना पड़ेगा | ड्राइवर के साथ मोलभाव करना अपने आप की ऊर्जा खर्च करना है | ये ऊर्जा आप घूमने-फिरने और नई जगहें देखने में खर्च कर सकते हैं |

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श्रेय : फ्लिक्र.कॉम से केंट हॉलोवे

अपने साथ नक्शा या गूगल मैप रखें

मुंबई में सफ़र करते समय दिशा की जानकारी रखना अहम है | अगर आप अकेले सफ़र कर रहे हैं तो ये बेहद ज़रूरी है | कहीं जाने से पहले जाने का रास्ता देख लें और दिमाग़ में कुछ नोट बना लें | साथ ही रास्ते के कुछ जरूरी जगहों को नोट कर लें | सफ़र शुरू करते ही नक्शे में देख कर सही दिशा सुनिश्चित कर लें | याद रखी गई जरूरी जगहों से आपको पता रहेगा कि आप सही रास्ते पर हैं |

mIndicator जैसी ऐप का इस्तेमाल करके अपना रूट पहले ही निश्चित कर लें

ये शानदार ऐप आपको मुंबई में यात्रा करने के अलग-अलग तरीके और अलग-अलग रास्ते, स्टॉप और स्टेशन सुझाता है | लोकल ट्रेन में सफ़र करते समय ये ख़ासतौर पर ज़रूरी है | मैं इस ऐप से अलग-अलग लाइनों पर चलने वाली लोकल ट्रेनों की जानकारी फटाफट ले सकता हूँ | बस में सफ़र करने के लिए मुझे बस स्टॉप का नाम डालने की ज़रूरत है और बस नंबर आ जाएगा | बस का रूट भी दिख जाएगा जिससे आने-जाने में सुविधा होती है |

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श्रेय: पियूष रा

सफ़र करते समय छुट्टा साथ रखें

यातायात के साधनों में काम करते लोगों को 5 रुपये की टिकट के लिए 100 रु का नोट देंगे तो छुट्टा निकालना कंडक्टर के लिए मुश्किल भी होगा और दिमाग़ खराब कर देने वाला अनुभव भी | सफ़र करते समय अपने साथ छुट्टा रखें ताकि ना आपको दिक्कत आए, ना किसी और को | अगर आप रोज़ सफ़र करते हैं तो आपको टिकट की कीमत का अंदाज़ा हो गया होगा | तो इस तरह से आप उतना छुट्टा पैसा रखिए | अगर आपको छुट्टा पैसा रखना पसंद नहीं हो तो आप रोज़ या महीने भर का पास भी बनवा सकते हैं |

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श्रेय : फ्लिक्र.कॉम से वरुण मेहरा

अपना सामान अपने पास ही रखें

अगर आप मुंबई या ऐसी किसी भीड़-भाड़ भरी महानगरी में घूम रहे हैं तो अपना सामान अपने पास रखें | ज़रूरी दस्तावेज या ज़्यादा कीमती सामान साथ ना रखें | अगर रखने पड़ें तो इन्हें अपने बैग, पर्स या अन्य चीज़ में किसी गहरी जेब में डाल दें | अपना बैगपैक शरीर पर सामने की ओर पहने और पर्स को गर्दन में लटका लें | अगर आप को भीड़भाड़ में सफ़र करना है तो फैशन को भूल जाएँ | अपने सामान पर कड़ी नज़र रखें |

आस-पास देखते रहें

अपने आस-पास भी ध्यान रखें | मुंबई भले ही सपनों का शहर हो लेकिन यहाँ के सार्वजनिक परिवहन के साधनों में यात्रा करते समय नींद लेना या सपनों में खो जाना अच्छा नहीं है | हमेशा सतर्क और सक्रिय रहें | इस तरह से आप इस बेहतरीन शहर का सही लुत्फ़ उठा पाएँगे |

शुभ यात्रा |

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