शनि शिगणापुर: वो गाँव जहाँ ना ताले हैं ना दरवाज़े

Tripoto

शनि शिंगणापुर की मेरी पहली याद 90 के दशक की है जब मैंने पहली बार दूरदर्शन चैनल पर इस पौराणिक गाँव पर एक डॉक्यूमेंट्री देखी थी। यह वह गाँव था जहाँ घरों में दरवाजे नहीं होते थे और दुकानों पर ताले नहीं लगते।

Photo of शनि शिगणापुर: वो गाँव जहाँ ना ताले हैं ना दरवाज़े 1/1 by Bhawna Sati

डॉक्यूमेंट्री में दिखाया था कि गाँव का संरक्षक देवता किसी भी चोरी से उनकी रक्षा करेगा। एक बार किसी ने इस गाँव से चोरी करने की कोशिश की और उसे तुरंत अंधे होने की सज़ा मिल गई। मेरा बचपन का भोला मन इस फिल्म को बेहद आनंद से देखता था। जब तक मैं 2013 में शनि शिंगणापुर में अपनी यात्रा के दौरान शिरडी गई, मुझे नहीं पता था कि वास्तव में ऐसा कुछ हुआ था। ज़ाहिर है, इस जगह की सैर करना रोमांचक और आश्चर्यजनक था। इस डॉक्यूमेंट्री से जुड़ी मेरी सारी यादें आँखों के सामने आ गई थी।

बिना दरवाजे के गाँव के रूप में मशहूर शनि शिंगणापुर महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के अंतर्गत आता है। ये गाँव पीढ़ियों से चले आ रहे, घरों में दरवाज़ें या ताले ना लगाने के रिवाज़ के लिए जाना जाता है। लोग ऐसा गाँव के पवित्र संरक्षक माने जाने वाले शनि देवता के लिए श्रद्धा के रूप में करते हैं।

यह माना जाता है कि अगर कोई भी यहाँ चोरी करने की कोशिश करता है, तो वे यहाँ के देवता की क्रोध के पात्र होंगे और तुरंत अंधे हो जाएँगे। यहाँ तक ​​कि आभूषण और पैसे भी बिना किसी लॉकर के रखे जाते हैं। गाँव वाले कभी-कभी कुत्तों और आवारा जानवरों को घर में घुसने से रोकने के लिए प्रवेश द्वार पर बैरियर या चादर का इस्तेमाल करते हैं

शनि शिंगणापुर की कहानी

कहानियों के अनुसार, लगभग 300 साल पहले, गाँव के बीच से बहती पानसनाला नदी के तट पर एक स्लैब पाया गया था। जब उन्होंने इसे छड़ी से छुआ, तो उसमें से खून निकलने लगा। उस रात बाद में भगवान शनि स्वयं ग्राम प्रधान के सपनों में प्रकट हुए, यह बताते हुए कि यह शिला उनकी अपनी मूर्ति थी। उन्होंने उससे कहा कि स्लैब को उस गाँव में रखा जाए जहाँ अब उनका आवास होगा।

लेकिन देवता की एक शर्त थी, कि इस पत्थर को दिवारों या किसी तरह की संरचना से ढका नहीं जाना चाहिए। शनि ने तब ग्राम प्रधान को आशीर्वाद दिया और गाँव को किसी भी तरह के खतरे से बचाने का वादा किया। यह कहा गया है कि इस चट्टान की शक्ति इतनी दिव्य है कि इसे एक छत के नीचे नहीं रखा जा सकता है। एक कहावत यह भी है कि स्लैब को बिना किसी घेराव के होना चाहिए ताकि शनि बिना बाधा के गाँव की देखरेख कर सके।

स्लैब के स्थापित होने के बाद, गाँव वालों ने दरवाजों का बहिष्कार करने का फैसला किया। उन्हें अब इनकीऔर जरूरत नहीं थी, आखिर भगवान खुद जो उनकी रक्षा कर रहे हैं।

ऐसा माना जाता है कि अगर कोई व्यक्ति कुछ भी चोरी करता है, या कुछ भी बेईमानी करता है, तो उसे साढ़े साती (साढ़े सात साल की बदकिस्मती) का सामना करना पड़ेगा, परिवार, अदालती मामलों, दुर्घटनाओं, मौतों, व्यापार में हानि और बुरा भाग्य उसके सिर हो जाएगा। गाँव वाले बताते हैं कि एक बार एक व्यक्तिन ने घर के प्रवेश द्वार पर लकड़ी की चौखट लगवा दी और अगले दिन उसकी कार की दुर्घटना हो गई।

