बाली घूमने जाएँ तो सिर्फ समुद्रतट और पार्टी ही नहीं, इन खूबसूरत मंंदिरों के लिए भी निकालें वक्त

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Photo of बाली घूमने जाएँ तो सिर्फ समुद्रतट और पार्टी ही नहीं, इन खूबसूरत मंंदिरों के लिए भी निकालें वक्त 1/9 by लफंगा परिंदा
ऐसी शिल्पकारी भारत में कहीं भी देखने को नहीं मिलती है

जैसे ही कोई बाली का नाम लेता है तो हमारे दिमाग़ में समुद्र तटों और रंगीन रातों की तस्वीरें आती है| और सच कहूँ तो ऐसे में हम अपने आप को दोष भी नहीं दे सकते क्योंकि जिस भी दूसरे व्यक्ति को मैं जानता हूँ वो बाली को मात्र जश्न मनाने की जगह समझता है | खूब दबा कर शराब पीजिए और खो जाइए बाली की रंगीन रातों में | सही भी है क्योंकि बाली के पर्यटन को इसी तरह दर्शा कर बेचा जाता रहा है और इसी वजह से इंडोनेशियाई अर्थव्यवस्था को बहुत आर्थिक मदद मिली है | मगर जश्न के इस कोलाहल में हमें ये बात नहीं भूलनी चाहिए की बाली का टापू चारित्रिक रूप से काफ़ी संपन्न है | यहाँ हर ओर बहुत सारे प्राचीन हिंदू मंदिर हैं यह जान कर शायद आप को आश्चर्य होगा | जी हाँ, आपने सही पढ़ा है | और अगर आप भी यह पढ़ कर उतना ही चौंक गए हैं जितना इस बारे में जान कर मैं चौंका था तो ज़्यादा सोचिए मत | मैं पूरी तरह से रिसर्च कर के आप के लिए इस बारे में सही जानकारी जुटाकर लाया हूँ |

बाली और हिंदू मंदिर

ईसा के लगभग 500 साल पहले से ही इंडोनेशिया में हिंदुत्व का अस्तित्व रहा है | हालाँकि आने वाली कई सदियों में बाली में अन्य बहुत सारे धर्मों की बाढ़ सी आई है फिर भी बाली की आबादी और वास्तुकला में मुख्यतः हिंदुत्व का दबदबा रहा है | ब्रह्मा, विष्णु और महेश यानी भगवान शिव, इन तीनों देवताओं का पावन संगम हमेशा ही बाली के हिंदू धर्म में विश्वास करने वालों के लिए पूजनीय रहा है | बाली के मंदिरों में इसी पावन तिगड़ी का प्रतिनिधित्व करने वाले संग हयांग विधी (जिन्हें बाली में एकमात्र हिंदू देवता होने का दर्जा प्राप्त है) के मंदिरों में पद्मासन के ऊपर खाली सिंघासन के रूप में दर्शाया गया है | भारत के हिंदुत्व से तुलना करें तो पता चलता है कि बाली के हिंदुत्व में धर्म से ज़्यादा दर्शन शास्त्र को महत्व दिया जाता है मगर जाति व्यवस्था और त्योहार लगभग एक से ही हैं |

बाली में घूमने योग्य 7 बेहतरीन मंदिर

मैंने बाली की धार्मिक शिल्पकारी के बहुत से बेहतरीन नमूनों में से 7 सबसे अच्छे हिंदू मंदिरों की एक सूची तैयार की है जहाँ आप को समुद्रतटों और जश्नों से थोड़ा समय निकाल कर ज़रूर जाना चाहिए |

तमन अयून मंदिर

पुरा तमन अयून बाली के बडूंग रीजेंसी में स्थित एक मंदिर परिसर है जहाँ मंदिरों के साथ साथ बाग-बगीचे और एक छोटा तालाब भी है | बाली द्वीप पर बने सबसे सुंदर मंदिर परिसर माने जाने वाले इस परिसर में एक हज़ार से ज़्यादा मंदिर तो हैं ही साथ ही करीने से तराशी हुई घास वाले बगीचे भी हैं जहाँ आप घंटे भर के लिए तो आराम से टहल सकते हैं और तस्वीरें भी ले सकते हैं |

