उत्तराखंड का असली अनुभव चाहिए तो 'द पहाड़ी ऑर्गैनिक' में बिताओ वक्त!

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उत्तराखंड एक ऐसी जगह है जहाँ मैं आता-जाता रहता हूँ। पहाड़ों से घिरा ये राज्य मेरे दूसरे घर जैसा है। नई जगहों, नए लोगों से मिलना हमेशा खास होता है और अगर बात उत्तराखंड की हो, तो मैं कोई भी अवसर छोड़ना नहीं चाहता। दिल्ली से सुबह की बस लेकर रामनगर आकर, फिर जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क से घन्टे भर की यात्रा करते हुए मैं टोटम पहुँच गया था। सामने था वादियों जैसा विशाल 'द पहाड़ी ऑर्गेनिक'। मेरे अंदर का पहाड़ी वापस अपने आशियाने आ गया था।

Photo of उत्तराखंड का असली अनुभव चाहिए तो 'द पहाड़ी ऑर्गैनिक' में बिताओ वक्त! 1/1 by Shubhanjal
श्रेय:- मोहित बहल
Day 1

द पहाड़ी ऑर्गेनिक

'द पहाड़ी ऑर्गेनिक' की शुरुआत मार्च 2018 में श्री रणजीत रावत और उनके बेटे चेतन रावत ने की थी। कुमाऊँनी संस्कृति, रिवाज़ और खान-पान से लोगों को परिचित कराने के मकसद से खोली गई ये जगह आज खुद ही पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। चाहे इसकी संरचना हो, आव-भगत हो, या यहाँ के खाने का स्वाद, जिधर आपकी नज़र जाएगी, सब ओर उत्तराखंडी संस्कृति की झलक आपको दिख ही जाएगी। यहाँ आए लोगों को किसी बात की कमी ना रहे, इसका खासा ध्यान रखा जाता है।

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विशालता और खूबसूरती का अद्भुत संगम

'द पहाड़ी ऑर्गेनिक' अपने आप में पारंपरिक और आधुनिक उत्तराखंड संस्कृति का खूबसूरत समागम है। 14 एकड़ में फैली इस जगह में 9 बड़े कमरे और 5 कॉटेज है जोकि बेहद खूबसूरत व सधी हुई कलाकृतियों का शानदार नज़राना हैं। चाहे वह पत्थर पर की गई कलाकृति हो या फिर लकड़ी और मिट्टी की, सब आपके मन को मोह लेगा। निश्चित ही यहाँ काम करने वाले कारीगर प्रशंसा के पात्र हैं जिन्होंने पिछले तीन साल से यहाँ की छोटी-से-छोटी चीज पर लगातार काम कर इसे इतना लुभावना बनाया। 'द पहाड़ी कॉटेज' निश्चित ही अपनी खूबसूरती से आपका दिल जीत लेगी।

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भव्य और आरामदायक

'द पहाड़ी ऑर्गेनिक' का हर कमरा सर से पाँव तक लकड़ी का बना है, जोकि एक ओर जहाँ इसे आकर्षक बनाता है, वहीं दूसरी ओर यहाँ आए मेहमानों को सुविधाजनक वातावरण भी देता है। बाहर पड़ रही सर्दी और लगातार वर्षा के बावजूद भी कमरे के अंदर गर्माहट रहती है। साफ-सुथरे कमरे और आरामदायक तकिए-कम्बल वातावरण के लिए पर्याप्त हैं। इतने व्यवस्थित कमरों और वातावरण पर चार चाँद लगाने का काम करती है कमरों से लगी बालकनी, जहाँ खड़े होकर आप पूरे पहाड़ व घाटी के सुंदरतम नज़ारों का लुत्फ उठा सकते हैं। लाउंज में मसाज कुर्सी और ट्रेडमिल की भी व्यवस्था है। एयर कंडीशनर, टेलीविजन, 24 घन्टे आने वाला गर्म पानी, वाईफाई, इलेक्ट्रिक लॉकर, मिनी फ्रिज के साथ-साथ और भी बहुत कुछ है यहाँ, जोकि मेहमानों का खासा ध्यान रखती हैं।

