मोहनदास से महात्मा बनने का साक्षी - साबरमती आश्रम, अहमदाबाद (Sabarmati Ashram - Ahemdabad, Gujarat)

Tripoto
18th Feb 2019
Photo of मोहनदास से महात्मा बनने का साक्षी - साबरमती आश्रम, अहमदाबाद (Sabarmati Ashram - Ahemdabad, Gujarat) by Kapil Kumar
Day 1

एक दोपहर बापु के सानिध्य में। (Sabarmati Ashram - Ahmadabad)

मोहनदास करमचंद गाँधी से महात्मा गाँधी के सफर का साक्षी - साबरमती आश्रम।बापू के सानिध्य में - साबरमती आश्रम, अहमदाबाद।

हृदय कुँज, बापू की कुटिया का अगला हिस्सा। इसमें सिर्फ बैठक, कस्तूरबा का कमरा, मेहमानों का कमरा, रसोई और भंडार गृह है। कोई भी कमरा 10 बाय 10 फ़ीट से ज्यादा नहीं है।

Photo of Sabarmati Ashram, Ahmedabad, Ashram Rd, Sabarmati, Ahmedabad, Gujarat, India by Kapil Kumar

1915 में साउथ अफ्रीका से लौटने के बाद पूरे एक साल गाँधी जी ने भारत भ्रमण किया फिर 1917 में अहमदाबाद की साबरमती नदी के किनारे आश्रम की स्थापना की। 1918 से 1930 तक मोहनदास करमचंद गाँधी और कस्तूरबा गाँधी ने हृदय कुंज नामक छोटी सी कुटिया में निवास किया था। दांडी के नमक सत्याग्रह के लिए बापू ने यही से कूच किया था।

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ह्रदय कुञ्ज - बापू की कुटिया में बैठक का वो कमरा जहाँ बापू चरखा चलते हुए स्वतंत्रता संग्राम से जुडी सारी बैठक करते थे. यही पर देश विदेश से मिलने आने वाले सभी लोग बापू से मिलते थे. 10 x 15 फ़ीट का यह कमरा दो तरफ से खुला हुआ है. इसे बापू की याद में अभी भी वैसे ही रखा गया है.

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सम्पूर्ण विश्व से बापू को पत्र लिखे जाते थे लेकिन बापू स्वतंत्रता आंदोलन के चलते देश मे घूमते रहते थे। इसलिए उन्हें पत्र लिखने वाले पते की जगह पर "महात्मा गाँधी जहाँ हो वहाँ" लिखकर पोस्ट कर देते थे। और पत्र देशभर में जहाँ भी बापू होते थे वहाँ पहुँच जाता था।

टेक्सटाइल इंजीनियरो के लिए तीर्थ स्थान। साबरमती आश्रम अहमदाबाद में एक वस्त्र विद्यालय 1919 से 1933 तक चलाया जाता रहा। अब भी आंशिक कार्यरत है। इसके संचालक स्व. मगनलाल गाँधी रहे। इस विद्यालय में स्वदेशी खादी वस्त्र तैयार करने की सभी प्रोसेस यानी स्पिनिंग, डाइंग, वीविंग, सिलाई आदि सिखाया जाता था। ये बापू के ग्राम स्वराज और उद्योग का ही एक हिस्सा था।

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बापु ने चरखे को देश की आत्म निर्भरता और स्वाभिमान का प्रतीक बनाया था !उनके अनुसार अगर हम लोग उपयोगी चीजो को खुद ही उत्पादित कर लेंगे तो हमें किसी की और ताकना नहीं पड़ेगा और हमें दोबारा कोई गुलाम बनाने की कोशिश नहीं करेगा !लगभग 12 साल पहले जब मैंने इंजीनियरिंग में पढने के लिए टेक्सटाइल ब्रांच ली थी तब मुझे पता नहीं था की मैं देश के दुसरे सबसे बड़े उद्योग का हिस्सा बनने जा रहा हूँ. आज मुझे गर्व है कि मैं देश के दोनों प्रमुख उद्योगों - कृषि और वस्त्र उद्योग से जुड़ा हुआ हूँ.बेशक बापू कि इस खाली जगह को कोई भर नहीं सका है और नहीं ही कभी भर सकेगा.लेकिन हम उनसे प्रेरणा तो हमेशा ही ले सकते है ...उन्हें नमन !!

बापू की कुटिया ह्रदय कुञ्ज का पिछला हिस्सा। इस छोटी सी कुटिया में कोई भी कमरा 10 x 10 फ़ीट से ज्यादा का नहीं है.

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बापू की अस्थियों  कलश 

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साबरमती आश्रम के पीछे बहने वाली साबरमती नदी।  इसी नदी के नाम पर साबरमती आश्रम नाम रखा गया था। 

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हृदय कुञ्ज के आँगन में 

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 मेरा जीवन ही मेरा सन्देश है।  - मोहनदास करमचंद गाँधी 

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साबरमती आश्रम से बाहर निकलते ही थोड़ी दूर पर पूर्व प्रधानमंत्री मोरार जी देसाई की भी समाधि है।

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साबरमती आश्रम आकर ऐसा लगता है हम सीधे इतिहास से साक्षात्कार कर रहे हो।  गुजरात की राजधानी गांधीनगर और अहमदाबाद शहर दोनों ही विख्यात है।  यहाँ आने के लिए एयर, ट्रैन और बस सभी तरह के परिवहन के साधन उपलब्ध है।  साबरमती आश्रम जाने के लिए एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और बस डेपो से टैक्सी, BRTS  बस, ऑटो सभी उपलब्ध रहते है. रुकने के लिए भी सभी तरह की होटल मिल जाती है।  

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