प्रवेश शुल्क: 15,000 रुपैयाह (लगभग ₹73)

खुलने का समय: सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक

कहाँ है : जालान अयोद्या नंबर 10, मेंगवी, कबूपातेन बदुंग, बाली

गुनुंग कवी मंदिर

अगर आप इस मंदिर के पूर्व की ओर जाएँगे तो उत्तरी दीवार की ओर खुदे शिलालेख पर "हाजी लुमाहिंग जुलु" लिखा हुआ पाएँगे जिसका अर्थ है "राजा ने यहाँ मंदिर बनवाया था" | गुनुन्ग कावी का मंदिर उबूद, बाली में शमशान परिसर के रूप में भी जाना जाता है मगर यहाँ का मुख्य आकर्षण उदयन वंश के राजा वुंगसू और उनकी रानियों को समर्पित 10 मंदिर हैं जो चट्टान को काट कर बनाए गए हैं | कहा जाता हैं कि इनमे से कुछ मंदिरों में रखैलो और दासियों को भी रखा जाता था |

प्रवेश शुल्क: 15,000 रुपैया (लगभग ₹73 )

खुलने का समय: सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक

कहाँ है: बंजार पेनाका, तमपाकसिरिंग, कबूपातेन जियानार, बाली

गोवा गज

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श्रेय : टिम लाम

गोवा गज मंदिर के आगे का हिस्सा हो सकता है भयानक लगे क्योंकि गुफा के मुहाने पर ही खूब सारे राक्षसों के चेहरों को शिल्पकारी द्वारा उकेरा हुआ है | मगर यहाँ का इतिहास उतना भयानक नहीं है | नक्काशी किए हुए चेहरों में मुख्य चेहरा एक हाथी का उकेरा हुआ है इसलिए इस जगह को हाथी गुफा भी कहते हैं | मंदिर परिसर के अंदर एक विशाल स्नानागार भी है, जिसकी खुदाई 1950 के दशक में हुई थी। मंदिर 9वीं शताब्दी में बनाया गया था और उस समय एक अभयारण्य हुआ करता था |

प्रवेश शुल्क: 15,000 रुपैया (लगभग ₹73)

खुलने का समय: सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक

कहाँ है: जेएल, राया गोवा गज, देसा बेदुलु, उबुद

पूरा उलून डानू ब्रटन

बेदुगुल के पास पहाड़ों की गोद में ब्रागन झील के तट पर स्थित है पुरा उलुन दानू ब्रटन मंदिर | यह सपनों सा सुंदर जल मंदिर हिंदू धर्मों के प्रमुख संप्रदायों में से एक शैव संप्रदाय का प्रतिनिधित्व करता है और इसे 16 वीं शताब्दी की शुरुआत में बनाया गया था। मंदिर परिसर में स्थित 11 मंजिला मंदिर की ये इमारत शिव और पार्वती को समर्पित है। यहाँ पर बुद्ध की एक प्रतिमा भी है| माना जाता है कि इस प्रतिमा को हाल ही में बनाया गया है।

प्रवेश शुल्क: 100,000 रुपैया (लगभग ₹484)

खुलने का समय: सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक

कहाँ है: जेएल, राया कैंडि कुनिंग, तबनन

पुरा बेसकीह मंदिर

बाली में माउंट अगुंग की ढलान पर बेसाकी गाँव में स्थित पुरा बेसकीह इंडोनेशिया का सबसे महत्वपूर्ण और सबसे बड़ा हिंदू मंदिर है | दूर दूर तक फैले इस मंदिर परिसर में 23 अलग अलग मंदिर बनें हैं जिनमे सबसे मशहूर है पुरा पेनतरन अगुंग | हालाँकि अगर आप बाली जाते हैं तो इस मंदिर परिसर को देखना तो बनता ही है लेकिन यहाँ मंदिर के बाहर मौजूद ठगों से सावधान रहें जो इस परिसर को देखने आने वाले सैलानियों को भगवान के नाम पर चूना लगाने से बाज़ नहीं आते | यहाँ पहुँचे तो ऐसे ठगों से बच कर रहें |

