सिर्फ़ पुष्कर में ही क्यों है ब्रह्मा देव का मंदिर?

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राजस्थान की राजधानी जयपुर से सिर्फ़ 150 कि.मी. दूर स्थित है पुष्कर नाम की पावन नगरी |

माना जाता है कि यहाँ स्थित पुष्कर झील, जिसे पुष्कर सरोवर भी कहा जाता है, ईसा से 400 साल पुरानी है | अक्टूबर-नवंबर महीनों में आने वाली कार्तिक पूर्णिमा के दिन इस प्राचीन झील में डुबकी लगाने पूरे देश से हज़ारों श्रद्धालू आते हैं |

श्रद्धा और अध्यात्मिकता से भरे इस शहर को यहाँ हर साल लगने वाले पशु मेले या पुष्कर मेले के लिए भी जाना जाता है | लेकिन इस शहर की मान्यता का केवल यही एक कारण नहीं है | इस शहर को तीर्थ राज कहने के पीछे का कारण है यहाँ बना जगतपिता ब्रह्मा का मंदिर, जो यहाँ के अलावा पूरे भारत में और कहीं नहीं है |

सृष्टि के निर्माता ब्रह्मा देव का इकलौता मंदिर :

यूँ तो पुष्कर झील के किनारे बने 500 मंदिरों में हर एक की अपनी अलग कहानी है, मगर इस शहर की मान्यता के पीछे का ख़ास कारण है यहाँ बना भारत का एकमात्र ब्रह्मा मंदिर |

Photo of ब्रह्माजी मंदिर, Brahma Temple Road, Ganahera, Pushkar, Rajasthan, India by लफंगा परिंदा

ब्रह्मा मंदिर से जुड़े किस्से

किस्से कहानियों और पुराणों की बात करें तो ब्रह्मा मंदिर के बनने की कहानी काफ़ी दिलचस्प है | इस कहानी में लड़ाई भी है तो प्रेम भी, ईर्ष्या भी है तो पश्च्याताप भी |

ब्रह्माजी मंदिर से जुड़ी लड़ाई

हिंदू धर्म के पद्म पुराण के हिसाब से इस सृष्टि के रचयिता ब्रह्म देव ने वज्रनाभ नाम के दैत्य को जब तबाही मचाते और लोगों को सताते देखा तो उन्होंने उस पर अपने हथियार कमल के फूल से हमला कर दिया | कमल का फूल लगते ही दैत्य मारा गया, और धरती पर जिन तीन जगहों पर इस फूल की पंखुड़ियाँ गिरी, उन जगहों को ब्रह्मा ने पुष्कर (पुश= फूल, कर= ब्रह्मा का हाथ) कह कर पुकारा | इन तीन जगहों को आज बूढ़ा पुष्कर, मंझला पुष्कर और छोटा पुष्कर के नाम से जाना जाता है, जो आस-पास ही बसे हुए हैं |

ब्रह्माजी मंदिर से जुड़ी ईर्ष्या

धरती पर बनी इस पवित्र जगह पुष्कर में ब्रह्मा ने यज्ञ करने का संकल्प लिया | यज्ञ के दौरान ब्रह्मा की पत्नी सावित्री को एक ख़ास रस्म के लिए मौजूद होना था, मगर किसी कारणवश सावित्री उस रस्म के दौरान वहाँ मौजूद नहीं थी | यज्ञ की रस्म को पूरा करवाने के लिए जिस जगह पर सावित्री को होना था, वहाँ ब्रह्मा ने एक गूजर की लड़की को बैठाने का सोचा | यज्ञ में बैठाने से पहले उस लड़की को गाय से छुआकर पवित्र करवाया गया, और इस तरह जन्म हुआ गायत्री का | रस्म पूरी करवा कर यज्ञ संपन्न करवाया गया | जब सावित्री वापिस लौटी तो अपनी जगह किसी और औरत को बैठा देख उन्हें काफ़ी गुस्सा आया | इसी गुस्से के पागलपन में उन्होंने ब्रह्मा को ये श्राप दे डाला कि दुनिया तो ब्रह्मा ने बना दी, मगर पूरी दुनिया में ब्रह्मा की पूजा कहीं नहीं होगी | यज्ञ की अग्नि को श्राप मिला कि जो भी उसे छुएगा वो भस्म हो जाएगा, और यज्ञ में शामिल ब्राह्मणों को श्राप मिला कि वो हमेशा ग़रीब ही रहेंगे |

ब्रह्माजी मंदिर से जुड़ा प्रेम

मगर गायत्री, जिन्हें यज्ञ के दौरान दिव्य शक्तियाँ मिली थी, उन्होंने श्राप का प्रभाव कम करते हुए पुष्कर को तीर्थ राज की उपाधि दी और ब्रह्मा को वरदान दिया कि उनकी और कहीं नहीं बल्कि पुष्कर में ही पूजा होगी | अग्नि को पवित्रता का और पंडितों को हमेशा इज़्ज़त मिलने का वरदान मिला |

ब्रह्माजी मंदिर से जुड़ा प्रेम पश्च्याताप

श्राप देने के बाद सावित्री को काफ़ी दुख हुआ और ब्रह्मा से कभी दूर ना होने के लिए वो भी पुष्कर में ही पहाड़ी पर झरने के रूप में बस गई | इस झरने की जगह आज सावित्री देवी का मंदिर बना हुआ है | माना जाता है कि ब्रह्मा मंदिर में दर्शन करके अगर आपने सावित्री मंदिर में माथा नहीं टेका तो पुष्कर आने का कोई पुण्य आपको नहीं मिलेगा |

मंदिर पास ही की एक पहाड़ी पर बना हुआ है जहाँ जाने के लिए आप रोपवे में बैठ सकते हैं | 120 रुपए में आपको आने और जाने की टिकट मिल जाएगी | अगर आप दर्शन ना भी करना चाहें तो रोपवे का अनुभव ही आपके लिए काफ़ी रोमांचक होगा |

तो अब शायद आपको पता चल गया होगा कि पूरे भारत का एकमात्र ब्रह्मा मंदिर पुष्कर में ही क्यों है | नास्तिकता के नाम पर आप चाहे कुछ भी कहें, मगर पुष्कर के लोगों से पूछेंगे तो आपको पता चलेगा कि लोग इस कहानी पर कितना विश्वास करते हैं | कुछ भी हो, ब्रह्मा मंदिर की ये कहानी पढ़ने या सुनने वाले को ऊबने नहीं देती |

देखा जाए तो बॉलीवुड की कई रोमांटिक फिल्मों की कहानी से तो ज़्यादा ही दिलचस्प है | क्यों ना इस कहानी की तर्ज़ पर एक स्क्रिप्ट लिखी जाए | स्क्रिप्ट से जुड़े अपने विचार मुझे कमेंट्स सेक्शन में बताएँ |

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