बिना ताले के बैंक और पुलिस स्टेशन

यहाँ तक ​​कि गाँव में नए निर्माण भी इसी परंपरा के हिसाब से होते हैं। जनवरी 2011 में, यूनाइटेड कमर्शियल बैंक ने शनि शिंगणापुर में देश की पहली लॉकलेस शाखा खोली।

उस वक्त तो बिना पैडलॉक वाली एकलौती बैंक शाखा होने की वजह से और गाँव वालों की भावनाओं का सम्मान करने के लिए बैंक को काफी मिली। लेकिन करीब से देखा जाए, तो यहाँ पर रिमोट से कंट्रोल होने वाले इलेक्ट्रोमैग्नेटिक लॉक का इस्तेमाल किया जाता है। कहा जाता है, किसी भी तरह की घटना को रोकने के लिए, बैंक बंद होने से पहले पड़ोसी सोनाई ब्रांच को अपना सारा कैश भेज देता है।

यहाँ कुछ वक्त पहले, शहर में पहला पुलिस स्टेशन खोला गया था; स्थानीय अधिकारियों ने कभी यहाँ दरवाजा लगाने की आवश्यकता महसूस नहीं की। उनके पास केवल एक स्लाइडिंग दरवाजा है जो कुत्तों और बिल्लियों को पुलिस स्टेशन में प्रवेश करने से रोकता है। दिलचस्प बात यह है कि पुलिस स्टेशन के खुलने के बाद से शिंगणापुर में कोई भी शिकायत दर्ज नहीं की गई है। हालांकि पुलिस सटेशन के आधिकारिक क्षेत्र में आने वाले पड़ोसी गाँवों के मामले ज़रूर दर्ज हुए हैं।

कितनी सच्ची हैं कहानियाँ?

हालांकि शनि शिंगणापुर में सदियों से कोई चोरी नहीं हुई है, लेकिन छोटे डकैतियों के मामलों के साथ गाँव की प्रतिष्ठा को धक्का लगा है। 2010 में, एक सैलानी ने शिकायत की कि उसकी गाड़ी से ₹35,000 की नकदी और कीमती सामान चोरी हो गए। इसके बाद ₹70,000 के सोने के गहनों की एक और चोरी की सूचना मिली थी। हालाँकि बाद में इसे यह कहते हुए खारिज कर दिया गया कि यह गाँव के बाहर, मंदिर परिसर में हुआ था।

बहुत से लोग यह बात मानते हैं कि क्षेत्र में कम अपराध शनि देव की चमत्कारी शक्तियों के कारण नहीं है। इसका कारण यह है कि गाँव ऐसी जगह बसा है जहाँ आस पास कुछ नहीं है। ये लोग मानते हैं कि इलाके में टूरिजम को बढ़ावा देने के लिए ये कहानियाँ सुनाई गई हैं।

यह भी कहा जाता है कि गाँव की छवि को ध्यान में रख कई केस तो पुलिस स्टेशन में दर्ज ही नहीं किए जाते, क्योंकि इसे टूरिजम पर फर्क पड़ेगा और टूरिजम ही यहाँ के लोगों की आमदनी का मुख्य ज़रिया है।

मैंने खुद जाकर उस इंसान से मिलने की कोशिश की जिसके घर चोरी हुई थी। उसका कहना था कि वो तो थाने में केस दर्ज करवाना चाहता था, लेकिन लोगों के दबाव में आकर नहीं करवा सकता। अब वो अपना ज़रूरी सामान बैंक के लॉकर में सुरक्षित रखता है।

लोगों का शनि देवता और उनसे जुड़ी इस कहानी को खारिज करने का एक कारण बदलाव की चाह भी हो सकती है। लोग अपने परिवार की भलाई और सुरक्षा के लिए दरवाज़े लगाने के लिए अनुमति मांग रहे हैं, लेकिन इस सब के बीच उन्हें उल लोगों से टकराव झेलना पड़ता है जो आज भी इस विश्वास को ज़िंदा रखना चाहते हैं।

उनके लिए शनि संरक्षक देवता हैं और हर बुरी नज़र से उनकी रक्षा करते रहेंगे।

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ये ब्लॉग मूल रूप से बॉयेंट फीट  पर प्रकाशित हुआ था।

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