प्रवेश शुल्क: 60,000 रुपैया (लगभग ₹290)

खुलने का समय: सुबह 7 बजे से 10 बजे तक

कहाँ है : बेसाकीह, रेंडांग, करंगसेम रीजेंसी, बाली

पुरा तमन सरस्वती

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श्रेय : डैन गुयेन

जैसा की नाम से पता लगता है, यह मंदिर देवी सरस्वती को समर्पित है जो कला और ज्ञान की देवी मानी जाती हैं | शहर के मुख्य भाग में स्थित होने के बावजूद इस मंदिर को अनदेखा करना बहुत आसान है क्योंकि क्षेत्रफल की दृष्टि से देखें तो यह मंदिर काफ़ी छोटा है | मगर इस मंदिर में एक बहुत बड़ा तालाब स्थित है जिसमें हज़ारों कमल के फूल खिले हुए हैं | इसलिए बाली जाएँ तो इस मंदिर के दर्शन ज़रूर करें | ध्यान रहे कि इस मंदिर में घुसने के लिए यहाँ की पारंपरिक वेशभूषा सरोन्ग पहनना बहुत ज़रूरी है और इस पोशाक को आप मंदिर के बाहर से ही किराए पर भी ले सकते हैं |

प्रवेश शुल्क: नि: शुल्क

खुलने का समय: सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक

कहाँ है: जेएल, कजेंग, उबुद, काबुपातेन जियानार, बाली

पुरा जगतनाथ

देनपसार के केंद्र में स्थित होने के कारण और बाली के सबसे बड़े मंदिरों में से एक होने की वजह से पुरा जगतनाथ मंदिर पर्यटकों के बीच बहुत लोकप्रिय है | इस मंदिर के बारे में एक अनोखा तथ्य है कि मंदिर में किसी प्रकार की कोई मूर्ति नहीं है | यही ख़ासियत इसे दूसरे मंदिरों से अलग करती है | हालाँकि मंदिर परिसर के एक बंद कमरे में एक शिव लिंग स्थापित है और परिसर के चारों ओर की दीवारों पर महाभारत और रामायण के श्लोक उकेरे हुए हैं |

प्रवेश शुल्क: नि: शुल्क

खुलने का समय: सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक

कहाँ है: जेएल, नुसा दुआ, बेनोआ, कुटा सेल, काबुपाटेन बडूंग, बाली

कहाँ ठहरें

अगर आप केवल पढ़ कर ही ऊपर दिए गये मंदिरों से प्रेम करने लगे हैं तो अपने समस्त परिवार या साथी को ले कर बाली घूमने ज़रूर जाएँ | आप के बाली घूमने के विचारों को और भी बल देने के लिए हम आपकी खातिर लाए हैं यहाँ रुकने की एक बेहतरीन जगह | बाली के ये इनफीनिटी विला काफ़ी वाजिब दामों में मिल जाते हैं

अब आप को जिस भी जानकारी की ज़रूरत थी वा सब अब आप को मिल चुकी है | तो बेफ़िक्र हो कर बाली जाइए और मज़े कीजिए | बाली में अपनी यात्रा को और सुगम बनाने के लिए एक योजना दी गयी है, इसे पढ़ें |

अगर आप पहले से बाली घूम कर आ चुके हैं तो अपने अनुभव और कहानियाँ Tripoto पर बाँटें और अपने जैसे दो करोड़ पचास लाख सैलानियों की घूमने फिरने की योजना बनाने में मदद कीजिए |

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