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जहाँ शांति है और रोमांच भी

हिमालय की तलहटी में बसा 'द पहाड़ी ऑर्गेनिक' उत्तराखंड के शोर-शराबों वाले इलाकों के बिल्कुल उलट है। यहाँ शांति खुद में कुछ बात कहती है। मेरे लिए ये उन जगहों में से पसंदीदा है जहाँ आप कुछ ना भी करें, तब भी सब अच्छा लगता है। भीड़ से दूर ये जगह, प्रकृति के बिल्कुल करीब है। पर अगर आप यहाँ बैठकर पहाड़ों और वादियों को देखने के अलावा भी कुछ करना चाहते हैं, तो उसकी भी व्यवस्था है। सूर्योदय-सूर्यास्त का खूबसूरत दृश्य दिख जाएगा आपको यहाँ। हज़ारों चिड़ियों को आप छिपकर घंटों निहार सकते हैं। सिर्फ इतना ही नहीं, रोमांचक खेलों में पैराग्लाइडिंग, वॉल क्लाइम्बिंग, बर्मा ब्रिज, एटीवी राइड, मंकी रोप, बंजी और पेंटबॉल, सब है यहाँ।

"द पहाड़ी ऑर्गेनिक' का ऑर्गेनिक खानपान

यहाँ की सबसे अच्छी बात ये है कि यहाँ सिर्फ प्लेट में आया खाना ही नहीं, बल्कि फलों-सब्जियों को पीछे की ओर बने खेतों में भी ऑर्गेनिक तरीकों से ही उगाया जाता है। खान-पान की हर व्यवस्था का खासा ख्याल रखते हैं यहाँ। 'खेत से मेज' की नीति इससे बेहतरीन और कहीं नहीं देखी मैंने। आप जो ऑर्डर करते हैं, उसे तुरन्त ही खेतों से लाकर, चूल्हे पर पकाकर, आपको ताजा रूप में परोसा जाता है। खाने के लिए पीतल-ताँबे से बने पारंपरिक बर्तनों का ही यहाँ प्रयोग होता है।

'द पहाड़ी ऑर्गेनिक' में बिताए वक्त में मैंने जो कुछ भी खाया, वह किसी उत्सव मनाने से कम न था। ब्रेकफास्ट, डिनर, लंच, स्नैक्स में मैंने कोशिश की कि कोई भी डिश रिपीट न हो, और इस बात का ध्यान वहाँ के कर्मचारियों व रसोईयों ने भी रखा। मेज पर हमेशा कुछ-न-कुछ नया व्यंजन रहता, जिसका स्वाद मैं अबतक मिस कर रहा हूँ। चिकन करी, मटन करी, कायल करी, पालक का काफा, कुमाऊँनी रायता, मंडुआ रोटी, छौ, गहट के दुबके, गडेरी की सब्जी, लाल चावल सब एक-पर-एक थे। दूध और ड्रायफ्रूट्स से बनी मडुए की बड़ी खाकर तो आप उँगली चाटते रह जाएँगे। यहाँ अगर आपने एक बार कुछ चख लिया, विश्वास रखिये, आप उसका स्वाद भूल नहीं पाएँगे।

श्रेय:- मोहित बहल

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'द पहाड़ी ऑर्गेनिक': कैसे जाएँ?

पता:- ग्राम खोल्योन, टोटम, रामनगर- रानीखेत रोड।

दिल्ली से दूरी:- 345 किलोमीटर।

रास्ता:- दिल्ली-गाजियाबाद-हापुड़-अमरोहा-मोरादाबाद-काशीपुर-रामनगर-टोटम-द पहाड़ी ऑर्गेनिक।

आनंद विहार बस टर्मिनल से आपको उत्तराखंड रोडवेज की बस प्रतिदिन नियमित अंतराल पर मिल जाती है। रामनगर ने रानीखेत जाने वाली बस लेकर आप 'द पहाड़ी ऑर्गेनिक' के ठीक बाहर उतर सकते हैं। दिल्ली से रामनगर की बस का किराया ₹290/- और रामनगर से 'द पहाड़ी ऑर्गेनिक' का ₹60/- पड़ेगा। दिल्ली से रामनगर जाने के लिए एक वॉल्वो बस टिकट का किराया ₹700/- है जोकि रात 11 बजे आनंद विहार ISBT से खुलकर सुबह 04:30 में आपको निर्धारित स्थान पर पहुँचा देती है।

श्रेय:- मोहित बहल

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